Ek Kutta Or Ek Maina Class 9 |Ek Kutta Aur Ek Maina Class 9 Question Answer | Ek Kutta Aur Ek Maina Ka Question Answer |
एक कुत्ता और एक मैना (अभ्यास प्रश्न)
प्रश्न 1. गुरुदेव ने शांतिनिकेतन को छोड़कर कहीं और रहने का मन क्यों बनाया?
एक तो गुरुदेव अस्वस्थ थे और दूसरा शांतिनिकेतन में अवकाश चल रहा था। इसलिए गुरुदेव ने शांतिनिकेतन को छोड़कर श्रीनिकेतन रहने का निश्चय किया। यह स्थान शांतिनिकेतन से दो मील दूरी पर था। वहाँ पर किसी प्रकार की चहल-पहल नहीं थी। गुरुदेव कुछ समय एकांत में रहना चाहते थे।
प्रश्न 2. मूक प्राणी मनुष्य से कम संवेदनशील नहीं होते। पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
जब गुरुदेव शांतिनिकेतन से श्रीनिकेतन में आकर रहने लगे तो उनका कुत्ता दो मील की यात्रा करके बिना किसी की सहायता से वहाँ चला आया। जब गुरुदेव ने उस पर अपना हाथ फेरा तो उसने अपनी आँखें बंद करके अपने आप को संतुष्ट महसूस किया। इसी प्रकार जब गुरुदेव के चिता भस्म को आश्रम के द्वार से लेकर उत्तरायण तक लेकर जाया गया तब वह चिता भस्म के साथ-साथ चला और कुछ समय तक चुपचाप कलश के पास बैठा रहा। इससे हमें पता चलता है कि मूक प्राणी मनुष्य से कम संवेदनशील नहीं होते।
प्रश्न 3. गुरुदेव द्वारा मैना को लक्ष्य करके लिखी कविता के मर्म को लेखक कब समझ पाया?
लेखक को यह विश्वास नहीं था कि दूसरों पर करुणा दिखाने वाली मैना भी करूण हो सकती है। गुरुदेव ने लेखक को आश्रम में एक ऐसी मैना दिखाई जो अपाहिज थी तथा अकेली रहती थी। शायद उसी मैना को लक्ष्य बनाकर गुरुदेव ने ऐसी कविता थी जिसमें उसके शिकार करने, आहार इकट्ठा करने आदि का वर्णन किया है।
प्रश्न 4. प्रस्तुत पाठ एक निबंध है। निबंध गद्य साहित्य की उत्कृष्ट विधा है, जिसमें लेखक अपने भावों और विचारों को कलात्मक और लालित्यपूर्ण शैली में अभिव्यक्त करता है। इस निबंध में उपर्युक्त विशेषताएँ कहाँ झलकती हैं? किन्हीं चार का उल्लेख कीजिए। (परीक्षोपयोगी नहीं है)
लेखक ने ऐसा कई बार किया है। शुरु में लेखक ने गुरुदेव के बुढ़ापे और उससे उत्पन्न समस्या के बारे में बताया है। उसके बाद लेखक ने अपने और गुरुदेव के बीच के वार्तालाप के माध्यम से गुरुदेव की शख्सियत के बारे में बताया है। फिर लेखक ने कुत्ते और मैना का उदाहरण देते हुए अपनी बात पूरी की है। हर प्रकरण में लेखक ने बड़ी ही जटिल भाषा और उपमाओं का प्रयोग किया है।
प्रश्न 5. आशय स्पष्ट कीजिए-इस प्रकार कवि की मर्मभेदी दृष्टि ने इस भाषाहीन प्राणी की करुण दृष्टि के भीतर उस विशाल मानव-सत्य को देखा है, जो मनुष्य, मनुष्य के अंदर भी नहीं देख पाता।
प्रस्तुत पंक्ति का आशय है कि एक सामान्य व्यक्ति केवल ऊपरी आवरण को ही देख पाता है। जबकि कवि अपने दिल की गहराई को देखने वाली आँखों से मूक प्राणी की करुणा को पहचान और समझ लेता है। बुद्धिमान होते हुए भी मनुष्य दूसरे मनुष्य के विषय में कुछ भी नहीं जान पाता है परंतु कवि भाषाहीन प्राणियों में विशाल मानव सत्य को खोज लेता है। कहा भी गया है- जहाँ न पहुँचे रवि, वहाँ पहुँचे कवि।

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