झाँसी की रानी - प्रश्न-उत्तर | Jhansi Ki Rani Question Answer NCERT

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झाँसी की रानी Question Answer | NCERT Solutions Hindi Chapter

हिंदी की प्रसिद्ध कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान द्वारा रचित कविता “झाँसी की रानी” के अभ्यास प्रश्न-उत्तर यहाँ दिए गए हैं। यह लेख विशेष रूप से स्कूल असाइनमेंट, परीक्षा की तैयारी और नोट्स बनाने के लिए अत्यंत उपयोगी है।


अभ्यास: मेरे उत्तर मेरे तर्क (MCQ Solutions)

निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं?

प्रश्न 1. ‘झाँसी की रानी’ कविता की पंक्ति “बूढ़े भारत में भी आई फिर से नई जवानी थी” में ‘नई जवानी’ शब्द किस भाव को व्यक्त करता है?
  • (क) देश का स्वाभिमान
  • (ख) विद्रोह की चिंगारी
  • (ग) स्वाधीनता का भय
  • (घ) भारत की युवावस्था
सही उत्तर: (क) देश का स्वाभिमान
तर्क (कारण): भारत लंबे समय से अंग्रेजों की गुलामी की जंजीरों में जकड़ा हुआ था, जिससे उसमें निराशा और शिथिलता आ गई थी (कवयित्री ने इसे 'बूढ़ा भारत' कहा है)। 1857 की क्रांति ने भारतीयों में नया जोश, ऊर्जा और अपने देश के प्रति स्वाभिमान जगा दिया, जिसे 'नई जवानी' का आना कहा गया है।
प्रश्न 2. लक्ष्मीबाई को ‘छबीली’ कहना उनके व्यक्तित्व की किस विशेषता को दर्शाता है?
  • (क) विनम्रता
  • (ख) शोभायुक्त
  • (ग) सहिष्णुता
  • (घ) कठोरता
सही उत्तर: (ख) शोभायुक्त
तर्क (कारण): 'छबीली' का अर्थ होता है— सुंदर, आकर्षक, सजीली और चंचल। बचपन में मनु (रानी लक्ष्मीबाई) बहुत सुंदर, मनमोहक और चंचल स्वभाव की थीं, इसलिए कानपुर के नाना उन्हें प्यार से 'छबीली' कहकर पुकारते थे।
प्रश्न 3. “बुझा दीप झाँसी का” पंक्ति का भावार्थ है—
  • (क) अंग्रेजों का झाँसी पर अधिकार हो जाना
  • (ख) झाँसी राज्य की उम्मीदों का नष्ट हो जाना
  • (ग) राजा की आकस्मिक मृत्यु होना
  • (घ) रानी के जीवन में उदासी होना
सही उत्तर: (ग) राजा की आकस्मिक मृत्यु होना
तर्क (कारण): कविता के अनुसार राजा गंगाधर राव निःसंतान ही स्वर्ग सिधार गए थे। किसी भी राज्य का राजा उस राज्य के कुलदीपक के समान होता है। इसलिए इस कविता में 'झाँसी का दीप बुझना' राजा गंगाधर राव के दुखद निधन का प्रतीक है।
प्रश्न 4. “इस स्वतंत्रता-महायज्ञ में कई वीरवर आए काम” पंक्ति में स्वतंत्रता आंदोलन की किस ऐतिहासिक घटना की ओर संकेत किया गया है?
  • (क) असहयोग आंदोलन
  • (ख) भारत छोड़ो आंदोलन
  • (ग) 1857 की क्रांति
  • (घ) सविनय अवज्ञा आंदोलन
सही उत्तर: (ग) 1857 की क्रांति
तर्क (कारण): यह पूरी कविता रानी लक्ष्मीबाई के शौर्य और 1857 के प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की पृष्ठभूमि पर लिखी गई है। इसी महायज्ञ (1857 की क्रांति) में तात्या टोपे, अजीमुल्ला, कुँवर सिंह, और अहमद शाह मौलवी जैसे कई वीर 'काम आए' यानी देश के लिए शहीद हुए थे।
प्रश्न 5. “व्यापारी बन दया चाहता था जब यह भारत आया” पंक्ति में ‘यह’ शब्द किसके लिए कहा गया है?
  • (क) नवाबों के लिए
  • (ख) जनरल डलहौजी के लिए
  • (ग) लेफ्टिनेंट वॉकर के लिए
  • (घ) ब्रिटिश राज के लिए
सही उत्तर: (घ) ब्रिटिश राज के लिए
तर्क (कारण): अंग्रेज (ब्रिटिश राज या ईस्ट इंडिया कंपनी) शुरुआत में भारत में केवल एक 'व्यापारी' के रूप में आए थे और यहाँ के राजाओं व नवाबों से व्यापारिक रियायतें (दया) माँगते थे। बाद में उनकी नीयत बदल गई और उन्होंने पूरे देश पर अपना साम्राज्य स्थापित कर लिया।

