CBSE Class 10 Hindi A Answer Key 2026 (All Sets & Codes) | 02 March 2026
CBSE Class 10 Hindi Course A (Code 002) की बोर्ड परीक्षा 02 मार्च 2026 को सफलतापूर्वक संपन्न हो चुकी है। परीक्षा के तुरंत बाद लाखों छात्र अपने उत्तरों का मिलान करने के लिए Hindi A Answer Key 2026 की तलाश कर रहे हैं। इस पोस्ट में हमने सभी 5 Sets (Set 1, 2, 3, 4, 5) और उनके सभी 15 Question Paper Codes का 100% सटीक हल (Solution) उपलब्ध कराया है।
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📌 Set 1
- 👉 Code 3/1/1
- 👉 Code 3/1/2
- 👉 Code 3/1/3
📌 Set 2
- 👉 Code 3/2/1
- 👉 Code 3/2/2
- 👉 Code 3/2/3
📌 Set 3
- 👉 Code 3/3/1
- 👉 Code 3/3/2
- 👉 Code 3/3/3
📌 Set 4
- 👉 Code 3/4/1
- 👉 Code 3/4/2
- 👉 Code 3/4/3
📌 Set 5
- 👉 Code 3/5/1
- 👉 Code 3/5/2
- 👉 Code 3/5/3
🔥 Set 1 - Answer Key 2026
🟢 Question Paper Code: 3/1/1 Solution
खंड – क (अपठित बोध)
प्रश्न 1: अपठित गद्यांश (दौड़ और प्रतिस्पर्धा)
- (i) (A) I और II दोनों (शारीरिक थकान और आत्मा की थकान)
- (ii) (C) हर दिन दूसरों की उपलब्धियों को दिखा ललचाता रहता है।
- (iii) (B) कथन सही है किंतु कारण गलत है।
- (iv) बचपन में हमें होशियार बनने, अच्छे नंबर लाने और जीत कर दिखाने की सीख दी जाती है। इसका प्रभाव यह पड़ता है कि हमारा जीवन दूसरों से आगे निकलने की एक अंधी दौड़ बन जाता है, जिससे हम मानसिक और शारीरिक रूप से थक जाते हैं।
- (v) खुशी और संतुष्टि किसी से तुलना या प्रतियोगिता करने के बजाय अपने भीतर स्थिर रहने और आत्म-साक्षात्कार से मिल सकती है। इसे पाने के लिए हम दूसरों की अंधी नकल छोड़कर अपनी स्वयं की गति से चलेंगे।
प्रश्न 2: अपठित काव्यांश (बाज़ारीकरण और प्रकृति)
- (i) (D) जीवन से प्रकृति और उसका साहचर्य गायब होना।
- (ii) (C) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण कथन की उचित व्याख्या है।
- (iii) (D) I और II सही हैं।
- (iv) 'नन्हीं पीढ़ी' का अर्थ है आज के बच्चे या आने वाली पीढ़ी। उन्हें साथ ले जाने का कारण उन्हें बाज़ार दिखाना और प्रकृति के विलुप्त होते रूपों से परिचित कराना था।
- (v) कविता जिन खतरों की ओर इशारा कर रही है उनसे बचने के दो प्रभावी उपाय हैं: 1. प्रकृति का संरक्षण करना और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनना। 2. अत्यधिक बाज़ारीकरण और उपभोक्तावाद की प्रवृत्ति को रोकना।
खंड – ख (व्यावहारिक व्याकरण)
प्रश्न 3: रचना के आधार पर वाक्य भेद
- वाक्य भेद: मिश्र वाक्य।
- मिश्र वाक्य: जो पान वाला था, उसके खुद के मुँह में पान ठूँसा हुआ था।
- सरल वाक्य: पान वाले के लिए मज़ेदार यह बात हालदार साहब के लिए चकित करने वाली थी।
- संयुक्त वाक्य: आषाढ़ की रिमझिम है और समूचा गाँव खेतों में उतर पड़ा है।
- आश्रित उपवाक्य: "जब उत्साह कविता लिखी गई", भेद: क्रिया-विशेषण उपवाक्य।
प्रश्न 4: वाच्य
- सभी बच्चों द्वारा पाठ पढ़ा गया। (कर्मवाच्य)
- वाच्य भेद: कर्तृवाच्य।
- वृद्धा चल नहीं पा रही थी। (कर्तृवाच्य)
- तुमसे जाया नहीं जा सकता। (भाववाच्य)
- वाच्य भेद: कर्मवाच्य।
प्रश्न 5: पद परिचय
- (i) अपने: सार्वनामिक विशेषण, पुल्लिंग, एकवचन, 'खेत' विशेष्य।
- (ii) उधर: स्थानवाचक क्रिया-विशेषण, अव्यय, 'रखी है' क्रिया की विशेषता।
- (iii) वह : अन्य पुरुषवाचक सर्वनाम, पुल्लिंग, एकवचन, कर्ता कारक।
- (iv) घटनाएँ: जातिवाचक संज्ञा, स्त्रीलिंग, बहुवचन, कर्ता कारक।
- (v) हे भगवान!: विस्मयादिबोधक अव्यय, आश्चर्य या शोक का भाव।
प्रश्न 6: अलंकार
- रूपक अलंकार (पद-पंकज)।
- मानवीकरण अलंकार।
- अतिशयोक्ति अलंकार।
- उपमा अलंकार का उदाहरण: पीपर पात सरिस मन डोला।
- उत्प्रेक्षा अलंकार का उदाहरण: सोहत ओढ़े पीत पट, स्याम सलौने गात। मनहुँ नीलमनि सैल पर, आतप परयौ प्रभात।
खंड – ग (पाठ्य पुस्तक एवं पूरक पाठ्य पुस्तक)
प्रश्न 7: पठित गद्यांश (बिस्मिल्ला खाँ)
- (i) (C) कथन II और IV सही हैं। (प्रतिष्ठा की चिंता और आत्मीयता का भाव)
- (ii) (B) स्नेह का।
- (iii) (D) कथन और कारण दोनों सही हैं परंतु कारण कथन की उचित व्याख्या नहीं है।
- (iv) (A) I, II और III तीनों (परिश्रमी, प्रतिभावान, सरल)।
- (v) (B) ईश्वर उनके गायन में सुरीलापन सदैव बनाए रखे।
प्रश्न 8: निर्धारित गद्य पाठों के आधार पर
(i) ‘नेताजी का चश्मा’ कहानी के संदर्भ में: मूर्ति पर पत्थर का चश्मा न होना नगरपालिका या मूर्तिकार की कमी को दर्शाता था। परंतु असली चश्मे की मौजूदगी यह सिद्ध करती थी कि समाज में 'कैप्टन' जैसे लोग अभी भी जीवित हैं, जिनके मन में देशभक्तों के प्रति गहरा सम्मान है।
(ii) बालगोबिन भगत का बेटा: भगत जी का बेटा शारीरिक और मानसिक रूप से सुस्त और कमज़ोर ('बोदा') था। भगत जी उसे सामान्य बच्चों से अधिक प्यार और स्नेह देते थे। उनका मानना था कि ऐसे विशेष बच्चों को अधिक देखभाल की आवश्यकता होती है।
(iii) नवाब साहब की असहजता: नवाब साहब ने अकेलेपन में खीरा खाने के लिए सेकंड क्लास का टिकट लिया था। लेखक के अचानक आ जाने से उन्हें संकोच हुआ कि कोई उन्हें मँझले दर्जे में खीरे जैसी आम चीज़ खाते हुए देखेगा। उनके हाव-भाव से उनकी असहजता साफ़ झलक रही थी।
(iv) मन्नू भंडारी के पिता का प्रभाव: 1. हीन-भावना: पिता द्वारा उनकी तुलना गोरी बड़ी बहन से किए जाने के कारण मन्नू के मन में हीन-भावना बैठ गई थी। 2. देशभक्त: घर की राजनीतिक बहसों ने मन्नू के भीतर देश के प्रति जागरूकता पैदा की।
प्रश्न 9: पठित काव्यांश (सूरदास)
- (i) (B) उद्धव का मन प्रेम से अछूता रहा।
- (ii) (D) केवल III सही हैं ।
- (iii) (D) I और IV सही हैं (सहज उपमाओं द्वारा गूढ़ भाव और कृष्ण-प्रेम को महत्त्व)।
- (iv) (C) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण कथन की उचित व्याख्या है।
- (v) (A) प्रेम-भाव से भरी नदी के समान।
प्रश्न 10: निर्धारित कविताओं के आधार पर
(i) परशुराम के आगमन पर राजा जनक की सभा: परशुराम के आगमन से पूरी सभा भयभीत हो गई। शिव-धनुष टूटने की खबर से वे अत्यंत क्रोधित थे। लक्ष्मण के साथ उनके तीखे संवादों ने सभा के वातावरण को तनावपूर्ण और उत्तेजित बना दिया था।
(ii) संगतकार की मनुष्यता: संगतकार मुख्य गायक के सुर को ऊँचा उठाने के लिए जानबूझकर अपना स्वर धीमा रखता है। कवि इसे उसकी विफलता नहीं बल्कि 'मनुष्यता' कहता है, क्योंकि वह निस्वार्थ भाव से सहयोगी की भूमिका निभाता है।
(iii) 'बाँस या बबूल' की संज्ञा: यह संज्ञा उन लोगों को दी गई है जिनका हृदय कठोर या नीरस हो चुका है। कवि कहता है कि बच्चे की निश्चल मुसकान इतनी प्रभावी है कि ऐसे कठोर हृदय वाले व्यक्ति का मन भी पिघलकर कोमल हो जाता है।
प्रश्न 11: पूरक पाठ्य पुस्तक (कृतिका) पर आधारित
(i) पिता द्वारा पालन-पोषण: 'माता का अंचल' पाठ में भोलानाथ के पिता उनका बहुत ध्यान रखते हैं। उदाहरण के लिए: 1. वे भोलानाथ को सुबह पूजा में अपने साथ बैठाते थे। 2. वे भोलानाथ को अपने हाथों से 'गोरस' और भात खिलाते थे, जिससे सिद्ध होता है कि पिता भी माँ की तरह ममत्व दे सकते हैं।
(ii) 'लायुंग' का आकर्षण: लेखिका को 'लायुंग' अपनी प्राकृतिक शांति और प्रदूषण रहित वातावरण के कारण पसंद आया। किसी पर्यटन स्थल को दर्शनीय बनाने वाले मुख्य बिंदु हैं—स्वच्छता, प्राकृतिक सौंदर्य का संरक्षण और स्थानीय संस्कृति का सम्मान।
(iii) प्रेरणास्रोत: हाँ, एक लेखक की आंतरिक व्याकुलता दूसरे लेखक के लिए प्रेरणा बन सकते हैं। जैसे हिरोशिमा की त्रासदी ने अज्ञेय जी को झकझोर दिया, वैसी ही मानवीय संवेदना किसी अन्य संवेदनशील रचनाकार को भी लिखने के लिए विवश कर सकती है।
खंड – घ (रचनात्मक लेखन)
प्रश्न 12, 13, 14, 15: रचनात्मक लेखन
विद्यार्थियों के लिए विशेष निर्देश:
प्रश्न संख्या 12, 13, 14, और 15 रचनात्मक लेखन के अंतर्गत आते हैं। इन प्रश्नों पर विद्यार्थी अपने मौलिक विचारों, अनुभव और प्रश्न में दिए गए संकेत-बिंदुओं के अनुसार स्वयं उत्तर लिख सकते हैं। इस भाग में आपकी भाषा-शैली और रचनात्मकता को ही मूल्यांकन का आधार बनाया जाता है।
🟢 Question Paper Code: 3/1/2 Solution
खंड – क (अपठित बोध)
प्रश्न 1: अपठित काव्यांश (प्रकृति और बाज़ारीकरण)
- (i) (D) जीवन से प्रकृति और उसका साहचर्य गायब होना
- (ii) (C) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण कथन की उचित व्याख्या है।
- (iii) (D) I और II सही हैं।
- (iv) 'नन्हीं पीढ़ी' का अर्थ है आने वाली नई पीढ़ी या बच्चे। कवयित्री उन्हें साथ लेकर इसलिए गई ताकि वे देख सकें कि विकास और बाज़ारीकरण की दौड़ में हमने प्रकृति (नदी, पहाड़) को कैसे खो दिया है और आज हम उसे बोतलों और डिब्बों में खरीदने को मजबूर हैं।
- (v) खतरों से बचने के दो प्रभावी उपाय:
1. पर्यावरण का संरक्षण करना और प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर जीना।
2. अत्यधिक उपभोक्तावाद और बाज़ारीकरण पर रोक लगाकर प्राकृतिक संसाधनों को बचाना।
प्रश्न 2: अपठित गद्यांश (प्रतिस्पर्धा और सफलता)
- (i) (A) I और II दोनों
- (ii) (C) हर दिन दूसरों की उपलब्धियों को दिखा ललचाता रहता है।
- (iii) (B) कथन सही है किंतु कारण गलत है।
- (iv) हमें बचपन से 'होशियार बनने, अच्छे नंबर लाने और दूसरों को जीत कर दिखाने' की सीख दी जाती है। इसका प्रभाव यह पड़ता है कि हमारे मन में दूसरों से आगे निकलने की एक कभी न खत्म होने वाली दौड़ शुरू हो जाती है, जिससे हम अपनी मानसिक शांति खो देते हैं।
- (v) खुशी और संतुष्टि आत्म-साक्षात्कार (स्वयं को पहचानने) से मिल सकती है। इसे पाने के लिए हमें दूसरों से तुलना करना बंद करना होगा और अपनी गति से अपने लक्ष्यों की ओर बढ़ना होगा।
खंड – ख (व्यावहारिक व्याकरण)
प्रश्न 3: रचना के आधार पर वाक्य भेद
- संयुक्त वाक्य: मूर्ति की आँखों पर सरकंडे का बना छोटा-सा चश्मा था और वह वहाँ रखा था।
- मिश्र वाक्य: जो मंझोले कद के गोरे-चिट्टे आदमी हैं, वे बालगोबिन भगत हैं।
- सरल वाक्य: नवाब साहब ने होंठ पोंछकर गर्व से हमारी ओर देखा।
- वाक्य भेद: सरल वाक्य (या विधानवाचक वाक्य)।
- उपवाक्य: 'जो सबसे अधिक छायादार वृक्ष समान था' - विशेषण आश्रित उपवाक्य।
प्रश्न 4: वाच्य
- राम से गिलास टूट गया। (कर्मवाच्य)
- मैं उस पवित्र ज्योति की याद में श्रद्धावनत हूँ। (कर्तृवाच्य)
- मन्नू भंडारी द्वारा देश की आज़ादी के आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई गई। (कर्मवाच्य)
- उन्होंने स्वदेशी चिंतन को व्यापक बनाया। (कर्तृवाच्य)
- राजेश से बहुत तेज़ दौड़ा गया। (भाववाच्य)
प्रश्न 5: पद परिचय
- (i) स्वाधीनता: भाववाचक संज्ञा, स्त्रीलिंग, एकवचन, कर्म कारक।
- (ii) और: समुच्चयबोधक अव्यय (समानाधिकरण)।
- (iii) छी!: विस्मयादिबोधक अव्यय, घृणा/तिरस्कार सूचक।
- (iv) कुछ: अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण, पुल्लिंग, बहुवचन।
- (v) अपने-आप: निजवाचक सर्वनाम।
प्रश्न 6: अलंकार
- उत्प्रेक्षा अलंकार ('मानो' शब्द के प्रयोग के कारण)।
- उपमा अलंकार ('सम' और 'सा' के प्रयोग के कारण)।
- मानवीकरण अलंकार (अलसी के पौधे का मानवीय रूप में वर्णन)।
- अतिशयोक्ति अलंकार: "हनुमान की पूँछ में लगन न पायी आग, लंका सिगरी जल गयी, गये निशाचर भाग।"
- रूपक अलंकार: "मैया मैं तो चंद्र-खिलौना लैहौं।"
खंड – ग (पाठ्य पुस्तक)
प्रश्न 7: सूरदास के पद (बहुविकल्पीय)
- (i) (B) उद्धव का मन प्रेम से अछूता रहा।
- (ii) (A) केवल III सही है।
- (iii) (D) I और IV सही हैं।
- (iv) (C) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण कथन की उचित व्याख्या है।
- (v) (A) प्रेम-भाव से भरी नदी के समान।
प्रश्न 8: निर्धारित कविताओं के आधार पर प्रश्न
(i) परशुराम के आगमन के पश्चात् दृश्य: परशुराम के आगमन और शिव-धनुष के टूटने की खबर से पूरी सभा भयभीत हो गई। परशुराम का अत्यंत क्रोधित रूप देखकर राजा जनक और अन्य राजा डर के मारे सहम गए। सभा में 'हाहाकार' मच गया।
(ii) संगतकार की मनुष्यता: संगतकार मुख्य गायक की आवाज़ को सहारा देता है और अपनी आवाज़ को मुख्य गायक से ऊँचा नहीं होने देता। यह उसकी विफलता नहीं, बल्कि उसकी मनुष्यता और कला के प्रति समर्पण है।
(iii) बाँस या बबूल का आशय: कवि ने 'बाँस या बबूल' उन कठोर हृदय वाले व्यक्तियों को कहा है जिनमें भावुकता की कमी है। बच्चे की मुस्कान देखकर ऐसे नीरस मन में भी प्रेम के फूल झड़ने लगते हैं।
(iv) 'उत्साह' में बादल का महत्व: बादल क्रांति और नव-निर्माण का प्रतीक है। कवि बादलों के माध्यम से समाज में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार करना चाहते हैं।
प्रश्न 9: बिस्मिल्ला खाँ - नौबतखाने में इबादत (MCQ)
- (i) (C) कथन II और IV सही हैं।
- (ii) (B) स्नेह का
- (iii) (A) कथन सही है परंतु कारण गलत है।
- (iv) (A) I, II और III तीनों।
- (v) (B) ईश्वर उनके गायन में सुरीलापन सदैव बनाए रखे।
प्रश्न 10: निर्धारित गद्य पाठों के आधार पर प्रश्न
