Sher Pehchan Chaar Haath Sajha Question Answer | Class 12th Sher Pehchan Chaar Haath Sajha Question Answer | शेर पहचान चार हाथ साझा Class 12 Questions Answer
1. शेर –
प्रश्न 1. लोमड़ी स्वेच्छा से शेर के मुँह में क्यों जा रही थी ?
उत्तर - लेखक ने जंगल में देखा कि जंगल के छोटे-मोटे जानवर एक लाइन में चले जा रहे हैं और शेर के मुँह में घुसते चले जा रहे हैं। शेर उन्हें बिना चबाए गटकता जा रहा है। फिर उसे एक लोमड़ी मिली। वह भी शेर के मुँह में चली जा रही थी। वह स्वेच्छा से अर्थात् अपनी मर्जी से शेर के मुँह में जा रही थी। जब लेखक ने उससे पूछा कि तुम शेर के मुँह में क्यों जा रही हो; तब उसने उत्तर दिया-” शेर के मुँह में रोज़गार का दफ्तर है। मैं वहाँ दरखास्त दूँगी, फिर मुझे नौकरी मिल जाएगी।” यह बात उसे शेर ने ही बताई थी।
प्रश्न 2. कहानी में लेखक ने शेर को किस बात का प्रतीक बताया है ?
उत्तर - कहानी में लेखक ने शेर को व्यवस्था का प्रतीक बताया है। वह सत्ता की व्यवस्था का प्रतीक है। जैसे ही कोई उसकी व्यवस्था पर उँगली उठाता है या उसकी आज्ञा मानने से इंकार करता है, वह खूँखार हो उठती है। यह सत्ता विरोध में उठने वाले स्वर को कुचल देती है। वह अपने स्वार्थ की सिद्धि के लिए अपने बारे में तरह-तरह के भ्रम प्रचारित करता है और लोगों को उस भ्रमजाल में फँसा लेता है। सामान्य लोग उसका विश्वास कर काल का ग्रास बन जाते हैं।
प्रश्न 3. शेर के मुँह और रोजगार के दफ्तर के बीच क्या अंतर है ?
उत्तर - शेर के मुँह के अंदर जो भी जंगली जानवर एक बार जाता है, उसका अस्तित्व समाप्त हो जाता है। वह वहौँ से पुन: लौटकर कभी नहीं आया। आधुनिक रोजगार दफ्तर में लोग नौकरी की उम्मीद में वहाँ के चक्कर काटते रहते हैं पर उन्हें वहाँ से कभी नौकरी नहीं मिलती। पर इतना अंतर अवश्य है कि रोजगार दफ्तर उन्हें शेर के मुँह की भॉति निगलकर उनका अस्तित्व समाप्त नहीं करता।
प्रश्न 4. ‘ग्रमाण से अधिक महत्त्वपूर्ण है विश्वास’-शेर कहानी के आधार पर टिप्पणी कीजिए।
उत्तर - जब लेखक पूछता है कि यदि शेर का मुँह रोजगार का दफ्तर है तो पास में रोजगार दफ्तर क्यों है ? तब उसे जवाब मिलता है कि प्रमाण से अधिक महत्त्वपूर्ण है विश्वास। यद्यपि शेर का मुँह हिंसा का प्रतीक है, पर विभिन्न जीवों को यह विश्वास दिलाया गया कि शेर के अंदर घास का हरा-भरा मैदान है, वहाँ रोजगार का दफ्तर है। शेर के मुँह में स्वर्ग है। अतः वे उसके मुँह में समाते चले गए। उन्हें किसी प्रमाण की आवश्यकता नहीं थी, बल्कि उन्हें अटूट विश्वास था। आज का सत्ताधारी वर्ग भी लोगों का विश्वास हासिल करने उनका शोषण करता है। यदि नेता जनता का विश्वास जीत जाता है तो उसका ढोंग भली प्रकार चल जाता है।
2. पहचान –
प्रश्न 1. राजा ने जनता को हुक्म क्यों दिया कि सब लोग अपनी आँखें बंद कर लें ?
उत्तर - राजा ने जनता को आँखें बंद कर लेने का हुक्म इसलिए दिया ताकि वह मनमाने ढंग से अपना काम कर सके और लोगों से खूब काम ले सके। बंद आँखों से काम अच्छा और अधिक हो रहा था। राजा को लगा कि जनता में शांति बनाए रखने के लिए आँखें बंद करवाना ही उचित है। राजा ने आँखें इसलिए भी बंद करवाईं ताकि लोग एक-दूसरे को न देख सकें। अपना ध्यान वे काम में लगाएँ।
प्रश्न 2. आँख बंद रखने और आँखें खोलकर देखने के क्या परिणाम निकले ?
