Ghar me Wapsi Class 11 Question Answer | Class 11 Hindi Chapter Ghar me Wapsi Question Answer | घर में वापसी पाठ के प्रश्न उत्तर

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Ghar me Wapsi Class 11 Question Answer | Class 11 Hindi Chapter Ghar me Wapsi Question Answer | घर में वापसी पाठ के प्रश्न उत्तर

 

प्रश्न 1. घर एक परिवार है, परिवार में पाँच सदस्य हैं, किंतु कबि पाँच सदस्य नहीं उहें पाँज की़ी आँखें मानता है। क्यों ?

उत्तर - कवि उन्हें परिवार के पाँच सदस्य नहीं मानकर पाँच जोड़ी आँखें इसलिए मानता है क्योंकि गरीबी के कारण वे पाँचों परस्पर खुलकर संबाद नहीं करते। उनके समस्त रिश्तों-नातों, स्नेह और अपनत्व के बीच गरीबी की दीवार खड़ी हो गई है। गरीबी से निंतर संघर्ष करते-करते उनमें अब इतनी भी शक्ति शेष नहीं रह गई कि वे आपसी रिश्तों में गरमाहट पैदा कर सकें। वे बेबस होकर एक-दूसरे को देखते रह जाते हैं। उनकी आँखंं भी निस्तेज तथा आशा-रहित हो गई हैं।


प्रश्न 2. ‘पत्नी की आँखें, आँखें नहीं हाथ हैं, जो मुझे थामे हुए हैं’ से कवि का क्या अभिप्राय है ?

उत्तर - कवि इस कथन के माध्यम से यह स्पष्ट करता है कि उसकी पत्नी उसके अभावग्रस्त जीवन में उसे बहुत सहारा देती है। वह उसे निरंतर उत्साहित करती रहती है तथा अभावों में भी निराश नहीं होने देती। उससे प्रेरणा प्राप्त करके ही वह अपनी गरीबी से संघर्ष कर रहा है।


प्रश्न 3. ‘वैसे हम स्वजन हैं, करीब हैं बीच की दीवार के दोनों ओर क्योंकि हम पेशेवर गरीब हैं’ से कवि का क्या आशय है ?

उत्तर - इस कथन के माध्यम से कवि स्पष्ट करता है कि निस्संदेह वे स्वजन हैं, करीब हैं पर वे अत्यधिक गरीब हैं, अभाषग्रस्त हैं। गरीबी ने उनके पारिवारिक संबंधों में बिखराव और टूटन की दीवार-सी खींच दी है। वे अपने हुदय के सुख-दुख को भी ठीक से एक-दूसरे से कह नहीं पाते। इसलिए उनके संबंध वास्तव में होकर भी नहीं होने जैसे हैं। इसका मुख्य कारण उनकी गरीबी है।


प्रश्न 4. ‘रिश्ते हैं, लेकिन खुलते नहीं’-कवि के समाने ऐसी कौन-सी विवशता है जिससे आपसी रिश्ते भी नहीं खुलते ?

उत्तर - कवि कहता है कि एक उसके घर में यद्यपि पाँच सदस्य रहते हैं पर वे स्वजन होकर भी स्वजन-सा व्यवहार नहीं करते। उनके ब्ददयों में गरीबी ने अलगाव की दीवारें खड़ी कर दी हैं। वे अपने सुख-दु:ख को एक-दूसरे के समक्ष प्रकट नहीं कर पाते। गरीबी के तनाष के कारण सभी के मुँह अलग-अलग दिशाओं में हैं।


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प्रश्न 5. निम्नलिखित का काव्य-साँदर्य स्पष्ट कीजिए –

(क) माँ की आंखें पड़ाव से पहले ही तीर्थ-यात्रा की बस के दो पंचर पहिए हैं।

(ख) पिता की आँखें लोहसाँय की ठंडी शलाखें हैं।

उत्तर - (क) कवि ने ‘पड़ाव से पहले ही तीर्थ-यात्रा की बस के दो पंचर पहिए’ प्रतीक मँं की औंखों के लिए प्रयुक्त किया है। इसके द्वारा कवि ने सारा जीवन पवित्र कर्मों को करते हुए भी माँ की आँखों की असमय रोशनी चले जाने की ओर संकेत है। तीर्थ-यात्रा वाली बस जिस प्रकार रास्ते में ही पंचर होकर विषम स्थिति उत्पन्न कर देती है, उसी प्रकार असमय ही माँ की औँखों ने रोशनी खोकर घर में विषमता उत्पन्न कर दी है। भाषा सहज, सरल और भावपूर्ण है। लाक्षणिक्ता और प्रतीकात्मकता विद्यमान है। मुक्त छंद है।

(ख) कवि ने ‘लोहसाँय की ठंडी सलाखें प्रतीक पिता की आँखों के लिए प्रतीक रूप में प्रयुक्त किया है। अपनी यौवनावस्था में पिता तेजस्वी और रौबदार रहे होंगे पर बुढ़ापे और गरीबी ने उनके तेज को उनसे छीन लिया है और उनका तेज मंद पड़ गया है। वे अपने दुर्भाग्य के हाथों हार गए हैं। इसलिए उनके लिए कवि लोहसाँय की ठंड़ी सलाखें कहा है। भाषा सहज, सरल और भावपूर्ण है। लाक्षणिकता एवं प्रतीकात्मक्ता विद्यमान है। मुक्त छंद है।


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