Do Bailon Ki Katha Class 9 Question Answer | Hindi Chapter 1 Notes | Class 9 Hindi Chapter 1 Question Answer: दो बैलों की कथा (NCERT)

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दो बैलों की कथा Class 9 Question Answer | NCERT Solutions Hindi

कक्षा 9 हिंदी (क्षितिज भाग 1) के प्रसिद्ध पाठ "दो बैलों की कथा" (मुंशी प्रेमचंद) के अभ्यास खण्ड के सभी प्रश्न-उत्तर यहाँ दिए गए हैं। यह लेख विशेष रूप से छात्रों के नोट्स बनाने और परीक्षा की तैयारी के लिए अत्यधिक उपयोगी है।

अभ्यास: रचना से संवाद (मेरे उत्तर मेरे तर्क)

निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं?

प्रश्न 1. कहानी में हीरा और मोती का आपसी संबंध किस गुण को मुख्य रूप से दर्शाता है?
  • (क) प्रतिस्पर्धा और प्रतिद्वंद्विता
  • (ख) एकता और सहयोग
  • (ग) गर्व और दंभ
  • (घ) विद्रोह और क्रोध
सही उत्तर: (ख) एकता और सहयोग
तर्क: पूरी कहानी में हीरा और मोती एक-दूसरे का साथ देते हैं, एक-दूसरे की भावनाएँ समझते हैं और हर संकट (जैसे साँड़ से भिड़ना या काँजीहौस की घटना) का मिलकर सामना करते हैं, जो उनकी एकता और सहयोग को दर्शाता है।
प्रश्न 2. हीरा-मोती ने नया स्थान स्वीकार क्यों नहीं किया?
  • (क) उन्हें भरपेट भोजन दिया गया।
  • (ख) उन्हें बहुत मोटी रस्सी से बाँधा गया।
  • (ग) मालिक ने बेचा, यह सोचकर उन्हें अपमान लगा।
  • (घ) उन्हें अलग-अलग बाँधा गया।
सही उत्तर: (ग) मालिक ने बेचा, यह सोचकर उन्हें अपमान लगा。
तर्क: बैल झूरी से बहुत प्रेम करते थे। जब झूरी का साला (गया) उन्हें ले जाने लगा, तो उन्हें लगा कि उनके मालिक ने उन्हें बेच दिया है। यह विचार उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुँचाने वाला था, इसलिए उन्होंने नया स्थान स्वीकार नहीं किया।
प्रश्न 3. बैलों ने रस्सी तोड़कर घर लौटने का निर्णय क्यों लिया?
  • (क) कष्टों से बचने के लिए
  • (ख) स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए
  • (ग) अभिमान की रक्षा के लिए
  • (घ) अपनापन पाने के लिए
सही उत्तर: (घ) अपनापन पाने के लिए
तर्क: गया के घर उन्हें रूखा-सूखा भोजन मिला और मार पड़ी, लेकिन इससे भी बड़ी बात यह थी कि वहाँ उन्हें प्रेम और अपनापन नहीं मिला। वे झूरी के प्यार और अपनत्व के भूखे थे, इसलिए उन्होंने रस्सी तोड़कर वापस लौटने का निर्णय लिया।
प्रश्न 4. गया द्वारा डंडे से मारने पर मोती का आक्रोश किस मानवीय मनोवृत्ति का द्योतक है?
  • (क) स्वाभिमान
  • (ख) अहिंसा
  • (ग) पराधीनता
  • (घ) अन्याय की रक्षा
सही उत्तर: (क) स्वाभिमान
तर्क: मोती उग्र स्वभाव का था और उसमें गहरा आत्मसम्मान (स्वाभिमान) था। बिना कारण डंडे से पीटे जाने पर उसका स्वाभिमान आहत हुआ और इसी कारण उसमें भारी आक्रोश उत्पन्न हो गया।
प्रश्न 5. कहानी में बैलों की ‘मूक-भाषा’ का प्रयोग लेखक ने किस लिए किया?
  • (क) कहानी को रोचक बनाने के लिए
  • (ख) मनुष्य जैसी चेतना दिखाने के लिए
  • (ग) संवादों को छोटा रखने के लिए
  • (घ) कथा में हास्य उत्पन्न करने के लिए
सही उत्तर: (ख) मनुष्य जैसी चेतना दिखाने के लिए
तर्क: मूक-भाषा के माध्यम से लेखक यह जताना चाहते हैं कि जानवरों के अंदर भी मनुष्यों की तरह ही सोचने, समझने और भावनाएँ व्यक्त करने की चेतना (consciousness) होती है। वे भी सुख-दुख और प्रेम महसूस करते हैं।
प्रश्न 6. ‘दो बैलों की कथा’ को यदि स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ें, तो हीरा और मोती किसके प्रतीक हो सकते हैं?
  • (क) भारत पर अंग्रेज़ों के क्रूर और अन्यायपूर्ण शासन के
  • (ख) स्वतंत्रता संग्राम में पशुओं के योगदान के
  • (ग) सत्याग्रह और अहिंसा के आंदोलन के
  • (घ) स्वतंत्रता के लिए भारतीय जनता के संघर्ष के
सही उत्तर: (घ) स्वतंत्रता के लिए भारतीय जनता के संघर्ष के
तर्क: जिस प्रकार भारतीय जनता ने आज़ादी पाने के लिए अंग्रेज़ों की यातनाएँ सहीं और लंबी लड़ाई लड़ी, उसी प्रकार हीरा और मोती ने भी अपनी स्वतंत्रता पाने के लिए हर मुसीबत और अत्याचार का डटकर सामना किया।

