Class 11 Hindi – नए और अप्रत्याशित विषयों पर लेखन | Question Answer
कक्षा 11 हिंदी के पाठ नए और अप्रत्याशित विषयों पर लेखन से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर यहाँ दिए गए हैं। यह सामग्री छात्रों को लेखन कौशल, लेख लेखन और परीक्षा की तैयारी में सहायता करती है।
नए और अप्रत्याशित विषयों पर लेखन – प्रश्न अभ्यास
प्रश्न 1 अधूरे वाक्यों को अपने शब्दों में पूरा कीजिए—
हम नया सोचने लिखने का प्रयास नहीं करते क्योंकि हमें आत्मनिर्भर होकर लिखित अभिव्यक्ति करने का अभ्यास नहीं होता है।
लिखित अभिव्यक्ति की क्षमता का विकास नहीं होता क्योंकि हम कुछ नया सोचने लिखने का प्रयास करने के स्थान पर किसी विषय पर पहले से उपलब्ध सामग्री पर निर्भर हो जाते हैं।
हमें विचार प्रवाह को थोड़ा नियंत्रित रखना पड़ता है क्योंकि विचारों को नियंत्रित करने से ही हम जिस विषय पर लिखने जा रहे हैं उसका विवेचन उचित रूप से कर सकेंगे।
लेखन के लिए पहले उसकी रूपरेखा स्पष्ट होनी चाहिए क्योंकि जब तक यह स्पष्ट नहीं होगा कि हमने क्या और कैसे लिखना है हम अपने विषय को सुसंबंध और सुसंगत रूप से प्रस्तुत नहीं कर सकते।
लेखन में ‘मैं’ शैली का प्रयोग होता है क्योंकि लेख में व्यक्त विचार लेखक के अपने होते हैं और लेख पर लेखक के अपने व्यक्तित्व की छाप होती है।
प्रश्न 2 निम्नलिखित विषयों पर 200 से 300 शब्दों में लेख लिखिए—
1. झरोखे से बाहर
झरोखा है-भीतर से बाहर की ओर झांकने का माध्यम और बाहर से भीतर देखने का रास्ता। हमारी आँखें भी तो झरोखा ही हैं-मन-मस्तिष्क को संसार से और संसार को मन-मस्तिष्क से जोड़ने का। मन रूपी झरोखे से किसी भक्त को संसार के कण-कण में बसने वाले ईश्वर के दर्शन होते हैं तो मन रूपी झरोखे से ही किसी डाकू-लुटेरे को किसी धनी-सेठ की धन-संपत्ति दिखाई देती है जिसे लूटने के प्रयत्न में वह हत्या जैसा जघन्य कार्य करने में तनिक नहीं झिझकता। झरोखा स्वयं कितना छोटा-सा होता है पर उसके पार बसने वाला संसार कितना व्यापक है।
2. सावन की पहली झड़ी पिछले कई दिनों से हवा में घुटन-सी बढ़ गई थी। बाहर तपता सूर्य और सब तरफ हवा में नमी की अधिकता जीवन दूभर बना रही थी। सुबह आँखें खुली तो अहसास हुआ कि खिड़कियों से ठंडी हवा भीतर आ रही है। उठ कर खिड़की से बाहर झांका तो मन खुशी से झूम उठा। आकाश काले बादलों से भरा हुआ था। अचानक बादलों में तेज बिजली कौंधी और कुछ ही क्षणों में तेज वर्षा शुरू हो गई। महीनों से प्यासी धरती की प्यास बुझ गई और पेड़-पौधों के पत्ते नहा उठे।
3. इम्तिहान के दिन बड़े-बड़े भी कांपते हैं इम्तिहान के नाम से। इम्तिहान छोटों का हो या बड़ों का, पर यह डराता सभी को है। जिस दिन इम्तिहान था उससे पहले रात को बिल्कुल नींद नहीं आई। स्कूल पहुँचे, प्रश्न-पत्र मिला और वह आसान लगा। जब बाहर निकले तो सभी प्रसन्न थे पर साथ ही अगले पेपर की चिंता शुरू हो गई। इम्तिहान के दिन वास्तव में बहुत तनाव भरे होते हैं।