अभ्यास: मेरी समझ मेरे विचार

प्रश्न 1. ‘झाँसी की रानी’ कविता के आधार पर बताइए कि लक्ष्मीबाई के प्रिय खेल कौन-कौन से थे? उनका बचपन दूसरों से किस प्रकार भिन्न था?
कविता के आधार पर रानी लक्ष्मीबाई के प्रिय खेल थे— नकली युद्ध करना, व्यूह की रचना करना, खूब शिकार खेलना, सेना घेरना और दुर्ग (किले) तोड़ना।

उनका बचपन सामान्य बच्चों से पूरी तरह भिन्न था। जहाँ अन्य बच्चियाँ गुड्डे-गुड़ियों से खेलती थीं, वहीं लक्ष्मीबाई बचपन से ही बरछी, ढाल, कृपाण और कटारी जैसे हथियारों को अपनी सहेली मानती थीं। उन्हें बचपन से ही वीर शिवाजी की शौर्य गाथाएँ ज़बानी याद थीं। इस प्रकार उनका बचपन एक सामान्य बालिका का न होकर एक वीर योद्धा का बचपन था।
प्रश्न 2. “किंतु कालगति चुपके-चुपके काली घटा घेर लाई” पंक्ति के माध्यम से किस घटना की ओर संकेत किया गया है?
इस पंक्ति के माध्यम से झाँसी के राजा गंगाधर राव की असामयिक (अचानक) मृत्यु और रानी लक्ष्मीबाई के कम उम्र में विधवा होने की दुखद घटना की ओर संकेत किया गया है। राजा की मृत्यु के कारण झाँसी अनाथ हो गई और डलहौजी ने इस अवसर का लाभ उठाकर झाँसी को ब्रिटिश राज्य में मिलाने की साजिश रची, जो झाँसी के लिए किसी 'काली घटा' (विपत्ति के बादल) से कम नहीं था।
प्रश्न 3. “महलों ने दी आग, झोंपड़ी ने ज्वाला सुलगाई थी” पंक्ति समाज के विभिन्न वर्गों की एकता को दर्शाती है, इस एकता का स्वतंत्रता संग्राम के संदर्भ में क्या महत्व है?
यह पंक्ति 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अमीरों (महलों) और गरीबों (झोंपड़ियों) के एकजुट होने को दर्शाती है। स्वतंत्रता संग्राम में केवल राजा-महाराजा ही नहीं, बल्कि आम जनता भी बढ़-चढ़कर शामिल हुई थी। महलों में अंग्रेजों के खिलाफ जो विरोध की आग भड़की थी, उसे आम जनता ने एक विशाल ज्वाला का रूप दे दिया।

इस एकता का यह महत्व है कि इसने अंग्रेजों की नींव हिला दी। यह सिद्ध कर दिया कि जब देश के सभी वर्ग (अमीर-गरीब, राजा-प्रजा) एकजुट होकर विदेशी सत्ता का सामना करते हैं, तो बड़े से बड़ा साम्राज्य भी घुटने टेकने पर मजबूर हो जाता है।
प्रश्न 4. “सरे-आम नीलाम छापते थे अंग्रेज़ों के अखबार” पंक्ति में ‘नीलाम छापते’ शब्द किसकी ओर संकेत करता है? यह भी बताइए कि किसकी नीलामी की जाती थी और क्यों?
'नीलाम छापते' का संकेत अंग्रेजों द्वारा भारतीय राजाओं और नवाबों की संपत्ति को नीलाम करने के विज्ञापन अखबारों में प्रकाशित करने की ओर है।