अभ्यास: मेरी समझ मेरे विचार (NCERT Textbook Solutions)

प्रश्न 1. "दूसरे दिन गया ने बैलों को हल में जोता, पर इन दोनों ने जैसे पाँव न उठाने की कसम खा ली थी।" जब बैल नए मालिक के यहाँ गए, तो उन्होंने काम करने से इनकार क्यों कर दिया था?
बैलों (हीरा और मोती) ने नए मालिक (गया) के यहाँ काम करने से इसलिए इनकार कर दिया क्योंकि उन्हें लगा कि उनके सच्चे मालिक झूरी ने उन्हें बेच दिया है। वे झूरी से बहुत प्रेम करते थे और अपना घर नहीं छोड़ना चाहते थे। नए घर में उन्हें अपनापन महसूस नहीं हुआ और गया का व्यवहार भी उनके प्रति बहुत कठोर, निर्दयी और अपमानजनक था। इसी क्रोध और दुख के कारण उन्होंने काम करने से मना कर दिया।
प्रश्न 2. "गाँव के इतिहास में यह घटना अभूतपूर्व न होने पर भी महत्वपूर्ण थी।" बैलों का घर लौट आना कोई साधारण घटना नहीं है। कैसे? (संकेत– वे क्यों लौट आए, उनके और झूरी के मन में कौन-कौन से भाव रहे होंगे, क्या वास्तविक जीवन में भी ऐसा होता है आदि।)
बैलों का घर लौट आना साधारण घटना इसलिए नहीं थी क्योंकि आमतौर पर बेचे गए या दूर भेजे गए जानवर इतनी आसानी से और इतनी दूर से अपने पुराने मालिक के पास वापस नहीं आ पाते हैं। वे झूरी के प्रति अपने असीम प्रेम, वफादारी और आत्मीयता के कारण पगहे (रस्सियाँ) तुड़ाकर वापस लौटे थे।

उन्हें देखकर झूरी खुशी और स्नेह से गदगद हो गया होगा, वहीं बैलों के मन में अपने मालिक से दोबारा मिलने की अपार शांति और संतोष रहा होगा। वास्तविक जीवन में भी कई बार कुत्तों, घोड़ों या अन्य पालतू जानवरों का अपने मालिक के प्रति ऐसा गहरा लगाव और वफादारी देखने को मिलती है।
प्रश्न 3. "मोती ने मूक-भाषा में कहा— अब तो नहीं सहा जाता, हीरा!" 'कभी-कभी संघर्ष करना आवश्यक हो जाता है' इस कथन को कहानी के उदाहरणों से सिद्ध कीजिए।
यह कथन बिल्कुल सत्य है। कहानी में कई ऐसे प्रसंग आए हैं जहाँ बैलों को अपने अस्तित्व, सम्मान और आज़ादी की रक्षा के लिए संघर्ष करना पड़ा।
उदाहरण:
1. गया के घर से भागने और उसके अत्याचारों से बचने के लिए उन्हें रस्सियाँ तोड़कर संघर्ष करना पड़ा।
2. रास्ते में जब एक विशाल साँड़ ने उन पर हमला किया, तो भागने के बजाय दोनों ने मिलकर उसका सामना किया और उसे खदेड़ दिया।
3. काँजीहौस में कैद होने पर भूखे मरने की नौबत आ गई थी, तब उन्होंने दीवार तोड़कर अन्य जानवरों की जान बचाई। यह दर्शाता है कि जब अन्याय सीमा पार कर जाए, तो संघर्ष करना ही पड़ता है।
प्रश्न 4. "जब पेट भर गया और दोनों ने आजादी का अनुभव किया..." हीरा एवं मोती 'स्वतंत्रता' और 'अपनापन' दोनों में से किस भावना से अधिक प्रेरित थे? कारण सहित लिखिए।
हीरा और मोती 'स्वतंत्रता' और 'अपनापन' दोनों भावनाओं से प्रेरित थे, लेकिन उनके भीतर 'अपनापन' की भावना अधिक प्रबल थी।