4. दिया और तूफ़ान मिट्टी का बना हुआ एक नन्हा-सा दीया भी जलता है तो रात्रि के अंधकार से लड़ता हुआ उसे दूर भगा देता है। यदि वह तूफ़ान का सामना करके अपनी टिमटिमाती लौ से प्रकाश फैला सकता है तो हम भी जीवन की कठिनाइयों का मुकाबला कर सकते हैं। दीये की तरह हमें भी संघर्ष करते हुए अपने जीवन में आगे बढ़ना चाहिए।
5. मेरे मुहल्ले का चौराहा मुहल्ले की सारी गतिविधियों का केंद्र मेरे घर के पास का चौराहा है। नगर की चार प्रमुख सड़कें इस पर मिलती हैं इसलिए यहाँ हर समय हलचल बनी रहती है। फलों की रेहड़ियां, सब्जी वाले, खोमचे वाले और आने-जाने वाले लोगों की भीड़ इस चौराहे को हमेशा जीवंत बनाए रखती है।
6. मेरा प्रिय टाइम पास आज के आपाधापी से भरे युग में किसके पास खाली समय है, पर कभी-कभी मन को आराम देने के लिए हम कुछ अलग करना चाहते हैं। मेरा प्रिय टाइम-पास विंडो-शॉपिंग है। बाजार में सजी हुई दुकानों की शो-विंडोज में रखे नए-नए सामान को देखना मुझे बहुत अच्छा लगता है। इससे मेरी जानकारी भी बढ़ती है और मन को भी आनंद मिलता है।
7. एक कामकाजी औरत की शाम हमारे समाज में कामकाजी औरतों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कामकाजी औरत की जिंदगी पुरुषों की अपेक्षा कठिन होती है क्योंकि उसे घर और बाहर दोनों जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं। शाम को घर लौटने के बाद भी वह बच्चों की पढ़ाई, खाना बनाना और घर के अन्य कार्यों में लगी रहती है। वास्तव में उसका जीवन निरंतर परिश्रम से भरा होता है।
2. सावन की पहली झड़ी पिछले कई दिनों से हवा में घुटन-सी बढ़ गई थी। बाहर तपता सूर्य और सब तरफ हवा में नमी की अधिकता जीवन दूभर बना रही थी। सुबह आँखें खुली तो अहसास हुआ कि खिड़कियों से ठंडी हवा भीतर आ रही है। उठ कर खिड़की से बाहर झांका तो मन खुशी से झूम उठा। आकाश काले बादलों से भरा हुआ था। अचानक बादलों में तेज बिजली कौंधी और कुछ ही क्षणों में तेज वर्षा शुरू हो गई। महीनों से प्यासी धरती की प्यास बुझ गई और पेड़-पौधों के पत्ते नहा उठे।
3. इम्तिहान के दिन बड़े-बड़े भी कांपते हैं इम्तिहान के नाम से। इम्तिहान छोटों का हो या बड़ों का, पर यह डराता सभी को है। जिस दिन इम्तिहान था उससे पहले रात को बिल्कुल नींद नहीं आई। स्कूल पहुँचे, प्रश्न-पत्र मिला और वह आसान लगा। जब बाहर निकले तो सभी प्रसन्न थे पर साथ ही अगले पेपर की चिंता शुरू हो गई। इम्तिहान के दिन वास्तव में बहुत तनाव भरे होते हैं।
4. दिया और तूफ़ान मिट्टी का बना हुआ एक नन्हा-सा दीया भी जलता है तो रात्रि के अंधकार से लड़ता हुआ उसे दूर भगा देता है। यदि वह तूफ़ान का सामना करके अपनी टिमटिमाती लौ से प्रकाश फैला सकता है तो हम भी जीवन की कठिनाइयों का मुकाबला कर सकते हैं। दीये की तरह हमें भी संघर्ष करते हुए अपने जीवन में आगे बढ़ना चाहिए।
5. मेरे मुहल्ले का चौराहा मुहल्ले की सारी गतिविधियों का केंद्र मेरे घर के पास का चौराहा है। नगर की चार प्रमुख सड़कें इस पर मिलती हैं इसलिए यहाँ हर समय हलचल बनी रहती है। फलों की रेहड़ियां, सब्जी वाले, खोमचे वाले और आने-जाने वाले लोगों की भीड़ इस चौराहे को हमेशा जीवंत बनाए रखती है।
