ऐसी भी बातें होती हैं Important Question Answer | Extra Questions Hindi | ऐसी भी बातें होती हैं (लता मंगेशकर) Most Important Questions Answer

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ऐसी भी बातें होती हैं Important Question Answer | NCERT Hindi Notes

हिंदी के प्रसिद्ध पाठ “ऐसी भी बातें होती हैं” (लता मंगेशकर से साक्षात्कार - यतींद्र मिश्र) के सबसे महत्वपूर्ण अतिरिक्त प्रश्न-उत्तर (Extra Important Questions) यहाँ दिए गए हैं। ये प्रश्न NCERT अभ्यास से अलग हैं और वार्षिक परीक्षाओं की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इस पोस्ट में Aisi Bhi Batein Hoti Hai Extra Question Answer बहुत ही सरल और परीक्षा-उपयोगी भाषा में प्रस्तुत किए गए हैं।


परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण अतिरिक्त प्रश्न (Extra Important Questions)

प्रश्न 1. कम उम्र में ही पिता का साया उठ जाने के कारण लता मंगेशकर को किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा और उन्होंने उस दौर से क्या सीखा?
उत्तर: मात्र 13 वर्ष की आयु में पिता का निधन हो जाने के कारण लता जी पर पूरे परिवार (माँ और छोटे भाई-बहनों) की ज़िम्मेदारी आ गई थी। घर चलाने के लिए उन्हें न चाहते हुए भी फिल्मों में अभिनय करना पड़ा। उन्हें दिन भर एक स्टूडियो से दूसरे स्टूडियो भाग-दौड़ करनी पड़ती थी। इन कठिन परिस्थितियों से उन्होंने स्वाभिमान के साथ जीना सीखा। उन्होंने सीखा कि चाहे कितनी भी बड़ी मुसीबत क्यों न आ जाए, किसी के आगे हाथ नहीं फैलाना चाहिए और हमेशा सही बात पर अडिग रहना चाहिए।
प्रश्न 2. लता मंगेशकर को बचपन में फिल्मों में अभिनय करना क्यों नापसंद था?
उत्तर: लता जी बचपन से ही संगीत में डूबी रहती थीं, उनका मन केवल गायन में लगता था। उन्हें फिल्मों में अभिनय करना बिल्कुल पसंद नहीं था क्योंकि उन्हें चेहरे पर मेकअप थोपना, तेज़ लाइट्स के सामने खड़ा होना, और लोगों की भीड़ के सामने कभी रोने तो कभी हँसने का नाटक करना अजीब लगता था। वे स्वभाव से शर्मीली थीं, इसलिए अभिनय की यह कृत्रिम दुनिया उन्हें रास नहीं आती थी। उन्होंने यह काम केवल परिवार के भरण-पोषण की मजबूरी में किया था।
प्रश्न 3. उस्ताद अली अकबर खाँ के सरोद का तार टूटने की घटना से संगीत के विषय में क्या सिद्ध होता है? लता जी ने इस पर क्या प्रतिक्रिया दी?
उत्तर: उस्ताद अली अकबर खाँ जब सरोद वादन कर रहे थे, तो वे उसमें इतने मग्न हो गए कि शुद्ध स्वर के तेज़ आघात (चोट) से उनके सरोद का तार ही टूट गया। इस घटना से यह सिद्ध होता है कि संगीत में असीम शक्ति और गहराई होती है। लता जी का मानना है कि संगीत की सीमा इतनी अनंत है कि जब कोई कलाकार पूरी पवित्रता और डूबकर सुर लगाता है, तो कुछ भी अप्रत्याशित घट सकता है। इसी आधार पर वे तानसेन द्वारा दीपक राग गाकर दीये जलाने की कथाओं को भी संभव मानती हैं।
प्रश्न 4. "मेरा गाना अमर है, पर शरीर तो अमर नहीं।" इस कथन के माध्यम से लता जी के व्यक्तित्व के किस विशेष गुण का पता चलता है?
उत्तर: इस कथन के माध्यम से लता जी के व्यक्तित्व की दार्शनिकता, विनम्रता और वास्तविकता को स्वीकार करने की क्षमता का पता चलता है। वे इतनी बड़ी गायिका होकर भी अहंकार से कोसों दूर हैं। वे जानती हैं कि भौतिक शरीर नश्वर है और एक दिन नष्ट हो जाएगा, लेकिन एक कलाकार की सच्ची पहचान उसकी कला होती है। उनका मानना है कि उनका संगीत और उनके गाए गीत लोगों के दिलों में हमेशा जीवित (अमर) रहेंगे।
प्रश्न 5. लता जी के अनुसार उनके बचपन की होली आजकल मनाई जाने वाली होली से किस प्रकार भिन्न थी?
उत्तर: लता जी के अनुसार, उनके बचपन में होली आजकल की तरह हुड़दंग, दिन भर पानी में भीगने और रासायनिक रंगों से नहीं खेली जाती थी। उनके घर में होलिका दहन के दिन पूजा होती थी और नारियल व मिठाइयाँ चढ़ाई जाती थीं। अगले दिन जली हुई राख (गुड़वड़) से होली खेलते थे। रंग-पंचमी के दिन उनके माता-पिता बच्चों पर केवल थोड़ा सा केसर का पानी छिड़कते थे। उस समय त्योहारों में सादगी, पवित्रता और पारिवारिक अनुशासन होता था, जो आजकल की होली में देखने को नहीं मिलता।
प्रश्न 6. बचपन में लता मंगेशकर के सपनों पर किस कलाकार का प्रभाव था और क्यों?
उत्तर: बचपन में लता मंगेशकर के सपनों पर महान शास्त्रीय गायक पंडित कुमार गंधर्व का बहुत प्रभाव था। जब कुमार गंधर्व जी गाने के लिए बैठते थे, तो वे अपनी काली शेरवानी पर अपने जीते हुए बहुत सारे मेडल (Medals) लगाकर बैठते थे। छोटी लता को यह बात बहुत अच्छी लगती थी। उन्हें देखकर लता जी के मन में भी यह सपना पनपता था कि जब वे बड़ी होकर गाएंगी, तो उन्हें भी ऐसे ही ढेर सारे मेडल मिलेंगे और वे उन्हें पहनकर कार्यक्रमों में जाया करेंगी।
प्रश्न 7. पुराने जमाने के संगीतकारों और नए संगीतकारों (जैसे ए.आर. रहमान, जतिन-ललित) के गीतों की रचना-प्रक्रिया के बारे में लता जी की क्या राय है?
उत्तर: लता जी दोनों पीढ़ियों के संगीतकारों का बहुत सम्मान करती हैं। उनका मानना है कि यदि पुराने गीत (जैसे 'आएगा आने वाला') आज के संगीतकार (रहमान) बनाते, तो शायद उनका प्रभाव, धुनें और तर्ज़ अलग होती। उसी प्रकार यदि आज के गीत पुराने संगीतकार (जैसे नौशाद साहब) बनाते, तो वे भी अलग शैली में होते। लता जी के अनुसार हर दौर की अपनी एक अलग तकनीक और खासियत होती है। वे नए संगीतकारों की प्रतिभा की भी उतनी ही सराहना करती हैं जितनी कि पुराने संगीतकारों की।
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