ऐसी भी बातें होती हैं (लता मंगेशकर से साक्षात्कार) - प्रश्न उत्तर | NCERT Solutions Hindi
हिंदी पाठ "ऐसी भी बातें होती हैं" (यतींद्र मिश्र द्वारा रचित) के अभ्यास खण्ड के सभी प्रश्नों के सटीक उत्तर यहाँ दिए गए हैं। यह नोट्स परीक्षाओं और असाइनमेंट के लिए बहुत उपयोगी हैं।
रचना से संवाद - मेरे उत्तर मेरे तर्क (NCERT Solutions)
मेरी समझ मेरे विचार (NCERT Textbook Solutions)
(संकेत– यहाँ अनुशासन में डर है या सम्मान?)
यहाँ अनुशासन में भय या दहशत नहीं, बल्कि पिता के प्रति गहरा सम्मान झलकता है। इसके तुरंत बाद उनका यह कहना कि "अच्छा अब जाओ, बाहर जाकर खेलो", यह सिद्ध करता है कि वे बच्चों पर केवल नियंत्रण नहीं रखना चाहते थे, बल्कि उनके बचपन और स्वतंत्रता से भी बहुत स्नेह करते थे। यही अनुशासन और स्नेह का सच्चा संतुलन है।
- स्वाभिमान के साथ जीना: पिता की मृत्यु के बाद बुरे हालात में भी लता जी ने अत्यंत स्वाभिमान के साथ जीवन जिया और कभी किसी के आगे मदद के लिए हाथ नहीं फैलाया। यह संस्कार उन्हें उनके पिता से ही मिला था।
- काम के प्रति एकाग्रता और साधना: लता जी ने अपने पिता को हमेशा संगीत और नाटकों में पूरी तरह डूबा हुआ देखा था। उसी तरह लता जी ने भी खुद को संगीत की साधना और रिकॉर्डिंग के प्रति पूरी तरह समर्पित कर दिया।
- दृढ़ता और आत्मविश्वास: सही बात पर अड़े रहना और गलत बात के आगे न झुकना लता जी ने अपने पिता से ही सीखा था।
इसके साथ एक बहुत बड़ा उत्तरदायित्व जुड़ा हुआ था— कला की पवित्रता को बनाए रखना, संगीत को एक इबादत (पूजा) की तरह मानना और अपने परिवार की गरिमा को किसी भी परिस्थिति में झुकने न देना। लता जी ने अपनी सुरीली आवाज़ और निष्कलंक जीवन के माध्यम से सचमुच अपने पिता के नाम को पूरी दुनिया में रोशन किया और उनके मूल्यों की रक्षा की।
लता जी का मानना था कि उनके गीतों की सफलता में संगीत निर्देशकों, सह-गायकों और विशेषकर कोरस (Chorus) में गाने वाली लड़कियों का बहुत बड़ा योगदान है। कोरस गाने वाली लड़कियाँ उनके घर की सदस्यों की तरह थीं; वे लता जी की बहन मीना की शादी में कोल्हापुर भी गई थीं। इसके अतिरिक्त, संगीत निर्देशकों (जैसे नौशाद साहब, अनिल विश्वास, मदन मोहन आदि) के प्रति उनके मन में अपार सम्मान था। वे दीवाली जैसे त्योहारों पर अहले सुबह उठकर खुद उन्हें मिठाई देने उनके घर जाती थीं। यह दर्शाता है कि वे सफलता के शिखर पर पहुँचकर भी अपने सहयोगियों को नहीं भूलीं।
साक्षात्कार से उभरता व्यक्तित्व / उभरती छवि
निर्देश: साक्षात्कार से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन पंक्तियों से लता मंगेशकर के व्यक्तित्व के कौन-कौन से गुण या विशेषताएँ उभरकर सामने आती हैं? दिए गए विकल्पों में से चुनकर लिखिए—
(विकल्प: दृढ़ता, कृतज्ञता, दार्शनिकता, समर्पण, उत्तरदायित्व, स्पष्टता, एकाग्रता, साधना, स्पष्टवादिता, विनम्रता, कठोरता, सरलता, आत्मविश्वास, उत्सवप्रियता, श्रद्धा, मानवता, अमरता, घमंड, स्वाभिमान)
मेरे प्रश्न
निर्देश: अब नीचे दिए गए उत्तरों से अधिक से अधिक प्रश्न बनाइए (कम से कम दो)—
रचना से संवाद - मेरे अनुभव मेरे विचार