इस नीलामी में कलकत्ते के बाज़ारों में नागपुर के कीमती जेवर और लखनऊ के नवाबों के नौलखा हार आदि बेचे जाते थे। अंग्रेज ऐसा इसलिए करते थे ताकि वे भारतीय शासकों को सरेआम अपमानित कर सकें, उनके स्वाभिमान को कुचल सकें और उनके खजाने को लूटकर अपनी (ब्रिटिश सरकार की) आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकें।
प्रश्न 5. “अभी उम्र कुल तेइस की थी, मनुज नहीं अवतारी थी” पंक्ति में ‘अवतारी’ शब्द व्यक्ति के विशेष गुणों की ओर इंगित कर रहा है। कविता के आधार पर बताइए कि लक्ष्मीबाई के किन गुणों के कारण उनको ‘अवतारी’ कहा गया है?
रानी लक्ष्मीबाई को 'अवतारी' इसलिए कहा गया है क्योंकि मात्र तेईस वर्ष की अल्प आयु में उन्होंने अदम्य साहस, वीरता और युद्ध कौशल का जो प्रदर्शन किया, वह किसी साधारण मनुष्य (मनुज) के बस की बात नहीं थी।

कविता के अनुसार उनके अंदर अद्भुत तेज, असीम देशभक्ति, कुशल नेतृत्व क्षमता और स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर देने का जज़्बा था। जिस प्रकार कोई 'अवतार' धरती पर बुराइयों का नाश करने और धर्म (स्वतंत्रता) की स्थापना करने आता है, उसी प्रकार लक्ष्मीबाई ने मृतप्राय भारत में स्वतंत्रता की नई जान फूँक दी थी। इन्हीं दिव्य गुणों के कारण उन्हें 'अवतारी' कहा गया है।

विधा से संवाद: कविता में कहानी

प्रश्न 1. पाठ की संरचना को समझते हुए इसमें वर्णित प्रमुख घटनाओं को समय-रेखा (टाइमलाइन) पर दर्शाएँ। (संकेत– लक्ष्मीबाई का बचपन, विवाह, अन्य घटनाएँ आदि।)
कविता में वर्णित घटनाओं की समय-रेखा (Timeline) इस प्रकार है:
  • बचपन: कानपुर के नाना के साथ खेलना-पढ़ना। हथियार (बरछी, ढाल, कृपाण, कटारी) ही उनकी सहेली थे। नकली युद्ध करना, शिकार खेलना और सैन्य व्यूह रचना करना उनके प्रिय खेल थे।
  • विवाह: झाँसी के राजा गंगाधर राव के साथ उनका विवाह होना और रानी बनकर झाँसी आना। महलों में खुशियाँ छा जाना।
  • वैधव्य (विधवा होना): राजा गंगाधर राव का निःसंतान ही आकस्मिक निधन हो जाना और रानी का कम उम्र में विधवा होना।
  • अंग्रेज़ों का कब्ज़ा: लॉर्ड डलहौजी द्वारा झाँसी को 'लावारिस' घोषित कर उस पर ब्रिटिश झंडा फहराना।
  • 1857 की क्रांति का आरंभ: महलों और झोपड़ियों (अमीर-गरीब) सभी में विद्रोह की ज्वाला भड़कना। दिल्ली, लखनऊ, मेरठ, कानपुर आदि में विद्रोह का फैलना।
  • युद्ध और शौर्य प्रदर्शन: रानी का रणचंडी का रूप धारण कर लेफ्टिनेंट वॉकर को हराना। इसके बाद कालपी और ग्वालियर पर अधिकार करना।
  • वीरगति: जनरल ह्यूरोज और स्मिथ की सेनाओं से घिर जाना। सामने नया घोड़ा अड़ जाने और नाला आ जाने के कारण, रानी का बुरी तरह घायल होकर मात्र 23 वर्ष की आयु में वीरगति (स्वर्ग) प्राप्त करना।

विषयों से संवाद: साझा साथ / साझा संघर्ष

प्रश्न 1. “लावारिस का वारिस बनकर ब्रिटिश राज्य झाँसी आया”, ब्रिटिश राज किस नीति के कारण ‘लावारिस का वारिस’ बन जाता था? अपने इतिहास के शिक्षक से पता लगाकर उस नीति के विषय में लिखिए।
ब्रिटिश राज लॉर्ड डलहौजी की 'हड़प नीति' (Doctrine of Lapse / व्यपगत का सिद्धांत) के कारण 'लावारिस का वारिस' बन जाता था।