(i) नेताजी का चश्मा - असली चश्मा: मूर्ति पर असली चश्मा होना इस बात का प्रमाण था कि आज भी आम जनता के मन में देश के शहीदों के प्रति सम्मान जीवित है। यह देशभक्ति की उस भावना को दर्शाता है जो संसाधनों के अभाव में भी हार नहीं मानती।
(ii) बालगोबिन भगत का बेटा: भगत का बेटा सुस्त और बोदा था। भगत उसे सामान्य बच्चों से अलग मानते थे क्योंकि उनका मानना था कि ऐसे बच्चों को अधिक देखभाल और प्यार की आवश्यकता होती है।
(iii) लखनवी अंदाज़ - नवाब साहब की असहजता: नवाब साहब ने अपनी रईसी दिखाने के लिए खीरे खरीदे थे। जब उन्होंने लेखक को देखा, तो उन्हें लगा कि एक साधारण व्यक्ति उन्हें खीरा खाते देख लेगा, जिससे उनकी शान में कमी आएगी। इसी दिखावे के कारण वे असहज हो गए।
प्रश्न 11: पूरक पाठ्यपुस्तक (कृतिका) के प्रश्न
(i) माता का अंचल - पिता की भूमिका: भोलानाथ का अपने पिता के साथ गहरा आत्मीय संबंध था। बच्चों के स्वस्थ विकास में पिता की भूमिका एक मित्र और रक्षक की होनी चाहिए। पिता को बच्चे के साथ समय बिताना चाहिए ताकि उसका भावनात्मक विकास सही हो।
(ii) साना-साना हाथ जोड़ि - यूमथांग यात्रा: लेखिका को यूमथांग जाने पर ऐसा महसूस हुआ जैसे वे स्वर्ग के करीब पहुँच गई हों। अगर मैं उनकी जगह होता, तो प्रकृति की उस विराट सुंदरता को देखकर दंग रह जाता और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेता।
(iii) 'मैं क्यों लिखता हूँ' - रचनाकार पर प्रभाव: लेखन केवल बाहरी दबाव से नहीं, बल्कि आंतरिक विवशता से पैदा होता है। हिरोशिमा की घटना ने अज्ञेय जी के भीतर जो वेदना जागी, उसी ने उन्हें कविता लिखने पर मजबूर किया।
खंड – घ (रचनात्मक लेखन)
प्रश्न 12, 13, 14, 15: रचनात्मक लेखन (Creative Writing)
विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण टिप:
प्रश्र 12, 13, 14, 15 रचनात्मक लेखन है .. जिस पर विद्यार्थी अपने विचार के अनुसार उत्तर लिख सकता है। यह भाग आपकी मौलिकता, भाषा प्रवाह और रचनात्मक क्षमता को परखने के लिए है। अतः दिए गए विषयों पर अपने शब्दों में स्पष्ट और प्रभावशाली उत्तर लिखें।
🟢 Question Paper Code: 3/1/3 Solution
खंड – ‘क’ (अपठित बोध)
प्रश्न 1: अपठित गद्यांश के उत्तर
- (i) (A) I और II दोनों
- (ii) (C) हर दिन दूसरों की उपलब्धियों को दिखा ललचाता रहता है।
- (iii) (B) कथन सही है किंतु कारण गलत है।
- (iv) सीख और प्रभाव: बचपन से हमें होशियार बनने, अच्छे नंबर लाने और दूसरों से आगे निकलने (जीतने) की सीख दी जाती है। इसका प्रभाव यह पड़ता है कि हमारा जीवन एक अंधी दौड़ बन जाता है और हम अपनी आंतरिक शांति व आत्मा को भूलकर दूसरों से तुलना करने लगते हैं।
- (v) खुशी और संतुष्टि: खुशी और संतुष्टि हमारे भीतर से आती है, न कि दूसरों से तुलना करने से। इसे पाने के लिए हमें अपनी 'आत्मा' से साक्षात्कार करना होगा और दूसरों की प्रगति देखकर विचलित होने के बजाय अपने भीतर स्थिर रहना सीखना होगा।
प्रश्न 2: अपठित काव्यांश के उत्तर
- (i) (D) जीवन से प्रकृति और उसका साहचर्य गायब होना।
- (ii) (C) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण कथन की उचित व्याख्या है।
- (iii) (D) I और III सही हैं।
- (iv) 'नन्हीं पीढ़ी' का अर्थ: 'नन्हीं पीढ़ी' का अर्थ है आज के बच्चे या आने वाली पीढ़ी। कवयित्री उसे साथ लेकर इसलिए गई ताकि उसे दिखा सके कि जहाँ आज बाज़ार और दरारें हैं, वहाँ कभी हरियाली और नदी हुआ करती थी। वह उसे प्रकृति के मूल रूप से परिचित कराना चाहती है।
- (v) दो प्रभावी उपाय: 1. अधिक से अधिक वृक्षारोपण करना और जल स्रोतों (नदियों) का संरक्षण करना। 2. बाज़ारीकरण और उपभोगवादी संस्कृति पर नियंत्रण पाकर प्रकृति के साथ तालमेल बिठाना।
खंड – ‘ख’ (व्यावहारिक व्याकरण)
प्रश्न 3: रचना के आधार पर वाक्य भेद
- मिश्र वाक्य: ऐसी संस्कृति जो पेट भरने और तन ढाँकने की इच्छा मात्र हो, वह संस्कृति की जननी नहीं है।
- संयुक्त वाक्य: शास्त्रों में आनंदकानन नाम से प्रतिष्ठित काशी है और यह संस्कृति की पाठशाला है।
- सरल वाक्य: मैंने ये सारी मिथ्या बातें कहीं सुनी हैं।
- आश्रित उपवाक्य: 'जो खीरा बेचने वाले हैं' - विशेषण आश्रित उपवाक्य।
- वाक्य भेद: मिश्र वाक्य।
प्रश्न 4: वाच्य
- शीला अग्रवाल ने साहित्य का दायरा बढ़ाया। - कर्तृवाच्य
- नवाब साहब द्वारा खीरों को धो-पोंछ कर सुखाया गया। - कर्मवाच्य
- बालगोबिन भगत द्वारा एक पद गाया जाता है।
- नन्हे शिशु द्वारा गहरी नींद में सोया जाता है।
- पान वाले ने हालदार साहब की ओर पान बढ़ाया।
प्रश्न 5: पद-परिचय
- शाबाश!: विस्मयादिबोधक अव्यय, हर्षबोधक भाव प्रकट करने के लिए।
- कितने: अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण, पुल्लिंग, बहुवचन, 'केले' विशेष्य का विशेषण।
- मेहनत: भाववाचक संज्ञा, स्त्रीलिंग, एकवचन, कर्म कारक।
- वह: अन्यपुरुषवाचक सर्वनाम, पुल्लिंग, एकवचन, कर्ता कारक।
- हाल में: जातिवाचक संज्ञा, पुल्लिंग, एकवचन, अधिकरण कारक।
प्रश्न 6: अलंकार
- रूपक अलंकार (मन-सागर, मनसा-लहरी)
- उत्प्रेक्षा अलंकार (वाचक शब्द 'मनहु' के कारण)
- अतिशयोक्ति अलंकार (हाथ छुए बिना ही आँसुओं से पैर धो देने का वर्णन)
- मानवीकरण अलंकार का उदाहरण: "मेघ आए बड़े बन-ठन के सँवर के।"
- उपमा अलंकार का उदाहरण: "पीपर पात सरिस मन डोला।"
खंड – ‘ग’ (पाठ्यपुस्तक एवं पूरक पाठ्यपुस्तक)
प्रश्न 7: निर्धारित गद्य पाठों पर आधारित लघु उत्तरीय प्रश्न
(i) ‘नेताजी का चश्मा’ - असली चश्मे की मौजूदगी: पत्थर की मूर्ति पर पत्थर का चश्मा न होना बड़ी बात इसलिए नहीं थी क्योंकि मूर्तिकार समय की कमी या बारीकी के चक्कर में उसे बनाना भूल गया होगा। किंतु असली चश्मा होना बड़ी बात इसलिए थी क्योंकि यह ‘कैप्टन’ जैसे साधारण नागरिक की नेताजी के प्रति अगाध श्रद्धा और देशभक्ति को दर्शाता था। यह संदेश देता है कि देश के आम लोगों में भी शहीदों के प्रति सम्मान जीवित है।
(ii) ‘बालगोबिन भगत’ का बेटा और उनका व्यवहार: भगत जी का बेटा सुस्त और बोदा (कम बुद्धि वाला) था। भगत जी उसे सामान्य बच्चों से अधिक प्यार करते थे क्योंकि उनका मानना था कि ऐसे बच्चों को अधिक देखरेख और मुहब्बत की ज़रूरत होती है। वे उसे ईश्वर की देन मानते थे और उस पर अधिक निगरानी रखते थे।
(iii) ‘लखनवी अंदाज़’ - नवाब साहब की असहजता: नवाब साहब ने अकेलेपन में आनंद लेने के लिए खीरे खरीदे थे। लेखक के अचानक आ जाने से उनकी एकांत साधना में बाधा पड़ी। वे एक साधारण व्यक्ति के सामने ‘खीरा’ जैसी मामूली खाद्य वस्तु खाने में अपनी नवाबी शान के खिलाफ संकोच (शर्म) महसूस कर रहे थे, इसलिए वे असहज हो गए।
(iv) ‘एक कहानी यह भी’ - पिता के प्रभाव के दो पहलू: मन्नू भंडारी के व्यक्तित्व पर पिता के प्रभाव के दो पहलू हैं: 1. सकारात्मक: उन्होंने मन्नू को घर की बहसों में बैठने और देश की परिस्थितियों को समझने के लिए प्रेरित किया, जिससे उनमें देशभक्ति जागी। 2. नकारात्मक: पिता के शक्की स्वभाव और अपनी विशिष्टता बनाए रखने की सनक ने मन्नू में हीन भावना पैदा कर दी थी।
प्रश्न 8: पठित गद्यांश (बिस्मिल्ला खाँ) आधारित बहुविकल्पीय उत्तर
- (i) (A) कथन सही है परंतु कारण गलत है ।
- (ii) (B) स्नेह का
- (iii) (C) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण कथन की उचित व्याख्या है।
- (iv) (A) I, II और III तीनों (परिश्रमी, प्रतिभावान, सरल)।
- (v) (B) ईश्वर उनके गायन में सुरीलापन सदैव बनाए रखे।
प्रश्न 9: निर्धारित कविताओं पर आधारित लघु उत्तरीय प्रश्न
(i) परशुराम के आगमन पर राजा जनक की सभा का दृश्य: परशुराम के क्रोधपूर्ण आगमन से पूरी सभा भयभीत हो गई। शिव का धनुष टूटा देख वे अत्यंत क्रोधित थे और अपराधी को सामने लाने की चुनौती दे रहे थे। सभा में सन्नाटा छा गया, राजा जनक और अन्य राजा डर के मारे काँपने लगे। लक्ष्मण ने व्यंग्य किया जबकि राम ने विनम्रता से उन्हें शांत करने का प्रयास किया।
(ii) ‘संगतकार’ की मनुष्यता: संगतकार की मनुष्यता इस बात में है कि वह अपनी प्रतिभा और आवाज़ को मुख्य गायक से ऊँचा नहीं होने देता। वह अपनी शक्ति का प्रयोग मुख्य गायक को सहारा देने और उसे निखारने के लिए करता है, न कि स्वयं प्रसिद्ध होने के लिए। अपनी सफलता को पीछे रखना उसकी कमजोरी नहीं, बल्कि उसकी महानता और मानवता है।
(iii) ‘यह दंतुरित मुसकान’ - बाँस या बबूल की संज्ञा: कवि ने स्वयं को ‘बाँस या बबूल’ कहा है। इसका कारण यह है कि कवि लंबे समय तक घर से बाहर रहा और उसका स्वभाव नीरस व कठोर हो गया था। बच्चे की कोमल मुसकान देखकर कवि का हृदय पिघल गया और उसे लगा जैसे उसके नीरस जीवन में शेफालिका के फूल झरने लगे हों।
प्रश्न 10: पठित काव्यांश (सूरदास के पद) आधारित बहुविकल्पीय उत्तर
- (i) (B) उद्धव का मन प्रेम से अछूता रहा।
- (ii) (A) केवल III सही है।
- (iii) (D) I और IV सही हैं।
- (iv) (C) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण कथन की उचित व्याख्या है।
- (v) (A) प्रेम-भाव से भरी नदी के समान
प्रश्न 11: पूरक पाठ्यपुस्तक (कृतिका) पर आधारित प्रश्न
(i) ‘माता का अंचल’ - पिता का आचरण और तर्क: भोलानाथ के पिता का आचरण आम भारतीय पिताओं से भिन्न है क्योंकि वे बच्चे के पालन-पोषण में माँ के समान ही सक्रिय भूमिका निभाते हैं। वे उसे नहलाते हैं, पूजा में साथ बिठाते हैं, खाना खिलाते हैं और उसके साथ खेलते हैं। तर्क: इस आचरण को समाज में अपनाया जाना चाहिए क्योंकि इससे बच्चे और पिता के बीच एक मज़बूत भावनात्मक संबंध बनता है।
(ii) ‘सेवन सिस्टर्स वॉटर फॉल’ का अनुभव: लेखिका ने जलप्रपात के प्रचंड वेग को देखा और महसूस किया जैसे प्रकृति की अनंत शक्ति उनके सामने प्रवाहित हो रही हो। उन्हें लगा कि उनके भीतर की सारी तामसिकता और विषैली वासनाएँ उस पवित्र जलधारा के साथ बह गई हैं। अगर मैं उस जगह होता, तो मुझमें भी प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और शांति के भाव उमड़ते।
(iii) ‘मैं क्यों लिखता हूँ’ - रचनाकार की आंतरिक विवशता: अज्ञेय के अनुसार, एक सच्चा रचनाकार अपनी आंतरिक व्याकुलता या दबाव से मुक्ति पाने के लिए लिखता है। वह स्वयं को समझने और अनुभव को प्रत्यक्ष करने के लिए लिखता है। पक्ष में विचार: रचनाकार का अलग-थलग रहना उसकी ‘साधना’ का हिस्सा है ताकि वह अपने भीतर के शोर और बाहरी जगत के अनुभवों को संतुलित कर सके।
खंड – ‘घ’ (रचनात्मक लेखन)
नोट: प्रश्न संख्या 12, 13, 14, 15 रचनात्मक लेखन है, जिस पर विद्यार्थी अपने विचार और प्रश्न में दिए गए संकेत बिंदुओं के अनुसार उत्तर लिख सकता है। इसमें आपकी अपनी कल्पना शक्ति और भाषा कौशल का महत्व होता है।
🔥 Set 2 - Answer Key 2026
🟢 Question Paper Code: 3/2/1 Solution
खण्ड क (अपठित बोध)
प्रश्न 1: अपठित गद्यांश पर आधारित प्रश्न
- (i) (A) जल संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति के कारण
- (ii) (C) नदियों से बसावट दूर हुई और तालाब, बावड़ियाँ, कुएँ आदि बनाए गए।
- (iii) (C) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
- (iv) जल के बदलते रंगों से हमें जीवन के विभिन्न रूपों का दर्शन होता है। जिस प्रकार पानी में निरंतर प्रवाह और गति होती है, वैसे ही जीवन में भी गतिशीलता बनी रहनी चाहिए। यही 'जल दर्शन' या जीवन दर्शन है।
- (v) गद्यांश के संदर्भ में 'पानीदार होने' का अर्थ है जल के महत्व, उसकी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक भूमिका को समझना और उसका सम्मान करना। हम अपनी प्राचीन जल संरक्षण परंपराओं (तालाब, कुएँ आदि) को जीवित रखकर और जल के प्रति संवेदनशील नज़रिया अपनाकर पानीदार बने रह सकते हैं।
प्रश्न 2: अपठित काव्यांश पर आधारित प्रश्न
- (i) (C) घर बेटी की अनुपस्थिति से बहुत सूना है।
- (ii) (C) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
- (iii) (A) केवल I सही है। (विवशता से भरी)
- (iv) सामाजिक ढाँचे में अक्सर पिता को कठोर और भावनाओं को दबाकर रखने वाले व्यक्ति के रूप में देखा जाता है। वे अपनी संतान के प्रति गहरा प्रेम तो रखते हैं, लेकिन संकोच या व्यक्तित्व की गंभीरता के कारण उसे शब्दों में व्यक्त नहीं कर पाते।
- (v) इस पंक्ति का आशय है कि बेटी के बिना घर की रौनक चली गई है। पूरा परिवेश नीरस और सूना हो गया है। घर की प्रत्येक वस्तु और सदस्य उसकी कमी महसूस कर रहे हैं, जिससे वातावरण में एक प्रकार की उदासी व्याप्त है।
खण्ड ख (व्यावहारिक व्याकरण)
प्रश्न 3: रचना के आधार पर वाक्य-भेद
- वाक्य भेद: सरल वाक्य
- आश्रित उपवाक्य: 'कि वे हमारे बीच मौजूद हैं' (संज्ञा उपवाक्य)
- उत्तर: उन्होंने भारत जाने की एक शर्त रखी।
- उत्तर: नाटकों में स्त्रियाँ प्राकृत बोलती हैं, पर यह उनके ग्रामीण होने का प्रमाण नहीं है।
- उत्तर: जो बच्चा रेलवे प्लेटफ़ॉर्म पर बैठा था, वह सहमा हुआ था।
प्रश्न 4: वाच्य
- उत्तर: पिताजी द्वारा स्वादिष्ट दाल बनाई गई।
- उत्तर: इतनी गर्मी में किसके द्वारा सोया जा सकता है?