वे काँजीहौस और गया के घर से इसलिए भागे क्योंकि उन्हें स्वतंत्रता चाहिए थी और अत्याचार पसंद नहीं था। लेकिन आज़ाद होने के बाद भी वे हमेशा लौटकर अपने असली मालिक 'झूरी' के पास ही आना चाहते थे जहाँ उन्हें सच्चा प्यार और अपनापन मिलता था। मटर के खेत में आज़ाद होकर पेट भरने के बाद भी, और दढ़ियल के चंगुल से छूटने के बाद भी वे सीधे झूरी के घर (थान) पर ही आकर रुके। यह सिद्ध करता है कि वे अपनापन के अधिक भूखे थे।
प्रश्न 5. "बैलों ने जैसे पाँव न उठाने की कसम खा ली थी।" 'अत्याचार सहना भी अन्याय में भागीदारी है'— क्या आप इस कथन से सहमत हैं? अपने उत्तर के कारण भी बताइए।
हाँ, हम इस कथन से पूर्णतः सहमत हैं। यदि कोई व्यक्ति या जीव बिना विरोध किए अत्याचार सहता रहता है, तो वह अत्याचारी का मनोबल और हिम्मत दोनों बढ़ाता है।

कहानी में हीरा और मोती ने गया के घर उसका अत्याचार चुपचाप सहने के बजाय उसका डटकर विरोध किया और हल में पाँव न उठाने की कसम खा ली। यदि वे चुपचाप मार खाते रहते और काम करते रहते, तो गया का अत्याचार उन पर और बढ़ जाता। इसलिए, अन्याय का विरोध करना न्याय की रक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है।
प्रश्न 6. "बहुत दिनों साथ रहते-रहते दोनों में भाईचारा हो गया था।" हीरा और मोती अभिन्न मित्र थे। कहानी की किन-किन घटनाओं के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है? कम से कम तीन बिंदु लिखिए।
हीरा और मोती की सच्ची मित्रता सिद्ध करने वाले तीन प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:

1. मूक संवाद और आपसी समझ: दोनों एक-दूसरे के मन की बात बिना बोले समझ लेते थे। नाँद में चारा खाते समय एक मुँह डालता तो दूसरा भी डालता, और एक हटाता तो दूसरा भी हटा लेता था।
2. संकट में साथ देना: जब एक विशाल साँड़ ने उन पर हमला किया, तो दोनों ने अपनी जान बचाने के लिए भागने के बजाय एक-दूसरे का साथ दिया और मिलकर साँड़ को परास्त किया।
3. विपत्ति में न छोड़ना: जब मटर के खेत में मोती कीचड़ में फँस गया और रखवालों ने उसे पकड़ लिया, तब हीरा भाग सकता था। लेकिन अपने मित्र को संकट में देखकर वह वापस आ गया और दोनों साथ में पकड़े गए।
प्रश्न 7. "उसी समय मालकिन ने आकर दोनों के माथे चूम लिए।" कहानी में मालकिन और छोटी लड़की, दोनों के व्यवहार की तुलना कीजिए।
मालकिन (झूरी की पत्नी): मालकिन का व्यवहार शुरुआत में कठोर, व्यावहारिक और स्वार्थपूर्ण था। जब बैल पहली बार भागकर वापस आए, तो वह क्रोधित हुई, उन्हें 'नमकहराम' कहा और उन्हें सूखा भूसा दिया। उसे बैलों के काम से मतलब था, उनकी भावनाओं से नहीं। हालाँकि, अंत में बैलों का प्यार और दुर्दशा देखकर उसका हृदय पिघल गया और उसने उनके माथे चूम लिए।

छोटी लड़की (भैरो की बेटी): छोटी लड़की का व्यवहार अत्यंत मासूम, संवेदनशील और निस्वार्थ प्रेम से भरा था। उसकी अपनी माँ मर चुकी थी और सौतेली माँ उसे मारती थी, इसलिए वह बैलों का दुख और दर्द समझती थी। वह छुपकर उन्हें रोटियाँ खिलाती थी और अंत में उसी ने उनकी रस्सियाँ खोलकर उन्हें भागने में मदद की।

अभ्यास: मेरी कल्पना मेरे अनुमान

प्रश्न 1. "उसने उनके माथे सहलाए और बोली– खोले देती हूँ। चुपके से भाग जाओ..." यदि आप वह छोटी लड़की होते, तो बैलों की मदद किस प्रकार करते?
यदि मैं उस छोटी लड़की की जगह होता/होती, तो मैं भी बैलों की दर्दनाक स्थिति देखकर उसी प्रकार उनकी मदद करता। मैं भी रात के अंधेरे में चुपके से जाकर उनकी रस्सियाँ खोल देता ताकि वे गया के क्रूर अत्याचारों से बच सकें और आजाद हो सकें। इसके अलावा, मैं उनके लिए थोड़ा चारा और पानी भी साथ ले जाता ताकि उन्हें रास्ते में भूख न लगे और वे बिना थके सुरक्षित अपने असली घर (झूरी के पास) पहुँच सकें।
प्रश्न 2. "दोनों गधे अभी तक ज्यों-के-त्यों खड़े थे।" भय और संकोच इंसान को अवसर मिलने पर भी जकड़े रखता है। क्या आप इस कथन से सहमत हैं? इस वाक्य के संबंध में कहानी और अपने अनुभवों से उदाहरण लेते हुए अपने विचार लिखिए।
हाँ, मैं इस कथन से पूर्णतः सहमत हूँ। कई बार इंसान या जानवर डर, संकोच और अनिश्चितता के कारण मिले हुए अवसर का भी लाभ नहीं उठा पाते।