इस नीति के अनुसार: यदि किसी भारतीय रियासत के राजा की मृत्यु बिना किसी सगे पुरुष उत्तराधिकारी (पुत्र) के हो जाती थी, तो उस राज्य को 'लावारिस' मान लिया जाता था। उस राजा को दत्तक पुत्र (गोद लिया हुआ बेटा) अपनाकर उसे अपना उत्तराधिकारी बनाने का कानूनी अधिकार नहीं था। इसके बाद ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी उस राज्य को सीधे तौर पर अपने अधीन (ब्रिटिश साम्राज्य में) मिला लेती थी। इसी क्रूर नीति के तहत राजा गंगाधर राव के निधन के बाद डलहौजी ने झाँसी पर कब्ज़ा किया था।
प्रश्न 2. इस कविता में लक्ष्मीबाई की जीवन-गाथा के साथ-साथ अनेक वीरों के त्याग और बलिदान का भी उल्लेख है। उनकी सूची बनाइए तथा शिक्षक की सहायता से 1857 की क्रांति में उनके योगदान के विषय में लिखिए।
कविता में 1857 की क्रांति के निम्नलिखित वीरों का उल्लेख हुआ है:
  • नाना धुंधूपंत (नाना साहेब): इन्होंने कानपुर में अंग्रेजों के खिलाफ 1857 के विद्रोह का नेतृत्व किया और मराठा साम्राज्य की शान बनाए रखी।
  • ताँतिया (तात्या टोपे): ये एक अत्यंत कुशल सेनानायक थे, जिन्होंने रानी लक्ष्मीबाई और नाना साहेब का युद्ध में पूरा साथ दिया और अपनी छापामार युद्ध नीति से अंग्रेजों को दिन-तारे दिखा दिए।
  • अज़ीमुल्ला: ये नाना साहेब के सचिव और मुख्य सलाहकार थे। इन्होंने क्रांति की गुप्त योजना और रूपरेखा तैयार करने में अहम भूमिका निभाई थी।
  • अहमद शाह मौलवी: इन्होंने अवध (फैजाबाद) क्षेत्र में अंग्रेजों के खिलाफ आम जनता और सैनिकों को एकजुट किया।
  • ठाकुर कुँवर सिंह: बिहार के जगदीशपुर के 80 वर्षीय वीर राजपूत, जिन्होंने अपनी ढलती उम्र के बावजूद अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिए।
  • झलकारी बाई (पाठ के अंत से): रानी लक्ष्मीबाई की हमशक्ल और उनकी 'दुर्गा दल' (महिला सेना) की प्रमुख। इन्होंने युद्ध में रानी के वेश में लड़कर अंग्रेजों को भ्रमित किया ताकि रानी सुरक्षित निकल सकें।
प्रश्न 3. यह कविता जिस समय और परिवेश में लिखी गई है, उसमें युद्ध और अन्य साहसिक कार्य करना सामान्यतः पुरुषों का क्षेत्र माना जाता था। वर्तमान में लगभग हर क्षेत्र में महिलाएँ कार्य कर रही हैं। नीचे कुछ ऐसे ही कार्यक्षेत्र दिए गए हैं। इन क्षेत्रों में काम करने वाली स्त्रियों के नाम और उनके विषय में लिखिए।
वर्तमान समय में विभिन्न साहसिक और चुनौतीपूर्ण कार्यक्षेत्रों में महिलाओं का परचम लहरा रहा है:
  • 1. दमकल केंद्र (फायर ब्रिगेड): हर्षिनी कान्हेकर (Harshini Kanhekar) - ये भारत की पहली महिला फायर फाइटर (अग्निशामक) हैं, जिन्होंने पुरुषों के वर्चस्व वाले इस क्षेत्र में अपनी जगह बनाई।
  • 2. रेलगाड़ी चालक: सुरेखा यादव (Surekha Yadav) - ये भारत और एशिया की पहली महिला लोको पायलट (ट्रेन ड्राइवर) हैं। इन्होंने हाल ही में आधुनिक 'वंदे भारत एक्सप्रेस' भी सफलतापूर्वक चलाई है।
  • 3. खेल के विभिन्न क्षेत्र: मैरी कॉम (मुक्केबाजी में छह बार विश्व चैंपियन), पी.वी. सिंधु (बैडमिंटन में दो बार ओलंपिक पदक विजेता), मिताली राज (महिला क्रिकेट की पूर्व कप्तान और सर्वाधिक रन बनाने वाली)।
  • 4. व्यापार और प्रबंधन: इंद्रा नूयी (पेप्सिको की पूर्व वैश्विक सीईओ), किरण मजूमदार-शॉ (बायोकॉन की संस्थापक), फाल्गुनी नायर (नायका की संस्थापक)।
  • 5. विज्ञान और तकनीक: कल्पना चावला (अंतरिक्ष में जाने वाली पहली भारतीय महिला), डॉ. टेसी थॉमस (इन्हें भारत की 'मिसाइल वुमन' कहा जाता है, जो अग्नि-4 मिसाइल प्रोजेक्ट की निदेशक थीं), डॉ. रितु करिधल (इसरो वैज्ञानिक, चंद्रयान मिशन)।
प्रश्न 4. कविता में 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से संबंधित अनके स्थानों के नाम आए हैं। अपने शिक्षक की सहायता से दिए गए मानचित्र में उन स्थानों/नगरों को चिह्नित करके नाम लिखिए।
कविता के आधार पर 1857 के स्वतंत्रता संग्राम से संबंधित निम्नलिखित प्रमुख स्थानों के नाम आए हैं। छात्र इन्हें भारत के राजनीतिक मानचित्र (Map) पर आसानी से चिह्नित कर सकते हैं:
  • झाँसी: उत्तर प्रदेश राज्य के दक्षिणी भाग में।
  • कानपुर (बिठूर): उत्तर प्रदेश में गंगा नदी के तट पर।
  • दिल्ली (देहली): भारत की राजधानी।
  • लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी (अवध क्षेत्र)।
  • मेरठ: उत्तर प्रदेश (दिल्ली के निकट, जहाँ से क्रांति की शुरुआत हुई)।
  • पटना: बिहार राज्य की राजधानी।
  • ग्वालियर: मध्य प्रदेश के उत्तरी भाग में।
  • कालपी: उत्तर प्रदेश (जहाँ रानी ने यमुना तट पर युद्ध किया था)।
  • जबलपुर: मध्य प्रदेश के मध्य भाग में।
  • कोल्हापुर: महाराष्ट्र राज्य के दक्षिणी भाग में।
(नोट: विद्यार्थी इन नामों की सूची लेकर भारत के नक्शे (Outline Map of India) पर इन राज्यों और शहरों को बिंदु (Dot) बनाकर दर्शा सकते हैं।)