- उत्तर: राधिका नहीं दौड़ सकी।
- वाच्य भेद: भाववाच्य
- वाच्य भेद: कर्तृवाच्य
प्रश्न 5: पद-परिचय
- (i) कबीर के: संबंध कारक, पुल्लिंग, बहुवचन (आदरसूचक), 'आदर्शों' विशेष्य का।
- (ii) उफ़!: विस्मयादिबोधक अव्यय, शोक/पीड़ा सूचक।
- (iii) मेरी: सार्वनामिक विशेषण, स्त्रीलिंग, एकवचन, 'घड़ी' विशेष्य।
- (iv) के साथ: संबंधबोधक अव्यय, 'रमेश' और 'तुम' के बीच संबंध दर्शा रहा है।
- (v) कूद रहे थे: क्रिया (अकर्मक), पुल्लिंग, बहुवचन, अपूर्ण भूतकाल, कर्तृवाच्य।
प्रश्न 6: अलंकार
- अलंकार: अतिशयोक्ति अलंकार
- अलंकार: उत्प्रेक्षा अलंकार
- अलंकार: उपमा अलंकार
- मानवीकरण अलंकार का उदाहरण: "मेघ आए बड़े बन-ठन के सँवर के।"
- रूपक अलंकार का उदाहरण: "मैया मैं तो चंद्र-खिलौना लैहौं।"
खण्ड ग (पाठ्य-पुस्तक एवं पूरक पाठ्य-पुस्तक)
प्रश्न 7: पठित गद्यांश (मन्नू भंडारी)
- (i) (B) केवल I और III सही हैं।
- (ii) (D) सम्पन्न और सम्मानजनक स्थिति।
- (iii) (B) कथन सही है किन्तु कारण ग़लत है।
- (iv) (C) अपने विश्वासपात्रों से मिले विश्वासघात को झेलने के कारण।
- (v) (D) II, III और IV सही हैं।
प्रश्न 8: निर्धारित गद्य पाठों के आधार पर
(i) हालदार साहब के मन में उभरे भाव: हालदार साहब ने जब नेताजी की मूर्ति पर असली चश्मा देखा, तो उनके मन में कौतुक (हैरानी) और सम्मान के भाव उभरे। उन्हें लगा कि भले ही मूर्ति पत्थर की है, लेकिन लोगों की श्रद्धा और देशभक्ति असली है। मूर्ति पर असली चश्मा इसलिए लगा था क्योंकि मूर्तिकार पत्थर का चश्मा बनाना भूल गया था या वह टूट गया था, जिसे देखकर देशभक्त 'कैप्टन' चश्मे वाले ने अपनी तरफ से एक असली फ्रेम लगा दिया था।
(ii) बालगोबिन भगत की मान्यता: हाँ, मैं भगत जी की इस मान्यता से सहमत हूँ। सुस्त और मानसिक रूप से कमज़ोर लोगों को समाज में अधिक देखभाल, प्रेम और दिशा-निर्देश की आवश्यकता होती है। यदि उन्हें उपेक्षित छोड़ दिया जाए, तो वे पीछे रह जाते हैं। प्रेम और निगरानी उन्हें सुरक्षा का अहसास कराती है और उन्हें बेहतर जीवन जीने में मदद करती है।
(iii) बिस्मिल्ला खाँ के व्यक्तित्व के गुण: बिस्मिल्ला खाँ के व्यक्तित्व के प्रमुख गुण उनकी सादगी, अपनी कला (शहनाई) के प्रति अटूट समर्पण और सांप्रदायिक सद्भाव थे। मैं उनके 'कला के प्रति समर्पण' के गुण को अपनाना चाहूँगा, क्योंकि किसी भी क्षेत्र में सफलता पाने के लिए निरंतर अभ्यास (रियाज़) और अहंकारशून्य होना अत्यंत आवश्यक है।
(iv) वास्तविक अर्थों में संस्कृत मनुष्य: 'संस्कृति' पाठ के अनुसार, वह व्यक्ति वास्तविक अर्थों में 'संस्कृत' है जो अपनी बुद्धि और योग्यता के बल पर किसी नए तथ्य या चीज़ का आविष्कार करता है जो मानवता के कल्याण के लिए हो। केवल पूर्वजों की खोजों का लाभ उठाने वाला व्यक्ति 'सभ्य' तो हो सकता है, पर 'संस्कृत' नहीं।
प्रश्न 9: पठित काव्यांश (सूरदास के पद)
- (i) (B) कृष्ण के स्थान पर उद्धव के आने के कारण।
- (ii) (C) गोपियाँ मानो विरह के दुख से जल उठीं।
- (iii) (C) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
- (iv) (A) कृष्ण ने।
- (v) (C) केवल I और II सही हैं।
प्रश्न 10: निर्धारित कविताओं के आधार पर
(i) परशुराम द्वारा शत्रु कहना: परशुराम शिव के अनन्य भक्त थे और शिवधनुष उन्हें अपने गुरु से प्राप्त हुआ था। गुरु का धनुष टूटना उनके लिए गुरु का अपमान था, इसलिए उन्होंने तोड़ने वाले को शत्रु कहा। मेरी दृष्टि में, राम वास्तव में उनके शत्रु नहीं थे; उन्होंने तो केवल शिव के पुराने धनुष को छुआ था और वह टूट गया, इसमें उनकी कोई दुर्भावना नहीं थी।
(ii) फागुन मास की मादकता: फागुन की मादकता सर्वत्र फैली हुई है। प्रकृति नई कोपलों, लाल-हरे पत्तों और सुगंधित फूलों से लद गई है। चारों ओर इतनी सुंदरता और रंगीनी है कि वह आँखों में समा नहीं रही है। वातावरण में एक नशा और उमंग है, जिससे मन प्रसन्न होकर कल्पना के पंख लगा लेता है।
(iii) जयशंकर प्रसाद के जीवन की झलक: 'आत्मकथ्य' कविता से पता चलता है कि प्रसाद जी का जीवन संघर्षों और अभावों से भरा रहा है। उन्होंने अपनों से ही धोखे और विडंबनाएँ झेली हैं। वे एक अत्यंत विनम्र और सादगी पसंद इंसान थे, जो अपनी उपलब्धियों का ढिंढोरा नहीं पीटना चाहते थे और अपने दुखों को निजी रखना चाहते थे।
(iv) संगतकार की आवश्यकता: संगतकार मुख्य गायक का सहयोगी इसलिए है क्योंकि: 1. जब मुख्य गायक का स्वर ऊँचाइयों (तार सप्तक) पर जाकर कमजोर पड़ने लगता है, तब संगतकार अपने स्वर से उसे सहारा देता है। 2. वह मुख्य गायक को यह अहसास दिलाता रहता है कि वह अकेला नहीं है और गायन की निरंतरता (स्थायी) को बनाए रखता है।
प्रश्न 11: पूरक पाठ्य-पुस्तक (कृतिका) के आधार पर
(i) ‘माता का अंचल’ की घटनाओं की वर्तमान से तुलना: यह कथन काफी हद तक सही है क्योंकि आज के शहरी परिवेश में बच्चे मिट्टी में खेलना, चूहों के बिल में पानी डालना या बारात निकालना जैसे सामूहिक खेलों से दूर हो गए हैं। वर्तमान में बच्चों का समय मोबाइल, कंप्यूटर और इनडोर गेम्स में बीतता है। माता-पिता का अत्यधिक सुरक्षात्मक होना भी उन्हें वैसी उन्मुक्त आज़ादी नहीं देता। हालाँकि, माँ का आँचल आज भी उतना ही सुरक्षात्मक और सुखद है, लेकिन खेलने के तरीके अब पूरी तरह बदल गए हैं।
(ii) हिमालय का सौंदर्य (साना-साना हाथ जोड़ि...): हिमालय का सौंदर्य पल-पल बदलता और अद्भुत है। कहीं हरियाली की गहरी चादर है, तो कहीं बर्फ की सफेद चादर। तीस्ता नदी का चाँदी जैसा चमकता पानी और ऊँचाई से गिरते झरने (जैसे सेवन सिस्टर्स) मन को मोह लेते हैं। हिमालय का विशाल स्वरूप और वहां की गहन शांति मनुष्य को तुच्छता का अहसास कराती है और उसे अध्यात्म की ओर ले जाती है।
(iii) ‘मैं क्यों लिखता हूँ?’ - मनुष्य निर्मित विभीषिका: इस पाठ में 'हिरोशिमा' के परमाणु बम विष्फोट की विभीषिका का वर्णन है, जहाँ विज्ञान का दुरुपयोग कर लाखों लोगों को पल भर में भाप बना दिया गया। यह मनुष्य द्वारा निर्मित सबसे बड़ी त्रासदी है। रोकथाम के दो उपाय: 1. विज्ञान और तकनीक का उपयोग केवल मानवता के कल्याण और विकास के लिए सुनिश्चित किया जाए। 2. विश्व के सभी राष्ट्रों के बीच शांति, अहिंसा और निःशस्त्रीकरण (Disarmament) के प्रति वैश्विक जागरूकता पैदा करना।
खण्ड घ (रचनात्मक लेखन)
प्रश्र 12, 13, 14, 15 रचनात्मक लेखन है: इस खंड में अनुच्छेद लेखन, पत्र लेखन, स्ववृत्त/ई-मेल और विज्ञापन लेखन शामिल हैं। इन प्रश्नों का उत्तर विद्यार्थी अपनी रचनात्मकता, वैचारिक स्पष्टता और प्रश्न में दिए गए संकेत-बिंदुओं के आधार पर अपने विचार के अनुसार लिख सकते हैं।
🟢 Question Paper Code: 3/2/2 Solution
खण्ड – क (अपठित बोध)
प्रश्न 1: अपठित काव्यांश (बेटी घर आना)
- (i) (C) घर बेटी की अनुपस्थिति से बहुत सूना है।
- (ii) (C) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
- (iii) (A) केवल I सही है। (विवशता से भरी)
- (iv) उत्तर: पिता अपनी अंतर्मुखी प्रकृति या संकोच के कारण बेटी के प्रति अपने प्रेम को शब्दों में व्यक्त नहीं कर पाते, वे अकेले में सिसकते हैं पर सामने कुछ कह नहीं पाते।
- (v) उत्तर: 'आँगन उदास है' का अर्थ है कि बेटी के बिना घर की रौनक खत्म हो गई है। घर का वातावरण नीरस और खुशियों से रहित हो गया है।
प्रश्न 2: अपठित गद्यांश (जल और सभ्यता)
- (i) (A) जल संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति के कारण।
- (ii) (C) नदियों से बसावट दूर हुई और तालाब, बावडियाँ, कुएँ आदि बनाए गए।
- (iii) (C) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
- (iv) उत्तर: जल से यह 'जीवन दर्शन' मिलता है कि जीवन में प्रवाह, गति और बदलाव अनिवार्य है, जैसे नदी का रंग और रूप दिन भर बदलता रहता है।
- (v) उत्तर: 'पानीदार होने' का अर्थ है—आत्मसम्मान बनाए रखना और जल जैसे प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना। हम जल का संचयन करके और उसके प्रति आध्यात्मिक जुड़ाव रखकर पानीदार बन सकते हैं।
खण्ड – ख (व्यावहारिक व्याकरण)
प्रश्न 3: रचना के आधार पर वाक्य-भेद
- (i) मिश्र वाक्य।
- (ii) जब हम कटाओ के करीब आ रहे थे, तब बर्फ से ढके पहाड़ दिखने लगे थे ।
- (iii) आँख के सामने न आने वाला घटित नहीं माना जाएगा।
- (iv) उसे अपनी भाषा पर गर्व था इसीलिए उसकी आँखें चमक उठीं।
- (v) आश्रित उपवाक्य: 'कि कैप्टन चश्मे बदलता है' (संज्ञा आश्रित उपवाक्य)।
प्रश्न 4: वाच्य
- (i) रोहन से अब उठा-बैठा जा सकता है।
- (ii) प्रबंधक ने सभागार में अगले कार्यक्रम की घोषणा की।
- (iii) महिलाओं द्वारा बाज़ार से कई किताबें खरीदी गईं।
- (iv) कर्तृवाच्य।
- (v) भाववाच्य।
प्रश्न 5: पद-परिचय
- (i) नदी: जातिवाचक संज्ञा, स्त्रीलिंग, एकवचन, संबंध कारक।
- (ii) जल्दी: रीतिवाचक क्रिया-विशेषण ('दौड़कर आए' क्रिया की विशेषता)।
- (iii) पर: समुच्चयबोधक अव्यय (विरोधवाचक)।
- (iv) देखा: सकर्मक क्रिया, पुल्लिंग, एकवचन, भूतकाल, कर्तृवाच्य।
- (v) उसी: सार्वनामिक विशेषण, पुल्लिंग, एकवचन ('कमरे' विशेष्य का विशेषण)।
प्रश्न 6: अलंकार
- (i) मानवीकरण अलंकार।
- (ii) उत्प्रेक्षा अलंकार।
- (iii) रूपक अलंकार।
- (iv) उपमा अलंकार का उदाहरण: पीपर पात सरिस मन डोला।
- (v) अतिशयोक्ति अलंकार का उदाहरण: हनुमान की पूँछ में लगन न पाई आग, लंका सिगरी जरि गई गए निसाचर भाग।
खण्ड – ग (पाठ्य-पुस्तक एवं पूरक पाठ्य-पुस्तक)
प्रश्न 7: पठित काव्यांश (सूरदास के पद)
- (i) (B) कृष्ण के स्थान पर उद्धव के आने के कारण।
- (ii) (C) गोपियाँ मानो विरह के दुःख से जल उठीं।
- (iii) (C) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
- (iv) (A) कृष्ण ने।
- (v) (C) केवल I और II सही हैं।
प्रश्न 8: कविताओं के आधार पर लघु उत्तरीय प्रश्न
(i) राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद: परशुराम शिव के परम भक्त थे और शिव-धनुष उनके गुरु की धरोहर थी। उसे तोड़ने वाले को उन्होंने अपना शत्रु इसलिए कहा क्योंकि उनके अनुसार यह उनके आराध्य का अपमान था। वास्तव में, वह व्यक्ति (श्रीराम) उनका शत्रु नहीं था, क्योंकि उन्होंने धनुष को द्वेषवश नहीं बल्कि उसकी जर्जर अवस्था के कारण अनजाने में तोड़ा था।
(ii) अट नहीं रही है: फागुन मास की मादकता का वर्णन करते हुए कवि कहते हैं कि इस समय प्रकृति का सौंदर्य इतना अधिक है कि वह समा नहीं पा रहा है। चारों ओर रंग-बिरंगे फूल खिले हैं, पेड़ों पर नई कोपलें आ गई हैं और मंद सुगंधित हवा चल रही है, जिससे मन और वातावरण पूरी तरह उल्लास से भर जाता है।
(iii) आत्मकथ्य: इस कविता के आधार पर जयशंकर प्रसाद के जीवन की सादगी और उनके संघर्षों की झलक मिलती है। वे अपने जीवन को एक 'साधारण' कहानी मानते हैं जिसमें सुख कम और वेदना अधिक थी। वे अपनी व्यक्तिगत असफलताओं और धोखों को सार्वजनिक नहीं करना चाहते, जो उनकी विनम्रता को दर्शाता है।
(iv) संगतकार: संगतकार मुख्य गायक का अनिवार्य सहयोगी इसलिए है क्योंकि: 1. वह मुख्य गायक की उखड़ती या थकी हुई आवाज़ को सहारा देकर उसे बिखरने से बचाता है। 2. जब मुख्य गायक अंतरे की जटिल तानों में खो जाता है, तब संगतकार 'स्थायी' (टेक) को पकड़कर मुख्य सुर को बनाए रखता है।
प्रश्न 9: पठित गद्यांश (मन्नू भंडारी)
- (i) (B) केवल I और III सही हैं।
- (ii) (D) सम्पन्न और सम्मानजनक स्थिति।
- (iii) (C) कथन सही है, किंतु कारण गलत है।
- (iv) (C) अपने विश्वासपात्रों से मिले विश्वासघात को झेलने के कारण।
- (v) (A) II, III और IV सही हैं।
प्रश्न 10: गद्य पाठों के आधार पर लघु उत्तरीय प्रश्न
(i) नेताजी का चश्मा: हालदार साहब के मन में देशभक्ति और सम्मान के भाव उभरे। उन्हें लगा कि आज भी लोगों के मन में शहीदों के प्रति सम्मान जीवित है। मूर्ति पर असली चश्मा इसलिए लगा था क्योंकि मूल पत्थर का चश्मा शायद टूट गया था या बना नहीं था, और कैप्टन अपनी देशभक्ति के कारण उस कमी को पूरा करता था।
(ii) बालगोबिन भगत: हाँ, मैं भगत की इस मान्यता से सहमत हूँ। कमजोर और सुस्त लोगों को अधिक देखभाल और प्रेम की आवश्यकता होती है क्योंकि वे स्वयं को उपेक्षित महसूस कर सकते हैं। अधिक प्रेम और मार्गदर्शन से ही उन्हें समाज की मुख्यधारा में लाया जा सकता है और उनमें आत्मविश्वास भरा जा सकता है।
(iii) बिस्मिल्ला खाँ: बिस्मिल्ला खाँ के व्यक्तित्व में सादगी, विनम्रता, अपनी कला के प्रति अटूट समर्पण और सांप्रदायिक सद्भाव जैसे गुण थे। मैं उनकी 'सादगी' को अपनाना चाहूँगा, क्योंकि भारत रत्न जैसी बड़ी उपाधि मिलने के बाद भी वे एक साधारण इंसान बने रहे और कभी अहंकार नहीं किया।
(iv) संस्कृति: 'संस्कृति' पाठ के संदर्भ में, वास्तविक अर्थों में संस्कृत मनुष्य वह है जो अपनी बुद्धि और विवेक का उपयोग कर किसी नई चीज़ का आविष्कार या खोज करता है। वह केवल परंपराओं का पालन नहीं करता, बल्कि मानवता के कल्याण के लिए नए तथ्य खोजता है।
प्रश्न 11: पूरक पाठ्य-पुस्तक (कृतिका) पर आधारित प्रश्न
(i) माता का अँचल: पाठ में वर्णित गाँव का स्वरूप आज पूरी तरह बदल चुका है। पहले बच्चे मिट्टी, कंकड़ और पत्तों जैसे प्राकृतिक साधनों से सामूहिक खेल खेलते थे और समाज में आपसी भाईचारा था। वर्तमान में, गाँवों में भी शहरीकरण का प्रभाव है; बच्चों का स्थान मोबाइल और वीडियो गेम्स ने ले लिया है और कच्चे घरों की जगह पक्के मकानों और आधुनिक सुख-सुविधाओं ने ले ली है।
(ii) साना-साना हाथ जोड़ि: लेखिका ने हिमालय के सौंदर्य का अद्भुत चित्रण किया है। जैसे-जैसे वे ऊँचाई पर जाती हैं, प्रकृति के विभिन्न रूप सामने आते हैं—कहीं गहरी घाटियाँ हैं, कहीं दूध की धार जैसे झरने, और कहीं बर्फ से ढकी चोटियाँ। फूलों से लदी वादियाँ और बादलों की धुंध पहाड़ों को रहस्यमयी बनाती है। यह सौंदर्य मन को शांति और आध्यात्मिकता से भर देता है।
(iii) मैं क्यों लिखता हूँ?: यह पाठ हमें विज्ञान के दुरुपयोग (जैसे हिरोशिमा का परमाणु बम) के प्रति सचेत करता है। जब विज्ञान का प्रयोग मानवता के विनाश के लिए होता है, तो वह अभिशाप बन जाता है। वर्तमान समय में विज्ञान के दुरुपयोग को रोकने के लिए हमें नैतिक शिक्षा पर बल देना चाहिए और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विनाशकारी हथियारों पर प्रतिबंध लगाने के कड़े कानून बनाने चाहिए।
खण्ड – घ (रचनात्मक लेखन)
प्रश्न 12, 13, 14, 15: रचनात्मक लेखन (Creative Writing)
नोट: प्रश्न संख्या 12, 13, 14 और 15 पूरी तरह से रचनात्मक लेखन (अनुच्छेद, पत्र, स्ववृत्त, विज्ञापन आदि) पर आधारित हैं। इन प्रश्नों का उत्तर प्रत्येक विद्यार्थी अपनी कल्पनाशीलता, मौलिक विचारों और प्रश्न में दिए गए संकेत-बिंदुओं के अनुसार लिख सकता है। परीक्षा में इन विषयों पर आपकी स्वयं की भाषा-शैली और प्रस्तुतीकरण को महत्व दिया जाता है।
🟢 Question Paper Code: 3/2/3 Solution
खंड – क (अपठित बोध)
प्रश्न 1: अपठित गद्यांश (नदियों और जल संरक्षण पर आधारित)
- (i) (A) जल संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति के कारण।
- (ii) (C) नदियों से बसावट दूर हुई और तालाब, बावडियाँ, कुएँ आदि बनाए गए।
- (iii) (C) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
- (iv) जल से हमें यह 'जीवन दर्शन' मिलता है कि जीवन प्रवाहमान है और इसमें गति होनी चाहिए। जैसे नदी का रंग दिन के समय के अनुसार बदलता है, वैसे ही हमारे जीवन में भी परिवर्तन आते रहते हैं।