उत्तर - आँख बंद रखने का यह परिणाम निकला कि काम पहले की तुलना में अधिक और अच्छा होने लगा। इसका कारण था कि लोग इधर-उधर न देखकर हर वक्त काम में जुटे रहते थे। आँखें खोलकर देखने का यह परिणाम निकला कि अब उन्हें राजा के सिवाय कोई और दिखाई ही नहीं देता था। वे एक-दूसरे तक की पहचान खो बैठे थे। राजा चाहता भी यही था।
प्रश्न 3. राजा ने कौन-कौन से हुक्म निकाले ? सूची बनाइए और इनके निहितार्थ लिखिए।
उत्तर - राजा ने निम्नलिखित हुक्म निकाले-
– सब लोग अपनी आँखें बंद रखेंगे, ताकि उन्हें शांति मिलती रहे। [निहितार्थ-लोग राजा के कामों को, हरकतों को न देख पाएँ और उसके काम में लगे रहें।]
– लोग अपने कानों में पिघला हुआ सीसा डलवा लें। [निहितार्थ-इससे लोगों के सुनने की शक्ति समाप्त हो जाएगी। वे किसी विपक्षी की बातें सुनकर सत्ता का विरोध नहीं कर सकेंगे।]
– लोग अपने होंठ सिलवा लें। बोलने को उत्पादन में बाधक बताया गया। [निहितार्थ-इसका निहितार्थ है कि लोग राजा के कार्यों के विरुद्ध अपनी आवाज न उठाएँ। वे चुप रहकर काम करते रहें।]
प्रश्न 4. जनता राज्य की स्थिति की ओर आँख बंद कर ले तो उसका राज्य पर क्या प्रभाव पड़ेगा ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर - यदि जनता राज्य की स्थिति की ओर आँख बंद कर ले अर्थात् ध्यान न दे तो शासक वर्ग निरंकुश हो जाएगा। तब राज्य की प्रगति तो अवरुद्ध हो जाएगी, पर राजा (सत्ता) की व्यक्तिगत उन्नति खूब होगी। वह राज्य की संपत्ति का उपभोग अपने लिए ही करेगा। राज्य की दशा सुधारने में उसकी कोई रुचि नहीं होती। वह तो तभी रुचि लेता है जब राज्य की जनता सचेत रहती है। शासक वर्ग तो यही चाहता है कि राज्य की जनता राज्य के प्रति आँखें मूँदे रहे।
यह पेज आपको कैसा लगा ... कमेंट बॉक्स में फीडबैक जरूर दें...!!!
प्रश्न 5. खैराती, रामू और छिदू ने जब आँखें खोलीं तो उन्हें राजा ही क्यों दिखाई दिया ?
उत्तर - खैराती, रामू और छिदू आम जनता के प्रतीक हैं। जब राजा (शासक वर्ग) जनता को गूँगा, बहरा और अंधा बना देता है तब जनता की अपनी पहचान खो जाती है। उसे वही दिखाई देता है जो उसे दिखाया जाता है। इन लोगों की मन:स्थिति ऐसी बना दी गई थी कि उन्हें राजा के अलावा और कोई दिखाई ही न देता था। इसी स्थिति को Brainwash करना कहते हैं। इसमें जनता की अपनी पहचान खो जाती है। उसे वही दिखाई देता है जो उसे दिखाया जाता है। इन लोगों की मन:स्थिति ऐसी बना दी गई थी कि उन्हें राजा के अलावा और कोई दिखाई नहीं दिया। उनकी स्थिति ऐसी थी जैसे सावन के अंधे को हरा-ही हरा दिखाई देता है।
3. चार हाथ –
प्रश्न 1. मजदूरों को चार हाथ देने के लिए मिल मालिक ने क्या-क्या किया और उसका क्या परिणाम निकला ?