जैसे, सुबह उठकर घर के सभी बड़ों के पैर छूना, खाना खाने से पहले हाथ धोना और रात को सोने से पहले भगवान का ध्यान करना। इसके अलावा, हमारे घर में यह भी एक कड़ा नियम है कि हम सब रात का भोजन एक साथ बैठकर करते हैं, ताकि परिवार के सभी लोग आपस में अपना दिन भर का अनुभव साझा कर सकें। बाहर जाते समय घर के बड़ों को बताकर जाना भी हमारी आदतों में शुमार है। ये संस्कार हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा बन गए हैं।
मुख्य पर्व के दिन हम बाजार की रेडीमेड रंगोली की जगह असली रंगों और फूलों से घर के आँगन में रंगोली बनाते हैं। शाम को पूरे घर में मिट्टी के दीये जलाए जाते हैं। परिवार के सभी सदस्य मिलकर नए कपड़े पहनते हैं और लक्ष्मी-गणेश की पूजा करते हैं। इसके बाद हम घर पर बनी विशेष मिठाइयाँ और पकवान पड़ोसियों तथा रिश्तेदारों में बाँटते हैं। इस प्रकार हमारा यह पर्व बहुत ही उल्लास से बीतता है।
- मिलने-जुलने में कमी: पहले लोग त्योहारों पर एक-दूसरे के घर जाकर गले मिलते थे और शुभकामनाएँ देते थे। अब यह जगह मोबाइल और सोशल मीडिया (व्हाट्सएप/फेसबुक) के संदेशों ने ले ली है।
- घर के पकवानों की जगह बाजार की मिठाइयाँ: पहले त्योहारों पर मिठाइयाँ और पकवान कई दिन पहले से घरों में ही बनाए जाते थे, अब ज्यादातर चीजें बाजार से रेडीमेड खरीदी जाती हैं।
- प्राकृतिक चीजों का अभाव: होली जैसे त्योहारों पर पहले प्राकृतिक रंगों और टेसू के फूलों का उपयोग होता था, जबकि अब रासायनिक रंगों का प्रयोग बढ़ गया है।
- दिखावा: पहले त्योहारों में सादगी और आत्मीयता होती थी, लेकिन अब त्योहारों का रूप ज्यादा दिखावटी, खर्चीला और व्यावसायिक (Commercial) हो गया है।
विधा से संवाद - साक्षात्कार की पड़ताल
- साक्षात्कार लेने वाले का नाम और जिसका साक्षात्कार लिया गया: यतींद्र मिश्र (साक्षात्कारकर्ता) और लता मंगेशकर (साक्षात्कार देने वाली)।
- प्रश्नोत्तर:
यतींद्र मिश्र: "दीदी, आपके संगीत की अप्रतिम यात्रा पर बातचीत शुरू करते हैं..."
लता मंगेशकर: "जी, जरूर! आपका बेहद शुक्रिया..." - भावनात्मक वातावरण: "जब बहुत सुर में तार लगता है, तो टूट जाता है।" / "हे प्रभु! तुमने जो भी दिया, वह बहुत दिया..."
- आमंत्रण, स्वागत और परिचय: "देशवासियों की ओर से प्रणाम करते हुए आपसे प्रश्न पूछना चाहूँगा..."
- उत्तर देने की शैली का संकेत: "(हँसते हुए) अरे! यह तो हम सब भाई-बहन बहुत करते थे।" / "(खिलखिलाकर हँसती हैं)"
- विचार और उदाहरण: "संगीत में असीम शक्ति है कि कुछ अप्रत्याशित वह जरूर रच देता है..." (उस्ताद अली अकबर खाँ के सरोद का तार टूटने का उदाहरण)।
- संस्मरण: "मसलन पचास-साठ मिनट कि ‘ठन’ से उनके सरोद का एक तार टूटा..." / "पिताजी सबको बुलाकर अपने सामने खड़़ा करते थे।"
- समापन: "अपनी कृपा की छाया से जैसे मुझे छाँह दी है, वैसे ही हर एक कलाकार और नेक इंसानों के ऊपर भी रखना... यही प्रार्थना है।"
लता जी का यह कहना कि "मैं कोशिश करूँगी कि जो कुछ भी मैंने जाना है, उसे आपको बता सकूँ", उनकी सरलता, सहजता और विनम्रता को दर्शाता है। इसमें कोई औपचारिक (Formal) अकड़ या कूटनीतिक जवाब देने की कोशिश नहीं है। यतींद्र मिश्र द्वारा उन्हें "दीदी" कहकर संबोधित करना और लता जी का खुलकर बचपन की शरारतों व यादों को साझा करना, इस संवाद को एक आत्मीय और पारिवारिक बातचीत का रूप दे देता है।
आपका साक्षात्कार
प्रश्न 1: "लता दीदी, आपको अपने गाए हुए हजारों गीतों में से अपना सबसे प्रिय गीत कौन सा लगता है और क्यों?"