भाषा से संवाद: व्याकरण की बात (शब्द एक अर्थ अनेक)

प्रश्न 1. “कानपूर के नाना की मुँहबोली बहन ‘छबीली’ थी”
उपर्युक्त पंक्ति में रेखांकित शब्द पर ध्यान दीजिए। कविता में ‘नाना’ शब्द ‘नाना धुंधूपंत’ के लिए प्रयुक्त हुआ है। लेकिन इस शब्द का प्रयोग संदर्भ के अनुसार अन्य अर्थों में भी होता है। जैसे– माता के पिता के लिए। इस प्रकार अनेकार्थी शब्द वह शब्द है जिसके एक से अधिक अर्थ होते हैं। नीचे दी गई कविता की पंक्तियों में रेखांकित शब्द अनेकार्थी शब्द हैं। कविता के संदर्भ में उनके सही अर्थ पर घेरा लगाइए (चुनिए)।
काव्य-पंक्ति दिए गए अर्थ (विकल्प) कविता के संदर्भ में सही अर्थ
तीर चलाने वाले कर में उसे चूड़ियाँ कब भाई नदी का किनारा, बाण, सीसा बाण
रानी विधवा हुई हाय! विधि को भी नहीं दया आई शास्त्र में लिखी व्यवस्था, प्रणाली, विधाता, तरीका विधाता (ईश्वर/भाग्य)
रानी ने तलवार खींच ली, हुआ द्वंद्व असमानों में युद्ध, संशय, युग्म युद्ध
हो मदमाती विजय, मिटा दे गोलों से चाहे झाँसी किसी पदार्थ का गोल पिंड, रस्सी/सूत/बर्फ का गोला, तोप से दागने वाले गोले, नारियल तोप से दागने वाले गोले
मिला तेज से तेज, तेज की वह सच्ची अधिकारी थी आभा, गति, तेज चाकू (धार) आभा (दिव्य चमक / शौर्य)
प्रश्न 2. “कानपूर के नाना की मुँहबोली बहन ‘छबीली’ थी”
“मेरठ, कानपुर, पटना ने भारी धूम मचाई थी”