- (v) 'पानीदार होने' का अर्थ है आत्म-सम्मान के साथ जीना और जल के महत्व को समझना। हम जल के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व को पहचान कर और उसे प्रदूषित होने से बचाकर 'पानीदार' बने रह सकते हैं।
प्रश्न 2: अपठित काव्यांश (बेटी और घर की याद पर आधारित)
- (i) (C) घर बेटी की अनुपस्थिति से बहुत सूना है।
- (ii) (C) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
- (iii) (A) केवल I सही है। (विवशता से भरी)
- (iv) पिता अक्सर अपनी भावनाओं को स्पष्ट रूप से व्यक्त नहीं कर पाते। वे समाज या स्वभाव के कारण चुप रहकर अपनी बेटी को याद करते हैं, सिसकते हैं और बुदबुदाते हैं, जिससे उनका मौन प्रेम झलकता है।
- (v) इस पंक्ति का आशय है कि बेटी के बिना घर की रौनक खत्म हो गई है। घर का वातावरण नीरस और उदास हो गया है, क्योंकि बेटी की उपस्थिति ही घर में उत्साह और जीवंतता लाती थी।
खंड – ख (व्यावहारिक व्याकरण)
प्रश्न 3: रचना के आधार पर वाक्य-भेद
- सुबह आँख खुलते ही मैं बालकनी की तरफ भागी। (सरल वाक्य)
- वह थाली में दही-भात सानती और हमें खिलाती थी। (संयुक्त वाक्य)
- जब मैं जीप की खिड़की से सिर निकाल रही थी, तब दूर-दूर तक देख रही थी। (मिश्र वाक्य)
- उपवाक्य पहचान: 'कि सभी सैलानी झूम-झूम कर गाने लगे' - भेद: संज्ञा आश्रित उपवाक्य।
- वाक्य भेद: संयुक्त वाक्य।
प्रश्न 4: वाच्य
- अब चलें। (भाववाच्य)
- हुक्कामों ने एक-दूसरे की तरफ देखा। (कर्तृवाच्य)
- अख़बारों ने खबरें छापीं। (कर्तृवाच्य में रूपांतरण)
- उससे चला नहीं जा रहा था। (भाववाच्य में रूपांतरण)
- बच्चों द्वारा खूब शोर मचाया गया। (कर्मवाच्य में रूपांतरण)
प्रश्न 5: पद-परिचय
- (i) पढ़ी: सकर्मक क्रिया, स्त्रीलिंग, एकवचन,भूतकाल।
- (ii) हताशा: भाववाचक संज्ञा, स्त्रीलिंग, एकवचन, करण कारक।
- (iii) अरे!: विस्मयादिबोधक अव्यय, आश्चर्य/विस्मय का भाव।
- (iv) स्वयं: निजवाचक सर्वनाम, पुल्लिंग, एकवचन।
- (v) प्रतिदिन: कालवाचक क्रिया-विशेषण।
प्रश्न 6: अलंकार
- रूपक अलंकार (मुनिपद कमल)
- उपमा अलंकार ('सा' वाचक शब्द के कारण)
- अतिशयोक्ति अलंकार (बाण छूटने से पहले ही सिर कटने का वर्णन)
- मानवीकरण अलंकार का उदाहरण: "मेघ आए बड़े बन-ठन के सँवर के।"
- उत्प्रेक्षा अलंकार का उदाहरण: "सोहत ओढ़े पीत पट, स्याम सलौने गात। मनहुँ नीलमनि सैल पर, आतपु पर्यो प्रभात॥"
खंड – ग (पाठ्य पुस्तक एवं पूरक पाठ्य पुस्तक)
प्रश्न 7: निर्धारित गद्य पाठों के आधार पर लघु उत्तरीय प्रश्न
(i) हालदार साहब के मन में कौतुक और सम्मान के भाव उभरे। पहला भाव यह था कि कस्बावासियों की देशभक्ति सराहनीय है कि वे मूर्ति के प्रति इतना लगाव रखते हैं। दूसरा, बच्चों द्वारा सरकंडे का चश्मा लगाने पर उन्हें यह सुखद अहसास हुआ कि नई पीढ़ी में भी देशभक्ति की भावना जीवित है।
(ii) हाँ, हम बालगोबिन भगत की इस मान्यता से सहमत हैं। उनके अनुसार ऐसे लोग मानसिक या शारीरिक रूप से कमजोर हो सकते हैं, जिन्हें अधिक देखरेख और सहानुभूति की आवश्यकता होती है। प्रेम और निगरानी से उनके जीवन को बेहतर दिशा दी जा सकती है, जो एक मानवीय दृष्टिकोण है।
(iii) बिस्मिल्ला खाँ के व्यक्तित्व से हम 'सादगी' और 'कला के प्रति पूर्ण समर्पण' के गुणों को अपनाना चाहेंगे। भारत रत्न जैसे सर्वोच्च सम्मान पाने के बाद भी वे अत्यंत विनम्र थे और उन्होंने अपनी जड़ों (बनारस और गंगा) को कभी नहीं छोड़ा। उनका यह गुण प्रेरणादायक है।
(iv) 'संस्कृति' पाठ के संदर्भ में, वास्तविक अर्थों में एक 'संस्कृत मनुष्य' वह है जो अपनी बुद्धि और विवेक के माध्यम से किसी नए तथ्य या सत्य का आविष्कार करता है। वह अपनी मौलिक खोज का उपयोग मानव कल्याण के लिए करता है, न कि केवल विनाश के लिए।
प्रश्न 8: पठित गद्यांश (मन्नू भंडारी) बहुविकल्पीय प्रश्न
- (i) (A) केवल I और III सही हैं।
- (ii) (D) सम्पन्न और सम्मानजनक स्थिति।
- (iii) (C) कथन सही है, किंतु कारण गलत है।
- (iv) (C) अपने विश्वासपात्रों से मिले विश्वासघात को झेलने के कारण।
- (v) (D) II, III और IV सही हैं।
प्रश्न 9: निर्धारित कविताओं के आधार पर लघु उत्तरीय प्रश्न
(i) परशुराम शिव के परम भक्त थे और शिव धनुष उनके गुरु की अमानत थी। धनुष टूटना उनके लिए गुरु का अपमान था, इसलिए उन्होंने तोड़ने वाले को शत्रु माना। वास्तव में राम उनके शत्रु नहीं थे, उन्होंने केवल धनुष की जीर्ण अवस्था के कारण उसे छुआ था।
(ii) फागुन मास में प्रकृति का सौंदर्य चरम पर होता है। चारों ओर हरियाली और फूलों की सुगंध बिखरी होती है। पेड़ नए पत्तों से लद जाते हैं और वातावरण इतना मादक और सुंदर होता है कि उससे आँखें हटाना मुश्किल हो जाता है।
(iii) 'आत्मकथ्य' कविता में जयशंकर प्रसाद के जीवन का संघर्ष और सादगी झलकती है। वे अपने जीवन को एक 'खाली गागर' की तरह बताते हैं जिसमें कोई विशेष उपलब्धि नहीं है। वे अपनी व्यक्तिगत पीड़ा और धोखों को सार्वजनिक नहीं करना चाहते।
(iv) संगतकार मुख्य गायक का अनिवार्य सहयोगी होता है क्योंकि वह मुख्य गायक की ऊँची तान पर उखड़ती आवाज़ को सहारा देता है और उसे उसके अकेलेपन के अहसास से बचाता है।
प्रश्न 10: पठित काव्यांश (सूरदास) बहुविकल्पीय प्रश्न
- (i) (B) कृष्ण के स्थान पर उद्धव के आने के कारण।
- (ii) (C) गोपियाँ मानो विरह के दुख से जल उठीं।
- (iii) (C) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
- (iv) (A) कृष्ण ने (क्योंकि उन्होंने प्रेम की मर्यादा नहीं रखी)।
- (v) (C) केवल I और II सही हैं।
प्रश्न 11: पूरक पाठ्य-पुस्तक (कृतिका) पर आधारित प्रश्न
(i) 'माता का अँचल' में वर्णित बचपन प्रकृति के सान्निध्य में बीतता था। बच्चे मिट्टी, धूल और घर की बेकार वस्तुओं से सामूहिक खेल खेलते थे। वर्तमान समय में बचपन डिजिटल गैजेट्स और मोबाइल तक सिमट गया है। अब बच्चों का प्रकृति से जुड़ाव कम हो गया है।
(ii) 'साना-साना हाथ जोड़ी' पाठ में लेखिका ने झरनों को 'सिल्वर की सुइयों' की तरह चमकता हुआ बताया है। 'सेवन सिस्टर्स वाटरफॉल' अपनी पूरी शक्ति के साथ नीचे गिर रहा था, जो मन को अद्भुत शांति प्रदान कर रहा था। तीस्ता नदी का सौंदर्य भी मंत्रमुग्ध कर देने वाला था।
(iii) मनुष्य विज्ञान की असीमित शक्ति के सामने तब विवश नज़र आता है जब वह उसके द्वारा बनाए गए विनाशकारी हथियारों का शिकार होता है। विज्ञान के सदुपयोग के लिए इसे मानवीय संवेदनाओं से जोड़ना आवश्यक है ताकि तकनीक का उपयोग मानव कल्याण के लिए हो सके।
खंड – घ (रचनात्मक लेखन)
विद्यार्थियों के लिए निर्देश:
प्रश्र 12, 13, 14, 15 रचनात्मक लेखन है (जैसे अनुच्छेद, पत्र, ई-मेल, विज्ञापन), जिस पर विद्यार्थी अपने विचार, रचनात्मकता और प्रश्न में दिए गए संकेत-बिंदुओं के अनुसार उत्तर लिख सकता है। इन प्रश्नों का कोई निश्चित उत्तर नहीं होता, आपकी मौलिकता ही इसमें अंक दिलाती है।
🔥 Set 3 - Answer Key 2026
🟢 Question Paper Code: 3/3/1 Solution
खण्ड क (अपठित बोध)
प्रश्न 1: अपठित गद्यांश (अक्षय ऊर्जा)
- (i) (B) अक्षय ऊर्जा के प्रति जागरूकता फैलाना
- (ii) (B) अक्षय ऊर्जा का क्षय न होकर नवीनीकरण होता रहता है।
- (iii) (D) कथन और कारण दोनों सही हैं तथा कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
- (iv) हमारे देश में अक्षय ऊर्जा पर बल देने के प्रमुख कारण यह हैं कि भारत प्राकृतिक संपदाओं से संपन्न है और पर्यावरण को प्रदूषण से बचाने तथा भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए यह एक बेहतरीन विकल्प है।
- (v) अक्षय ऊर्जा के उपयोग से भारत ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनेगा, गाँवों की ऊर्जा संबंधी समस्याएँ हल होंगी और भारत दुनिया में ऊर्जा के मामले में एक अग्रणी (सिरमौर) देश बनेगा।
प्रश्न 2: अपठित काव्यांश (मानवीय मूल्य)
- (i) (D) कथन I, II, III और IV सही हैं।
- (ii) (C) दुखों के बदले सुख देना
- (iii) (C) कथन सही है और कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
- (iv) काव्यांश के अनुसार, मनुष्य रूढ़ियों (पुरानी सड़ी-गली परंपराओं) को तोड़कर और क्रांति के संदेश के माध्यम से युग की दिशा बदल सकता है और एक नया मानवीय संसार बना सकता है।
- (v) आदमी होने के नाते हमारा कर्तव्य है कि हम द्वेष करने वालों के नफरत भरे तूफान को अपनी मुस्कुराहट से शांत करें और उन्हें नफरत के बदले प्रेम दें।
खण्ड ख (व्यावहारिक व्याकरण)
प्रश्न 3: रचना के आधार पर वाक्य-भेद
- वाक्य का भेद: मिश्र वाक्य
- आश्रित उपवाक्य: 'जिसका नाम कैप्टन है'; उपवाक्य का भेद: विशेषण आश्रित उपवाक्य।
- संयुक्त वाक्य: झूरी के दो बैल थे और उन्हें मजबूरन गया के घर जाना पड़ा।
- मिश्र वाक्य: जैसे ही शिक्षक आए, वैसे ही पूरी कक्षा कविता का सस्वर पाठ करने लगी।
- सरल वाक्य: बच्चों के समय पर घर न पहुँचने पर अभिभावक चिंतित हो उठे।
प्रश्न 4: वाच्य पर आधारित प्रश्न
- मुझसे अच्छी तरह सोया नहीं गया। - भाववाच्य
- वह सुंदर चित्र बनाता है। - कर्तृवाच्य
- कर्तृवाच्य: मैं उसका हाल न सुन सका। / मैंने उसका हाल नहीं सुना।
- कर्मवाच्य: नवाब साहब द्वारा संगति के लिए उत्साह नहीं दिखाया गया।
- भाववाच्य: तुम क्यों नहीं उठे? → तुमसे क्यों नहीं उठा गया?
प्रश्न 5: पद-परिचय
- (i) दौड़ता है: अकर्मक क्रिया, पुल्लिंग , एकवचन, वर्तमान काल।
- (ii) खीरों: जातिवाचक संज्ञा, पुल्लिंग, बहुवचन, कर्ता कारक।
- (iii) तुम्हारी: सार्वनामिक विशेषण, स्त्रीलिंग, एकवचन, संबंध कारक।
- (iv) पाँचवीं: संख्यावाचक विशेषण (निश्चित संख्या - क्रमवाचक), स्त्रीलिंग, एकवचन, विशेष्य 'संतान'।
- (v) शाबाश!: विस्मयादिबोधक अव्यय, हर्षबोधक/प्रशंसावाचक।
प्रश्न 6: अलंकार
- अतिशयोक्ति अलंकार: "हनुमान की पूँछ में लगन न पायी आग, लंका सिगरी जरि गयी गए निसाचर भाग।"
- उपमा अलंकार: "पीपर पात सरिस मन डोला।"
- उत्प्रेक्षा अलंकार ('मनहुँ' शब्द के कारण)।
- रूपक अलंकार (रघुवर को बाल पतंग/सूर्य का रूप दिया गया है)।
- मानवीकरण अलंकार (सागर को नाचते और गाते हुए दिखाया गया है)।
खण्ड ग (पाठ्य-पुस्तक एवं पूरक पाठ्य-पुस्तक)
प्रश्न 7: पठित काव्यांश (राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद)
- (i) (C) परशुराम का दास।
- (ii) (A) केवल I और II सही हैं।
- (iii) (C) कथन और कारण दोनों सही हैं तथा कारण, कथन की सही व्याख्या नहीं करता है।
- (iv) (B) व्यंग्यपूर्ण
- (v) (B) दोषी स्वयं ही सभा से अलग हो जाए।
प्रश्न 8: निर्धारित कविताओं के आधार पर प्रश्न (25-30 शब्द)
(i) योग-संदेश पाकर गोपियों की क्या मनोदशा हुई?
योग का संदेश सुनकर गोपियों की विरह-अग्नि और अधिक भड़क उठी। उन्हें यह संदेश 'कड़वी ककड़ी' के समान अरुचिकर लगा। वे कृष्ण के प्रेम में डूबी हुई थीं, इसलिए योग की बातें उन्हें एक व्याधि (बीमारी) जैसी लगीं, जिससे उनका मन और अधिक अशांत हो गया।
(ii) बच्चे की मुस्कान और छवियों को कवि ने किन-किन बिंबों में व्यक्त किया है?
कवि ने बच्चे की मुस्कान को 'मृतक में जान डाल देने वाली' बताया है। इसके लिए उन्होंने 'झोंपड़ी में कमल खिलना', 'चट्टानों का पिघलकर जल बन जाना' और 'बाँस या बबूल से शेफालिका के फूलों का झड़ना' जैसे सुंदर बिंबों का प्रयोग किया है।
(iii) ‘संगतकार’ कविता के संदर्भ में युवाओं को क्या प्रेरणा मिलती है?
संगतकार से युवाओं को निस्वार्थ सेवा, त्याग और मानवीयता की प्रेरणा मिलती है। वह स्वयं को पीछे रखकर मुख्य कलाकार की सफलता सुनिश्चित करता है। यह सिखाता है कि सफलता के पीछे छिपे योगदान का भी उतना ही महत्व है जितना मुख्य व्यक्ति का।
(iv) फागुन की मनहारिता मनुष्य के मन पर क्या प्रभाव डालती है?
फागुन की सुंदरता इतनी अधिक है कि वह आँखों में समा नहीं रही है। प्रकृति की रंगीनी देखकर मनुष्य का मन प्रसन्नता से भर जाता है और कल्पना के पंख लगाकर आकाश में उड़ने को आतुर हो जाता है।
प्रश्न 9: पठित गद्यांश (लखनवी अंदाज़)
- (i) (D) I और III दोनों सही हैं।
- (ii) (D) दिखावा और संकोच
- (iii) (D) आलोचनात्मक और कल्पनाशील
- (iv) (C) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
- (v) (A) स्वाभिमान का निर्वाह करने के लिए आँखें हटाना।
प्रश्न 10: निर्धारित गद्य पाठों के आधार पर प्रश्न (25-30 शब्द)
(i) हालदार साहब को क्या देखकर ‘दुर्दमनीय कौतूहल’ हुआ?
हालदार साहब ने देखा कि नेताजी की मूर्ति तो पत्थर की थी, लेकिन उस पर चश्मा असली था और वह हर बार बदल जाता था। इस विरोधाभास ने उनके मन में यह जानने की तीव्र जिज्ञासा पैदा कर दी कि आखिर यह कौन करता है।
(ii) ‘एक कहानी यह भी’ पाठ के अनुसार किन ‘दो रास्तों’ के बीच टकराहट की बात की गई है?
यहाँ लेखिका मन्नू भंडारी के पिता के पुराने रूढ़िवादी संस्कारों और लेखिका के आधुनिक, प्रगतिशील और देश-प्रेम की भावना से ओत-प्रोत विचारों के बीच टकराहट की बात की गई है।
(iii) ‘नौबतखाने में इबादत’ पाठ के आधार पर एक सच्चे कलाकार को किन बातों पर ध्यान देना चाहिए?
एक सच्चे कलाकार को अपनी कला के प्रति पूर्ण समर्पण, विनम्रता और निरंतर रियाज़ (अभ्यास) पर ध्यान देना चाहिए। उसे प्रसिद्धि के बजाय अपनी कला की साधना को प्राथमिकता देनी चाहिए।
(iv) ‘बालगोबिन भगत’ के स्वरूप पर टिप्पणी कीजिए।
बालगोबिन भगत साठ से ऊपर के गोरे-चिट्टे व्यक्ति थे। वे कमर में एक लंगोटी और सिर पर कबीरपंथियों जैसी टोपी पहनते थे। वे गले में तुलसी की माला और माथे पर चंदन का टीका लगाते थे।
प्रश्न 11: पूरक पाठ्य-पुस्तक (कृतिका) आधारित प्रश्न (50-60 शब्द)
(i) ‘माता का अँचल’ पाठ के संदर्भ में सामाजिक परिवेश का प्रभाव:
पाठ में बच्चे अपने ग्रामीण परिवेश से प्रेरित खेल खेलते हैं, जैसे मिट्टी के घरोंदे, बारात और खेती। ये खेल दर्शाते हैं कि बच्चे समाज में जो देखते हैं, उसी का अनुकरण करते हैं। इससे सिद्ध होता है कि बच्चों का खेल उनके सामाजिक परिवेश का प्रतिबिंब होता है।
(ii) ‘साना-साना हाथ जोड़ि...’ पाठ के प्रभावित करने वाले दृश्य:
मुझे दो दृश्यों ने प्रभावित किया: पहला, पहाड़ी औरतों का पत्थर तोड़ना, जहाँ वे कठोर श्रम करती हैं। दूसरा, तीस्ता नदी और हिमालय का विराट सौंदर्य, जो मन को शांति से भर देता है। ये दृश्य प्रकृति की कोमलता और जीवन के संघर्ष का संतुलन दिखाते हैं।
(iii) प्रत्यक्ष अनुभव की अपेक्षा अनुभूति लेखन में क्यों अधिक मदद करती है?
अनुभव बाहर से आता है, जबकि अनुभूति भीतर से उपजती है। अनुभूति हृदय की संवेदनाओं को जगाती है और लेखक को लिखने के लिए विवश करती है। अनुभूति से रचना में वास्तविकता और गहराई आती है, इसलिए यह लेखन में अधिक सहायक है।
खण्ड घ (रचनात्मक लेखन)
प्रश्न 12, 13, 14, 15: रचनात्मक लेखन (महत्वपूर्ण सूचना)
प्रश्न संख्या 12, 13, 14, 15 रचनात्मक लेखन है, जिस पर विद्यार्थी अपने विचार के अनुसार उत्तर लिख सकता है।
इस खंड में अनुच्छेद लेखन, पत्र लेखन, स्ववृत्त/ई-मेल और विज्ञापन/संदेश लेखन शामिल हैं। इनका उत्तर विद्यार्थी की मौलिक सोच और रचनात्मकता पर निर्भर करता है, इसलिए इनका कोई एक निश्चित उत्तर नहीं होता। बोर्ड परीक्षा में आपकी भाषा-शैली और प्रस्तुतीकरण के आधार पर अंक दिए जाते हैं।
🟢 Question Paper Code: 3/3/2 Solution
खंड – क (अपठित बोध)
प्रश्न 1: अपठित काव्यांश (आदमी हो, स्नेह-बाती बन...)
