आओ मिलकर बचाएँ कविता Question Answer | Class 11 Hindi Notes
कक्षा 11 हिंदी के महत्वपूर्ण पाठ ‘आओ मिलकर बचाएँ’ के प्रश्न-उत्तर यहाँ सरल भाषा में दिए गए हैं। यह पोस्ट Class 11 Hindi Aao Milkar Bachayen Question Answer, परीक्षा तैयारी, नोट्स और होमवर्क के लिए उपयोगी है। सभी प्रश्न-उत्तर NCERT pattern के अनुसार दिए गए हैं।
आओ मिलकर बचाएँ – प्रश्न अभ्यास
प्रश्न 1. 'माटी का रंग' प्रयोग करते हुए किस संकेत की ओर इशारा किया गया है?
'माटी का रंग' प्रयोग करते हुए संथाली लोगों को विस्थापित होने से बचाने और उनको रोकने का प्रयास किया है। 'माटी का रंग' प्रयोग करते हुए कवयित्री कहती हैं कि जिस स्थान पर हम बड़े हो रहे हैं। उसी स्थान की मिट्टी से हमें प्यार होना भी होना चाहिए। उस मिट्टी में मिले हमारे भाव को हमें संजोकर रखना है। उस मिट्टी की हमें इज्जत करनी चाहिए। उसकी गरिमा को भी बचाना होगा।
प्रश्न 2. भाषा में झारखंडीपन से क्या तात्पर्य है?
कवयित्री संथाल परगना की बात करती है। जिसमें झारखंडी बोली बोली जाती है। वहाँ के लोग इसी भाषा को समझते हैं और कहते हैं। अतः कवयित्री झारखंडी भाषा को बचाने का प्रयास करती है। अन्यथा लोग दूसरी भाषा को बोलना और समझना शुरू कर देंगे जिससे झारखंडी भाषा समाप्त हो जाएगी। अतः कवयित्री झारखंडी भाषा को बचाने का प्रयास करती है।
प्रश्न 3. दिल के भोलेपन के साथ-साथ अक्खड़पन और जुझारूपन को भी बचाने की आवश्यकता पर क्यों बल दिया गया है?
झारखंड के लोग भोलेभाले स्वभाव के हैं। वे छल-कपट से हमेशा दूर रहते हैं। इसलिए कवयित्री कहती है कि यदि दिल से भोले भाले बने रहे तो न तो हम सुरक्षित रह पाएँगे और न समाज। दिल के भोले होने के साथ-साथ हमें अपनी सही बात पर अड़ना और विवेकपूर्ण उत्तर देना भी आना चाहिए। दिल का भोलापन तो ठीक है परंतु सही बात पर अक्खड़पन होना, कार्य करने के लिए उत्साह होना और मेहनत करना भी अनिवार्य है।
प्रश्न 4. प्रस्तुत कविता आदिवासी समाज की किन बुराइयों और समस्याओं की ओर संकेत करती है?
कवयित्री ने शहरीकरण के नाम पर झारखंड क्षेत्र के विस्थापित संथाल समाज के आदिवासियों की बुरी हालात पर चिंता व्यक्त की है। यद्यपि सामाजिक बुराइयों के कारण उस क्षेत्र की प्रकृति विनाश के कगार पर है। समाज भी कुरीतियों के कारण बुराई की ओर बढ़ रहा है। उनके पास अपनी संस्कृति-सभ्यता को बचाने के लिए बहुत सी चीजें हैं जिन्हें उनकी धरोहर कहा जा सकता है।
प्रश्न 5. इस दौर में भी बचाने को बहुत कुछ बचा है – से क्या आशय है?
