रीढ़ की हड्डी Class 9 Hindi Question Answer | NCERT Solutions | Class 9 Hindi Chapter 'रीढ़ की हड्डी' Question Answers & Grammar

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रीढ़ की हड्डी (एकांकी) - Question Answer | NCERT Solutions Hindi

हिंदी कृतिका के प्रसिद्ध एकांकी “रीढ़ की हड्डी” (लेखक: जगदीशचंद्र माथुर) के अभ्यास खंड के सभी प्रश्न-उत्तर यहाँ दिए गए हैं। यह लेख विशेष रूप से परीक्षा की तैयारी, असाइनमेंट और नोट्स बनाने के लिए बहुत उपयोगी है।


रचना से संवाद : मेरे उत्तर मेरे तर्क

प्रश्न 1. एकांकी 'रीढ़ की हड्डी' का शीर्षक किसका प्रतीक है?
  • (क) शरीर के एक आवश्यक अंग का
  • (ख) व्यक्ति की ऊँचाई के आधार का
  • (ग) आत्म-सम्मान और नैतिक दृढ़ता का
  • (घ) शारीरिक शक्ति और परिश्रम का
सही उत्तर: (ग) आत्म-सम्मान और नैतिक दृढ़ता का

तर्क (कारण): शरीर में जो महत्व रीढ़ की हड्डी (Backbone) का होता है, वह शरीर को सीधा और मजबूत रखती है। उसी प्रकार मनुष्य के जीवन में चरित्र, आत्म-सम्मान और दृढ़ निश्चय का महत्व होता है। एकांकी में शंकर का अपना कोई निजी विचार या स्टैंड नहीं है, अर्थात् उसकी 'रीढ़ की हड्डी' नहीं है। वहीं उमा आत्म-सम्मान और नैतिक दृढ़ता की प्रतीक है। इसलिए यह उत्तर सबसे उपयुक्त है।
प्रश्न 2. 'रीढ़ की हड्डी' एकांकी में किस पर व्यंग्य किया गया है?
  • (क) पात्रों की निर्धनता और लाचारी पर
  • (ख) पात्रों की भाषा और हास्य पर
  • (ग) विवाह और अशिक्षा पर
  • (घ) समाज की अनुचित मान्यताओं पर
सही उत्तर: (घ) समाज की अनुचित मान्यताओं पर

तर्क (कारण): यह एकांकी भारतीय समाज की उस दकियानूसी और रूढ़िवादी सोच पर करारी चोट करता है जहाँ लड़के वाले स्वयं चाहे कितने भी कमज़ोर या चरित्रहीन हों, लेकिन उन्हें अपने घर के लिए एक पढ़ी-लिखी नहीं, बल्कि दबी-कुचली और बिना रीढ़ (बिना विरोध करने वाली) वाली लड़की चाहिए। विवाह के नाम पर लड़कियों को वस्तु की तरह नापना-तौलना समाज की अनुचित मान्यता है, जिस पर गहरा व्यंग्य किया गया है।
प्रश्न 3. "घर जाकर ज़रा यह पता लगाइएगा कि आपके लाडले बेटे के रीढ़ की हड्डी भी है या नहीं" यह वाक्य शंकर की किस छवि को उजागर करता है?
  • (क) नैतिक साहस की कमी और चारित्रिक दुर्बलता
  • (ख) अनुभव और विवेक की कमी
  • (ग) चारित्रिक दृढ़ता और शारीरिक दुर्बलता
  • (घ) उदासीनता और एकाकीपन
सही उत्तर: (क) नैतिक साहस की कमी और चारित्रिक दुर्बलता

