Jujh Class 12 Hindi Question Answer | Jujh Class 12 Hindi Question Answer | जूझ Class 12 Hindi प्रश्न उत्तर | जूझ Class 12 Hindi Question Answer

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Joojh Class 12 Question Answer | जूझ पाठ के प्रश्न उत्तर (NCERT Solutions)


कक्षा 12 हिंदी के प्रसिद्ध पाठ “जूझ” के महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर यहाँ विस्तार से दिए गए हैं। यह पोस्ट छात्रों को परीक्षा की तैयारी, असाइनमेंट और नोट्स बनाने में सहायता करेगी। इस लेख में Joojh Class 12 Question Answer सरल भाषा में प्रस्तुत किए गए हैं ताकि विद्यार्थी पाठ को आसानी से समझ सकें।

जूझ पाठ – प्रश्न अभ्यास (Class 12 Hindi Chapter Joojh Solutions)

प्रश्न 1. 'जूझ' शीर्षक के औचित्य पर विचार करते हुए यह स्पष्ट करें कि क्या यह शीर्षक कथा नायक की किसी केंद्रीय चारित्रिक विशेषता को उजागर करता है?
इस पाठ का शीर्षक 'जूझ' संपूर्ण कथा नायक का बिंदु है। जिसका अर्थ है- संघर्ष। कथानायक आनंद इस पाठ में हमें आदि से अंत तक संघर्ष करते दिखाई देता है। पाठशाला जाने के लिए आनंद को एक लंबे संघर्ष का सामना करना पड़ा। प्रवेश लेने के पश्चात अपने अस्तित्व के लिए आनंद को जूझना पड़ा। तब कहीं जाकर वह कक्षा मॉनिटर बना। उसने कवि बनने के लिए भी निरंतर संघर्ष किया। वह कागज के टुकड़ों पर अथवा पत्थर की शिला पर या भैंस की पीठ पर कविता लिखा करता। उसके संघर्ष में मराठी अध्यापक न०वा० सौंदलगेकर के साथ उपन्यास का यह शीर्षक कथानायक की संघर्षमय प्रवृत्ति की ओर संकेत करता है। अतः यह शीर्षक उचित है।
प्रश्न 2. स्वयं कविता रच लेने का आत्मविश्वास लेखक के मन में कैसे पैदा हुआ?
लेखक मराठी भाषा के अध्यापक न०वा० सौंदलगेकर से अधिक प्रभावित हुआ। उन्हें लय, छंद, यति-गति आरोह-अवरोह का उचित ज्ञान था। जिसका कथानायक पर अनुकूल प्रभाव पड़ा। जब लेखक को पता चला कि अध्यापक ने अपने घर के दरवाजे पर लगी 'मालती' नामक लता पर कविता लिखी है तब उसे अनुभव हुआ कि कवि भी अन्य मनुष्यों के समान ही हाड-मास, क्रोध-लोभ आदि प्रवृत्तियों का दास होता है। इसके बाद उसे महसूस हुआ कि वह अपने गाँव के तथा आसपास के अनेक दृश्यों पर कविता लिख सकता है। शीघ्र ही वह तुकबंदी करने लगा और अध्यापक ने भी उसका उत्साह बढ़ाया। उसके मन में यह विश्वास उत्पन्न हुआ कि वह भी कवि बन सकता है।
प्रश्न 3. श्री सौंदलगेकर के अध्यापन की उन विशेषताओं को रेखांकित करें जिन्होंने कविताओं के प्रति लेखक के मन में रुचि जगाई।
श्री न०वा० सौंदलगेकर लेखक की कक्षा में मराठी पढ़ाते थे। वे बड़े सुरीले कण्ठ से कविता सुनाया करते थे। उन्हें छंद, यति-गति, आरोह-अवरोह का समुचित ज्ञान था। वे प्रायः कविता गाकर सुनाया करते थे। कवितागान के समय उनके चेहरे पर भावों के अनुकूल हाव-भाव देखे जा सकते थे। उन्होंने लेखक की तुकबंदी का अनेक बार संशोधन किया तथा बार-बार उसे प्रोत्साहित भी किया। वे लेखक को यह भी बताते कि कविता की भाषा कैसी होनी चाहिए और छंद की जाति कैसे पहचानी जाए। इस प्रकार वे कथानायक को कविता लिखने के लिए हमेशा प्रोत्साहित करते रहते थे।
प्रश्न 4. कविता के प्रति लगाव से पहले और उसके बाद अकेलेपन के प्रति लेखक की धारणा में क्या बदलाव आया?
कविता के प्रति लगाव से पहले कथानायक को ढोर चराते समय, खेत में पानी लगाते समय या अन्य काम करते समय अकेलापन बहुत खटकता था। परंतु अब अकेलापन उसे खटकता नहीं है। कविता लिखते समय वह अपने आप से खेलता था। इस अकेलेपन के कारण वह ऊँची आवाज में कविता का गान करता था। कभी-कभी वह कविता पाठ करते समय अभिनय भी करता था और थुई-थुई करके नाचता भी था। इस प्रकार कविता ने उसके अकेलेपन को रचनात्मक आनंद में बदल दिया।
प्रश्न 5. आपके ख्याल से पढ़ाई लिखाई के संबंध में लेखक और दत्ता जी राव का रवैया सही था या लेखक के पिता का? तर्क सहित उत्तर दें।
हमारे विचार से पढ़ाई लिखाई के संबंध में दत्ताजी राव का रवैया सही था और लेखक के पिता का रवैया गलत था। लेखक का सोचना भी सही था कि पढ़-लिख कर कोई नौकरी मिल जाएगी और चार पैसे हाथ में आने से कोई व्यापार किया जा सकता है। इसी प्रकार दत्ता जी राव का रवैया सही ठहराया जा सकता है। उन्होंने ही लेखक के पिता को धमकाया तथा लेखक को पढ़ने के लिए पाठशाला भिजवाया।
प्रश्न 6. दत्ताजी राव से पिता पर दबाव डलवाने के लिए लेखक और उसकी माँ को एक झूठ का सहारा लेना पड़ा। यदि झूठ का सहारा न लेना पड़ता तो आगे का घटनाक्रम क्या होता?
कथानायक और उसकी माँ दत्ताजी राव के पास इसलिए गए थे ताकि वे लेखक के पिता पर दबाव डालकर उसे पाठशाला भिजवा सके। यदि लेखक की माँ यह झूठ नहीं बोलती तो लेखक के पिता बहुत नाराज हो जाते और माँ-बेटे की खूब पिटाई करते। इसी प्रकार लेखक ने झूठ न बोला होता कि "पिता को बुलाने आया हूँ, उन्होंने अभी खाना नहीं खाया" तब लेखक वहाँ जा नहीं पाता और पिता बेटे पर झूठे आरोप लगाकर दत्ताजी राव को चुप करवा लेता। लेखक जीवनभर पढ़ाई न कर पाता और खेत में संघर्षपूर्ण जीवन जीता रहता।
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3Comments

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  1. न०वा० सौंदलगेकर का पूरा नाम क्या है जी

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  2. न०वा० सौंदलगेकर , भा० रा०ताँबे,बा०भ० बोरकर का पुरा नाम क्या है सर बताना कोई

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  3. Sir thoda answer chote likho taki hum 2 marks ke answer tou likh sake

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