कहानी के संदर्भ में: जब हीरा और मोती ने कांजीहौस की कच्ची दीवार तोड़ दी, तो वहाँ कैद सभी जानवर भाग गए। लेकिन दोनों गधे डर के मारे वहीं खड़े रहे। उन्हें यह भय था कि अगर वे पकड़े गए तो उन्हें और भी ज्यादा मार पड़ेगी। इसी डर ने उन्हें आज़ाद होने के अवसर से वंचित कर दिया।

अनुभव के आधार पर: असल जीवन में भी कई बार लोग असफलता के डर से नई और अच्छी नौकरी के अवसर छोड़ देते हैं या कोई नया काम शुरू करने से घबराते हैं। उन्हें लगता है कि 'अगर नुकसान हो गया तो क्या होगा?' यही भय उन्हें जीवन भर एक ही स्थिति में जकड़े रखता है और वे कभी प्रगति नहीं कर पाते।

अभ्यास: मेरे अनुभव मेरे विचार

प्रश्न 1. "दोस्तों में घनिष्ठता होते ही धौल-धप्पा होने लगता है। इसके बिना दोस्ती कुछ फुसफुसी, कुछ हल्की-सी रहती है, जिस पर ज्यादा विश्वास नहीं किया जा सकता।" क्या आप इस बात से सहमत हैं? आपको ऐसा क्यों लगता है? अपने अनुभवों के आधार पर बताइए।
हाँ, मैं इस बात से पूरी तरह सहमत हूँ। सच्ची दोस्ती में कोई औपचारिकता (formality) या दिखावा नहीं होता। दोस्तों के बीच थोड़ी बहुत मस्ती, हँसी-मज़ाक, रूठना-मनाना और धौल-धप्पा (मार-पीट का मज़ाक) होना आम बात है।

मुझे ऐसा इसलिए लगता है क्योंकि जब दो लोग एक-दूसरे के साथ पूरी तरह सहज महसूस करते हैं, तभी वे खुलकर एक-दूसरे से मज़ाक कर पाते हैं। यदि दोस्ती में हर समय सोच-समझकर बोलना पड़े या केवल औपचारिकता रहे, तो वह दोस्ती गहरी नहीं होती बल्कि एक सामान्य जान-पहचान मात्र लगती है। ऐसे रिश्तों पर संकट के समय पूरा विश्वास नहीं किया जा सकता।
प्रश्न 2. "हीरा ने तिरस्कार किया– गिरे हुए बैरी पर सींग न चलाना चाहिए।" "यह सब ढोंग है। बैरी को ऐसा मारना चाहिए कि फिर न उठे।" आपका इस संबंध में क्या विचार है? आप किसके साथ हैं— हीरा के या मोती के या दोनों के? क्यों?
मेरे विचार से दोनों अपनी-अपनी जगह सही हैं, परंतु मैं मोती के विचार से अधिक सहमत हूँ।

हीरा का विचार आदर्शवादी और सैद्धांतिक है कि गिरे हुए दुश्मन पर वार नहीं करना चाहिए, जो नैतिक दृष्टि से बहुत उच्च है। परंतु मोती का विचार अधिक व्यावहारिक (practical) है कि दुश्मन को इतना मारना चाहिए कि वह दोबारा सिर न उठा सके।

आज के समय में यदि हम किसी चालाक और क्रूर दुश्मन को दया करके छोड़ देते हैं, तो वह हमारी कमजोरी समझकर दोबारा हम पर अधिक ताकत से हमला कर सकता है। इसलिए दुष्ट प्रकृति के शत्रुओं को पूरी तरह परास्त करना ही अपनी सुरक्षा के लिए उचित होता है।
प्रश्न 3. "हम और तुम इतने दिनों एक साथ रहे। आज तुम विपत्ति में पड़ गए तो मैं तुम्हें छोड़कर अलग हो जाऊँ?" क्या कभी आपने किसी विपत्ति या चुनौती का सामना अपने किसी मित्र या परिजन के साथ मिलकर किया है? उस घटना के विषय में बताइए।
हाँ, जीवन में ऐसी परिस्थितियाँ अक्सर आती हैं जब हमें अपनों की आवश्यकता होती है।

एक बार मैं और मेरा मित्र स्कूल से घर लौट रहे थे। तभी रास्ते में एक सुनसान जगह पर कुछ आवारा और खतरनाक कुत्तों ने हम पर भौंकते हुए हमला कर दिया। हम दोनों बहुत डर गए थे। यदि हम में से कोई एक भागता, तो कुत्ते दूसरे को काट लेते। इसलिए हमने भागने और एक-दूसरे को अकेला छोड़ने के बजाय हिम्मत से काम लिया।