- (i) (D) कथन I, II, III और IV सही हैं।
- (ii) (C) दुखों के बदले सुख देना।
- (iii) (C) कथन सही है और कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
- (iv) मानव पुरानी और हानिकारक रूढ़ियों को तोड़कर समाज को एक नई दिशा दे सकता है और क्रांति का संदेश देकर युग का रुख बदल सकता है।
- (v) द्वेष करने वालों के प्रति हमारा कर्तव्य है कि हम उनके नफ़रत भरे तूफ़ान को अपनी मुस्कुराहट से मिटा दें और स्वयं कड़वाहट (विष) पीकर भी दूसरों को प्रेम और सद्भाव दें।
प्रश्न 2: अपठित गद्यांश (अक्षय ऊर्जा / राष्ट्रीय अक्षय ऊर्जा दिवस)
- (i) (B) अक्षय ऊर्जा के प्रति जागरूकता फैलाना।
- (ii) (B) अक्षय ऊर्जा का क्षय न होकर नवीनीकरण होता रहता है।
- (iii) (D) कथन और कारण दोनों सही हैं तथा कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
- (iv) भारत प्राकृतिक संपदाओं से संपन्न है और यहाँ अक्षय ऊर्जा (सौर, पवन, जल-विद्युत आदि) की अपार संभावनाएँ हैं। साथ ही, यह ग्रामीण क्षेत्रों की ऊर्जा समस्याओं को सुलझाने और प्रदूषण कम करने का एक स्थायी विकल्प है।
- (v) अक्षय ऊर्जा के उत्पादन में भारत दुनिया में अग्रणी (सिरमौर) देश बन सकता है, जिससे न केवल ऊर्जा की कमी दूर होगी बल्कि पर्यावरण का संरक्षण भी होगा।
खंड – ख (व्यावहारिक व्याकरण)
प्रश्न 3: रचना के आधार पर वाक्य भेद
- सरल वाक्य: हमारे कटाओ के करीब आने पर बर्फ से ढके पहाड़ दिखने लगे।
- संयुक्त वाक्य: संकट के बादल छा गए परंतु भारतीय सैनिक निराश नहीं हुए।
- मिश्र वाक्य: जब बिस्मिल्ला खाँ ने काशी में होने वाले परिवर्तनों को देखा, तब वे दुखी थे।
- आश्रित उपवाक्य और भेद: "जहाँ कल सम्मान समारोह हुआ" - विशेषण आश्रित उपवाक्य।
- रचना के आधार पर वाक्य भेद: मिश्र वाक्य।
प्रश्न 4: वाच्य पर आधारित प्रश्न
- कर्मवाच्य: नेताजी द्वारा भाषण दिया गया था।
- भाववाच्य: बीमार व्यक्ति से चला नहीं जाता।
- कर्तृवाच्य: मैं लड़ नहीं सकता।
- वाच्य भेद: कर्मवाच्य।
- वाच्य भेद: कर्तृवाच्य।
प्रश्न 5: पद-परिचय
- (i) मुझे: उत्तम पुरुषवाचक सर्वनाम, पुल्लिंग/स्त्रीलिंग, एकवचन, कर्ता कारक।
- (ii) के बिना: संबंधबोधक अव्यय।
- (iii) और: अनिश्चित परिमाणवाचक विशेषण, स्त्रीलिंग , एकवचन।
- (iv) लेखकों : जातिवाचक संज्ञा, पुल्लिंग, बहुवचन, संबंध कारक ।
- (v) सुंदर: गुणवाचक विशेषण, विशेष्य 'कमरा'।
प्रश्न 6: अलंकार
- (i) मानहु लोन जरे पर देई: उत्प्रेक्षा अलंकार
- (ii) खड़-खड़ खड़ताल बजा रही विसुध हवा: मानवीकरण अलंकार
- (iii) हृदय-गगन में रूप-चंद्रिका बनकर उतरो मेरे: रूपक अलंकार
- (iv) उपमा अलंकार का उदाहरण: "पीपर पात सरिस मन डोला।"
- (v) अतिशयोक्ति अलंकार का उदाहरण: "हनुमान की पूँछ में लगन न पाई आग, लंका सिगरी जल गई गए निसाचर भाग।"
खंड – ग (पाठ्य पुस्तक एवं पूरक पाठ्य पुस्तक)
प्रश्न 7: पठित गद्यांश (लखनवी अंदाज़)
- (i) (D) I और III दोनों सही हैं।
- (ii) (D) दिखावा और संकोच।
- (iii) (D) आलोचनात्मक और कल्पनाशील।
- (iv) (C) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की उचित व्याख्या करता है।
- (v) (A) स्वाभिमान का निर्वाह करने के लिए आँखें हटाना।
प्रश्न 8: निर्धारित गद्य पाठों पर आधारित प्रश्न
(i) 'नेताजी का चश्मा': हालदार साहब कस्बे से गुज़रते समय नेताजी की मूर्ति पर हर बार नया चश्मा देखकर चकित थे। उनकी जिज्ञासा यह जानने की थी कि आखिर यह कौन करता है। उन्होंने अपनी जिज्ञासा शांत करने के लिए पान वाले से पूछा और जाना कि 'कैप्टन' चश्मे वाला अपनी देशभक्ति के कारण ऐसा करता है।
(ii) 'एक कहानी यह भी': लेखिका के पिता के संदर्भ में 'दो रास्तों' का अर्थ उनके अंतर्विरोधों से है। एक रास्ता उनकी वह प्रतिष्ठा और अहम (ego) था जो वे घर में बनाए रखना चाहते थे, और दूसरा रास्ता वह आधुनिकता और समाज में बदलाव की चाह थी जो वे अपनी बेटियों में देखना चाहते थे।
(iv) 'बालगोबिन भगत': बालगोबिन भगत वेशभूषा से साधु नहीं थे, बल्कि अपने कर्मों और विचारों से सच्चे गृहस्थ साधु थे। वे कबीर के आदर्शों पर चलते थे, हमेशा सत्य बोलते थे, किसी की चीज़ बिना पूछे नहीं छूते थे और अपनी खेती की उपज का एक हिस्सा कबीर मठ में भेंट कर देते थे।
प्रश्न 9: पठित काव्यांश (राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद)
- (i) (C) परशुराम का दास।
- (ii) (A) केवल I और II सही हैं।
- (iii) (C) कथन और कारण दोनों सही हैं तथा कारण, कथन की उचित व्याख्या नहीं करता है।
- (iv) (B) व्यंग्यपूर्ण।
- (v) (B) दोषी स्वयं ही सभा से अलग हो जाए।
प्रश्न 10: निर्धारित कविताओं पर आधारित लघु उत्तरीय प्रश्न
(i) योग-संदेश पाकर गोपियों की मनोदशा: गोपियाँ कृष्ण के प्रेम में व्याकुल थीं। योग-संदेश पाकर उनकी विरह-अग्नि और बढ़ गई। 1. वे ठगा हुआ और दुखी महसूस करने लगीं क्योंकि उन्हें कृष्ण के आने की आशा थी। 2. उन्हें लगा कि कृष्ण ने उनके साथ छल किया है और वे प्रेम की जगह नीरस ज्ञान का संदेश भेज रहे हैं।
(ii) बच्चे की मुस्कान और छवियों के बिंब: कवि ने बच्चे की मुस्कान के लिए दो सुंदर बिंबों का प्रयोग किया है: 1. 'मृतक में भी डाल दे जान' – यानी अत्यंत प्रभावी और प्राणवान मुस्कान। 2. 'तालाब छोड़कर झोपड़ी में कमल खिलना' – यानी अत्यंत अभाव में भी सुंदरता और खुशी का आभास होना।
(iv) 'अट नहीं रही है' - फागुन की मनोदशा: फागुन की सुंदरता इतनी अधिक है कि वह मनुष्य के आँखों और मन में समा नहीं पा रही है। प्रकृति का सौंदर्य चारों ओर बिखरा हुआ है, जिससे मन प्रसन्नता और उमंग से भर जाता है। हर तरफ हरियाली और फूलों की सुगंध के कारण मनुष्य कल्पना लोक में उड़ने लगता है।
प्रश्न 11: पूरक पाठ्य-पुस्तक (कृतिका) के प्रश्न
(i) 'माता का अंचल' - खेल और परिवेश का संबंध: इस पाठ में बच्चों के खेल पूरी तरह से उनके ग्रामीण परिवेश से जुड़े हैं। वे मिट्टी के बर्तन, पत्तों की थाली, कंकड़ों के पैसे और धूल की मेड़ बनाकर खेलते हैं। उनका परिवेश ही उन्हें खिलौने और कल्पना की सामग्री उपलब्ध कराता है। यह दर्शाता है कि बच्चों का उनके आसपास की प्रकृति और मिट्टी से गहरा नाता है। उनके खेल बनावटी न होकर प्राकृतिक और सहज हैं।
(ii) 'साना-साना हाथ जोड़ि...' - प्रकृति की विराटता: इस पाठ में लेखिका ने हिमालय के अत्यंत विशाल और अलौकिक रूप का वर्णन किया है। ऊँचे पर्वत, गहरी घाटियाँ, दूध की धार जैसे झरने और चारों ओर फैली अनंत हरियाली प्रकृति की विराटता को दर्शाते हैं। लेखिका को लगता है कि यह सौंदर्य किसी दिव्य शक्ति का अहसास कराता है। प्रकृति का यह रूप मनुष्य को अपनी तुच्छता का अनुभव कराता है और उसे मौन रहकर इसके सौंदर्य को निहारने पर मजबूर कर देता है।
(iii) 'मैं क्यों लिखता हूँ?' - अनुभव और अनुभूति: लेखक के अनुसार, 'प्रत्यक्ष अनुभव' वह है जो हमारे साथ बाहर घटित होता है और जिसे हम इंद्रियों से महसूस करते हैं। जबकि 'अनुभूति' वह आंतरिक संवेदनशीलता है जो अनुभव को हृदय में आत्मसात कर लेती है। लिखने के लिए अनुभूति अधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि जब तक कोई अनुभव हृदय को स्पर्श कर 'अनुभूति' नहीं बनता, तब तक वह सच्ची रचना का रूप नहीं ले सकता। मैं अनुभूति को अधिक महत्व देता हूँ क्योंकि यह लेखन में गहराई और ईमानदारी लाती है।
खंड – घ (रचनात्मक लेखन)
रचनात्मक लेखन हेतु निर्देश
प्रश्र 12, 13, 14, 15 रचनात्मक लेखन है .. जिस पर विद्यार्थी अपने विचार के अनुसार उत्तर लिख सकता है।
इन प्रश्नों में अनुच्छेद लेखन, औपचारिक/अनौपचारिक पत्र, ई-मेल/स्ववृत्त लेखन और विज्ञापन/संदेश लेखन शामिल हैं। विद्यार्थियों को सलाह दी जाती है कि वे प्रश्न में दिए गए संकेत-बिंदुओं का प्रयोग करते हुए अपनी मौलिक भाषा में उत्तर दें। परीक्षा में प्रस्तुतीकरण और रचनात्मकता पर विशेष अंक दिए जाते हैं।
🟢 Question Paper Code: 3/3/3 Solution
खंड – क (अपठित बोध)
प्रश्न 1: अपठित गद्यांश (अक्षय ऊर्जा)
- (i) (B) अक्षय ऊर्जा के प्रति जागरूकता फैलाना।
- (ii) (B) अक्षय ऊर्जा का क्षय न होकर नवीनीकरण होता रहता है।
- (iii) (D) कथन और कारण दोनों सही हैं तथा कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
- (iv) प्रमुख कारण हैं—पर्यावरण प्रदूषण को कम करना, जीवाश्म ईंधन (पेट्रोल-कोयला) की कमी को पूरा करना और प्रकृति के अनियोजित दोहन को रोकना।
- (v) अक्षय ऊर्जा के उपयोग से भारत ऊर्जा उत्पादन के मामले में दुनिया का सिरमौर बन सकता है और गाँवों की ऊर्जा संबंधी समस्याओं का समाधान हो सकता है।
प्रश्न 2: अपठित काव्यांश (आदमी हो...)
- (i) (D) कथन I, II, III और IV सभी सही हैं।
- (ii) (C) दुखों के बदले सुख देना।
- (iii) (C) कथन सही है और कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
- (iv) मानव रूढ़ियों को तोड़कर पुरानी परंपराओं को खत्म कर सकता है और क्रांति का संदेश देकर नए युग की शुरुआत कर सकता है।
- (v) द्वेष करने वालों के प्रति घृणा न रखकर उनके द्वेष को मुस्कुराहट से मिटाना चाहिए और उन्हें प्यार देना चाहिए।
खंड – ख (व्यावहारिक व्याकरण)
प्रश्न 3: रचना के आधार पर वाक्य-भेद
- सरल वाक्य में बदलिए: मूर्ति कपड़े न बदलकर भी चश्मा बदल सकती है।
- वाक्य भेद: संयुक्त वाक्य।
- आश्रित उपवाक्य: 'जब हम कटाओ के करीब आए' - क्रिया-विशेषण उपवाक्य।
- मिश्र वाक्य में बदलिए: मूर्ति की आँखों पर जो चश्मा रखा हुआ था, वह सरकंडे से बना था।
- संयुक्त वाक्य में बदलिए: जीप रुकी और हालदार साहब कूदकर बाहर निकले।
प्रश्न 4: वाच्य
- भाववाच्य: दादी माँ से प्रतिदिन स्टेडियम में टहला जाता है।
- कर्मवाच्य: सभापति द्वारा कलाकार को पुरस्कार दिया गया।
- वाच्य भेद: कर्मवाच्य।
- कर्तृवाच्य: पतोहू ने खाना दिया।
- वाच्य भेद: भाववाच्य।
प्रश्न 5: पद-परिचय
- (i) उस: सार्वनामिक विशेषण, पुल्लिंग, एकवचन, 'बाग' विशेष्य।
- (ii) हर ओर: स्थानवाचक क्रिया-विशेषण, 'बढ़ने' क्रिया की विशेषता।
- (iii) मूर्ति :जातिवाचक संज्ञा, स्त्रीलिंग, एकवचन।
- (iv) मीठी: गुणवाचक विशेषण, स्त्रीलिंग, एकवचन, 'शहनाई' विशेष्य।
- (v) आई: सकर्मक क्रिया, स्त्रीलिंग , एकवचन, भूतकाल, कर्तृवाच्य।
प्रश्न 6: अलंकार
- अतिशयोक्ति अलंकार (छुअत टूट रघुपति न दोसू...)।
- उपमा अलंकार (हाथी-सा टीला)।
- उत्प्रेक्षा अलंकार (सुनती जैसे कुछ निज बात)।
- रूपक अलंकार उदाहरण: "मैया मैं तो चंद्र-खिलौना लैहों।"
- उत्प्रेक्षा अलंकार उदाहरण: "सोहत ओढ़े पीत पटु स्याम सलौने गात, मनहुँ नीलमणि सैल पर आतपु परयो प्रभात।"
खंड – ग (पाठ्य पुस्तक एवं पूरक पाठ्य पुस्तक)
प्रश्न 7: निर्धारित कविताओं के आधार पर लघु उत्तरीय प्रश्न
(i) गोपियों की मनोदशा: योग का संदेश सुनकर गोपियों की विरह-अग्नि और अधिक बढ़ गई। उन्हें श्रीकृष्ण से प्रेम की उम्मीद थी, लेकिन योग संदेश ने उन्हें निराश कर दिया। उन्हें यह संदेश 'कड़वी ककड़ी' के समान अरुचिकर लगा।
(ii) बच्चे की मुस्कान के बिंब: कवि ने कहा है कि बच्चे की मुस्कान ऐसी है मानो कमल का फूल तालाब छोड़कर कवि की झोंपड़ी में खिल गया हो, या कठोर पत्थर पिघलकर जल की धारा बन गया हो।
(iii) संगतकार से प्रेरणा: संगतकार जैसे व्यक्तियों से प्रेरणा मिलती है कि अपनी प्रतिभा को मुख्य कलाकार के पीछे रखकर निस्वार्थ भाव से सहयोग करना चाहिए और सफलता का श्रेय टीम वर्क को देना चाहिए।
(iv) फागुन की मनहारिता: फागुन की सुंदरता मनुष्य के मन को प्रसन्नता से भर देती है। चारों ओर बिखरा सौंदर्य देखकर मन कल्पनाओं के पंख लगाकर उड़ने लगता है और आँखों को वहाँ से हटाना मुश्किल हो जाता है।
प्रश्न 8: पठित काव्यांश (राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद)
- (i) (C) परशुराम का दास।
- (ii) (A) केवल I, II सही है ।
- (iii) (C) कथन और कारण दोनों सही हैं तथा कारण, कथन की सही व्याख्या नहीं करता है।
- (iv) (B) व्यंग्यपूर्ण।
- (v) (B) दोषी स्वयं ही सभा से अलग हो जाए।
प्रश्न 9: निर्धारित गद्य पाठों के आधार पर लघु उत्तरीय प्रश्न
(i) हालदार साहब का कौतूहल: हालदार साहब ने जब नेताजी की मूर्ति पर असली चश्मा लगा देखा, तो उन्हें तीव्र जिज्ञासा हुई। उन्होंने अपनी जिज्ञासा शांत करने के लिए जीप रुकवाई और पान वाले से इसका कारण पूछा।
(ii) 'दो रास्तों' के बीच टकराहट: यहाँ मन्नू भंडारी के पिता की 'विशिष्ट' बनने की चाहत और लेखिका के सक्रिय देशप्रेम व आंदोलनकारी स्वभाव के बीच टकराहट की बात की गई है। पिता चाहते थे कि बेटी घर की मर्यादा में रहे, जबकि लेखिका सक्रिय आंदोलनों में थी।
(iii) सच्चे कलाकार का ध्यान: एक सच्चे कलाकार को अपनी कला के निरंतर रियाज़, सादगी और विनम्रता पर ध्यान देना चाहिए। उसे बाहरी तड़क-भड़क और घमंड से दूर रहना चाहिए, जैसा बिस्मिल्ला खाँ करते थे।
(iv) बालगोबिन भगत का स्वरूप: वे साठ वर्ष से ऊपर के गोरे-चिट्टे व्यक्ति थे। वे कबीरपंथी टोपी पहनते, माथे पर चंदन लगाते और शरीर पर नाममात्र के कपड़े रखते थे। वे गृहस्थ होकर भी शुद्ध साधु थे।
प्रश्न 10: पठित गद्यांश (लखनवी अंदाज़)
- (i) (D) I और III दोनों सही हैं।
- (ii) (D) दिखावा और संकोच।
- (iii) (D) आलोचनात्मक और कल्पनाशील।
- (iv) (C) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
- (v) (A) स्वाभिमान का निर्वाह करने के लिए आँखें हटाना।
प्रश्न 11: पूरक पाठ्य-पुस्तक (कृतिका) पर आधारित प्रश्न
(i) 'माता का अंचल' - खेलों में नकल: बच्चे अपने परिवेश को देखकर खेलों में उतारते हैं। जैसे वे धूल-मिट्टी से मिठाइयाँ बनाकर दुकान सजाते थे या टूटी चूहेदानी को पालकी बनाकर बारात निकालते थे।
(ii) प्रकृति और मनुष्य का अंत:संबंध: प्रकृति मनुष्य को शांति और जीवन की विराटता का अनुभव कराती है। 'साना-साना हाथ जोड़ि' में लेखिका ने देखा कि प्रकृति जहाँ सुंदरता से निहाल करती है, वहीं मनुष्य के स्वार्थ से उसका संतुलन बिगड़ रहा है।
(iii) लेखक के लिखने के कारण: लेखक के लिखने के पीछे 'आंतरिक विवशता' होती है। अज्ञेय के अनुसार जब तक भीतर की व्याकुलता मजबूर नहीं करती, तब तक सच्चा लेखन संभव नहीं है।
खंड – घ (रचनात्मक लेखन)
विद्यार्थियों के लिए निर्देश:
प्रश्न संख्या 12, 13, 14, 15 रचनात्मक लेखन (अनुच्छेद, पत्र, विज्ञापन, ई-मेल) पर आधारित हैं। यह भाग विद्यार्थी की मौलिकता और कल्पनाशीलता के परीक्षण के लिए है, अतः विद्यार्थी अपने विचारों के अनुसार और प्रश्न में दिए गए संकेत-बिंदुओं के आधार पर इनके उत्तर स्वयं लिखें।
🔥 Set 4 - Answer Key 2026
🟢 Question Paper Code: 3/4/1 Solution
खंड – क (अपठित बोध)
प्रश्न 1: अपठित गद्यांश (चींटियों पर आधारित)
- (i) (B) चींटियों के प्रेरक जीवन पर
- (ii) (C) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
- (iii) (C) कथन (I), (III) और (IV) सही हैं। (सहयोग, परिश्रमशीलता और अनुशासन)
- (iv) चींटियाँ बिना किसी फल की आसक्ति के (मौन भाव से) अपना काम निरंतर करती रहती हैं, इसलिए उन्हें 'निष्काम कर्म' की भावना का प्रतीक माना गया है।
- (v) सहयोगात्मक नेतृत्व का अर्थ है सबको साथ लेकर चलना और एक ऐसा तंत्र बनाना जहाँ सभी मिलकर योगदान दें। इसका एक लाभ यह है कि इसके माध्यम से असंभव कार्यों को भी संभव बनाया जा सकता है।
प्रश्न 2: अपठित काव्यांश (जीवन पथ पर आधारित)
- (i) (D) साहसी मुसाफ़िर को
- (ii) (A) विकल्प (I) और (II) सही हैं। (पथ की बाधाएँ और असफलताएँ)
- (iii) (C) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
- (iv) 'आँधियों से ही नहीं खुद से भी तुझे लड़ना पड़ेगा' पंक्ति का अभिप्राय है कि मनुष्य को बाहरी बाधाओं के साथ-साथ अपने भीतर के डर, संदेह और कमजोरियों से भी लड़ना होगा।
- (v) 'मुस्कुराकर चलने' का आशय है जीवन की कठिन परिस्थितियों और दुखों का सामना सकारात्मकता, धैर्य और साहस के साथ करना।