तर्क (कारण): उमा का यह कथन शंकर की असलियत को सामने लाता है। शंकर लड़कियों के हॉस्टल के चक्कर काटते हुए पकड़ा गया था और बेइज्ज़त होकर वहाँ से भगाया गया था। वह अपने पिता की गलत बातों का विरोध नहीं कर सकता और पीठ झुकाकर बैठता है। यह सब उसके चरित्र की कमजोरी, डरपोकपन और नैतिक साहस की कमी को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
प्रश्न 4. "जी हाँ, मैं कॉलेज में पढ़ी हूँ। मैंने बी.ए. पास किया है।" उमा की दृष्टि में शिक्षा प्राप्त करने का सही अर्थ है?
  • (क) बड़ी-बड़ी डिग्री प्राप्त करना
  • (ख) कॉलेज में पढ़ना और नौकरी पाना
  • (ग) माता-पिता और पति को प्रसन्न रखना
  • (घ) आत्मबल और स्वतंत्र विचार रखना
सही उत्तर: (घ) आत्मबल और स्वतंत्र विचार रखना

तर्क (कारण): उमा शिक्षा को केवल नौकरी पाने या विवाह का साधन नहीं मानती। शिक्षा से व्यक्ति के अंदर आत्मविश्वास, सही-गलत को पहचानने की क्षमता और स्वतंत्र विचार उत्पन्न होते हैं। जब गोपालप्रसाद उमा को अपमानित करने का प्रयास करते हैं, तो उमा अपनी शिक्षा के कारण ही पूरे आत्मविश्वास और आत्मबल के साथ उनका निडरता से सामना करती है और अपने स्वतंत्र विचार उनके सामने रखती है।
प्रश्न 5. गोपालप्रसाद और रामस्वरूप में क्या-क्या समानताएँ हैं?
  • (क) दोनों प्रगतिशील हैं और रूढ़ियों को नकारते हैं।
  • (ख) दोनों दिखावे और परंपरा के शिकार हैं।
  • (ग) दोनों शिक्षा और रूढ़ियों के समर्थक हैं।
  • (घ) दोनों संगीत और स्वादिष्ट भोजन के प्रेमी हैं।
सही उत्तर: (ख) दोनों दिखावे और परंपरा के शिकार हैं।

तर्क (कारण): रामस्वरूप आधुनिक होने का दिखावा करते हैं, पर अपनी बेटी की शादी के लिए झूठे दिखावे और पुरानी परंपराओं के आगे घुटने टेक देते हैं। वहीं गोपालप्रसाद भी पढ़ी-लिखी बहू न चाहने की दकियानूसी परंपरा और समाज में अपने झूठे रुतबे (दिखावे) के शिकार हैं।
प्रश्न 6. इस एकांकी की संवाद शैली मुख्यतः कैसी है?
  • (क) औपचारिक और शुष्क
  • (ख) स्वाभाविक और व्यंग्यपूर्ण
  • (ग) काव्यात्मक और प्रश्नात्मक
  • (घ) भावुक और संक्षिप्त
सही उत्तर: (ख) स्वाभाविक और व्यंग्यपूर्ण

तर्क (कारण): इस एकांकी के सभी संवाद बिल्कुल आम बोलचाल की भाषा (स्वाभाविक) में लिखे गए हैं, जिससे कहानी बहुत असली लगती है। साथ ही, समाज की रूढ़िवादी सोच, लड़कों की कमजोरियों और समाज के दोहरे मापदंडों पर उमा और अन्य पात्रों के माध्यम से बहुत ही सटीक और गहरा व्यंग्य (Satire) किया गया है।

मेरी समझ मेरे विचार – प्रश्न अभ्यास

प्रश्न 1. बाबू रामस्वरूप समाज में आधुनिक व्यवहार का दिखावा करते हैं, जबकि उनके विचार रूढ़िवादी हैं। इस अंतर्द्वंद्व के उदाहरण एकांकी में से खोजकर लिखिए।
बाबू रामस्वरूप के आधुनिक और रूढ़िवादी विचारों का अंतर्द्वंद्व (टकराव) एकांकी में कई स्थानों पर स्पष्ट होता है:

आधुनिकता का दिखावा: वे अपनी बेटी उमा को उच्च शिक्षा (बी.ए.) दिलाते हैं। उनका मानना है कि लड़कियों को भी पढ़ने का अधिकार है।
रूढ़िवादी विचार: जब उमा की शादी की बात आती है, तो वे दकियानूसी सोच वाले लड़के वालों (गोपालप्रसाद) के सामने पूरी तरह झुक जाते हैं। वे अपनी बेटी की उच्च शिक्षा को छिपाते हैं और उसे केवल मैट्रिक पास बताते हैं। वे उमा पर 'पाउडर-वौडर' लगाकर सज-धज कर आने का दबाव डालते हैं ताकि वह एक वस्तु की तरह लड़के वालों को पसंद आ जाए। यह सिद्ध करता है कि वे अपनी बेटी के स्वाभिमान से ज्यादा समाज के झूठे दिखावे और रूढ़िवादी दबावों को महत्व देते हैं।
प्रश्न 2. 'रीढ़ की हड्डी' का संदर्भ दो अलग-अलग पात्रों के लिए भिन्न-भिन्न अर्थों में आया है, उनकी पहचान कीजिए और लिखिए।
'रीढ़ की हड्डी' का संदर्भ एकांकी में मुख्यतः दो पात्रों— शंकर और उमा के लिए आया है:

1. शंकर के संदर्भ में: यह शब्द उसकी शारीरिक और चारित्रिक दुर्बलता का प्रतीक है। शंकर झुक कर बैठता है, उसकी शारीरिक 'रीढ़ की हड्डी' कमजोर है (बैकबोन की समस्या)। इसके अलावा, उसका अपना कोई व्यक्तिगत विचार या स्टैंड नहीं है। वह अपने पिता की दकियानूसी बातों में हाँ-में-हाँ मिलाता है और लड़कियों के हॉस्टल के चक्कर काटते हुए पिट चुका है। इस प्रकार वह 'बिना रीढ़' (चरित्रहीन और डरपोक) का इंसान है。

2. उमा के संदर्भ में: यहाँ रीढ़ की हड्डी 'आत्मसम्मान, स्वाभिमान और चारित्रिक दृढ़ता' का प्रतीक है। उमा पढ़ी-लिखी है और अन्याय का विरोध करना जानती है। वह अपने आत्मसम्मान के लिए गोपालप्रसाद जैसे लोगों के सामने निडर होकर खड़ी होती है, जो दर्शाता है कि उसकी वैचारिक रीढ़ की हड्डी अत्यंत मजबूत है।
प्रश्न 3. “मेरी समझ में तो ये पढ़ाई-लिखाई के जंजाल आते नहीं।” प्रेमा की इस सोच से उस समय की स्त्री-शिक्षा की स्थिति के विषय में क्या पता चलता है?
प्रेमा (उमा की माँ) का यह कथन उस समय की पिछड़ी और पितृसत्तात्मक सोच को उजागर करता है। इससे पता चलता है कि:
  • उस समय स्त्री-शिक्षा को समाज में कोई विशेष महत्व नहीं दिया जाता था।
  • उच्च शिक्षा को लड़कियों के लिए एक 'जंजाल' या अनावश्यक बोझ समझा जाता था जो उनके विवाह में रुकावट पैदा करता है।
  • समाज की मानसिकता यह थी कि लड़की का मुख्य काम केवल घर-गृहस्थी संभालना, खाना बनाना और पति या ससुराल वालों की सेवा करना ही है।
  • लड़कियों का शिक्षित होना या अपने अधिकार के लिए बोलना उस समय के समाज (विशेषकर बुजुर्ग महिलाओं तक) को भी स्वीकार्य नहीं था।
प्रश्न 4. लेखक ने ‘रीढ़ की हड्डी’ शब्द को एकांकी के शीर्षक के रूप में क्यों चुना होगा? यदि आप इस एकांकी का दूसरा शीर्षक रखना चाहें, जो इसकी मुख्य बात को दर्शाए, तो वह क्या होगा और क्यों?
शीर्षक चुनने का कारण: जिस प्रकार रीढ़ की हड्डी शरीर को सीधा और मजबूत रखती है, उसी प्रकार मनुष्य का चरित्र और स्वाभिमान उसे समाज में सिर उठाकर जीने की ताकत देता है। एकांकी में शंकर जैसे युवाओं पर करारा व्यंग्य है, जिनका अपना कोई व्यक्तित्व या आत्मसम्मान नहीं है (अर्थात् उनकी रीढ़ की हड्डी नहीं है)। दूसरी ओर, उमा के माध्यम से लेखक ने समाज को यह संदेश दिया है कि हर व्यक्ति में स्वाभिमान रूपी 'रीढ़ की हड्डी' का होना आवश्यक है। अतः यह शीर्षक पूरी तरह से सटीक और सार्थक है।