हमने अपनी पीठ एक-दूसरे की तरफ कर ली और रास्ते में पड़े कुछ पत्थर और डंडे उठाकर जोर-जोर से चिल्लाने लगे। हमारा यह सम्मिलित विरोध और साहस देखकर कुत्ते डर गए और वहाँ से भाग गए। उस दिन मुझे समझ आया कि विपत्ति में यदि मित्र साथ हो, तो बड़ी से बड़ी चुनौती का भी डटकर सामना किया जा सकता है।

अभ्यास: पशुओं के लिए कानून

प्रश्न 1. बैलों का काँजीहाउस में बंद होना न्याय और अन्याय दोनों को दर्शाता है। कैसे?
न्याय: आवारा या दूसरों के खेतों में घुसकर फसल बर्बाद करने वाले पशुओं को पकड़कर काँजीहाउस (पशु-फाटक) में बंद करना किसानों की फसल बचाने की दृष्टि से 'न्याय' है, ताकि समाज में व्यवस्था बनी रहे।

अन्याय: काँजीहाउस में बंद बेजुबान जानवरों को खाने-पीने के लिए चारा-पानी न देना, उन्हें भूखा मारना और अंततः कसाइयों के हाथों नीलाम कर देना सरासर 'अन्याय' और क्रूरता है।
प्रश्न 2. यदि आपको अवसर मिले तो आप बैलों की ओर से कौन-कौन से कानूनी अधिकार माँगेंगे?
यदि मुझे बैलों की ओर से कानूनी अधिकार माँगने का अवसर मिले, तो मैं निम्नलिखित अधिकार माँगूँगा:
  • भोजन और पानी का अधिकार: पशुओं को समय पर पर्याप्त चारा और साफ पानी मिलना चाहिए।
  • क्रूरता से बचाव का अधिकार: उनसे अमानवीय व्यवहार करने, डंडे से पीटने या भूखा रखने पर मालिक के खिलाफ सख्त सजा का प्रावधान होना चाहिए।
  • श्रम सीमा का अधिकार: किसी भी पशु से उसकी क्षमता से अधिक काम लेने या भारी बोझ लादने पर कानूनी रोक होनी चाहिए।
  • चिकित्सा का अधिकार: बीमार या घायल होने पर उनका मुफ्त और उचित इलाज होना चाहिए।
प्रश्न 3. मान लीजिए कि हीरा-मोती अपने साथ हुए अन्याय की शिकायत करना चाहते हैं। उनकी ओर से उनकी शिकायत थानाध्यक्ष को करते हुए एक पत्र लिखिए। (संकेत– "थानाध्यक्ष महोदय, हमारा नाम... है। हमारे साथ अन्याय हुआ है...।")
सेवा में,
थानाध्यक्ष महोदय,
थाना - झूरी का गाँव (प्रेम नगर),
दिनांक: 12 मार्च, 202X

विषय: पशुओं के प्रति हो रहे अन्याय और क्रूरता की शिकायत हेतु।

महोदय,
हमारा नाम हीरा और मोती है। हम झूरी नामक किसान के पालतू बैल हैं। हमारे साथ बहुत अन्याय हुआ है। हमारे मालिक के साले 'गया' ने हमें जबरदस्ती अपने घर ले जाकर बहुत यातनाएँ दीं। वह हमसे दिन-भर कड़ी मेहनत करवाता था, लेकिन खाने को सिर्फ सूखा भूसा देता था और छोटी-छोटी बातों पर डंडों से निर्दयतापूर्वक पीटता था।

वहाँ से जान बचाकर भागने पर हमें 'काँजीहाउस' में बंद कर दिया गया। वहाँ कई दिनों तक हमें अन्न-जल नहीं दिया गया, जिससे हम अधमरे हो गए। अंत में हमें एक कसाई (दढ़ियल) के हाथों नीलाम कर दिया गया, जो हमें मारने के लिए ले जा रहा था।

हम आपसे प्रार्थना करते हैं कि पशुओं पर हो रहे इस अत्याचार पर रोक लगाई जाए और गया तथा काँजीहाउस के व्यवस्थापकों के खिलाफ पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की जाए।

धन्यवाद!
भवदीय,
हीरा और मोती (झूरी के बैल)

अभ्यास: हमारी धरोहर और संस्कृति

प्रश्न 1. "वह अपना धर्म छोड़ दे लेकिन हम अपना धर्म क्यों छोड़ें!" कहानी के अनुसार हीरा और मोती सदैव ध्यान रखते थे कि कौन-से कार्य करने योग्य हैं और कौन-से नहीं। वे कौन-कौन से कार्य कभी नहीं करते थे?
हीरा और मोती भारतीय संस्कृति और उच्च आदर्शों के प्रतीक थे। वे निम्नलिखित कार्य कभी नहीं करते थे:
  • वे कभी भी औरतों पर सींग नहीं चलाते थे क्योंकि वे इसे कायरता और नारी का अपमान मानते थे।
  • वे निहत्थे और गिरे हुए शत्रु (बैरी) पर कभी वार नहीं करते थे।
  • वे अपने मालिक (झूरी) के प्रति कभी बेवफाई या नमकहरामी नहीं करते थे।
  • वे संकट के समय अपने मित्र को अकेला छोड़कर कभी नहीं भागते थे।
प्रश्न 2. "गिरे हुए बैरी पर सींग न चलाना चाहिए।" "लेकिन औरत जात पर सींग चलाना मना है, यह भूले जाते हो।" हीरा के ये कथन किन भारतीय मूल्यों की ओर संकेत करते हैं?
हीरा के ये कथन भारतीय संस्कृति के उन महान और उच्च मूल्यों की ओर संकेत करते हैं जो रामायण और महाभारत काल से हमारे समाज में स्थापित हैं। ये कथन मुख्य रूप से 'वीर धर्म', 'नारी सम्मान' और 'क्षमाशीलता' की ओर संकेत करते हैं।