इस दौर में बजाने को बहुत कुछ बचा है। उन वस्तुओं को बचाना है जो हमारे सामाजिक व प्राकृतिक परिवेश को स्वच्छ बनाती है। उदाहरण के तौर पर जीवन सादगी, कठोर-परिश्रम प्राकृतिक प्रेम आदि के द्वारा हम संथाल परगना के लोगों के जीवन को सुखी बना सकते हैं। इसलिए कवयित्री ने कहा है कि अभी बचाने को बहुत कुछ बचा है।
प्रश्न 6. निम्नलिखित पंक्तियों के काव्य-सौंदर्य को उद्घाटित कीजिए-
(क) ठंडी होती दिनचर्या में जीवन की गर्माहट
उत्तर –
(क) इस पंक्ति में कवयित्री ने आदिवासी क्षेत्रों से विस्थापन की पीड़ा को व्यक्त किया है। विस्थापन से वहाँ के लोगों की दिनचर्या ठंडी पड़ गई है। हम अपने प्रयासों से उनके जीवन में उत्साह जगा सकते हैं। यह काव्य पंक्ति लाक्षणिक है इसका अर्थ है-उत्साहहीन जीवन। ‘गर्माहट’ उमंग, उत्साह और क्रियाशीलता का प्रतीक है। इन प्रतीकों से अर्थ गांभीर्य आया है। शांत रस विद्यमान है। अतुकांत अभिव्यक्ति है।
(ख) थोड़ा-सा विश्वास
थोडी-सी उम्मीद
थोड़े-से सपने
आओ, मिलकर बचाएँ।
(ख) इस अंश में कवयित्री अपने प्रयासों से लोगों की उम्मीदें, विश्वास व सपनों को जीवित रखना चाहती है। समाज में बढ़ते अविश्वास के कारण व्यक्ति का विकास रुक-सा गया है। वह सभी लोगों से मिलकर प्रयास करने का आहवान करती है। उसका स्वर आशावादी है। ‘थोड़ा-सा’ ; ‘थोड़ी-सी’ व ‘थोड़े-से’ तीनों प्रयोग एक ही अर्थ के वाहक हैं। अत: अनुप्रास अलंकार है। उर्दू (उम्मीद), संस्कृत (विश्वास) तथा तद्भव (सपने) शब्दों का मिला-जुला प्रयोग किया गया है। तुक, छद और संगीत विहीन होते हुए कथ्य में आकर्षण है। खड़ी बोली का प्रयोग दर्शनीय है।
उत्तर –
(क) इस पंक्ति में कवयित्री ने आदिवासी क्षेत्रों से विस्थापन की पीड़ा को व्यक्त किया है। विस्थापन से वहाँ के लोगों की दिनचर्या ठंडी पड़ गई है। हम अपने प्रयासों से उनके जीवन में उत्साह जगा सकते हैं। यह काव्य पंक्ति लाक्षणिक है इसका अर्थ है-उत्साहहीन जीवन। ‘गर्माहट’ उमंग, उत्साह और क्रियाशीलता का प्रतीक है। इन प्रतीकों से अर्थ गांभीर्य आया है। शांत रस विद्यमान है। अतुकांत अभिव्यक्ति है।
(ख) थोड़ा-सा विश्वास
थोडी-सी उम्मीद
थोड़े-से सपने
आओ, मिलकर बचाएँ।
(ख) इस अंश में कवयित्री अपने प्रयासों से लोगों की उम्मीदें, विश्वास व सपनों को जीवित रखना चाहती है। समाज में बढ़ते अविश्वास के कारण व्यक्ति का विकास रुक-सा गया है। वह सभी लोगों से मिलकर प्रयास करने का आहवान करती है। उसका स्वर आशावादी है। ‘थोड़ा-सा’ ; ‘थोड़ी-सी’ व ‘थोड़े-से’ तीनों प्रयोग एक ही अर्थ के वाहक हैं। अत: अनुप्रास अलंकार है। उर्दू (उम्मीद), संस्कृत (विश्वास) तथा तद्भव (सपने) शब्दों का मिला-जुला प्रयोग किया गया है। तुक, छद और संगीत विहीन होते हुए कथ्य में आकर्षण है। खड़ी बोली का प्रयोग दर्शनीय है।
प्रश्न 7. बस्तियों को शहर की किस आबो-हवा से बचाने की आवश्यकता है?
हमें अपने नगर और बस्ती के बढ़ते प्रदूषण और प्राकृतिक संपदा का विनाश होने से बचाना चाहिए। पर्यावरण मानव जाति के लिए सुरक्षा कवच के समान है। यदि प्रदूषण के कारण पर्यावरण को हानि होगी तो बस्ती में दुख-रोग आदि बढ़ने लगेंगे। हम कोशिश करेंगे कि हमारी बस्ती और नगर की वायु शुद्ध हो और इसके आसपास वृक्षारोपण किया जाए।
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