Laghu Kathayen Sher Pehchan Chaar Haath Sajha 12 Important Question Answer | Class 12th Hindi Laghu Kathayen Sher Pehchan Chaar Haath Sajha | लघुकथा शेर हाथी पहचान चार हाथ साझा
प्रश्न 1. लेखक ने गधे को किधर जाते देखा ? वह किस गलतफहमी में था ?
उत्तर - अगले दिन लेखक ने एक गधा देखा जो लंगड़ाता हुआ शेर के मुँह की तरफ चला जा रहा था। लेखक को उसकी बेवकूफी पर संख्त गुस्सा आया और वह उसे समझाने के लिए झाड़ी से निकलकर उसके सामने आया। लेखक ने उससे पूछा, “तुम शेर के मुँह में अपनी इच्छा से क्यों जा रहे हो ?” उसने कहा, “वहाँ हरी घास का एक बहुत बड़ा मैदान है। मैं वहाँ बहुत आराम से रहूँगा और खाने के लिए खूब घास मिलेगी।” लेखक ने कहा, “वह शेर का मुँह है। ”उसने कहा, “गधे, वह शेर का मुँह जरूर है, पर वहाँ है हरी घास का मैदान।” इतना कहकर वह शेर के मुँह के अंदर चला गया। वह वहाँ हरी घास मिलने का भ्रम पाले हुए था।
प्रश्न 2. गन्ने की फसल तैयार होने पर किसान ने क्या चाहा और हाथी ने क्या किया ?
उत्तर : किसान फसल की सेवा करता रहा और समय पर जब गन्ने तैयार हो गए तो वह हाथी को खेत पर बुला लाया। किसान चाहता था कि फसल आधी-आधी बाँट ली जाए। जब उसने हाथी से यह बात कही तो हाथी काफी बिगड़ा। हाथी ने कहा, “अपने और पराये की बात मत करो। यह छोटी बात है। हम दोनों ने मिलकर मेहनत की थी हम दोनों उसके स्वामी हैं। आओ, हम मिलकर गन्ने खाएँ। ”किसान के कुछ कहने से पहले ही हाथी ने बढ़कर अपनी सूँड़ से एक गन्ना तोड़ लिया और आदमी से कहा., “आओ खाएँ।” गन्ने का एक छोर हाथी की सूँड़ में था और दूसरा आदमी के मुँह में। गन्ने के साथ-साथ आदमी हाथी की तरफ खिंचने लगा तो उसने गन्ना छोड़ दिया। इस प्रकार हाथी सारी फसल हथिया गया।
प्रश्न 3. लेखक ने कुत्तों को किस रूप में देखा ?
उत्तर - लेखक ने एक दिन कुत्तों के एक बड़े जुलूस को देखा जो कभी हँसते-गाते थे और कभी विरोध में चीखते-चिल्लाते थे। उनकी बड़ी-बड़ी लाल जीभें निकली हुई थीं, पर सब दुम दबाए थे। कुत्तों का यह जुलूस शेर के मुँह की तरफ बढ़ रहा था। लेखक ने चीखकर कुत्तों को रोकना चाहा, पर वे नहीं रुके और उन्होंने उसकी बात अनसुनी कर दी। वे सीधे शेर के मुँह में चले गए।
प्रश्न 4. ‘शेर’ कहानी का प्रतिपाद्य संक्षेप में बताइए।
उत्तर - इस कहानी में शेर व्यवस्था (सत्ता) का प्रतीक है। यह व्यवस्था तभी तक चुप रहती है जब तक उसकी आज्ञाओं का पालन होता रहे। सत्ता को अपना विरोध हजम नहीं होता। जब वह आक्रामक रूप धारण कर लेती है।
प्रश्न 5.‘पहचान’ लघुकथा का प्रतिपाद्य लिखिए।
उत्तर : ‘पहचान’ लघुकथा का प्रतिपाद्य यढ़ है कि राजा अर्थात् सत्ता को सदा बहरी, गूँगी और अंधी प्रजा पसंद आती है। उसे ऐसी प्रजा चाहिए जो बिना कुछ बोले, बिना कुछ सुने और बिना कुछ देखो उसकी हर आज्ञा का पालन करती रहे। ‘पहचान’ में लेखक ने इसी यथार्थ की पहचान कराई है। अपनी छद्म प्रगति और विकास के बहाने राजा (सत्ता) उत्पादन के सभी साधनों पर अपनी पकड़ मजबूत करता जाता है। वह लोगों के जीवन को स्वर्ग जैसा बनाने का झाँसा देकर अपना स्वयं का जीवन स्वर्गमय बनाता है। वह जनता को एकजुट होने से रोकता है और उसे भुलावे में रखता है। यही उसकी सफलता का राज़ है।
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प्रश्न 6.‘चार हाथ’ लघुकथा का क्या प्रतिपाद्य है ?