6. मेरा प्रिय टाइम पास आज के आपाधापी से भरे युग में किसके पास खाली समय है, पर कभी-कभी मन को आराम देने के लिए हम कुछ अलग करना चाहते हैं। मेरा प्रिय टाइम-पास विंडो-शॉपिंग है। बाजार में सजी हुई दुकानों की शो-विंडोज में रखे नए-नए सामान को देखना मुझे बहुत अच्छा लगता है। इससे मेरी जानकारी भी बढ़ती है और मन को भी आनंद मिलता है।
7. एक कामकाजी औरत की शाम हमारे समाज में कामकाजी औरतों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कामकाजी औरत की जिंदगी पुरुषों की अपेक्षा कठिन होती है क्योंकि उसे घर और बाहर दोनों जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं। शाम को घर लौटने के बाद भी वह बच्चों की पढ़ाई, खाना बनाना और घर के अन्य कार्यों में लगी रहती है। वास्तव में उसका जीवन निरंतर परिश्रम से भरा होता है।
प्रश्न 3 घर से स्कूल तक के सफ़र में आज आपने क्या-क्या देखा और अनुभव किया? अपने लेख को एक अच्छा-सा शीर्षक दें।
संवेदनाओं की मौत
मैं घर से अपने विद्यालय जाने के लिए निकली। आज मैं अकेली ही जा रही थी क्योंकि मेरी सखी नीलम को ज्वर आ गया था। रास्ते में बस स्टेंड भी पड़ता है। वहाँ से निकली तो बसों का आना-जाना जारी था। अचानक मेरे सामने ही एक व्यक्ति बस से टकराकर सड़क पर गिर गया। मैं किनारे खड़ी देख रही थी कि कोई भी उसे उठाने नहीं आ रहा था। एक बुजुर्ग ने मुझे रोक कर कहा कि पुलिस के चक्कर में मत पड़ो। मैं घबरा कर पीछे हट गई और सोचती रही कि क्या हम इतने संवेदनहीन हो गए हैं कि किसी की सहायता भी नहीं कर सकते।
प्रश्न 4 अपने आस-पास की किसी चीज़ पर एक लेख लिखें और उपयुक्त शीर्षक दें।
पानी के नाम पर बिकता ज़हर
जेठ की तपती दोपहरी में प्यास से व्याकुल लोग सड़क के किनारे खड़ी ‘रेफ्रिजरेटर कोल्ड वाटर’ की रेहड़ियों से पानी पीते हैं। पर क्या कभी हमने सोचा है कि इन टंकियों की सफाई होती भी है या नहीं? कहीं ऐसा तो नहीं कि हम पैसे देकर पानी के नाम पर ज़हर पी रहे हों? स्वास्थ्य विभाग का कर्तव्य है कि इन पानी बेचने वालों की जांच करे ताकि लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा हो सके।
Tags: Class 11 Hindi Lekhan Kaushal, Naye Aur Apratyashit Vishayon Par Lekhan Notes, Hindi Essay Writing Class 11, CBSE Hindi Writing Skills, Class 11 Hindi Question Answer.

Sir Jo "mere mohalle ka chouraha" ka lekh hai usme अंत mai pura dhyan chourahe se hatkar Awara ladko ki taraf chala jata hai toh ye सुसंबद्धता ka पालन nahi kar raha hai...kya yeh sahi hai?
ReplyDeleteHa kyuki sir ne btaya h ki apratyaashit lekh 2 prakar ke h
Delete1st jisme hmm kuch bhi likh sakte h
Apne vicharo ke according
(Ye ek khuli maidan ki tarah hoti h)
Aur 2nd jisme hme dhyan rekhna hota h
( sapast focus vale lekh jisme hmm badhya ho jate h usi se related likhne ke liye)