अन्य शीर्षक और उसका कारण: यदि मुझे इसका दूसरा शीर्षक रखना हो, तो मैं "उमा का स्वाभिमान" या "सशक्त उमा" रखूँगा।
कारण: क्योंकि यह पूरा एकांकी उमा के चरित्र, उसकी शिक्षा और उसके आत्मसम्मान के इर्द-गिर्द घूमता है। उमा ही वह पात्र है जो रूढ़िवादी समाज के मुँह पर तमाचा मारती है और अपने स्वाभिमान की रक्षा करती है।

एकांकी की पड़ताल – प्रश्न और उत्तर

प्रश्न 1. 'रीढ़ की हड्डी' एकांकी से संबंधित कुछ बिंदु नीचे दिए गए हैं। एकांकी में से इन बिंदुओं से संबंधित एक-एक उदाहरण ढूँढ़कर लिखिए:
यहाँ 'रीढ़ की हड्डी' एकांकी के आधार पर माँगे गए सभी बिंदुओं के उदाहरण प्रस्तुत हैं:

  • 1. एकांकी का नाम: 'रीढ़ की हड्डी'
  • 2. लेखक का नाम: जगदीशचंद्र माथुर
  • 3. पात्र: उमा, रामस्वरूप (पिता), प्रेमा (माँ), शंकर (लड़का), गोपालप्रसाद (शंकर के पिता), रतन (नौकर)।
  • 4. परिवेश/देश-काल: यह एकांकी 1939 के आसपास के भारतीय मध्यवर्गीय समाज का परिवेश दिखाता है, जहाँ स्त्रियों की शिक्षा और विवाह में दकियानूसी परंपराएँ हावी थीं। कमरा मामूली तरह से सजा हुआ है।
  • 5. रंग-निर्देश/मंच-निर्देश: "(मामूली तरह से सजा हुआ एक कमरा। अंदर के दरवाजे से आते हुए जिन महाशय की पीठ नजर आ रही है, वह अधेड़ उम्र के मालूम होते हैं। एक तख्त को पकड़े हुए पीछे की ओर चलते-चलते कमरे में आते हैं।)"
  • 6. संवाद-निर्देश: "(ज़रा सकपकाकर)", "(ज़रा रूखी आवाज़ में)", "(ताव में आकर)" आदि।
  • 7. समस्या: समाज में लड़कियों की उच्च शिक्षा का विरोध, विवाह में लेन-देन, लड़कियों को सजी-धजी वस्तु की तरह नापना-तौलना और रूढ़िवादी सोच।
  • 8. संवाद:
    रामस्वरूप: "न जाने कैसा इसका दिमाग है। वरना, आजकल की लड़कियों के सहारे तो पौडर का कारोबार चलता है।"
    उमा: "अब मुझे कह लेने दीजिए, बाबूजी!... ये जो महाशय मेरे खरीदार बनकर आए हैं, इनसे ज़रा पूछिए कि क्या लड़कियों के दिल नहीं होता?"
  • 9. मुख्य विचार: स्त्री-शिक्षा का समर्थन, स्त्रियों के आत्मसम्मान व अधिकारों की रक्षा और समाज के दोहरे मापदंडों पर करारी चोट।
  • 10. समाधान/परिणाम: एकांकी के अंत में उमा द्वारा निडर होकर गोपालप्रसाद और शंकर की सच्चाई को सामने लाना। अंततः गोपालप्रसाद का बेइज्जत होकर लौटना और उमा का आत्मसम्मान के साथ विजयी होना।