खंड – ख (व्यावहारिक व्याकरण)
प्रश्न 3: रचना के आधार पर वाक्य-भेद
- वसंत आने पर वृक्ष हरे-भरे होने लगे। (सरल वाक्य)
- शाम हुई और तारे चमकने लगे। (संयुक्त वाक्य)
- जो सबसे कुशल कारीगर है, उसी से काम करवाना। (मिश्र वाक्य)
- यह एक मिश्र वाक्य है।
- क्रिया विशेषण उपवाक्य।
प्रश्न 4: वाच्य
- मज़दूरों द्वारा एक साल में यह पुल तैयार किया गया।
- इस सर्दी में तो रह नहीं सकूँगा ।
- उससे दौड़ा नहीं गया।
- कर्तृवाच्य।
- मेरे द्वारा अगले महीने ताजमहल देखा जाएगा।
प्रश्न 5: पद-परिचय
- (i) आपको: मध्यम पुरुषवाचक सर्वनाम, पुल्लिंग/स्त्रीलिंग, एकवचन, कर्म कारक।
- (ii) खिले हैं: सकर्मक क्रिया, पुल्लिंग, बहुवचन, वर्तमान काल।
- (iii) अजी : विस्मयादिबोधक अव्यय।
- (iv) हर जगह: स्थानवाचक क्रिया-विशेषण, खोजा' क्रिया के होने के स्थान की विशेषता बता रहा है।
- (v) इस: सार्वनामिक विशेषण, पुल्लिंग, एकवचन, 'विद्यार्थी' विशेष्य का विशेषण।
प्रश्न 6: अलंकार
- उपमा अलंकार (सागर-सा, गिरी-सा - तुलना के कारण)
- उत्प्रेक्षा अलंकार ('मानहु' वाचक शब्द के प्रयोग के कारण)
- मानवीकरण अलंकार (ताल को सजीव के समान पानी लाते हुए दिखाने के कारण)
- रूपक अलंकार (चरण और कमल में अभेद आरोप के कारण)
- अतिशयोक्ति अलंकार (बात को बहुत बढ़ा-चढ़ाकर कहने के कारण)
खंड – ग (पाठ्य पुस्तक एवं पूरक पाठ्य पुस्तक)
प्रश्न 7: पठित गद्यांश (मन्नू भंडारी - 'एक कहानी यह भी')
- (i) (B) परंपरावादी मान्यता
- (ii) (A) उम्र में सोलह वर्ष और शिक्षा में मैट्रिक
- (iii) (B) उसकी क्षमता और प्रतिभा को विकसित करना
- (iv) (B) विकल्प (I), (II) और (III) सही हैं।
- (v) (C) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
प्रश्न 8: निर्धारित गद्य पाठों के आधार पर प्रश्न
(i) 'नेताजी का चश्मा' पाठ के आधार पर: नेताजी की मूर्ति को चश्मा पहनाने वाले व्यक्ति का नाम 'कैप्टन' था। वह पेशे से एक चश्मा बेचने वाला था और उसकी आर्थिक स्थिति अत्यंत दयनीय थी (वह निर्धन और वृद्ध/लंगड़ा था)। उसके व्यक्तित्व की 'देशभक्ति' और 'स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति सम्मान' के गुण ने हमें प्रभावित किया।
(ii) 'बालगोबिन भगत' पाठ के आधार पर: गंगा-स्नान के समय भगत जी कड़ा उपवास रखते थे। वे करीब तीस कोस पैदल चलकर जाते थे। वे घर से खाकर चलते और वापस आकर ही खाते थे। रास्ते भर वे खँजड़ी बजाते और भजन गाते चलते थे। वे किसी से कुछ माँगते नहीं थे और न ही किसी का सहारा लेते थे।
(iii) 'लखनवी अंदाज़' पाठ के आधार पर: लेखक ने सेकंड क्लास का टिकट इसलिए खरीदा क्योंकि वे भीड़ से बचकर एकांत में नई कहानी के बारे में सोचना चाहते थे। साथ ही, वे खिड़की से बाहर के प्राकृतिक दृश्यों का आनंद लेना चाहते थे।
(iv) 'नौबतखाने में इबादत' पाठ के आधार पर: बिस्मिल्ला खाँ काशी छोड़कर इसलिए नहीं जाना चाहते थे क्योंकि उनका काशी, गंगा और वहाँ की संस्कृति से गहरा जुड़ाव था। वे कहते थे कि यहाँ बाबा विश्वनाथ और माँ गंगा के सान्ध्य में उन्हें संगीत की जो प्रेरणा मिलती है, वह कहीं और संभव नहीं है।
प्रश्न 9: पठित काव्यांश (जयशंकर प्रसाद - 'आत्मकथ्य')
- (i) (C) जीवन की नश्वरता का
- (ii) (A) मित्रों के लिए
- (iii) (B) विकल्प (I), (II) और (III) सही हैं।
- (iv) (B) जीवन में कोई अपना न होना (अर्थात् उपलब्धियों या खुशियों का अभाव)
- (v) (C) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
प्रश्न 10: निर्धारित कविताओं के आधार पर प्रश्न
(i) 'गुर चाँटी ज्यों पागी' के आधार पर गोपियों की मनोदशा: इस पंक्ति से गोपियों के श्रीकृष्ण के प्रति अनन्य और अडिग प्रेम की अभिव्यक्ति होती है। जिस प्रकार चींटी गुड़ से चिपक जाती है और अपनी जान दे देती है पर अलग नहीं होती, वैसी ही दशा गोपियों की है—वे कृष्ण प्रेम में पूरी तरह डूबी हुई हैं।
(ii) लक्ष्मण और श्री राम के वचनों में अंतर: श्री राम के वचन अत्यंत शीतल, विनम्र, धैर्यपूर्ण और मर्यादा से भरे हुए थे। इसके विपरीत, लक्ष्मण के वचन व्यंग्यात्मक, उग्र, क्रोध दिलाने वाले और वीरता के अभिमान से युक्त थे।
(iii) 'उत्साह' और 'अट नहीं रही है' में ऋतु वर्णन: 'उत्साह' में वर्षा ऋतु (बादलों के आगमन) का और 'अट नहीं रही है' में बसंत ऋतु का वर्णन हुआ है। मुझे बसंत ऋतु पसंद है क्योंकि इस समय प्रकृति अपने चरम सौंदर्य पर होती है, चारों ओर फूल खिलते हैं और वातावरण सुगंधित हो जाता है।
(iv) 'संगतकार' कविता में 'नौसिखिया' का अर्थ: 'नौसिखिया' का अर्थ है—वह जिसने अभी-अभी सीखना शुरू किया हो। यह शब्द मुख्य गायक को उसके बचपन के उन दिनों की याद दिलाता है जब वह स्वयं गायन सीख रहा था और उसकी आवाज़ में वह परिपक्वता नहीं थी।
प्रश्न 11: पूरक पाठ्य-पुस्तक (कृतिका) पर आधारित प्रश्न
(i) 'माता का अंचल' - ग्रामीण संस्कृति में परिवर्तन: आज की ग्रामीण संस्कृति में काफी बदलाव आ गए हैं। पहले गाँवों में बच्चे सामूहिक खेल (जैसे मिट्टी के घरौंदे बनाना, बारात का खेल) खेलते थे और उनका जुड़ाव प्रकृति से था। आज मोबाइल, टीवी और इंटरनेट ने उन खेलों की जगह ले ली है। संयुक्त परिवारों की जगह एकल परिवार बढ़ रहे हैं और आधुनिक सुख-सुविधाओं के कारण ग्रामीण सादगी कम होती जा रही है।
(ii) 'साना-साना हाथ जोड़ि' - सैलानियों का योगदान: सैलानियों को प्रकृति की छटा का अनुभव कराने में सबसे बड़ा योगदान वहाँ के स्थानीय निवासियों, गाइडों और उन परिश्रमी महिलाओं का है जो पहाड़ों पर पत्थर तोड़कर रास्ते बनाती हैं। साथ ही, सीमा सड़क संगठन (BRO) के कर्मचारी जो जान जोखिम में डालकर दुर्गम रास्तों को सुगम बनाते हैं, उनका योगदान भी अतुलनीय है।
(iii) 'मैं क्यों लिखता हूँ' - हिरोशिमा का प्रत्यक्ष अनुभव: हिरोशिमा जाने पर लेखक ने एक पत्थर देखा जिस पर किसी व्यक्ति की लंबी छाया जम गई थी। परमाणु विस्फोट के समय जो भीषण गर्मी निकली होगी, उसने उस व्यक्ति को भाप बना दिया होगा और उसकी छाया पत्थर पर अंकित हो गई। इस दृश्य ने लेखक के भीतर के 'भोक्ता' को झकझोर दिया और उन्होंने उस त्रासदी के दर्द को प्रत्यक्ष महसूस किया।
खंड – घ (रचनात्मक लेखन)
नोट: प्रश्र 12, 13, 14, 15 रचनात्मक लेखन है (अनुच्छेद, पत्र, स्ववृत्त, ई-मेल, विज्ञापन और संदेश लेखन), जिस पर विद्यार्थी अपने विचार, मौलिकता और रचनात्मकता के अनुसार उत्तर लिख सकता है। परीक्षा में इन विषयों पर आपकी अपनी भाषा-शैली और प्रस्तुतीकरण को महत्व दिया जाता है।
🟢 Question Paper Code: 3/4/2 Solution
खंड – क (अपठित बोध)
प्रश्न 1: अपठित काव्यांश (पंथ पर चलना तुझे...)
- (i) (D) साहसी मुसाफ़िर को
- (ii) (A) विकल्प (I) और (II) सही हैं। (पथ की बाधाएँ और असफलताएँ)
- (iii) (C) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या है।
- (iv) इसका अर्थ है कि मनुष्य को केवल बाहरी बाधाओं (आँधियों) से ही नहीं, बल्कि अपने भीतर के डर, आलस्य और निराशा से भी लड़ना होगा।
- (v) 'मुस्कुराकर चलने' का अर्थ है जीवन की कठिन परिस्थितियों और चुनौतियों का सामना सकारात्मकता, साहस और धैर्य के साथ करना।
प्रश्न 2: अपठित गद्यांश (चींटियों का जीवन)
- (i) (B) चींटियों के प्रेरक जीवन पर
- (ii) (C) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
- (iii) (C) कथन (I), (III) और (IV) सही हैं।
- (iv) चींटियाँ बिना किसी फल की इच्छा या बाहरी निगरानी के निरंतर अपने कर्तव्य (भोजन संचय, सुरंग बनाना) में लगी रहती हैं, इसलिए वे 'निष्काम कर्म' का प्रतीक हैं।
- (v) सहयोगात्मक नेतृत्व वह है जहाँ नेता केवल अपनी सफलता नहीं देखता, बल्कि एक ऐसा तंत्र बनाता है जहाँ सभी मिल-जुलकर योगदान दें और सफल हों। इससे असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं।
खंड – ख (व्यावहारिक व्याकरण)
प्रश्न 3: रचना के आधार पर वाक्य भेद
- जब कुत्ते भौंकने लगे तब चोर भाग गए। → कुत्तों के भौंकने पर चोर भाग गए। (सरल वाक्य)
- प्रधानाचार्य की बातें सुनकर छात्र जोश से भर उठे। → प्रधानाचार्य ने बातें कीं और छात्र जोश से भर उठे। (संयुक्त वाक्य)
- निरालाजी द्वारा रचित कविता सभी को पसंद आई। → जो कविता निरालाजी द्वारा रचित थी, वह सभी को पसंद आई। (मिश्र वाक्य)
- आप नाटक देखने जाएँगे या सिनेमा। → संयुक्त वाक्य
- माली ने बच्चों को समझाया कि फूल तोड़ना गलत है। → संज्ञा उपवाक्य
प्रश्न 4: वाच्य
- सभी दर्शकों ने नाटक की प्रशंसा की। → सभी दर्शकों द्वारा नाटक की प्रशंसा की गई। (कर्मवाच्य)
- किसी के द्वारा दरवाजा खटखटाया जा रहा है। → कोई दरवाजा खटखटा रहा है। (कर्तृवाच्य)
- वह खड़ा नहीं हो सकता। → उससे खड़ा नहीं हुआ जाता। (भाववाच्य)
- छात्रों द्वारा परीक्षा दी जा रही है। → कर्मवाच्य
- लड़कियों ने देश-प्रेम का एक गीत सुनाया। → लड़कियों द्वारा देश-प्रेम का एक गीत सुनाया गया। (कर्मवाच्य)
प्रश्न 5: पद-परिचय
- रामचरितमानस: व्यक्तिवाचक संज्ञा, स्त्रीलिंग , एकवचन, संबंध कारक।
- बैठे थे: अकर्मक क्रिया, बहुवचन, भूतकाल , कर्तृवाच्य।
- अरे!: विस्मयादिबोधक अव्यय, आश्चर्य का भाव।
- धीरे-धीरे: रीतिवाचक क्रिया-विशेषण, 'आ गया' क्रिया की विशेषता।
- अपनी: निजवाचक सर्वनाम, स्त्रीलिंग, एकवचन।
प्रश्न 6: अलंकार
- ले चला साथ मैं तुझे कनक। ज्यों भिक्षुक लेकर स्वर्ण झनक। → उत्प्रेक्षा अलंकार
- निर्मल तेरा नीर अमृत-सम उत्तम है। → उपमा अलंकार
- जगीं वनस्पतियाँ अलसाई, मुख धोती शीतल जल से। → मानवीकरण अलंकार
- अंबर-पनघट में डुबो रही, तारा-घट उषा नागरी। → रूपक अलंकार
- हनुमान की पूँछ में, लग न पायी आग। लंका सारी जल गई... → अतिशयोक्ति अलंकार
खंड – ग (पाठ्य-पुस्तक एवं पूरक पाठ्य-पुस्तक)
प्रश्न 7: पठित गद्यांश (एक कहानी यह भी)
- (i) (B) परंपरावादी मान्यता
- (ii) (A) उम्र में सोलह वर्ष और शिक्षा में मैट्रिक
- (iii) (B) उसकी क्षमता और प्रतिभा को विकसित करना
- (iv) (B) विकल्प (I), (II) और (III) सही हैं।
- (v) (C) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या है।
प्रश्न 8: पठित काव्यांश (आत्मकथ्य)
- (i) (C) जीवन की नश्वरता का
- (ii) (A) मित्रों के लिए
- (iii) (B) विकल्प (I), (II) और (III) सही हैं।
- (iv) (B) जीवन में कोई अपना न होना
- (v) (C) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या है।
प्रश्न 9: कविताओं के आधार पर लघु उत्तरीय प्रश्न
(i) सूरदास के 'पद' के आधार पर गोपियों की मनोदशा: इस पंक्ति के माध्यम से गोपियों की कृष्ण के प्रति अनन्य और अटूट प्रेम की अभिव्यक्ति होती है। जिस प्रकार चींटी गुड़ से चिपक जाती है और अपनी जान दे देती है पर अलग नहीं होती, वैसे ही गोपियाँ भी कृष्ण के प्रेम में पूरी तरह डूबी हुई हैं।
(ii) लक्ष्मण और श्री राम के वचनों में मुख्य अंतर: श्री राम के वचन अत्यंत विनम्र, शीतल और शांत हैं (जैसे जल)। इसके विपरीत, लक्ष्मण के वचन तीखे, व्यंग्यपूर्ण और आक्रामक हैं, जो परशुराम जी के क्रोध रूपी अग्नि में घी डालने का कार्य करते हैं।
(iii) 'उत्साह' और 'अट नहीं रही है' में ऋतु वर्णन: 'उत्साह' में वर्षा ऋतु का आह्वान है, जबकि 'अट नहीं रही है' में बसंत ऋतु का सौंदर्य वर्णित है। मुझे बसंत ऋतु पसंद है क्योंकि चारों ओर प्रसन्नता छा जाती है।
(iv) 'संगतकार' कविता में 'नौसिखिया' का अभिप्राय: 'नौसिखिया' का अर्थ है वह व्यक्ति जो अभी संगीत सीख रहा हो। संगतकार मुख्य गायक को सहारा देकर उसका बचपन याद दिलाता है जब वह स्वयं सीख रहा था और असुरक्षित महसूस करता था।
प्रश्न 10: गद्य पाठों के आधार पर लघु उत्तरीय प्रश्न
(i) नेताजी की मूर्ति पर चश्मा पहनाने वाला व्यक्ति: उसे 'कैप्टन' कहा जाता था। वह एक बूढ़ा, मरियल और लंगड़ा फेरीवाला था। उनकी अगाध देशभक्ति मुझे सबसे अधिक प्रभावित करती है।
(ii) बालगोबिन भगत के नियम-व्रत: भगत जी हर वर्ष 30 कोस पैदल चलकर गंगा-स्नान को जाते थे। वे रास्ते में किसी से कुछ माँगते नहीं थे, भजन गाते और पानी पीकर उपवास रखते थे।
(iii) लेखक ने सेकंड क्लास का टिकट क्यों खरीदा? लेखक ने सेकंड क्लास का टिकट इसलिए खरीदा ताकि वे भीड़ से बच सकें, खिड़की से प्राकृतिक दृश्य देख सकें और एकांत में नई कहानी के बारे में सोच सकें।
(iv) बिस्मिल्ला खाँ काशी छोड़कर क्यों नहीं जाना चाहते थे? उनका मानना था कि उनकी शहनाई की कला, गंगा मैया का सान्निध्य और काशी के मंदिरों का वातावरण उन्हें कहीं और नहीं मिल सकता। काशी उनके लिए जन्नत थी।
प्रश्न 11: पूरक पाठ्य-पुस्तक (कृतिका) पर आधारित प्रश्न
(i) भोलानाथ के पिता और पूजा/मछलियों को दाना: पिता उसे धार्मिक संस्कारों से जोड़ना चाहते थे। मछलियों को दाना खिलाने के पीछे उद्देश्य बच्चे को प्रकृति और जीवों के प्रति संवेदनशील बनाना था।
(ii) 'छाया' और 'माया' का अनूठा खेल: लेखिका ने हिमालय की बदलती घाटियों और बादलों के बीच धूप-छाँव के खेल को 'छाया और माया' का अनूठा खेल कहा है, जो आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है।
(iii) कृतिकार की ईमानदारी और लेखन की विवशता: लेखक अज्ञेय के अनुसार, वे 'आत्म-मुक्ति' और अपने भीतर की 'आतंरिक विवशता' के कारण लिखते हैं। जब तक वे अपनी बात लिख नहीं लेते, उन्हें शांति नहीं मिलती।
खंड – घ (रचनात्मक लेखन)
नोट: रचनात्मक लेखन (प्रश्न 12, 13, 14, 15)
प्रश्र 12, 13, 14, 15 रचनात्मक लेखन है, जिस पर विद्यार्थी अपने विचार के अनुसार उत्तर लिख सकता है। इन प्रश्नों (अनुच्छेद, पत्र, ई-मेल, विज्ञापन) में आपकी मौलिक सोच और भाषा प्रवाह को परखा जाता है। परीक्षा में दिए गए संकेत-बिंदुओं का प्रयोग करते हुए स्वयं इनका अभ्यास करें।
🟢 Question Paper Code: 3/4/3 Solution
खंड – क (अपठित बोध)
प्रश्न 1: अपठित गद्यांश (चींटियों के जीवन पर आधारित)
- (i) (B) चींटियों के प्रेरक जीवन पर
- (ii) (C) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
- (iii) (C) कथन (I), (III) और (IV) सही हैं।
- (iv) 'निशकाम कर्म' का अर्थ है फल की इच्छा किए बिना अपना कर्तव्य करना। चींटियाँ बिना किसी वाहवाही या स्वार्थ के निरंतर अपने कार्यों (भोजन संचित करना, बिल बनाना) में लगी रहती हैं।
- (v) सहयोगात्मक नेतृत्व का अर्थ है—पूरे समूह को साथ लेकर चलना जहाँ नेता केवल स्वयं की सफलता नहीं बल्कि सबकी सफलता चाहता है। इसका लाभ यह है कि समूह मिलकर असंभव कार्य को भी संभव बना देता है।
प्रश्न 2: अपठित काव्यांश (मुसाफ़िर पर आधारित)
- (i) (D) साहसी मुसाफ़िर को
- (ii) (A) विकल्प (I) और (II) सही हैं।
- (iii) (C) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
- (iv) इस पंक्ति का अभिप्राय है कि मुसाफ़िर को न केवल बाहरी बाधाओं (कठिनाइयों) से लड़ना है, बल्कि अपने भीतर के डर, आलस्य और निराशा से भी जीतना होगा।
- (v) 'मुस्कुराकर चलने' का आशय है—विषम परिस्थितियों और दुखों में भी अपना धैर्य न खोना और सकारात्मकता के साथ आगे बढ़ते रहना।
खंड – ख (व्यावहारिक व्याकरण)
प्रश्न 3: रचना के आधार पर वाक्य-भेद
- सरल वाक्य: लोगों ने जोकर की बातें सुनकर हँस दिया।
- संयुक्त वाक्य: आज तुम घर पर रहो और जानवरों की देख-रेख का काम करो।
- मिश्र वाक्य: जैसे ही छत पर दाना देखा, वैसे ही कबूतर आ गए।
- वाक्य-भेद: मिश्र वाक्य (क्रिया-विशेषण उपवाक्य)।
- उपवाक्य का भेद: विशेषण उपवाक्य।
प्रश्न 4: वाच्य
- कर्मवाच्य: बालगोबिन भगत द्वारा कबीर के भजन गाए जा रहे थे।
- कर्तृवाच्य: उन्होंने कैप्टन की देशभक्ति का सम्मान किया।
- भाववाच्य: घायल होने के कारण उससे उड़ा नहीं गया।
- वाच्य भेद: भाववाच्य।
- कर्मवाच्य: पुलिस द्वारा अपराधी को पकड़ा गया।
प्रश्न 5: पद-परिचय
- (i) विद्यालय: जातिवाचक संज्ञा, पुल्लिंग, एकवचन, अपादान कारक।
- (ii) खेल रहे हैं: अकर्मक क्रिया, पुल्लिंग , बहुवचन, वर्तमान काल।
- (iii) आजीवन: कालवाचक क्रिया-विशेषण।
