झाँसी की रानी - महत्वपूर्ण अतिरिक्त प्रश्न-उत्तर | Important Questions Class 9
कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान द्वारा रचित “झाँसी की रानी” हिंदी साहित्य की एक अत्यंत ओजस्वी कविता है। परीक्षा की दृष्टि से (Board & Non-Board Exams) इस पाठ के अभ्यास प्रश्नों के अलावा कुछ अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर (Extra Questions) भी पूछे जाते हैं। नीचे ऐसे ही 7 सबसे महत्वपूर्ण प्रश्नों का संकलन दिया गया है।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण अतिरिक्त प्रश्न (Extra Questions)
प्रश्न 1. ‘झाँसी की रानी’ कविता का मूल भाव या उद्देश्य क्या है?
इस कविता का मूल उद्देश्य भारतीयों, विशेषकर युवा पीढ़ी के मन में देशभक्ति, साहस और आत्मसम्मान की भावना जाग्रत करना है। कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान इस कविता के माध्यम से 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में रानी लक्ष्मीबाई के अदम्य साहस, वीरता और उनके सर्वोच्च बलिदान को याद दिलाना चाहती हैं, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ अपनी आज़ादी की कीमत को समझें और देश के लिए मर-मिटने को सदैव तैयार रहें।
प्रश्न 2. "गुमी हुई आज़ादी की कीमत सबने पहचानी थी" - इस पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
इस पंक्ति का आशय यह है कि जब भारतवासी लंबे समय तक अंग्रेजों की गुलामी सहते रहे और अंग्रेजों ने उनके धन, सम्मान और राज्यों को हड़पना शुरू कर दिया, तब भारतीयों को एहसास हुआ कि स्वतंत्रता कितनी मूल्यवान होती है। अपनी खोई हुई आज़ादी (गुमी हुई आज़ादी) का महत्व समझ में आने के बाद ही संपूर्ण भारत में अंग्रेजों को खदेड़ने का दृढ़ निश्चय किया गया और 1857 की क्रांति का जन्म हुआ।
प्रश्न 3. राजा गंगाधर राव की मृत्यु के बाद लॉर्ड डलहौज़ी क्यों प्रसन्न हुआ?
राजा गंगाधर राव का निधन निःसंतान अवस्था में हुआ था। लॉर्ड डलहौज़ी इसलिए मन-ही-मन बहुत प्रसन्न हुआ क्योंकि उसे अपनी 'हड़प नीति' (Doctrine of Lapse) के तहत झाँसी पर कब्ज़ा करने का सुनहरा अवसर मिल गया था। इस नीति के अनुसार किसी भी निःसंतान राजा के राज्य को लावारिस मानकर ब्रिटिश साम्राज्य में मिला लिया जाता था। डलहौज़ी ने तुरंत अपनी सेना भेजकर झाँसी के किले पर अंग्रेजी झंडा फहरा दिया।
प्रश्न 4. कविता के आधार पर रानी लक्ष्मीबाई के चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
रानी लक्ष्मीबाई के चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. वीर एवं साहसी: वे बचपन से ही निडर थीं और युद्ध कला में निपुण थीं।
2. देशभक्त: उनके लिए अपना राज्य और मातृभूमि अपने प्राणों से भी बढ़कर थी।
3. कुशल नेतृत्वकर्ता: उन्होंने पुरुषों की सेना का ही नहीं, बल्कि महिलाओं (दुर्गा दल) का भी कुशल नेतृत्व किया।
4. स्वाभिमानी: उन्होंने अंग्रेजों की गुलामी स्वीकार करने के बजाय युद्ध भूमि में लड़ते हुए वीरगति पाना उचित समझा।
1. वीर एवं साहसी: वे बचपन से ही निडर थीं और युद्ध कला में निपुण थीं।
2. देशभक्त: उनके लिए अपना राज्य और मातृभूमि अपने प्राणों से भी बढ़कर थी।
3. कुशल नेतृत्वकर्ता: उन्होंने पुरुषों की सेना का ही नहीं, बल्कि महिलाओं (दुर्गा दल) का भी कुशल नेतृत्व किया।
4. स्वाभिमानी: उन्होंने अंग्रेजों की गुलामी स्वीकार करने के बजाय युद्ध भूमि में लड़ते हुए वीरगति पाना उचित समझा।
प्रश्न 5. कवयित्री ने बार-बार "बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी" पंक्ति का प्रयोग क्यों किया है?
'हरबोले' बुंदेलखंड के वे लोकगायक होते हैं जो राजाओं और वीरों की शौर्य गाथाएँ गाकर सुनाते हैं। कवयित्री ने इस पंक्ति का बार-बार प्रयोग कविता में प्रामाणिकता (Authenticity), लोक-संस्कृति का पुट और वीर रस का प्रवाह (Rhythm) बनाए रखने के लिए किया है। यह पंक्ति दर्शाती है कि रानी की वीरता की कहानी कोई कल्पना नहीं है, बल्कि यह वहाँ के जन-जन की ज़ुबान पर आज भी लोकगीतों के रूप में जीवित है।
प्रश्न 6. युद्धभूमि में काना और मंदरा की क्या भूमिका थी?
काना और मंदरा रानी लक्ष्मीबाई की बचपन की सखियाँ और उनकी महिला सेना की अत्यंत वीर सेनापति थीं। युद्धभूमि में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण थी। जब अंग्रेज जनरल स्मिथ की सेना ने झाँसी पर हमला किया, तब काना और मंदरा ने रानी के साथ मिलकर रणभूमि में भयंकर मार-काट मचाई और अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिए। उन्होंने रानी का अंत तक एक वफादार योद्धा की तरह साथ दिया।
प्रश्न 7. रानी लक्ष्मीबाई को वीरगति कैसे प्राप्त हुई? कविता के आधार पर वर्णन कीजिए।
कालपी और ग्वालियर जीतने के बाद, रानी अंग्रेजों की सेना से घिर गईं। सामने जनरल ह्यूरोज और पीछे अन्य सेना थी। रानी मार-काट करती हुई सेना के पार निकल गईं, किंतु सामने एक भयंकर नाला आ गया। रानी का नया घोड़ा अड़ गया और पार नहीं कर सका। इसी बीच बहुत से अंग्रेज सैनिक वहाँ आ गए और 'एक रानी और अनेक शत्रु' के बीच भयंकर युद्ध हुआ। रानी शेरनी की भाँति लड़ते हुए बुरी तरह घायल होकर गिर पड़ीं और मात्र 23 वर्ष की अल्प आयु में उन्हें वीरगति (स्वर्ग) प्राप्त हो गई।
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