(कारण: यह जानने के लिए कि संगीत जगत की इतनी महान हस्ती के दिल के सबसे करीब कौन सा गीत है।)
प्रश्न 2: "जब आप पहली बार रिकॉर्डिंग स्टूडियो में माइक के सामने खड़ी हुई थीं, तो आपके मन में क्या चल रहा था?"
(कारण: एक महान सफर की शुरुआत के समय एक नए कलाकार की झिझक, घबराहट और अनुभव को जानने के लिए।
विषयों से संवाद (NCERT Textbook Solutions)
- भोजन: दिन भर स्टूडियो दर स्टूडियो भागने के कारण उन्हें समय पर पौष्टिक खाना नहीं मिल पाता होगा। कई बार तो उन्हें भूखे पेट ही काम करना पड़ा होगा।
- यात्रा-भाड़ा: घर की आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण यात्रा के लिए पैसे नहीं होते होंगे, जिसके चलते उन्हें मीलों पैदल चलना पड़ा होगा।
- सुरक्षा: एक छोटी बच्ची का अकेले फिल्म इंडस्ट्री के चक्कर काटना असुरक्षित और मानसिक रूप से तनावपूर्ण रहा होगा।
- थकान: सुबह से देर रात तक लगातार काम करने और यात्रा करने से अत्यधिक शारीरिक और मानसिक थकान होती होगी।
- विद्यालय में: वार्षिकोत्सव (Annual Function), खेल-कूद प्रतियोगिताएँ, सामूहिक प्रोजेक्ट बनाना और प्रार्थना सभा का आयोजन।
- घर और परिवार में: शादी-ब्याह की तैयारियाँ, त्योहारों (जैसे दिवाली, होली) पर घर की साफ-सफाई, सजावट करना और पकवान बनाना।
- समुदाय में: मोहल्ले में स्वच्छता अभियान चलाना, धार्मिक आयोजन (जैसे दुर्गा पूजा या गणेश पंडाल लगाना), और किसी प्राकृतिक आपदा के समय राहत कार्य करना।
शास्त्रीय संगीत
- राग: भारतीय शास्त्रीय संगीत में स्वरों की वह विशिष्ट और मधुर रचना जो मन को आनंदित करे और जिसका एक निश्चित नियम हो।
- सुर: संगीत के सात मूल स्वर (सा, रे, ग, म, प, ध, नि) जिनकी सहायता से संगीत रचा जाता है।
- बंदिश: शास्त्रीय संगीत में राग और ताल में बँधी हुई काव्य रचना या गीत के बोल।
- अभंग: महाराष्ट्र का एक प्रकार का भक्ति संगीत, जो मुख्य रूप से भगवान विट्ठल की स्तुति में गाया जाता है (जैसे संत तुकाराम के अभंग)।
- सोहर: उत्तर भारत में बच्चे के जन्म के शुभ अवसर पर घर-आँगन में गाया जाने वाला पारंपरिक मंगलगीत।
- फाग: फाल्गुन मास (होली के समय) में गाया जाने वाला उल्लासपूर्ण और मस्ती भरा लोकगीत।
- बधावा: किसी शुभ कार्य, विवाह, जन्म या मुंडन के अवसर पर बधाई के रूप में गाया जाने वाला मांगलिक गीत।
प्रमुख गीत:
- विवाह के अवसर पर 'बन्ना-बन्नी' और 'गारी' (हास्य-व्यंग्य के गीत) गाए जाते हैं।
- सावन के महीने में महिलाएँ झूले झूलते समय 'कजरी' और 'मल्हार' गाती हैं।
- नवजात शिशु के जन्म पर 'सोहर' गाया जाता है।
"जुग जुग जियसु ललनवा, भवनवाँ के भाग जागल हो,
ललना लाल होइहें कुलवा के दीपक, मनवा में आस लागल हो।"
साइबर सुरक्षा
आज तकनीकी विकास इतना अधिक हो चुका है कि अनेक धोखेबाज/ठग कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का प्रयोग करके अपनी आवाज़ बदलकर लोगों के साथ धोखाधड़ी करते हैं। कक्षा में चर्चा कीजिए और बताइए कि साइबर सुरक्षा नियमों का प्रयोग करते हुए इस प्रकार की धोखाधड़ी से किस प्रकार बचा जा सकता है?