उत्तर : ‘चार हाथ’ लघुकथा पूँजीवादी व्यवस्था में मज़दूरों के शोषण को उजागर करती है। पूँजीपति भाँति-भाँति के उपाय करके मजदूरों को पंगु, असहाय बनाने के प्रयास करते हैं। वे मजदूरों के अहं और अस्तित्व को छिन्न-भिन्न करने के नए-नए तरीके ढूँढ़ते रहते हैं और अंततः उनकी अस्मिता को ही समाप्त कर देते हैं। मजदूर मालिक का विरोध करने की स्थिति में नहीं होते। मजदूरी तो मिल के कल-पुर्जे बन गए हैं। उन्हें लाचारी में आधी-अधूरी मजदूर पर भी काम करने को तैयार होना पड़ता है। यह लघुकथा मजदूरों की लाचारी-शोषण पर आधारित व्यवस्था पर करारा व्यंग्य करती है।
प्रश्न 7. ‘साझा’ लघुकथा का प्रतिपाद्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर - ‘साझा’ लघुकथा में उद्योगों पर कब्जा जमाने के बाद पूँजीपतियों की नज़र किसानों की जमीन और उत्पाद पर जमी नज़र को उजागर करती है। गाँव का प्रभुत्वशाली वर्ग भी इसमें शामिल रहता है। वह हाथी के रूप में किसान को साझा खेती करने का झाँसा देता है और अंत में उसकी सारी फसल हड़प कर लेता है। किसान इतना भोला होता है कि उसे यह पता भी नहीं चलता कि उसकी सारी कमाई हाथी (पूँजीपति) के पेट में चली जा रही है। यह हाथी और कोई नहीं बल्कि समाज का धनाद्य और प्रभुत्वशाली वर्ग है जो किसानों को धोखे में डालकर उसकी सारी मेहनत डकार जाता है। इस लघुकथा में किसानों की बदहाली के कारणों की भी पड़ताल की गई है।
प्रश्न 8. शेर गौतम बुद्ध की मुद्रा छोड़ अपने वास्तविक रूप में आकर क्यों झपटा ?
उत्तर - शेर की गौतम बुद्ध वाली मुद्रा ओढ़ी हुई थी। वह वास्तव में वैसा था ही नहीं। वह गौतम बुद्ध जैसा दिखाई देने का ढोंग कर रहा था। जब बात उसके विपरीत गई तो वह अपने असली रूप में आ गया और लेखक पर झपटा। सत्ता पक्ष तभी तक गौतम बुद्ध की मुद्रा में रहता है जब जनता उसके कही बातों को आँख मूँदकर मानती रहती है। जो भी कोई उसकी पोल खोलता है या विरोध करता है, सत्ता पक्ष उसका गला घोंट देती है।
प्रश्न 9.‘साझा’ कहानी में लेखक ने क्या बताना चाहा है ?