भारतीय मूल्य हमें सिखाते हैं कि सच्चे वीर कभी निहत्थे, असहाय और गिरे हुए शत्रु पर वार नहीं करते। इसके साथ ही, भारतीय संस्कृति में नारी को पूजनीय माना गया है ("यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता:"), इसलिए उन पर हाथ (या सींग) उठाना महापाप और कायरता माना गया है।
प्रश्न 3. "दूसरे दिन गया ने बैलों को हल में जोता" (क) खेतों में जुताई के लिए बैल और हल कृषि के पारंपरिक उपकरण हैं। कृषि के अन्य पारंपरिक और आधुनिक उपकरणों तथा उनके उपयोग के विषय में पता लगाइए और लिखिए।
पारंपरिक उपकरण:
  • हल: बैलों की मदद से खेत की मिट्टी पलटने और जुताई करने के काम आता है।
  • हँसिया (दरांती): पकी हुई फसल (गेहूँ, धान आदि) को हाथ से काटने के काम आता है।
  • कुदाल/फावड़ा: मिट्टी खोदने, मेड़ बनाने और खरपतवार निकालने के काम आता है।
  • रहट: बैलों की सहायता से कुएँ से सिंचाई के लिए पानी निकालने के काम आता है।
आधुनिक उपकरण:
  • ट्रैक्टर: हल जोतने, बीज बोने और सामान ढोने का बहुउद्देश्यीय आधुनिक साधन।
  • हार्वेस्टर (कंबाइन): बड़ी तेजी से फसल काटने और अनाज को भूसे से अलग करने की मशीन।
  • ट्यूबवेल (पंपसेट): बिजली या डीजल की मदद से ज़मीन के नीचे से सिंचाई का पानी निकालने के लिए।
  • कल्टीवेटर: ट्रैक्टर के पीछे लगाकर मिट्टी को भुरभुरा बनाने और जुताई करने के लिए।
प्रश्न 3 (ख). भारत में बैल केवल पशु नहीं बल्कि कृषि संस्कृति का अभिन्न अंग हैं। लिखिए कि भारतीय गाँवों एवं शहरों में भी बैल किस-किस काम में सहायक होते हैं?
भारत एक कृषि प्रधान देश है जहाँ बैलों को प्राचीन काल से ही 'किसानों का मित्र' कहा जाता है। बैल केवल पशु नहीं, बल्कि हमारी कृषि संस्कृति का आधार हैं।

गाँवों में बैलों के उपयोग: खेतों की जुताई करना, पाटा लगाना, बैलगाड़ी के माध्यम से अनाज को खलिहानों से घर या मंडी तक पहुँचाना, कुएँ से रहट चलाकर सिंचाई करना और गन्ना पेरने वाले कोल्हू या तेल निकालने वाले घानी को चलाना।

शहरों में बैलों के उपयोग: शहरों में बैल मुख्य रूप से सामान ढोने (बैलगाड़ी/बुग्गी के माध्यम से) के काम आते हैं। इसके अलावा तंग गलियों में जहाँ ट्रैक्टर या ट्रक नहीं जा सकते, वहाँ निर्माण सामग्री (ईंट, रेत आदि) पहुँचाने में बैलों का ही उपयोग किया जाता है।