- क्रॉस-सत्यापन (Cross-Verification): यदि फोन पर कोई व्यक्ति (जो मित्र या रिश्तेदार की आवाज़ में हो) अचानक पैसों की माँग करे या दुर्घटना की बात कहे, तो तुरंत फोन काटकर उसके असली और पुराने नंबर पर कॉल या वीडियो कॉल करके सच्चाई की पुष्टि करें।
- निजी जानकारी गुप्त रखें: फोन पर कभी भी OTP, बैंक खाते की जानकारी, डेबिट/क्रेडिट कार्ड नंबर या पासवर्ड किसी के साथ साझा न करें।
- संदिग्ध लिंक से बचें: अनजान नंबरों से आने वाले व्हाट्सएप मैसेज या SMS में दिए गए संदिग्ध लिंक्स (Links) पर बिल्कुल क्लिक न करें।
- शिकायत दर्ज करें: धोखाधड़ी का संदेह होने पर घबराएं नहीं, तुरंत राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन (1930) पर कॉल करें या पोर्टल (cybercrime.gov.in) पर अपनी शिकायत दर्ज करें।
हम ऐसे भी बोलते हैं
क्या आपके जीवन में भी कोई ऐसा व्यक्ति है जो बिना कुछ बोले सिर्फ नजरों या संकेतों (हाव-भाव) से ही आपको समझा देता है? उस अनुभव के विषय में बताइए।
इसी तरह, जब मैं परीक्षा में अच्छे अंक लाता हूँ या कोई अच्छा काम करता हूँ, तो उनकी आँखों की चमक और चेहरे की मुस्कान बिना एक भी शब्द कहे उनके प्यार, गर्व और आशीर्वाद को बयां कर देती है।
मैं भी इशारों का प्रयोग करके या कागज़-पेन पर लिखकर उसे जवाब देने की कोशिश करूँगा। ऐसे व्यक्तियों के प्रति हमें पूर्ण सम्मान और उनकी बात को समझने की जिज्ञासा दिखानी चाहिए, ताकि उन्हें यह बिल्कुल महसूस न हो कि उन्हें समाज में अनदेखा किया जा रहा है।
सृजन (रचनात्मक लेखन)
दिनांक: 15 सितंबर, 1949 (बंबई)
समय: रात 9:00 बजे
आज का दिन मेरे जीवन का सबसे अद्भुत और अविस्मरणीय दिन रहा। टाइम मशीन के ज़रिए मैं सीधे 1949 की बंबई (मुंबई) के एक पुराने रिकॉर्डिंग स्टूडियो में पहुँच गया। वहाँ मेरी मुलाकात 20 साल की एक बेहद सादगी पसंद और शर्मीली लड़की से हुई— वह और कोई नहीं, हमारी लता दीदी थीं!