उत्तर - मिल मालिक ने मजदूों को चार हाथ देकर अधिक काम करवाने का विचार किया। इसके लिए उसने निम्नलिखित प्रयास किए:
बड़े वैज्ञानिकों को मोटी तनख्वाह पर नौकर रखा ताकि वे शोध और प्रयोग करके मजदूरों के चार हाथ कर सकें। कई साल के प्रयोग के बाद उन्होंने इसे असंभव बताया अतः वैज्ञानिकों की छुट्टी कर दी गई। फिर मिल मालिकों ने कटे हुए हाथ मँगवाए और उन्हें मजदूरों को फिट करना चाहा, पर ऐसा हो नहीं सका। फिर उसने लकंड़ी के हाथ मँगवाए और उन्हें लगवाना चाहा। उनसे काम नहीं हो पाया। फिर उसने लोहे के हाथ मँगवाए। उन्हें फिट करवाया तो मजदूर मर गए।
प्रश्न 2. चार हाथ न लग पाने की स्थिति में मिल मालिक की समझ में क्या बात आई ?
उत्तर - एक दिन मिल-मालिक के दिमाग में एक ख्याल आया कि अगर मज़दूरों के चार हाथ हों तो काम बहुत तेजी से होगा और उसका मुनाफ़ा भी ज्यादा हो जाएगा। उसने इस काम को करने के लिए बड़े वैज्ञानिकों को मोटी तनख्वाह पर नौकर रखा। कई साल तक शोध और प्रयोग करने के बाद उन्होंने कहा कि ऐसा करना असंभव है कि आदमी के चार हाथ हो जाएँ। मिल-मालिक नाराज़ हो गया। वह स्वयं इसका उपाय ढूँढ़ने में जुट गया। उसने कटे हाथ मँगवाए और उन्हें अपने मज़दूरों के फिट करवाना चाहा, पर ऐसा न हो सका। लकड़ी के हाथ भी नहीं लग पाए। अंत में उसे एक बात समझ में आ गई। उसने मज़दूरों की मजदूरी आधी कर दी। इससे बचे पैसों से दुगुने मजदूर काम पर रख लिए। अब उन्हीं पैंसों में दुगुना काम होने लगा।
यह पेज आपको कैसा लगा ... कमेंट बॉक्स में फीडबैक जरूर दें...!!!
4. साझा –
प्रश्न 1. साझे की खेती के बारे में हाथी ने किसान को क्या बताया ?
उत्तर - साझे की खेती के बारे में हाथी ने किसान को यह बताया कि वह उसके साथ साझे में खेती करे। उसने समझाया कि साझे की खेती करने का यह लाभ होगा कि जंगल के छोटे-मोटे जानवर खेतों को नुकसान नहीं पहुँचा सकेंगे। खेती की अच्छी रखवाली हो जाएगी।
प्रश्न 2. हाथी ने खेत की रखवाली के लिए क्या घोषणा की ?
उत्तर - किसान अकेले खेती करने का साहस नहीं जुटा पाता था। वह पहले शेर, चीते, मगरमच्छ के साथ खेती कर चुका था, पर उसे कोई लाभ नहीं हुआ था। अबकी बार हाथी ने कहा कि अब वह उसके साथ खेती करे। इससे उसे यह लाभ होगा कि जंगल के छोटे-मोटे जानवर खेतों को नुकसान नहीं पहुँचा पाएँगे। अंतत: किसान इसके लिए तैयार हो गया। उसने हाथी से मिलकर खेत में गन्ना बोया। हाथी ने खेत की रखवाली के लिए पूरे जंगल में घूमकर यह डुग्गी पीटी कि अब गन्ने के खेत में उसका साझा है, इसलिए कोई जानवर खेत को नुकसान न पहुँचाए, नहीं तो अच्छा नहीं होगा। इस प्रकार गन्ने के खेत की रखवाली अच्छी प्रकार से हो गई।
प्रश्न 3. आधी-आधी फसल हाथी ने किस तरह बँटी ?
उत्तर - गन्ने की फसल पकने पर किसान हाथी को खेत पर बुला लाया। किसान चाहता था कि फसल आधी-आधी बाँट ली जाए। जब उसने हाथी को यह बात कही तो वह बिगड़ उठा। वह बोला, “अपने-पराए की बात मत करो। यह छोटी बात है। हम दोनों गन्ने के स्वामी हैं। अतः हम मिलकर गन्ने खाएँगे।” यह कहकर गन्ने का एक छोर हाथी ने अपने मुँह में ले लिया और दूसरा सिरा किसान के मुँह में दे द्यिया। गन्ने के साथ-साथ आदमी भी हाथी के मुँह की तरफ खिंचने लगा तो उसने गन्ना छोड़ दिया। इस प्रकार सारा गन्ना हाथी के हिस्से में आ गया।


If you have any doubts, Please let me know