मेरी टिप्पणी – प्रश्न और उत्तर

प्रश्न 2. “जी हाँ, जाइए, जरूर चले जाइए। लेकिन घर जाकर ज़रा यह पता लगाइएगा कि आपके लाडले बेटे के रीढ़ की हड्डी भी है या नहीं— यानी बैकबोन, बैकबोन!”
उपर्युक्त वाक्य उमा द्वारा शंकर पर की गई एक व्यंग्य टिप्पणी है। अब आप उमा द्वारा शंकर के लिए कही गई इस बात पर अपने विचार प्रस्तुत करते हुए एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
मेरी टिप्पणी:

उमा का यह कथन शंकर के खोखले और रीढ़-विहीन व्यक्तित्व पर एक बहुत बड़ा और सटीक व्यंग्य है। 'रीढ़ की हड्डी' न होने का अर्थ है - व्यक्ति में अपने खुद के विचारों, आत्मसम्मान और चरित्र का न होना।

शंकर का अपना कोई वजूद या अस्तित्व नहीं है। वह पूरी तरह से अपने दकियानूसी पिता के विचारों के अधीन है और उनकी हर गलत बात में हाँ-में-हाँ मिलाता है। शारीरिक रूप से भी वह झुक कर चलता है। इसके अलावा, वह लड़कियों के हॉस्टल के आस-पास घूमते हुए बेइज्जत होकर भगाया जा चुका है।

उमा इस टिप्पणी के माध्यम से यह कड़ा संदेश देती है कि जो युवक स्वयं इतना चरित्रहीन, डरपोक और वैचारिक रूप से अपंग हो, उसे किसी लड़की के रूप-रंग या शिक्षा पर सवाल उठाने का कोई अधिकार नहीं है। उमा की यह टिप्पणी अत्यंत साहसिक है और पुरुष-प्रधान समाज के दोहरे मापदंडों की पोल खोलकर रख देती है।

तुलना और विचार – प्रश्न अभ्यास

प्रश्न 1. “गोपालप्रसाद: भला पूछिए इन अक्ल के ठेकेदारों से कि क्या लड़कों की पढ़ाई और लड़कियों की पढ़ाई एक बात है।”
एकांकी में उन पंक्तियों को खोजिए जहाँ एकांकी के पात्रों के व्यवहार में लड़कियों तथा लड़कों के प्रति भिन्न-भिन्न दृष्टि अभिव्यक्त हुई है। अब यह भी लिखिए कि आप इस भिन्नता को किस प्रकार समझते हैं?
एकांकी में लड़के-लड़कियों के प्रति भिन्न दृष्टि (भेदभाव) दर्शाने वाली पंक्तियाँ:
  1. गोपालप्रसाद: "औरतों का काम तो है ही पढ़ना और काबिल होना... जनाब, मोर के पंख होते हैं, मोरनी के नहीं; शेर के बाल होते हैं, शेरनी के नहीं।" (पुरुषों की तुलना मोर/शेर से और स्त्रियों को कमतर आँकना)
  2. गोपालप्रसाद: "बस हद से हद मैट्रिक-पास होनी चाहिए... मेम साहब तो रखनी नहीं, कौन भुगतेगा उसके नखरों को।" (लड़कियों की उच्च शिक्षा का विरोध)
  3. रामस्वरूप (पिता): लड़के वालों के डर से अपनी बेटी उमा की बी.ए. की पढ़ाई को छिपाते हैं और उसे 'मैट्रिक पास' बताते हैं।
  4. गोपालप्रसाद (लड़के की कमियों को नजरअंदाज करना): "बाप सेर है तो लड़का सवा सेर... लड़का एक साल बीमार हो गया था... यह कोई साल-दो-साल का 'मार्जिन' रखता हूँ।"