- (iv) अरे वाह !: विस्मयादिबोधक अव्यय (हर्षबोधक)।
- (v) तुमने: मध्यम पुरुषवाचक सर्वनाम, एकवचन, पुल्लिंग, कर्ता कारक।
प्रश्न 6: अलंकार
- रूपक अलंकार (चंद्रिका रूपी चादर)।
- उपमा अलंकार ('जैसे' शब्द का प्रयोग)।
- अतिशयोक्ति अलंकार (आँसुओं से पैर धोने का बढ़ा-चढ़ाकर वर्णन)।
- उत्प्रेक्षा अलंकार ('मानो' शब्द का प्रयोग)।
- मानवीकरण अलंकार (सिंधु को मनुष्य की तरह विष उगलते दिखाया गया है)।
खंड – ग (पाठ्य-पुस्तक एवं पूरक पाठ्य-पुस्तक)
प्रश्न 7: पठित काव्यांश (आत्मकथ्य)
- (i) (C) जीवन की नश्वरता का।
- (ii) (A) मित्रों के लिए।
- (iii) (B) विकल्प (I), (II) और (III) सही हैं।
- (iv) (D) उपलब्धियों से रहित जीवन।
- (v) (C) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
प्रश्न 8: निर्धारित कविताओं के आधार पर लघु उत्तरीय प्रश्न
(i) सूरदास के 'पद' (गोपियों की मनोदशा): 'गुर चाँटी ज्यों पागी' के माध्यम से गोपियाँ अपनी अनन्य भक्ति प्रकट करती हैं। जिस प्रकार चींटी गुड़ से चिपक जाती है और अपनी मृत्यु तक उससे अलग नहीं होती, वैसे ही गोपियाँ भी श्रीकृष्ण के प्रेम में पूरी तरह लीन हैं। वे स्वयं को असहाय महसूस करती हैं और कृष्ण के प्रेम को छोड़ने में असमर्थ हैं।
(ii) राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद: श्रीराम के वचन अत्यंत शीतल, मधुर, विनम्र और मर्यादापूर्ण हैं। वे परशुराम के क्रोध को शांत करने का प्रयास करते हैं। इसके विपरीत, लक्ष्मण के वचन व्यंग्यपूर्ण, कठोर और उग्र हैं। वे अपनी वीरता का बखान करते हुए परशुराम को बार-बार चुनौती देते हैं।
(iii) उत्साह और अट नहीं रही है: 'उत्साह' कविता में बादलों के माध्यम से वर्षा ऋतु के आगमन का संकेत है, जबकि 'अट नहीं रही है' में फागुन (वसंत ऋतु) की सुंदरता का वर्णन है। मुझे वसंत ऋतु पसंद है क्योंकि इस समय प्रकृति अपने पूर्ण यौवन पर होती है, चारों ओर फूल खिलते हैं और वातावरण खुशनुमा हो जाता है।
(iv) संगतकार (नौसिखिया): 'नौसिखिया' का अर्थ है—जिसने अभी सीखना शुरू किया हो। संगतकार का स्वर जब मुख्य गायक के स्वर को सहारा देता है, तो वह उसे उसके बचपन की याद दिलाता है जब वह स्वयं सीख रहा था और अक्सर सुरों से भटक जाता था।
प्रश्न 9: पठित गद्यांश (मन्नू भंडारी - 'एक कहानी यह भी')
- (i) (B) परंपरावादी मान्यता।
- (ii) (A) उम्र में सोलह वर्ष और शिक्षा में मैट्रिक।
- (iii) (B) उसकी क्षमता और प्रतिभा को विकसित करना।
- (iv) (B) विकल्प (I), (II) और (III) सही हैं।
- (v) (C) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
प्रश्न 10: निर्धारित गद्य पाठों के आधार पर प्रश्न
(i) नेताजी का चश्मा: मूर्ति को चश्मा पहनाने वाले व्यक्ति का नाम 'कैप्टन' था। वह एक बूढ़ा, लंगड़ा और गरीब फेरीवाला था। उसकी 'देशभक्ति' की भावना ने मुझे सबसे अधिक प्रभावित किया। वह महापुरुषों के प्रति अगाध सम्मान रखता था।
(ii) बालगोबिन भगत: भगत जी हर वर्ष पैदल गंगा-स्नान के लिए जाते थे। वे घर से खाकर निकलते और वापस आकर ही खाते थे। वे किसी से भिक्षा नहीं मांगते थे और लगभग 4-5 दिनों की इस कठिन यात्रा में उपवास रखते हुए अपने नियमों का पालन करते थे।
(iii) लखनवी अंदाज़: लेखक ने भीड़ से बचने, एकांत में बैठकर नई कहानी के बारे में सोचने और खिड़की से बाहर के प्राकृतिक दृश्यों का आनंद लेने के लिए सेकंड क्लास का टिकट खरीदा था।
(iv) नौबतखाने में इबादत: बिस्मिल्ला खाँ काशी छोड़कर कहीं नहीं जाना चाहते थे क्योंकि उनके लिए काशी और गंगा मैया स्वर्ग के समान थे। उनकी शहनाई का सीधा संबंध काशी के मंदिरों और वहाँ की संस्कृति से था।
प्रश्न 11: पूरक पाठ्यपुस्तक (कृतिका) के आधार पर
(i) माता का अँचल: बैजू ने मूसन तिवारी को चिढ़ाया था, लेकिन भोलानाथ उनके साथ था, इसलिए शिक्षक ने भोलानाथ को पकड़ लिया और सजा दी। समूह में की गई शरारत का दंड अक्सर निर्दोष को भी भुगतना पड़ता है। *अनुभव:* हाँ, ऐसा कई बार स्कूल में होता है जब पूरी कक्षा के शोर मचाने पर मॉनिटर को डाँट सुननी पड़ती है।
(ii) साना-साना हाथ जोड़ी: लेखिका ने हिमालय के पल-पल बदलते दृश्यों को 'चलायमान सौंदर्य' कहा है। यह कहना पूर्णतः उचित है क्योंकि जीवन भी स्थिर नहीं है; निरंतर परिवर्तन और नई अनुभूतियाँ ही जीवन को जीवंत और आनंदमयी बनाती हैं।
(iii) मैं क्यों लिखता हूँ: लेखक ने हिरोशिमा में एक पत्थर पर एक लंबी 'मानव छाया' देखी। अणु बम के विस्फोट के समय कोई व्यक्ति उस पत्थर के पास खड़ा रहा होगा, जो विकिरण की तीव्र ऊष्मा से भाप बनकर उड़ गया। यह दृश्य परमाणु बम की भयावहता का जीवंत प्रमाण था।
खंड – घ (रचनात्मक लेखन)
रचनात्मक लेखन निर्देश
प्रश्र 12, 13, 14, 15 रचनात्मक लेखन है .. जिस पर विद्यार्थी अपने विचार के अनुसार उत्तर लिख सकता है।
इन प्रश्नों में अनुच्छेद लेखन, विज्ञापन, पत्र और संदेश लेखन शामिल हैं। विद्यार्थियों को सलाह दी जाती है कि वे प्रश्न में दिए गए संकेत बिंदुओं का पालन करें और अपनी मौलिक भाषा का प्रयोग करें।
🔥 Set 5 - Answer Key 2026
🟢 Question Paper Code: 3/5/1 Solution
खंड – क (अपठित बोध)
प्रश्न 1: अपठित गद्यांश (पंचतंत्र/जातक कथाएँ)
- (i) (B) पशु-पक्षियों के माध्यम से जीवन-मूल्य संप्रेषित करना।
- (ii) (C) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या है।
- (iii) (C) कथन (I), (III) और (IV) सही हैं। (चिंतन क्षमता, कल्पना शक्ति और नैतिक मूल्य)।
- (iv) पशु-पक्षियों की कहानियाँ बच्चों को क्यों लुभाती हैं?
उत्तर: बच्चे स्वभाव से कल्पनाशील होते हैं और पशु-पक्षियों की दुनिया के प्रति उनमें सहज रुचि और जिज्ञासा होती है। कहानियों में पशु-पक्षियों का आपसी संवाद उन्हें मानवीय समाज जैसा लगता है, जो उन्हें आकर्षित करता है। - (v) 'आज से करीब दो हज़ार साल पहले लिखी गयी पंचतंत्र की कहानियाँ कालजयी हैं' - पंक्ति का आशय क्या है?
उत्तर: इसका आशय है कि ये कहानियाँ समय की सीमा से परे हैं। हज़ारों साल पहले लिखे जाने के बावजूद आज भी इनकी प्रासंगिकता बनी हुई है, ये दुनिया की अनेक भाषाओं में अनूदित हैं और आज भी बच्चों को नैतिक शिक्षा देने का सबसे सशक्त माध्यम हैं।
प्रश्न 2: अपठित काव्यांश (धरती माँ)
- (i) (B) प्रकृति प्रेम ।
- (ii) (B) कथन (I), (II) और (III) सही हैं। (सम्मान, कृतज्ञता और रक्षा की भावना)।
- (iii) (C) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या है।
- (iv) 'धरती माँ की काया यों तो, कोरा पत्थर है, माटी है' - पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: इसका आशय है कि ऊपरी तौर पर देखने पर धरती केवल निर्जीव पत्थर और मिट्टी का ढेर प्रतीत होती है, लेकिन वास्तव में यही मिट्टी जीवन का आधार है और इसी से प्रकृति का सारा सौंदर्य निखरता है। - (v) धरती माँ का कवच किसे और क्यों कहा गया है?
उत्तर: वृक्षों को धरती माँ का 'रक्षा-कवच' कहा गया है क्योंकि वे धरती को उजाड़ होने से बचाते हैं, हरियाली फैलाते हैं और जीवन के लिए आवश्यक ऑक्सीजन और संसाधन प्रदान करते हैं।
खंड – ख (व्यावहारिक व्याकरण)
प्रश्न 3: रचना के आधार पर वाक्य-भेद
- जब असफल हो गए, तो शोक करना व्यर्थ है। (सरल वाक्य में): असफल होने पर शोक करना व्यर्थ है।
- सूर्योदय होने पर कुहासा जाता रहा। (संयुक्त वाक्य में): सूर्योदय हुआ और कुहासा जाता रहा।
- गार्ड ने हरी झंडी दिखाई और ट्रेन चल पड़ी। (मिश्र वाक्य में): जैसे ही गार्ड ने हरी झंडी दिखाई, वैसे ही ट्रेन चल पड़ी।
- माताजी ने मुझे एक और पुस्तक दी। (वाक्य-भेद): सरल वाक्य।
- जैसा आपने बताया था, वैसा मैंने किया। (उपवाक्य भेद): क्रिया-विशेषण आश्रित उपवाक्य।
प्रश्न 4: वाच्य पर आधारित प्रश्न
- क्या यह उपन्यास मन्नू भंडारी ने लिखा है? (कर्मवाच्य): क्या यह उपन्यास मन्नू भंडारी द्वारा लिखा गया है?
- आज घूमने चला जाए। (कर्तृवाच्य): आज घूमने चलें ।
- पहाड़ी रास्ते पर घोड़ा तेज़ न चल सका। (भाववाच्य): पहाड़ी रास्ते पर घोड़े से तेज़ नहीं चला जा सका।
- अवनि ने पुस्तकें खरीदीं। (वाक्य पहचान): कर्तृवाच्य।
- कल आपके द्वारा दावत दी जाएगी। (कर्तृवाच्य): कल आप दावत देंगे।
प्रश्न 5: पद-परिचय
- (i) वह: पुरुषवाचक सर्वनाम (अन्य पुरुष), पुल्लिंग, एकवचन, कर्ता कारक।
- (ii) पढ़ा रही हैं: सकर्मक क्रिया, स्त्रीलिंग, एकवचन, कर्तृवाच्य, वर्तमान काल।
- (iii) वाह!: विस्मयादिबोधक अव्यय (हर्षबोधक)।
- (iv) बाद में :
- (v) इस : सर्वनामिक विशेषण, पुल्लिंग, एकवचन, कबूतर का विशेषण।
प्रश्न 6: अलंकार पहचानिए
- मेघ आए बड़े बन-ठन के संवर के: मानवीकरण अलंकार।
- देखि रूप लोचन ललचाने। हरषु जनु निज निधि पहिचाने: उत्प्रेक्षा अलंकार।
- पायो जी मैंने राम-रतन धन पायो: रूपक अलंकार।
- तब तो बहता समय शिला-सा जम जाएगा: उपमा अलंकार।
- पानी परात को हाथ छुऔ नहि, नैनन के जल सौं पग धोए: अतिशयोक्ति अलंकार।
खंड – ग (पाठ्य पुस्तक एवं पूरक पाठ्य पुस्तक)
प्रश्न 7: पठित गद्यांश (मन्नू भंडारी - 'एक कहानी यह भी')
- (i) (D) पारिवारिक परंपरा के अनुसार लड़कों को बाहर खेलने की स्वतंत्रता थी।
- (ii) (C) पिताजी को लड़कियों का घर से बाहर निकलना नापसंद था ।
- (iii) (A) कथन (I) और (II) सही हैं।
- (iv) (B) हम संकुचित और असहाय हो गए हैं।
- (v) (C) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या है।
प्रश्न 8: निर्धारित गद्य पाठों के आधार पर प्रश्न
(i) नेताजी की प्रतिमा पर चश्मा: नेताजी की प्रतिमा पर पत्थर का चश्मा न होने के कारण ये थे कि या तो मूर्तिकार चश्मा बनाना भूल गया था, या उसने पारदर्शी चश्मा बनाने की कोशिश में उसे तोड़ दिया होगा, या फिर वह पत्थर का चश्मा बनाने में असफल रहा होगा।
(ii) 'बालगोबिन भगत' का संगीत: भगत जी 'खँजरी' बजाते हुए कबीर के पदों का गायन करते थे। उनके गायन की गति धीरे-धीरे ऊपर उठती थी और एक निश्चित ताल-स्वर पर पहुँचकर श्रोताओं के मन-तन पर हावी हो जाती थी।
(iii) नवाब साहब का व्यवहार: नवाब साहब का व्यवहार दिखावे और बनावटीपन से भरा था। वे अपनी नवाबी का प्रदर्शन करने के लिए खीरे को केवल सूंघकर खिड़की से बाहर फेंक देते हैं, जो उनकी खोखले सामंती गर्व को दर्शाता है।
(iv) बिस्मिल्ला खाँ और कस्तूरी मृग: जिस प्रकार कस्तूरी मृग अपनी ही कस्तूरी की सुगंध को बाहर खोजता है, उसी प्रकार बिस्मिल्ला खाँ विश्व प्रसिद्ध होने के बाद भी स्वयं को एक सच्चा साधक मानते थे और हमेशा ईश्वर से 'सच्चे सुर' की नेमत माँगते थे।
प्रश्न 9: पठित काव्यांश (जयशंकर प्रसाद - 'आत्मकथ्य')
- (i) (D) अपनी प्रेयसी की यादों को।
- (ii) (C) अंतर्मन के लिए।
- (iii) (B) कथन (I), (II) और (III) सही हैं।
- (iv) (C) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या है।
- (v) (B) वे बहुत सरल थे, उनको अहंकार नहीं था।
प्रश्न 10: निर्धारित कविताओं के आधार पर लघु उत्तरीय प्रश्न
(i) गोपियों की निराशा: कृष्ण के आने की प्रतीक्षा कर रही गोपियों को जब उद्धव ने 'योग-साधना' का संदेश दिया, तो उन्हें यह 'कड़वी ककड़ी' के समान लगा, जिससे वे निराश हो गईं।
(ii) वीर योद्धा की विशेषताएँ: लक्ष्मण के अनुसार, एक सच्चा वीर रणभूमि में अपनी वीरता का प्रदर्शन करता है, वह अपनी प्रशंसा स्वयं नहीं करता। वीर पुरुष धैर्यवान और क्षोभरहित होते हैं।
(iii) बादलों से गरजने का आह्वान: कवि बादलों को क्रांति का प्रतीक मानते हैं। वे चाहते हैं कि बादल गरजकर समाज में नई चेतना और जोश भर दें ताकि पुरानी परंपराएँ नष्ट हों और नए समाज का निर्माण हो।
(iv) संगतकार की भूमिका: संगतकार मुख्य कलाकार के साथ गायन में सहयोग देता है। वह मुख्य गायक की लड़खड़ाती आवाज़ को सहारा देता है और अपनी आवाज़ को मुख्य गायक से ऊँचा न उठाकर अपनी 'मनुष्यता' का परिचय देता है।
प्रश्न 11: पूरक पाठ्य-पुस्तक (कृतिका) पर आधारित प्रश्न
(i) 'माता का अँचल' खेल: पाठ में बच्चों द्वारा चूहों के बिल में पानी डालना पसंद नहीं आया। इसका कारण यह है कि इससे निर्दोष जीवों को कष्ट होता है और उनका घर नष्ट हो जाता है।
(ii) पहाड़ों का कठोर जीवन: 'साना-साना हाथ जोड़ि' के अनुसार, पहाड़ों पर महिलाओं को पत्थर तोड़ने पड़ते हैं और बच्चों को पढ़ाई के लिए मीलों दूर पहाड़ चढ़ना पड़ता है। वहाँ जीवन निरंतर संघर्ष का नाम है।
(iii) 'हिरोशिमा' कविता की मानसिक स्थिति: लेखक ने यह कविता तब लिखी जब उन्होंने जापान में एक पत्थर पर किसी मनुष्य की 'छाया' देखी, जो परमाणु विस्फोट में भाप बन गया था। इस भीतरी दबाव ने उन्हें लिखने पर विवश किया।
खंड – घ (रचनात्मक लेखन)
प्रश्न 12, 13, 14, 15: रचनात्मक लेखन
नोट: प्रश्न संख्या 12, 13, 14, 15 रचनात्मक लेखन है, जिस पर विद्यार्थी अपने विचार, मौलिकता और प्रश्न में दिए गए संकेत-बिंदुओं के अनुसार उत्तर लिख सकता है। इस भाग में पत्र, अनुच्छेद, स्ववृत्त और विज्ञापन लेखन शामिल हैं, जहाँ आपकी रचनात्मक शैली को परखा जाता है।
🟢 Question Paper Code: 3/5/2 Solution
खंड – क (अपठित बोध)
प्रश्न 1: अपठित काव्यांश (धरती माँ)
- (i) (B) प्रकृति-प्रेम
- (ii) (B) कथन (I), (II) और (III) सही हैं ।
- (iii) (C) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या है ।
- (iv) इस पंक्ति का आशय यह है कि ऊपरी तौर पर देखने में पृथ्वी केवल निर्जीव मिट्टी और पत्थरों का एक पिंड दिखाई देती है, लेकिन वास्तव में इसी मिट्टी और पत्थर से प्रकृति के विविध और सुंदर रूप (पर्वत, घाटियाँ, मैदान) निर्मित हुए हैं। यह वह आधार है जिस पर संपूर्ण जीवन टिका है।
- (v) कविता के अनुसार वृक्षों (पेड़ों) को धरती माँ का रक्षा-कवच कहा गया है। उन्हें ऐसा इसलिए कहा गया है क्योंकि वे धरती को बंजर होने और मरुस्थल बनने से बचाते हैं, हरियाली फैलाते हैं और पर्यावरण की रक्षा करते हैं।
प्रश्न 2: अपठित गद्यांश (पंचतंत्र और जातक कथाएँ)
- (i) (B) पशु-पक्षियों के माध्यम से जीवन-मूल्य संप्रेषित करना ।
- (ii) (C) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या है ।
- (iii) (C) कथन (I), (III) और (IV) सही हैं ।
- (iv) पशु-पक्षियों की कहानियाँ बच्चों को इसलिए लुभाती हैं क्योंकि बच्चे स्वाभाविक रूप से उनके प्रति आकर्षित होते हैं। इन कहानियों में जब पशु-पक्षी मनुष्यों की तरह बात करते और व्यवहार करते हैं, तो यह बच्चों में भारी कौतूहल और जिज्ञासा पैदा करता है।
- (v) 'कालजयी' होने का अर्थ है समय की सीमाओं को जीत लेना। इसका आशय यह है कि यद्यपि ये कहानियाँ हज़ारों साल पहले लिखी गई थीं, लेकिन इनमें समाहित जीवन-मूल्य और नैतिकता आज के आधुनिक युग में भी उतनी ही प्रासंगिक और उपयोगी हैं।
खंड – ख (व्यावहारिक व्याकरण)
प्रश्न 3: रचना के आधार पर वाक्य-भेद
- सरल वाक्य: बल्लेबाजों के अच्छे प्रदर्शन से भारत मैच जीत गया।
- संयुक्त वाक्य: लोगों ने जादूगर का खेल देखा और तालियाँ बजाईं।
- मिश्र वाक्य: जैसे ही वसंत आया, वैसे ही चारों ओर रंग-बिरंगे फूल खिल उठे।
- वाक्य-भेद: संयुक्त वाक्य
- उपवाक्य का भेद: संज्ञा उपवाक्य
प्रश्न 4: वाच्य
- कर्मवाच्य: प्रधानमंत्री जी द्वारा इस भवन का उद्घाटन किया गया।
- कर्तृवाच्य: बच्चों ने अच्छा कार्यक्रम प्रस्तुत किया।
- भाववाच्य: सारिका से क्षण भर के लिए भी शांत नहीं बैठा जाता।
- वाच्य पहचान: कर्मवाच्य
- कर्मवाच्य: चुनावों की घोषणा की गई।
प्रश्न 5: पद-परिचय
- (i) सीता: व्यक्तिवाचक संज्ञा, स्त्रीलिंग, एकवचन, कर्ता कारक।
- (ii) यह (लड़का): सार्वनामिक विशेषण, पुल्लिंग, एकवचन, विशेष्य: 'लड़का'।
- (iii) मिला था: सकर्मक क्रिया, पुल्लिंग, एकवचन, भूतकाल।
- (iv) धीरे-धीरे: रीतिवाचक क्रिया-विशेषण, 'लिख रहा है' क्रिया की विशेषता।
- (v) वाह !: विस्मयादिबोधक अव्यय, हर्ष/प्रसन्नता सूचक भाव।
प्रश्न 6: अलंकार
- उत्प्रेक्षा अलंकार (मानो हवा के जोर से...)