अभ्यास: अलग-अलग और साथ-साथ

"दो-चार बार मोती ने गाड़ी को सड़क की खाई में गिराना चाहा; पर हीरा ने संभाल लिया। वह ज्यादा सहनशील था।"
प्रश्न 1. कहानी के आधार पर हीरा और मोती की विशेषताएँ लिखिए।
(संकेत– धैर्यवान, गुस्सैल, मेहनती, शांत, सहनशील आदि)
कहानी के आधार पर हीरा और मोती की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
  • हीरा की विशेषताएँ: हीरा स्वभाव से बहुत शांत, समझदार और सहनशील था। वह विपरीत और कठिन परिस्थितियों में भी अपना धैर्य नहीं खोता था और हमेशा सोच-समझकर कदम उठाता था।
  • मोती की विशेषताएँ: मोती का स्वभाव उग्र, गुस्सैल और विद्रोही था। उसे अपने साथ या किसी और के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं होता था और वह ईंट का जवाब पत्थर से देने में विश्वास रखता था।
  • दोनों की समान विशेषताएँ: दोनों ही बैल बहुत मेहनती, अपने मालिक (झूरी) के प्रति स्वामीभक्त, पक्के मित्र, परोपकारी और स्वतंत्रता-प्रेमी थे।
प्रश्न 2. हीरा और मोती की विशेषताएँ कुछ-कुछ समान और कुछ-कुछ अलग हैं, किंतु उनकी भिन्न विशेषताएँ एक-दूसरे को पूरा करती हैं। कैसे?
हीरा और मोती का स्वभाव एक-दूसरे का पूरक (Complementary) था। जहाँ मोती उग्र और गुस्सैल था, वह अन्याय देखकर तुरंत हमलावर हो जाता था (जैसे गया की गाड़ी गिराना या साँड़ से भिड़ना)। ऐसे समय में हीरा अपने धैर्य और समझदारी से मोती को शांत करता था और स्थिति को बिगड़ने से बचाता था।

दूसरी ओर, कई बार हीरा का सीधापन और अत्यधिक सहनशीलता उन्हें मुसीबत में डाल देती थी, तब मोती अपने साहसी, उग्र स्वभाव और ताकत से हीरा की रक्षा करता था। जैसे मटर के खेत में जब हीरा पकड़ा गया, तो मोती भागने के बजाय वापस आ गया और रखवालों से भिड़ गया। इस प्रकार, अपनी अलग-अलग विशेषताओं के बावजूद वे एक-दूसरे की कमियों को पूरा करते थे और हर मुसीबत का मिलकर सामना करते थे।
प्रश्न 3. आपकी कक्षा में भी कुछ-कुछ समान और कुछ-कुछ भिन्न विशेषताओं वाले सहपाठी हैं। सबकी आवश्यकताएँ भी थोड़ी समान और थोड़ी भिन्न हैं। बताइए कि आप भिन्न विशेषताओं वाले सहपाठी से अपने लिए कैसा व्यवहार चाहते हैं? उनसे पता कीजिए कि वे आपसे अपने लिए कैसा व्यवहार चाहते हैं?
(संकेत– क्या-क्या करें और क्या-क्या न करें, कैसे पढ़ाई खेल आदि में एक-दूसरे की सहायता करें और साथ दें)
हाँ, मेरी कक्षा में भी विभिन्न स्वभाव और विशेषताओं वाले सहपाठी हैं। कोई पढ़ाई में बहुत होशियार है, तो कोई खेलकूद में माहिर है; कोई शांत रहता है, तो कोई बातूनी है।

मैं उनसे कैसा व्यवहार चाहता हूँ: मैं चाहता हूँ कि मेरी भिन्न विशेषताओं वाले सहपाठी मेरी कमजोरियों का मज़ाक न बनाएँ। यदि मैं गणित या विज्ञान में कमजोर हूँ, तो वे मुझे नीचा दिखाने के बजाय प्यार से समझाएँ। इसी तरह खेल के मैदान में भी वे मेरा सहयोग करें।

वे मुझसे कैसा व्यवहार चाहते हैं (पूछने पर पता चला): जब मैंने अपने सहपाठियों से बात की, तो उन्होंने बताया कि वे भी मुझसे सम्मान, बिना स्वार्थ के सहयोग और सच्ची मित्रता की अपेक्षा रखते हैं।

निष्कर्ष: हमें हीरा और मोती की तरह एक-दूसरे का साथ देना चाहिए। जो छात्र पढ़ाई में तेज़ हैं, वे कमज़ोर छात्रों की मदद करें और जो खेल में अच्छे हैं, वे बाकियों को सिखाएँ। हमें एक-दूसरे से ईर्ष्या करने के बजाय मिल-जुलकर आगे बढ़ना चाहिए।
प्रश्न 4. "दोनों आमने-सामने या आस-पास बैठे हुए एक-दूसरे से मूक-भाषा में विचार-विनिमय करते थे।" कहानी में अनेक स्थानों पर ‘मूक-भाषा’ का उल्लेख किया गया है। आपके विचार से हीरा और मोती किस प्रकार आपस में बातें किया करते होंगे? अनुमान और कल्पना से बताइए।
मेरे विचार से हीरा और मोती मूक-भाषा (बिना बोले) में एक-दूसरे के हाव-भाव और शारीरिक क्रियाओं से बातें किया करते होंगे। वे एक-दूसरे को सूंघकर, चाटकर, सींग मिलाकर या हल्के से धकेल कर अपना प्रेम और अपनापन व्यक्त करते होंगे।