उत्तर - ‘साझा’ कहानी में लेखक ने पूँजीपतियों की बुरी नीयत का पर्दाफाश किया है। उनकी नजर किसानों की जमीन तथा उनकी फसल पर लगी रहती है। इसमें गाँच का प्रभुत्वशाली वर्ग भी शामिल रहता है। वे सब मिलकर किसान को साझा खेती का झाँसा देते हैं और अंत में उनकी फसल हड़प लेते हैं। किसान को पता भी नहीं चलता और उसकी सारी कमाई हाथी के पेट में चली जाती है। यह हाथी और कोई नहीं बल्कि समाज का धनाद्य और प्रभावशाली वर्ग है।
प्रश्न 10. ‘शेर’ लघु कथा में शेर किस बात का प्रतीक है ? इस लघु कथा के माध्यम से हमारी व्यवस्था पर क्या व्यंग्य किया गया है ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर : ‘शेर’ कहानी के लेखक ने शेर को व्यवस्था का प्रतीक बताया है। यह व्यवस्था ही सत्ता है। यह प्रजा को अपने ढंग से चलाती है। यह व्यवस्था तब तक चुप रहती है जब तक इसकी हर आज्ञा का पालन होता रहे। इसका विरोध करने पर यह व्यवस्था शेर की तरह आक्रामक हो उठती है। इस लघु कथा के माध्यम से हमारी व्यवस्था पर यह व्यंग्य किया गया कि यह व्यवस्था ऊपरी तौर पर अहिंसावादी, न्यायप्रिय प्रतीत होती है, पर जब कोई इस व्यवस्था का विरोध करता है तब इस व्यवस्था का असली रूप (अहिंसक) सामने आ जाता है।
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प्रश्न 11. ‘शेर’ कहानी के आधार पर बताइए कि शेर के मुँह और रोजगार के दफ्तर के बीच क्या साम्य और अंतर है ? इस कहानी के द्वारा हमारी व्यवस्था पर क्या व्यंग्य किया गया है ?
उत्तर : शेर के मुँह के अन्दर जो भी जंगली जानवर एक बार जाता है, उसका अस्तित्व समाप्त हो जाता है। वह वहाँ से पुनः लौटकर कभी नहीं आया। आधुनिक रोजगार दफ्तर में लोग नौकरी की उम्मीद में वहाँ से चक्कर काटते रहते हैं पर उन्हें वहाँ से कभी नौकरी नहीं मिलती। पर इतना अंतर अवश्य है कि रोजगार दफ्तर उन्हें शेर के मुँह की भाँति निगलकर उनका अस्तित्व समाप्त नहीं करता। इस कहानी में हमारी व्यवस्था पर यह व्यंग्य है-शेर व्यवस्था का प्रतीक है। इस कहानी के द्वारा व्यवस्था पर यह व्यंग्य किया गया है कि व्यवस्था (सत्ता) तभी तक खामोश रहती है जब तक उसकी आज्ञाओं, इच्छाओं का पालन होता रहे। इसका विरोध होने पर वह शेर की तरह मुँह फाड़ लेती है और आक्रामक रूप धारण कर लेती है।
प्रश्न 12. लेखक शहर छोड़कर कहाँ भागा? क्यों?
उत्तर : लेखक के सिर पर सींग निकल रहे थे। उसे डर हो गया कि किसी दिन कोई कसाई उसे पशु समझकर पकड़ लेगा। इस कारण वह आदमियों से डरकर जंगल में भागा ताकि वहाँ बच सके। दूसरे शब्दों में, लेखक व्यवस्था का विरोध करने लगा था। व्यवस्था के कहर से बचने के लिए वह जंगल में भागा ताकि वहाँ पर भयमुक्त होकर जीवन बिता सके।
प्रश्न 13. जंगल में लेखक को आशा के विपरीत कौन-सा दृश्य नज़र आया?
उत्तर : आदमियों विशेषकर कसाई से भाग रहे लेखक ने जंगल में देखा कि बरगद के पेड़ के नीचे एक शेर बैठा था, जिसका मुँह खुला हुआ था। इस मुँह में जंगल के छोटे-मोटे जानवर एक लाइन में जा रहे थे। शेर उन्हें बिना हिले-डुले तथा बिना चबाए गटकता जा रहा था। इस भयानक दृश्य को देखकर लेखक बेहोश होते-होते बचा क्योंकि उसने ऐसे दृश्य की कल्पना भी नहीं की थी।


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