उपर्युक्त पंक्तियों में रेखांकित शब्दों की वर्तनी पर ध्यान दीजिए। दोनों शब्दों की वर्तनी में थोड़ी भिन्नता है। कई बार रचनाकार कविता की लय, अर्थ की लय इत्यादि को ध्यान में रखते हुए भाषा के स्तर पर इस प्रकार का प्रयोग करते रहे हैं। इस कविता में अन्य शब्दों के भी ऐसे प्रयोग मिलते हैं, उन्हें ढूँढ़कर लिखिए।
कवयित्री ने कविता में लय (Rhythm) और तुकबंदी (Rhyme) को बनाए रखने के लिए कई शब्दों की मानक (Standard) वर्तनी में बदलाव किया है। कविता में प्रयुक्त ऐसे ही कुछ अन्य शब्द और उनके मानक रूप निम्नलिखित हैं:

  • उदैपूर (कविता का शब्द) — उदयपुर (मानक वर्तनी)
  • करनाटक (कविता का शब्द) — कर्नाटक (मानक वर्तनी)
  • रजधानी (कविता का शब्द) — राजधानी (मानक वर्तनी)
  • ताँतिया (कविता का शब्द) — तात्या (मानक वर्तनी)
  • बिरानी (कविता का शब्द) — वीरानी / पराई (मानक वर्तनी)
  • उजयाली (कविता का शब्द) — उजियाली / उजाला (मानक वर्तनी)
  • भृकुटी (कविता का शब्द) — भृकुटि (मानक वर्तनी)
नोट: कविताओं में इस प्रकार की छूट को 'काव्यगत छूट' (Poetic License) कहा जाता है, जिसका उद्देश्य कविता को गाते या पढ़ते समय एक प्रवाह और गेयता (Musicality) प्रदान करना होता है।

भाषा से संवाद: व्याकरण की बात (मुहावरे)

प्रश्न: पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। उन पंक्तियों में आए मुहावरे ढूँढ़कर लिखिए और उन मुहावरों का प्रयोग करते हुए नए वाक्य भी बनाइए।
कविता की दी गई पंक्तियों में छिपे मुहावरे और उनके वाक्य प्रयोग निम्नलिखित हैं:
क्र.सं. काव्य पंक्ति प्रयुक्त मुहावरा नया वाक्य प्रयोग
1. अबके जनरल स्मिथ सम्मुख था,
उसने मुँह की खाई थी
मुँह की खाना
(पराजित होना / हारना)
मोहन ने सोचा था कि वह आसानी से कुश्ती जीत जाएगा, लेकिन अंत में उसे मुँह की खानी पड़ी।
2. डलहौजी ने पैर पसारे अब तो
पलट गई काया
पैर पसारना
(अधिकार जमाना / विस्तार करना)
विदेशी कंपनियों ने भारतीय बाज़ार में तेज़ी से अपने पैर पसार लिए हैं।
3. राजाओं नवाबों को भी उसने
पैरों ठुकराया
पैरों ठुकराना
(अपमानित करना / परवाह न करना)
सच्चे देशभक्त धन-दौलत और लालच को पैरों ठुकरा देते हैं।
4. हुआ यज्ञ प्रारंभ उन्हें तो/ सोई
ज्योति जगानी थी
सोई ज्योति जगाना
(खोया हुआ उत्साह या ज्ञान वापस लाना)
स्वामी विवेकानंद जी ने युवाओं के मन में देशभक्ति की सोई ज्योति जगाई
5. मेरठ, कानपुर, पटना ने भारी धूम
मचाई थी
धूम मचाना
(प्रसिद्धि पाना / शोर मचाना / तहलका मचाना)
भारतीय क्रिकेट टीम ने विश्व कप में अपनी शानदार जीत से धूम मचा दी।

