Kis Tarah Aakhirkar Main Hindi Mein Aaya Class 9 Question Answer | Class 9 Hindi Kis Tarah Aakhirkar Main Hindi Mein Aaya | किस तरह आखिरकार मैं हिंदी में आया Question Answer
किस तरह आखिरकार मैं हिंदी में आया (अभ्यास प्रश्न)
प्रश्न 1.वह ऐसी कौन-सी बात रही होगी। जिसने लेखक को दिल्ली जाने के लिए बाध्य कर दिया?
लेखक को घर के किसी सदस्य ने कोई ऐसी कटु बात कह दी होगी जिससे उसका हृदय आहत हो उठा। उसके स्वयं का अपने घर में रहना असुविधाजनक लगा होगा। उस कटु बात से उसके स्वाभिमान को भी ठेस पहुँची होगी। संभवत: लेखक अपने घर में निठल्ला रहा हो, उसे कोई काम न मिला हो। इस तरह अपने जीवन में कुछ कर दिखाने की ललक जाग उठी होगी। इसी कारण वह जेब में पाँच-सात रुपये होने पर दिल्ली के लिए निकल पड़ा।
प्रश्न 2. लेखिक को अंग्रेजी में कविता लिखने का अफसोस क्यों रहा होगा?
लेखक के घर का वातावरण उर्दू प्रधान था। वह अपनी भावनाओं की अभिव्यक्ति उर्दू या अंग्रेजी भाषा में कर सकता था। हरिवंशराय बच्चन, निराला तथा पंत जी से परिचित होने के बाद लेखक का रुझान हिंदी की ओर बढ़ा। लेखक 1934 तक हिंदी कविताएँ लिख चुका था। सन 1937 के बाद वह पुनः हिंदी में कविताएँ लिखने लगा था। बीच में वह अंग्रेजी कविताएँ लिखने लगा था जिसका उसे अफसोस रहा।
प्रश्न 3. अपनी कल्पना से लिखिए कि बच्चन ने लेखक के लिए 'नोट' में क्या लिखा होगा?
संभव है कि बच्चन जी लेखक से मिलना चाहते थे परंतु लेखक स्टूडियो में नहीं थे। इसलिए बच्चन जी ने उनके लिए एक नोट छोड़ा। लेखक उस नोट को पढ़कर आनंदित हो उठे। यह भी संभव होगा कि बच्चन जी ने लेखक के बारे में कुछ काव्य पंक्तियाँ लिखी हो और साथ ही मिलने की इच्छा व्यक्त की हो।
प्रश्न 4. बच्चन ने बच्चन के व्यक्तित्व के किन-किन रूपों को उभारा है?
लेखक ने बताया कि बच्चन जी अत्यंत सहयोगी, परोपकारी, संघर्षी तथा कर्तव्यनिष्ठ थे। उनका हृदय मक्खन के समान कोमल था। वे निस्वार्थ भाव से दूसरे की सहायता करते थे। वे बात के धनी थे। सच्चे अर्थों में वे एक महान कवि व अत्यंत सहज, सरल व साधारण व्यक्ति थे।
प्रश्न 5. बच्चन के अतिरिक्त लेखक को अन्य किन लोगों का तथा किस प्रकार का सहयोग मिला?
सुमित्रानंदन पंत
इन्होंने लेखक को इंडियन प्रेस में अनुवाद करने का काम दिलवाया। इसके अतिरिक्त उन्होंने हिंदी कविता लिखने के लिए प्रेरित किया।
सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'
'निराला जी' ने लेखक की कविता की प्रशंसा करके उसे प्रोत्साहित किया।
शारदा चरण उकील
इन्होंने लेखक को चित्रकारी की शिक्षा दी।
प्रश्न 6. लेखक के हिंदी लेखन में कदम रखने का क्रमानुसार वर्णन कीजिए।
सन 1933
लेखक की कविताएँ 'सरस्वती' और 'चाँद' पत्रिका में प्रकाशित हुई।
सन 1934-36
लेखक ने प्रायः अंग्रेजी या उर्दू में कविता व निबंध आदि लिखें।
सन 1937
लेखक ने फिर से हिंदी कविता लिखना आरंभ किया।
# उन्होंने 'निशा निमंत्रण के कवि के प्रति' नामक कविता लिखी जो आज भी अप्रकाशित है। उसके बाद लेखक ने निबंध कविताएँ लिखने जारी रखें।
प्रश्न 7. लेखक ने अपने जीवन में जिन कठिनाइयों को झेला है, उनके बारे में लिखिए।
लेखक ने अपने जीवन में आर्थिक, शारीरिक, मानसिक, पारिवारिक आदि कष्टों को सहन किया। उनकी युवा पत्नी का अचानक देहांत हो गया। उसे तरह-तरह के दुख झेलने पड़े। घर पर उसे ताने दिए जाते थे। अतः वह बिना सामान लिए दिल्ली आ गया। उसने साइन बोर्ड पर चित्र आदि बनाकर थोड़े बहुत पैसे कमाए। लेखक जीवनभर मन में अकेलापन महसूस करता रहा।

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