जब वे मुसीबत में होते या उन्हें कोई योजना बनानी होती (जैसे दीवार तोड़ना या साँड़ से लड़ना), तो वे आँखों के इशारों से, कान खड़े करके या अपनी पूँछ हिलाकर एक-दूसरे को सतर्क करते होंगे। जानवरों की अपनी एक गहरी समझ होती है जिससे वे बिना शब्द बोले ही साथी का दुख-दर्द और विचार समझ लेते हैं।
प्रश्न 5. आप भी अनेक अवसरों पर बिना शब्दों का उच्चारण किए संवाद करते हैं। कब-कब? कहाँ-कहाँ? कुछ उदाहरण लिखिए।
हाँ, मनुष्यों के जीवन में भी ऐसे कई अवसर आते हैं जब हम मूक-भाषा (इशारों या हाव-भाव) में संवाद करते हैं। इसके कुछ उदाहरण निम्नलिखित हैं:
  • परीक्षा भवन में: जब हमें किसी सहपाठी से पेन या पेंसिल माँगनी होती है, तो हम बिना बोले हाथ के इशारे से माँगते हैं।
  • पुस्तकालय (Library) या अस्पताल में: जहाँ बोलना मना होता है, वहाँ हम आँखों और हाथों के इशारों से बात करते हैं (जैसे मुँह पर उंगली रखकर चुप रहने का इशारा)।
  • खेल के मैदान में: क्रिकेट या फुटबॉल खेलते समय खिलाड़ी दूर से ही अपनी टीम के साथियों को इशारों में रणनीति समझाते हैं।
  • क्रोध या सहमति जताते समय: जब हम किसी बात पर सहमत होते हैं तो सिर्फ सिर हिलाकर 'हाँ' कह देते हैं। वहीं, गुस्सा आने पर बिना कुछ बोले सिर्फ बड़ी-बड़ी आँखें दिखाकर सामने वाले को डरा देते हैं।

अभ्यास: भाषा गढ़ते मुहावरे

नीचे दिए गए वाक्यों में से मुहावरों को पहचानकर रेखांकित कीजिए और उनका प्रयोग करते हुए नए वाक्य बनाइए:

1. "झूरी के साले गया को घर तक गोईं ले जाने में दाँतों पसीना आ गया।"
मुहावरा: दाँतों पसीना आना (बहुत अधिक कठिन परिश्रम करना या परेशान होना)।
वाक्य प्रयोग: अपनी बिगड़ैल कार को धक्का लगाकर गैरेज तक पहुँचाने में रमेश को दाँतों पसीना आ गया
2. "उसका चेहरा देखकर अंतर्ज्ञान से दोनों मित्रों के दिल काँप उठे।"
मुहावरा: दिल काँप उठना (बहुत अधिक डर जाना या भयभीत होना)।
वाक्य प्रयोग: सामने से आते हुए एक विशाल और खूँखार शेर को देखकर शिकारियों के दिल काँप उठे
3. "झूरी की स्त्री ने बैलों को द्वार पर देखा, तो जल उठी।"
मुहावरा: जल उठना (अत्यधिक क्रोधित होना या ईर्ष्या करना)।
वाक्य प्रयोग: पड़ोसन की नई कार और गहने देखकर शीला ईर्ष्या से जल उठी
4. "मोती दिल में ऐंठकर रह गया।"
मुहावरा: ऐंठकर रह जाना (क्रोध को पी जाना या मन मसोस कर रह जाना)।
वाक्य प्रयोग: अधिकारी द्वारा सबके सामने बिना बात के अपमानित किए जाने पर क्लर्क मन ही मन ऐंठकर रह गया
5. "आएगा तो दूर ही से खबर लूँगा। देखूँ कैसे ले जाता है।"
मुहावरा: खबर लेना (सज़ा देना, डाँटना या बदला लेना)।
वाक्य प्रयोग: यदि इस बार तुमने परीक्षा में नकल करने की कोशिश की, तो मैं तुम्हारी अच्छी तरह खबर लूँगा
6. "जी तोड़कर काम करते हैं, किसी से लड़ाई-झगड़ा नहीं करते, चार बातें सुनकर गम खा जाते हैं।"
मुहावरा 1: जी तोड़कर काम करना (बहुत अधिक मेहनत करना)।
वाक्य प्रयोग: किसान दिन-रात जी तोड़कर काम करता है, तब जाकर फसल तैयार होती है।

मुहावरा 2: गम खा जाना (चुपचाप सहन कर लेना या क्रोध पी जाना)।
वाक्य प्रयोग: पिताजी की डाँट सुनकर रोहन कुछ नहीं बोला और चुपचाप गम खा गया
7. "अगर वे भी ईंट का जवाब पत्थर से देना सीख जाते, तो शायद सभ्य कहलाने लगते।"
मुहावरा: ईंट का जवाब पत्थर से देना (कड़ी प्रतिक्रिया देना या मुँहतोड़ जवाब देना)।
वाक्य प्रयोग: भारतीय सेना ने सीमा पर आतंकवादियों की घुसपैठ का ईंट का जवाब पत्थर से दिया
8. "तो फिर यहीं मरो। बंदा तो नौ-दो ग्यारह होता है।"
मुहावरा: नौ-दो ग्यारह होना (चुपचाप भाग जाना या खिसक लेना)।
वाक्य प्रयोग: पुलिस की गाड़ी का सायरन सुनते ही जुआरी मौके से नौ-दो ग्यारह हो गए
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