सृजन (रचनात्मक लेखन)

प्रश्न 1. लक्ष्मीबाई की सखियों काना तथा मंदरा की ओर से लक्ष्मीबाई को एक पत्र लिखिए जिसमें काना तथा मंदरा द्वारा ब्रिटिश हुकूमत के विरुद्ध युद्ध की रणनीति पर चर्चा की गई हो।
स्थान: ग्वालियर छावनी
दिनांक: 15 जून 1858

परम पूजनीय महारानी जी,
सादर प्रणाम।

महारानी जी, कल के युद्ध में आपने जिस अदम्य साहस और शौर्य का परिचय दिया, उसे देखकर हम दोनों सखियों का सीना गर्व से चौड़ा हो गया। अंग्रेजों के छक्के छुड़ाते हुए आपका रणचंडी रूप हमारी सेना के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है।

हम दोनों ने आगे के युद्ध के लिए कुछ रणनीति पर विचार किया है। हमारी गुप्तचरों की सूचना के अनुसार अंग्रेज जनरल ह्यूरोज और स्मिथ अपनी नई टुकड़ी के साथ हमें घेरने की योजना बना रहे हैं। हमारी राय में अब हमें सीधे युद्ध करने के बजाय 'छापामार युद्ध नीति' का प्रयोग करना चाहिए। हमें अपनी महिला टुकड़ी (दुर्गा दल) को किले के पिछले द्वारों और पहाड़ी रास्तों पर तैनात करना चाहिए। झलकारी बाई भी आपके वेश में अंग्रेजों को भ्रमित करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

महारानी जी, हमारी तलवारें और हमारे प्राण झाँसी और आपकी रक्षा के लिए सदैव तत्पर हैं। आप बस आदेश दें, हम दोनों सखियाँ अंग्रेजों के खून से रणभूमि को लाल कर देंगी।

आपकी विश्वासपात्र सखियाँ,
काना और मंदरा
प्रश्न 2. युद्धपूर्व रात्रि में झाँसी की रानी के मन में अगले दिन की संभावनाओं को लेकर कई तरह के भाव और विचार उठ रहे होंगे। आपके जीवन में भी कई ऐसे क्षण आए होंगे जब आपने मानसिक ऊहापोह का अनुभव किया होगा। ऐसी किसी घटना के विषय में अपनी डायरी में लिखिए, जैसे– परीक्षा के एक दिन पूर्व की स्थिति या नौवीं कक्षा में पहला दिन आदि।
दिन: रविवार
दिनांक: 3 मार्च 2024
समय: रात 10:30 बजे

प्रिय डायरी,

आज मेरे मन में एक अजीब सी हलचल है। कल मेरी नौवीं कक्षा की वार्षिक परीक्षा का पहला पेपर (गणित) है। मैं बिस्तर पर लेटा/लेटी हूँ, लेकिन नींद मेरी आँखों से कोसों दूर है। मेरे दिमाग में एक अजीब सा मानसिक ऊहापोह (उथल-पुथल) चल रहा है।

मैंने साल भर बहुत मेहनत की है, सारे सूत्र (formulas) भी याद कर लिए हैं, लेकिन फिर भी एक डर लग रहा है कि कहीं कल मैं सब कुछ भूल न जाऊँ। बार-बार ऐसा लग रहा है जैसे अलजेब्रा (Algebra) का वह कठिन सवाल पेपर में आ गया, तो मैं क्या करूँगा/करूँगी? झाँसी की रानी भी शायद युद्ध से एक रात पहले ऐसी ही बेचैनी महसूस करती होंगी कि कल रणभूमि में क्या होगा? पर उनका लक्ष्य देश को बचाना था और मेरा लक्ष्य अच्छे अंक लाना है।

मैंने अभी एक गिलास पानी पिया है और गहरी साँस ली है। मुझे खुद पर भरोसा रखना चाहिए। माँ ने भी कहा है कि शांत दिमाग से पेपर देने पर सब अच्छा होता है। अब मैं सोने की कोशिश करता/करती हूँ। ईश्वर सब ठीक करेंगे।

शुभ रात्रि डायरी!
तुम्हारा/तुम्हारी,
[अपना नाम लिखें]
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