रुबाइयाँ, गज़ल (काव्य-सौंदर्य /शिल्प-सौंदर्य)

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रुबाइयाँ


काव्य सौंदर्य बोध संबंधी प्रश्न






पूरी कविता से काव्य-सौंदर्य/शिल्प-सौंदर्य के कुछ कॉमन पॉइंट्स: 




● सहज, सरल साहित्यिक हिंदी भाषा का प्रयोग है।
● शब्द-चयन सर्वथा उचित एवं सटीक है।
● संपूर्ण पद में दृश्य तथा श्रव्य-बिंबों का सुंदर प्रयोग है।
● प्रसाद- गुण तथा वात्सल्य रस का प्रयोग है।
● रुबाई छंद का सफल प्रयोग हुआ है।



निम्नलिखित काव्यांशों को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-


1.
आंगन में लिए चाँद के टुकड़े को खड़ी
हाथों पे झुलाती हैं उसे गोद-भरी
रह-रह के हवा में जो लोका देती है
पूँज उठती हैं खिलखिलाते बच्चे की हँसी।
नहला के छलके छलके निर्मल जल से
उलझे हुए गेसुओं में कंघी
किस प्यार से देखता हैं बच्चा मुँह को
करके जब घुटनियों में ले के हैं पिन्हाती कपड़े।

प्रश्न
(क) चाँद का टुकड़ा' कौन हैं? इस बिंब के प्रयोगगत भावों में क्या विशेषता हैं?
(ख) बच्चे को लेकर माँ के किन क्रियाकलापों का चित्रण किया गया हैं? उनसे उसके किस भाव की अभिव्यक्ति हो रही है?
(ग) 'किस प्यार से देखता है बच्चा मुँह को ' में अभिव्यक्त बच्चे के चष्टजन्य सौंदर्य की विशेषता को स्पष्ट कीजिए।
(घ) माँ और बच्चे के स्नेह-सबधों पर टिप्पणी कीजिए।

उत्तर -
(क) चाँद का टुकड़ा' माँ की गोद में खेल रहा वह बच्चा है, जिसे माँ हाथों में लिए हवा में झुला रही है। इस प्रयोग से बच्चे को प्रसन्न करने के लिए उसे हवा में झुलाती माँ का बिंब साकार हो उठा है।

(ख) बच्चे को लेकर माँ आँगन में खड़ी है। वह हँसाने के लिए बच्चे को हवा में झुला रही है, लोका दे रही है। इन क्रियाओं से प्रेम और वात्सल्य के साथ ही उसकी ममता की अभिव्यक्ति हो रही है।

(ग) किस प्यार से देखता है बच्चा मुँह को अंश में बालसुलभ और चेष्टाजन्य क्रियाएँ साकार हो उठी हैं। माँ बच्चे को नहला-धुलाकर जब अपने घुटनों में लेकर कपड़े पहनती है तो बच्चा अपनत्व भाव से मों के चेहरे को देखता है। ऐसे में बच्चे का सौंदर्य और भी निखर जाता है।

(घ) माँ और बच्चे का संबंध वात्सल्य और ममता से भरपूर होता है। बच्चा अपनी सारी जरूरतों के लिए जहाँ माँ पर निर्भर होता है, वहीं माँ को बच्चा सर्वाधिक प्रिय होता है। वह उसकी जरूरतों का ध्यान रखती है तथा प्यार और ममता से पोषित करके उसे बड़ा करती है।

2.
आँगन में ठनक रहा हैं जिदयाय है।
बालक तो हई चाँद में ललचाया है।
दर्पण उसे दे के कह रही हैं माँ
देख आईने में चाँद उतर आया है।

प्रश्न
(क) काव्यांश की भाषा की दो विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
(ख) यह काव्यांश किस छंद में लिखा गया हैं? विशेषता बताइए।
(ग) 'देख आईने में चाँद उतर आया है कथन के सौंदर्य को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर =
(क) काव्यांश की भाषा उर्दू-हिंदी भाषा है। इसमें सरलता, सुबोधता है। बाल-मनोविज्ञान का राजीव चित्रण है।

(ख) यह काव्यांश रुबाई छंद में लिखा गया है। इसमें चार पंक्तियाँ होती हैं। इसकी पहली व चौथी पंक्ति में तुक मिलाया जाता है तथा तीसरी पंक्ति स्वतंत्र होती है।

(ग) इस कथन में माँ की सूझ बूझ का वर्णन है। वह बच्चे की जिद को आईने में चाँद को दिखाकर पूरा करती है। यहाँ ग्रामीण संस्कृति प्रत्यक्ष रूप से साकार हो उठती है।



(ख) गजल





पूरी कविता से काव्य-सौंदर्य/शिल्प-सौंदर्य के कुछ कॉमन पॉइंट्स: 


● इस शेर का भाव और भाषा दोनों उर्दू भाषा से प्रभावित हैं।
● शब्द चयन उचित एवं सटीक है।
● अभिव्यक्ति की दृष्टि से शेर सरल और ह्रदयग्राही है।
● इस शेर में कवि ने प्रकृति के सौंदर्य का सजीव वर्णन किया है।



निम्नलिखित शेरों को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-


हम हों या किस्मत हो हमारी दोनों को इक ही काम मिला
किस्मत हमको रो लेते है हम किस्मत को रो ले हैं।
जो मुझको बदनाम करे हैं काश वे इतना सोच सकें
मेरा परदा खोले हैं या अपना परदा खोले हैं।

प्रश्न
(क) गजल के इस अंश की दो भाषिक विशेषताएँ बताइए।
(ख) प्रधम शेर में आइ पंक्तियों की व्यंजना स्पष्ट कजिए।
(ग) भाव-सौंदर्य स्पष्ट कजिए-
'मेरा परदा खोले हैं या अपना परदा खोले हैं।

उत्तर -
(क) गजल में उर्दू भाषा के शब्दों का अधिक प्रयोग होता है। दूसरा, इसमें सर्वनामों का प्रयोग होता है। जो, वे, हम, अपना आदि सर्वनाम उर्दू गजलों में पाए जाते हैं। इनका लक्ष्य कोई भी हो सकता है।

(ख) कवि अपनी किस्मत से असंतुष्ट है। वह उसे अपने ही समान मानता है। दोनों एक-दूसरे को कोसते रहते हैं।

(ग) कवि इन पंक्तियों में कहता है कि उसको बदनाम करने वाले लोग स्वयं ही बदनाम हो रहे हैं। वे अपने चरित्र को स्वयं ही उद्घाटित कर रहे हैं।



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