दो बैलों की कथा Extra Questions Answers | Class 9 Hindi Chapter 1 | Do Bailon Ki Katha Extra Important Questions Class 9 Hindi

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दो बैलों की कथा - Important Extra Questions Answers | Class 9 Hindi Chapter 1

परीक्षा के लिए विशेष (Exam Special): कक्षा 9 हिंदी क्षितिज भाग-1 के पाठ 'दो बैलों की कथा' (मुंशी प्रेमचंद) के अभ्यास प्रश्नों के अतिरिक्त कुछ ऐसे महत्वपूर्ण प्रश्न भी हैं जो वार्षिक परीक्षाओं (Annual Exams) में बार-बार पूछे जाते हैं। यहाँ ऐसे ही Top 7 Most Important Extra Questions with Answers दिए गए हैं, जो आपकी परीक्षा की तैयारी को 100% पक्का करेंगे।

अतिरिक्त महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर (Extra Important Questions)

प्रश्न 1. मुंशी प्रेमचंद की कहानी 'दो बैलों की कथा' के माध्यम से समाज को क्या मुख्य संदेश दिया गया है?
इस कहानी के माध्यम से प्रेमचंद जी ने कई महत्वपूर्ण संदेश दिए हैं। पहला, स्वतंत्रता जन्मसिद्ध अधिकार है, लेकिन यह आसानी से नहीं मिलती, इसके लिए निरंतर संघर्ष करना पड़ता है। दूसरा, एकता में बहुत शक्ति होती है; मुसीबत के समय यदि मित्र एकजुट रहें, तो बड़ी से बड़ी विपत्ति को टाला जा सकता है। तीसरा, पशुओं के अंदर भी मनुष्य जैसी संवेदना और भावनाएँ होती हैं, अतः हमें उनके प्रति प्रेम और दया का भाव रखना चाहिए।
प्रश्न 2. "स्वतंत्रता सहज ही नहीं मिलती, उसके लिए बार-बार संघर्ष करना पड़ता है।" कहानी के आधार पर इस कथन की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।
हीरा और मोती को अपनी स्वतंत्रता (झूरी के घर वापसी) पाने के लिए अनेक कष्ट सहने पड़े और कड़ा संघर्ष करना पड़ा। सबसे पहले उन्हें गया की मार सहनी पड़ी और वहाँ से भूखे-प्यासे भागना पड़ा। फिर रास्ते में एक खूँखार साँड़ से अपनी जान बचाने के लिए लड़ना पड़ा। इसके बाद वे खेत के रखवालों द्वारा पकड़े गए और काँजीहौस में कई दिनों तक भूखे-प्यासे कैद रहे। अंत में उन्हें एक निर्दयी कसाई के चंगुल से भी खुद को बचाना पड़ा। यह सिद्ध करता है कि आज़ादी बिना संघर्ष और त्याग के नहीं मिलती।
प्रश्न 3. काँजीहौस में कैद पशुओं की स्थिति का वर्णन कीजिए। लेखक ने इसके माध्यम से समाज के किस वर्ग की ओर संकेत किया है?
काँजीहौस में भैंसें, बकरियाँ, घोड़े, गधे आदि कई जानवर कैद थे। उन सभी की स्थिति बहुत दयनीय थी। उन्हें कई दिनों से खाने-पीने को कुछ नहीं मिला था, जिसके कारण वे कमज़ोर होकर मुर्दों की तरह ज़मीन पर पड़े थे। उनमें खड़े होने तक की हिम्मत नहीं बची थी।

इसके माध्यम से लेखक ने समाज के उस शोषित, पराधीन और कमज़ोर वर्ग की ओर संकेत किया है जो अत्याचारियों के चंगुल में फँसकर अपने जीने की इच्छा, आज़ादी और विद्रोह करने की चेतना पूरी तरह खो चुका है।
प्रश्न 4. गया के घर से भागने में हीरा-मोती की मदद किसने और क्यों की?
गया के घर से भागने में हीरा-मोती की मदद भैरो की छोटी बच्ची ने की थी। उस बच्ची की अपनी माँ मर चुकी थी और उसकी सौतेली माँ उसे बहुत मारती-पीटती थी। चूँकि वह खुद अत्याचार सह रही थी, इसलिए वह बैलों का दुख और दर्द भी भली-भाँति समझती थी। बैलों के प्रति सहानुभूति और प्रेम के कारण ही उसने रात के अंधेरे में चुपके से उनके पगहे (गले की रस्सियाँ) खोल दिए, ताकि वे आज़ाद हो सकें।
प्रश्न 5. 'दो बैलों की कथा' में प्रेमचंद ने किसान और पशुओं के भावनात्मक संबंधों को कैसे दर्शाया है?
प्रेमचंद ने झूरी और उसके बैलों (हीरा-मोती) के माध्यम से किसान और पशु के बीच एक गहरे आत्मीय और पारिवारिक संबंध को दर्शाया है। झूरी अपने बैलों को बच्चों की तरह प्यार करता था, कभी उन्हें मारता-पीटता नहीं था। बैल भी झूरी के इशारों को समझते थे और उसके लिए जी-तोड़ मेहनत करते थे। जब बैल आज़ाद होकर वापस लौटे, तो झूरी उन्हें देखकर खुशी से रो पड़ा और बैलों ने भी प्यार से उसका हाथ चाटना शुरू कर दिया। यह दर्शाता है कि पशु भी सच्चे प्रेम के भूखे होते हैं।
प्रश्न 6. दढ़ियल (कसाई) को देखकर हीरा-मोती ने क्या प्रतिक्रिया दी और अंततः वे उससे कैसे बचे?
काँजीहौस में नीलाम होते समय जब दढ़ियल कसाई ने बैलों के कूल्हों में उंगली चुभाकर उन्हें परखा, तो उसकी कठोर और क्रूर आँखों को देखकर हीरा-मोती अंतर्ज्ञान से काँप उठे। वे समझ गए कि यह कसाई उनकी जान ले लेगा।

वे डर के मारे उसके साथ चल तो दिए, लेकिन जैसे ही उन्होंने अपना जाना-पहचाना रास्ता देखा, उनमें नई ऊर्जा आ गई। वे तेजी से भागकर सीधे झूरी के घर पहुँच गए। जब कसाई ने आकर बैलों की रस्सियाँ पकड़ लीं, तो उग्र स्वभाव वाले मोती ने उस पर सींग चलाकर हमला कर दिया और उसे दौड़ा-दौड़ाकर गाँव के बाहर खदेड़ दिया। इस प्रकार उन्होंने अपनी जान बचाई।
प्रश्न 7. कहानी के आधार पर बताइए कि विपत्ति के समय एक सच्चे मित्र की क्या भूमिका होती है?
कहानी में हीरा और मोती की मित्रता से सिद्ध होता है कि विपत्ति के समय सच्चा मित्र कभी अपने साथी को अकेला नहीं छोड़ता। साँड़ के हमले के समय यदि दोनों अलग-अलग भागते, तो मारे जाते, लेकिन उन्होंने एकजुट होकर उसका सामना किया। इसी प्रकार, मटर के खेत में जब मोती कीचड़ में फँस गया, तो हीरा सुरक्षित होने के बावजूद भागने के बजाय वापस आ गया और अपने मित्र के साथ बँधना स्वीकार किया। सच्चा मित्र सुख-दुख दोनों में बराबर का भागीदार होता है।
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