उनका पहनावा बहुत ही साधारण था। उन्होंने एक सूती (कॉटन) की सफेद साड़ी पहनी हुई थी, जिस पर हल्का बॉर्डर था। बालों की दो लंबी चोटियाँ बनी हुई थीं और चेहरे पर एक अजीब सा तेज और आत्मविश्वास था। स्टूडियो का माहौल आज के डिजिटल युग से बिल्कुल अलग था। वहाँ एक ही बड़ा सा माइक था, जिसके चारों तरफ साजिंदे (ऑर्केस्ट्रा वाले) अपने-अपने वाद्य यंत्र (तबला, हारमोनियम, सितार) लेकर बैठे थे। सब कुछ 'लाइव' रिकॉर्ड हो रहा था; एक गलती का मतलब था पूरा गाना दोबारा गाना। मैंने लता जी को 'महल' फिल्म का गाना 'आएगा आने वाला' गाते हुए सुना। उनकी आवाज़ में जो कशिश थी, उसने पूरे स्टूडियो को मंत्रमुग्ध कर दिया था।
रिकॉर्डिंग के बीच जब ब्रेक हुआ, तो हम सबने मिलकर ज़मीन पर बैठकर साधारण सा भोजन किया। उनके टिफिन में महाराष्ट्रियन पोहा और दाल-रोटी थी। इतने बड़े संघर्ष के बावजूद उनकी बातों में किसी के प्रति कोई कड़वाहट नहीं थी, बस अपने परिवार को पालने की फिक्र और संगीत के प्रति गहरी साधना थी। आज मैंने साक्षात देवी सरस्वती को गाते हुए सुना। यह दिन मैं ताउम्र नहीं भूल पाऊँगा।
कल्पना कीजिए कि यह लता जी का अंतिम संदेश है— आप उस पर अपनी भावनात्मक प्रतिक्रिया एक अनुच्छेद के रूप में व्यक्त कीजिए।
भावनात्मक प्रतिक्रिया:
लता दीदी का यह अंतिम संदेश पढ़कर आँखें नम हो जाती हैं और हृदय श्रद्धा से भर उठता है। दीदी, आपका यह कहना कि आप अमर नहीं हैं, आपकी महानता और उस निश्छल विनम्रता को दर्शाता है, जिसने आपको हमेशा ज़मीन से जोड़े रखा। यह सच है कि प्रकृति के नियम के अनुसार शरीर नश्वर है और एक दिन उसे पंचतत्व में विलीन होना ही पड़ता है, लेकिन कलाकारों की कला कभी नहीं मरती। आपकी आवाज़ भारत की आत्मा बन चुकी है। देश की सीमा पर खड़े सैनिक की आँखों में 'ऐ मेरे वतन के लोगों' सुनकर आज भी आँसू आ जाते हैं; त्योहारों, शादियों और खुशी के हर मौके पर आपके गीत ही हमारे जीवन में रंग भरते हैं। जब तक इस ब्रह्मांड में संगीत का अस्तित्व है, जब तक हवाओं में सुरों की मिठास बाकी है, तब तक आप हमारे दिलों में, हमारी यादों में और हमारे जीवन के हर एक पल में अमर रहेंगी। आपके भौतिक रूप के जाने के बाद भी, आपकी आवाज़ हमेशा हमारा मार्गदर्शन करती रहेगी और हमें सुकून देती रहेगी। आप सचमुच अमर हैं, दीदी!
व्याकरण की बात: मुहावरे
प्रश्न: "मगर किसी के आगे जाकर हाथ नहीं पसारना है।"
उपर्युक्त वाक्य में रेखांकित अंश मुहावरा है। हाथ पसारना या फैलाना का अर्थ है— कुछ माँगना या याचना करना। हाथों से जुड़े अनेक मुहावरे आपने पढ़े और सुने होंगे। ऐसे ही कुछ मुहावरे नीचे दिए गए हैं। इनका प्रयोग करते हुए वाक्य बनाइए—
हमारी भाषाएँ
भोजपुरी में: "काया त नस्वर बा, बाकिर करम अउर नाम अमर रहेला।"
हरियाणवी में: "माणस की देही तो खाक हो जा सै, पर उसकै काम अर नाम हमेशा रह्या करै।"
राजस्थानी (मारवाड़ी) में: "मिनख तो म्हर जावे पण उणरो नांव अमर रेवे है।"
मातृभाषा (भोजपुरी) की कहावत: "भैंस के आगे बीन बजावे, भैंस खड़ी पगुराए।"
हिंदी अनुवाद: मूर्ख व्यक्ति के सामने ज्ञान की बातें करना व्यर्थ है। (हिंदी का समानांतर मुहावरा: भैंस के आगे बीन बजाना।)
भाव में परिवर्तन: अनुवाद करने पर कहावत का मूल अर्थ तो स्पष्ट हो जाता है, लेकिन लोकभाषा का जो ठेठ, देसी और व्यंग्यात्मक स्वाद (Flavor) मूल कहावत में था, वह खड़ी बोली हिंदी में थोड़ा औपचारिक और सपाट हो जाता है।
(छात्र इसे एक ड्राइंग के रूप में अपनी कॉपी में बना सकते हैं। यहाँ उदाहरण के लिए हिंदी और भोजपुरी के समान शब्द दिए गए हैं:)
किनारा 1 (हिंदी) ↔️ सेतु (समान शब्द) ↔️ किनारा 2 (भोजपुरी)
- माता / माँ ↔️ माई ↔️ माई
- पिता ↔️ बाबूजी / बाबू ↔️ बाबूजी / बाबू
- पानी ↔️ पानी ↔️ पानी
- रोटी ↔️ रोटी ↔️ रोटी
- घर ↔️ घर ↔️ घर

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