- उपमा अलंकार (सरिस मन डोला)
- मानवीकरण अलंकार (हिमकर निराश कर चला...)
- रूपक अलंकार (महंत वसंत)
- अतिशयोक्ति अलंकार (मृतक में भी डाल देगी जान)
खंड – ग (पाठ्य पुस्तक एवं पूरक पाठ्य पुस्तक)
प्रश्न 7: पठित गद्यांश (एक कहानी यह भी)
- (i) (D) पारिवारिक परंपरा के अनुसार लड़कों को बाहर खेलने की स्वतंत्रता थी ।
- (ii) (C) पिताजी को लड़कियों का घर से बाहर निकलना नापसंद था ।
- (iii) (A) कथन (I) और (II) सही हैं ।
- (iv) (B) हम संकुचित और असहाय हो गए हैं ।
- (v) (C) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या है ।
प्रश्न 8: पठित काव्यांश (आत्मकथ्य)
- (i) (D) अपनी प्रेयसी की यादों को ।
- (ii) (C) अंतर्मन के लिए ।
- (iii) (B) कथन (I), (II) और (III) सही हैं।
- (iv) (C) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या है ।
- (v) (B) वे बहुत सरल थे, उनको अहंकार नहीं था ।
प्रश्न 9: निर्धारित कविताओं पर आधारित प्रश्न
(i) गोपियाँ उद्धव की बातें सुनकर निराश क्यों हो गईं?
गोपियाँ कृष्ण के आने की प्रतीक्षा कर रही थीं और उन्हें प्रेम संदेश की आशा थी। इसके विपरीत, उद्धव ने उन्हें निर्गुण ब्रह्म और योग साधना का 'नीरस' संदेश दिया। उन्हें लगा कि कृष्ण ने उनके साथ छल किया है, इसलिए वे निराश हो गईं।
(ii) लक्ष्मण ने वीर योद्धा की क्या विशेषताएँ बताईं?
लक्ष्मण के अनुसार, सच्चा वीर युद्ध के मैदान में अपनी वीरता का प्रदर्शन करता है, वह अपने मुँह से अपनी प्रशंसा (डिंगें) नहीं मारता। वीर योद्धा धैर्यवान, शांत और विनम्र होता है तथा वह ब्राह्मण, गाय और भक्त पर शस्त्र नहीं उठाता।
(iii) 'उत्साह' कविता में कवि ने बादलों को गरजने का आह्वान क्यों किया है?
कवि निराला बादलों को क्रांति का प्रतीक मानते हैं। वे बादलों से गरजने का आह्वान इसलिए करते हैं ताकि समाज में नई चेतना और जोश पैदा हो सके और पुरानी व्यवस्था को बदलकर एक नए सृजन का मार्ग प्रशस्त हो।
(iv) 'संगतकार' शब्द का अर्थ और कविता के संदर्भ में उसकी भूमिका:
'संगतकार' का अर्थ है मुख्य गायक के साथ स्वर मिलाने वाला सहायक कलाकार। कविता में उसकी भूमिका मुख्य गायक की थकी या टूटती आवाज़ को सहारा देना है, ताकि संगीत की लय बनी रहे और मुख्य गायक अकेला न पड़े।
प्रश्न 10: निर्धारित गद्य पाठों पर आधारित प्रश्न
(i) नेताजी की प्रतिमा पर कैसा चश्मा लगा था? पत्थर का चश्मा न होने के कारण:
नेताजी की प्रतिमा पर पत्थर का चश्मा नहीं था, बल्कि एक असली फ्रेम वाला चश्मा लगा था। पत्थर का चश्मा न होने का कारण संभवतः यह था कि मूर्तिकार मास्टर मोतीलाल चश्मा बनाना भूल गया या उसे बनाने में असफल रहा।
(ii) बालगोबिन भगत की संगीत मंडली और वादन-गायन:
बालगोबिन भगत अपनी खँजरी बजाते थे और उनकी मंडली उनके पीछे पदों को दोहराती थी। उनका गायन इतना प्रभावशाली था कि सुनने वाले झूमने लगते थे। आषाढ़ की रिमझिम में उनका स्वर जादुई प्रभाव पैदा करता था।
(iii) नवाब साहब के व्यवहार पर विचार:
नवाब साहब का व्यवहार दिखावे और बनावटीपन से भरा है। वे अपनी नवाबी ठसक दिखाने के लिए खीरे जैसी साधारण चीज़ को काटकर सूंघकर खिड़की से बाहर फेंक देते हैं। यह उनकी सामंती और खोखली मानसिकता को दर्शाता है।
(iv) बिस्मिल्ला खाँ की तुलना कस्तूरी मृग से क्यों की गई है?
जिस प्रकार कस्तूरी मृग अपनी ही नाभि की सुगंध को बाहर जंगल में ढूँढता रहता है, उसी प्रकार बिस्मिल्ला खाँ सर्वश्रेष्ठ 'सुर' की तलाश में अस्सी वर्ष तक इबादत करते रहे। अपार सफलता के बाद भी वे स्वयं को संगीत में अधूरा मानते थे।
प्रश्न 11: पूरक पाठ्य-पुस्तक (कृतिका) पर आधारित प्रश्न
(i) 'माता का अँचल' और आधुनिक बचपन में अंतर:
'माता का अँचल' में बच्चे मिट्टी, कंकड़, पत्तों और घरेलू सामानों से प्राकृतिक खेल खेलते थे। वे टोली बनाकर सामूहिक आनंद लेते थे। इसके विपरीत, आज के बच्चों की दुनिया गैजेट्स, वीडियो गेम्स और बंद कमरों तक सीमित है। आधुनिक युग में प्रकृति से जुड़ाव कम और पढ़ाई का बोझ अधिक हो गया है।
(ii) कटाओ पर किसी दुकान का न होना वरदान क्यों है?
कटाओ पर दुकानों का न होना इसलिए वरदान है क्योंकि वहां अभी व्यवसायीकरण (Commercialization) नहीं हुआ है, जिससे वहां की प्राकृतिक सुंदरता और पवित्रता सुरक्षित है। युवा वर्ग जागरूकता फैलाकर और कचरा न फैलाकर इन स्थलों को प्रदूषण से बचा सकते हैं।
(iii) 'मैं क्यों लिखता हूँ' पाठ के आधार पर 'कृति' का अर्थ:
लेखक अज्ञेय के अनुसार, 'कृति' केवल कागज़ पर लिखे शब्द नहीं हैं, बल्कि वह लेखक की आंतरिक व्याकुलता और अनुभूति की अभिव्यक्ति है। लेखन की विवशता तब होती है जब लेखक के भीतर का दबाव उसे लिखने के लिए प्रेरित करता है ताकि वह अपनी पीड़ा या अनुभव से मुक्त हो सके।
खंड – घ (रचनात्मक लेखन)
नोट: प्रश्न संख्या 12, 13, 14, 15 रचनात्मक लेखन (अनुच्छेद, पत्र, ई-मेल, विज्ञापन) पर आधारित हैं। यह भाग विद्यार्थियों की अपनी कल्पनाशीलता और रचनात्मकता पर निर्भर करता है, जिस पर विद्यार्थी अपने स्वतंत्र विचारों के अनुसार उत्तर लिख सकता है। परीक्षा में दिए गए संकेत-बिंदुओं के आधार पर मौलिक लेखन को प्राथमिकता दें।
🟢 Question Paper Code: 3/5/3 Solution
खंड – क (अपठित बोध)
प्रश्न 1: अपठित गद्यांश (पंचतंत्र और जातक कथाएँ)
- (i) (B) पशु-पक्षियों के माध्यम से जीवन-मूल्य संप्रेषित करना।
- (ii) (C) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या है।
- (iii) (C) कथन (I), (III) और (IV) सही हैं।
- (iv) उत्तर: पशु-पक्षियों की कहानियाँ बच्चों को इसलिए लुभाती हैं क्योंकि बच्चों के कल्पना जगत में पशु-पक्षियों का एक विशेष और अद्वितीय स्थान होता है। वे स्वाभाविक रूप से उनकी ओर आकर्षित होते हैं और उनके माध्यम से दी गई सीख को आसानी से ग्रहण कर लेते हैं।
- (v) उत्तर: 'पंचतंत्र की कहानियाँ कालजयी हैं' - इस पंक्ति का आशय यह है कि ये कहानियाँ समय की सीमाओं से परे हैं। हज़ारों साल पहले लिखे जाने के बावजूद आज भी इनकी प्रासंगिकता, लोकप्रियता और प्रभाव कम नहीं हुआ है।
प्रश्न 2: अपठित काव्यांश (धरती माँ और वृक्ष)
- (i) (D) धरती माँ
- (ii) (B) कथन (I), (II) और (III) सही हैं।
- (iii) (C) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या है।
- (iv) उत्तर: 'धरती माँ की काया यों तो, कोरा पत्थर है, माटी है' - इस पंक्ति का आशय है कि ऊपरी तौर पर धरती केवल निर्जीव मिट्टी और पत्थरों का ढेर दिखाई देती है, लेकिन वास्तव में यही मिट्टी जीवन का आधार है और ममतामयी माँ के समान हमारा पालन-पोषण करती है।
- (v) उत्तर: धरती माँ का 'रक्षा-कवच' वृक्षों को कहा गया है क्योंकि वृक्ष ही धरती को हरा-भरा रखते हैं, उसे कटाव से बचाते हैं और पर्यावरण का संतुलन बनाए रखते हैं।
खंड – ख (व्यावहारिक व्याकरण)
प्रश्न 3: रचना के आधार पर वाक्य-भेद
- दो दिन लगातार वर्षा होने के कारण सर्वत्र पानी भर गया। (सरल वाक्य)
- बच्चों ने शोर मचाया और पक्षी उड़ गए। (संयुक्त वाक्य)
- जैसे ही लोगों ने महात्माजी का प्रभावपूर्ण प्रवचन सुना, वैसे ही वे नतमस्तक हो गए। (मिश्र वाक्य)
- वाक्य-भेद: मिश्र वाक्य।
- उपवाक्य-भेद: विशेषण उपवाक्य।
प्रश्न 4: वाच्य (Voice)
- माता-पिता द्वारा उसको अच्छे संस्कार देने का प्रयास किया गया। (कर्मवाच्य)
- किसने घड़ी चुराई थी? (कर्तृवाच्य)
- उससे दौड़ा नहीं जाता। (भाववाच्य)
- वाच्य पहचान: भाववाच्य।
- सुमन द्वारा अच्छी कविता लिखी गई है। (कर्मवाच्य)
प्रश्न 5: पद-परिचय
- (i) भारतीय: गुणवाचक विशेषण, पुल्लिंग, बहुवचन, 'सैनिक' विशेष्य का विशेषण।
- (ii) गंगा: व्यक्तिवाचक संज्ञा, स्त्रीलिंग, एकवचन, कर्ता कारक।
- (iii) बढ़ता है: सकर्मक क्रिया, पुल्लिंग, एकवचन, वर्तमान काल, 'चाँद' कर्ता के अनुसार।
- (iv) सवेरे: कालवाचक क्रिया-विशेषण, 'व्यायाम करने' क्रिया की विशेषता बता रहा है।
- (v) वाह!: विस्मयादिबोधक अव्यय, हर्ष (प्रसन्नता) सूचक।
प्रश्न 6: अलंकार
- उत्प्रेक्षा अलंकार ('मानों' शब्द के कारण)।
- उत्प्रेक्षा अलंकार ('ज्यों' शब्द द्वारा संभावना)।
- उपमा अलंकार ('सी' वाचक शब्द के कारण)।
- उपमा/अतिशयोक्ति अलंकार।
- रूपक अलंकार (राम को 'घनश्याम' बादल का रूप दिया गया है)।
खंड – ग (पाठ्य पुस्तक एवं पूरक पाठ्य पुस्तक)
प्रश्न 7: पठित काव्यांश (आत्मकथ्य) बहुविकल्पीय प्रश्न
- (i) (D) अपनी प्रेयसी की यादों को।
- (ii) (C) अंतर्मन के लिए।
- (iii) (B) कथन (I), (II) और (III) सही हैं।
- (iv) (C) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या है।
- (v) (B) वे बहुत सरल थे, उनको अहंकार नहीं था।
प्रश्न 8: निर्धारित कविताओं के आधार पर प्रश्न
(i) गोपियाँ उद्धव की बातें सुनकर निराश क्यों हो गईं?
गोपियाँ कृष्ण के प्रेम में व्याकुल थीं और उनके आने का इंतज़ार कर रही थीं। उद्धव ने आकर जब उन्हें कृष्ण के प्रेम के बदले 'योग संदेश' और 'निर्गुण ब्रह्म' की उपासना की सीख दी, तो उनकी विरह-अग्नि और बढ़ गई। उन्हें यह संदेश 'कड़वी ककड़ी' के समान लगा, इसलिए वे निराश हो गईं।
(ii) लक्ष्मण ने वीर योद्धा की क्या विशेषताएँ बताईं?
लक्ष्मण ने वीर योद्धा की विशेषताएँ बताते हुए कहा कि वीर योद्धा युद्ध के मैदान में अपनी वीरता का प्रदर्शन कार्य करके करते हैं, वे अपनी प्रशंसा स्वयं नहीं करते। वीर पुरुष धैर्यवान, क्षमाशील और विनम्र होते हैं तथा वे रणभूमि में शत्रु को सामने पाकर कायरो की तरह डींगें नहीं मारते।
(iii) 'उत्साह' कविता में कवि ने बादलों को गरजने का आह्वान क्यों किया?
'उत्साह' कविता में कवि निराला ने बादलों को गरजने के लिए इसलिए कहा है क्योंकि 'गरजना' नई चेतना और क्रांति का प्रतीक है। कवि समाज में परिवर्तन लाना चाहते हैं। वे बादलों को केवल शांति से बरसने के बजाय गरजने को कहते हैं ताकि लोगों के मन में उत्साह और जोश भर सके।
(iv) 'संगतकार' शब्द का अर्थ और उसकी भूमिका:
'संगतकार' का अर्थ है मुख्य कलाकार के साथ गायन या वादन करने वाला सहायक कलाकार। इसकी भूमिका मुख्य गायक के स्वर को आधार देना, उसकी आवाज़ में गहराई लाना और जब मुख्य गायक कठिन तानों में भटक जाए, तो उसे वापस स्थायी (मुख्य धुन) पर लाना है।
प्रश्न 9: पठित गद्यांश (एक कहानी यह भी)
- (i) (D) पारिवारिक परंपरा के अनुसार लड़कों को बाहर खेलने की स्वतंत्रता थी।
- (ii) (C) पिताजी को लड़कियों का घर से बाहर निकलना नापसंद था।
- (iii) (B) कथन (I), (II) और (III) सही हैं।
- (iv) (B) हम संकुचित और असहाय हो गए हैं।
- (v) (C) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या है।
प्रश्न 10: निर्धारित गद्य पाठों के आधार पर प्रश्न
(i) नेताजी की प्रतिमा पर कैसा चश्मा लगा था?
नेताजी की प्रतिमा पर पत्थर का चश्मा न होकर सचमुच का काला चौड़ा फ्रेम वाला चश्मा लगा था। इसके कारण मूर्तिकार द्वारा पत्थर का चश्मा बनाना भूल जाना या बनाते समय टूट जाना हो सकते हैं।
(ii) बालगोबिन भगत के संगीत कार्यक्रम और वादन की गति:
बालगोबिन भगत संगीत कार्यक्रम में 'खंजड़ी' बजाया करते थे और उनकी मंडली 'ताल' और 'मंजीरे' बजाती थी। उनके गायन की गति शुरू में धीमी होती थी, जो धीरे-धीरे बढ़ती जाती थी और अंत में वे मग्न होकर नृत्य करने लगते थे।
(iii) नवाब साहब के व्यवहार पर विचार:
नवाब साहब का व्यवहार उनकी 'बनावटी जीवन-शैली' और 'मिथ्या गौरव' को दर्शाता है। वे लेखक के सामने अपनी नबावी का प्रदर्शन करने के लिए खीरों को खाने के बजाय केवल सूँघकर खिड़की से बाहर फेंक देते हैं।
(iv) बिस्मिल्ला खाँ की तुलना कस्तूरी मृग से क्यों की गई है?
जैसे कस्तूरी मृग सुगंध को बाहर खोजता है, वैसे ही बिस्मिल्ला खाँ शहनाई में शिखर प्राप्त करने के बाद भी हमेशा ईश्वर से 'सच्चे सुर' की इबादत करते थे। वे अंत तक पूर्णता को खोजते रहे।
प्रश्न 11: पूरक पाठ्य-पुस्तक (कृतिका) के आधार पर प्रश्न
(i) भोलानाथ का माँ के आँचल में छिपने का कारण:
सांप को देखने के बाद जो डर भोलानाथ को लगा, वह केवल माँ की ममता और आंचल की छाँव में ही शांत हो सकता था। संकट के समय माँ की उपस्थिति सबसे बड़ा मानसिक संबल और सुरक्षा का अहसास दिलाती है।
(ii) 'धर्म चक्र' को देखकर लेखिका की अनुभूति:
'साना-साना हाथ जोड़ि' में लेखिका ने कुटिया के भीतर घूमते 'धर्म चक्र' को देखा। इसे देखकर उन्हें लगा कि पूरे भारत की आत्मा एक जैसी है; लोगों की आस्थाएँ और विश्वास हर जगह एक समान हैं।
(iii) लेखक की आभ्यांतर विवशता क्या होती है?
'आभ्यांतर विवशता' वह मानसिक बेचैनी है, जो लेखक को लिखने के लिए प्रेरित करती है। बाहरी कारकों में प्रकाशक का आग्रह, आर्थिक आवश्यकता या यश पाने की इच्छा शामिल हो सकती है।
खंड – घ (रचनात्मक लेखन)
प्रश्न 12, 13, 14, 15: रचनात्मक लेखन
नोट: प्रश्र 12, 13, 14, 15 रचनात्मक लेखन है (विज्ञापन, अनुच्छेद, पत्र, ई-मेल/संदेश)। जिस पर विद्यार्थी अपने विचार, मौलिकता और प्रश्न में दिए गए संकेत-बिंदुओं के अनुसार उत्तर लिख सकता है। परीक्षा में इन प्रश्नों के लिए रचनात्मकता को महत्व दिया जाता है।
✍️ रचनात्मक लेखन (Creative Writing) के लिए महत्वपूर्ण नोट:
खंड 'घ' (रचनात्मक लेखन) जैसे पत्र, अनुच्छेद, स्ववृत्त (Resume) और विज्ञापन के उत्तर पूरी तरह से छात्र की रचनात्मकता और सोच पर निर्भर करते हैं। ऊपर दिए गए उत्तर केवल Model Answer (आदर्श उत्तर) हैं। यदि आपने परीक्षा में प्रारूप (Format) सही लिखा है और विषय से जुड़ी बातें अपनी भाषा में लिखी हैं, तो आपको पूरे अंक मिलेंगे।
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