मेरी समझ (विचार):
यह भिन्नता पूरी तरह से पितृसत्तात्मक और रूढ़िवादी समाज की दोहरी मानसिकता को दर्शाती है। इस मानसिकता के अनुसार, लड़के घर के चिराग और अधिकार-संपन्न होते हैं, इसलिए उनके दोष और कमजोरियों (जैसे शंकर का बैकबोन न होना) को छुपा लिया जाता है। वहीं, लड़कियों को केवल घर संभालने वाली एक वस्तु समझा जाता है, इसलिए उनकी शिक्षा, विचार और स्वाभिमान को कुचलने का प्रयास किया जाता है। आज के समय में यह सोच पूरी तरह अनुचित और अस्वीकार्य है।
प्रश्न 2. “मुझे अपनी इज्जत, अपने मान का खयाल तो है। लेकिन इनसे पूछिए कि ये किस तरह अपना मुँह छिपाकर भागे थे।”
एकांकी में उमा अपने अधिकार और विचार खुलकर व्यक्त करती है। इससे उमा के व्यक्तित्व के विषय में क्या-क्या पता चलता है? आपके विचार से उसके व्यक्तित्व में ये विशेषताएँ कैसे आई होंगी? (संकेत– शिक्षा, परिवार का व्यवहार आदि)
उमा के व्यक्तित्व की विशेषताएँ:
  • साहसी और निडर: वह गोपालप्रसाद के तीखे सवालों और अपमानजनक बातों का बिना डरे, दृढ़ता से जवाब देती है।
  • स्वाभिमानी: उसे अपने आत्मसम्मान से प्रेम है। वह खुद को फर्नीचर या मूक जानवर की तरह तौले जाने का कड़ा विरोध करती है।
  • तार्किक और मुखर: वह शंकर की सच्चाई निडरता से सबके सामने रखती है और पुरुष-प्रधान समाज के खोखलेपन पर प्रहार करती है।

ये विशेषताएँ कैसे आई होंगी:
  • शिक्षा का प्रभाव: उमा बी.ए. पास है। उच्च शिक्षा ने उसकी सोच को विकसित किया, उसे सही-गलत की पहचान कराई और उसके भीतर आत्मविश्वास तथा आत्मबल जगाया।
  • परिवार का व्यवहार (परिपक्वता): यद्यपि उसके माता-पिता रूढ़िवादी दबाव में आ गए थे, लेकिन उमा ने समाज की इस झूठी और दकियानूसी व्यवस्था को करीब से देखा और समझा। इसी समझ ने उसे इस अन्याय के खिलाफ मुखर होने की प्रेरणा दी।

सृजन: एकांकी का विस्तार – प्रश्न और उत्तर

प्रश्न 1. एकांकी के अंत में रतन कहता है— "बाबूजी, मक्खन..." और परदा गिर जाता है। लेखक ने इस संवाद से एकांकी का अंत क्यों किया होगा?
(संकेत– हास्य, व्यंग्य, टिप्पणी आदि)
लेखक ने एकांकी का अंत रतन के संवाद "बाबूजी, मक्खन..." से जानबूझकर किया है। इसके पीछे निम्नलिखित कारण हो सकते हैं:
  • व्यंग्य और प्रतीकात्मकता: मक्खन 'चिकनी-चुपड़ी बातों' या चापलूसी का प्रतीक है। रामस्वरूप अपनी बेटी की शादी के लिए गोपालप्रसाद को बहुत 'मक्खन' लगा रहे थे, लेकिन उमा की स्पष्टवादिता से सारी सच्चाई सामने आ गई। अब मक्खन लाने का कोई औचित्य नहीं बचा था।
  • हास्य उत्पन्न करना: एकांकी का अंत काफी गंभीर और तनावपूर्ण था (जब गोपालप्रसाद और शंकर बेइज्जत होकर घर से जा रहे होते हैं और उमा रो रही होती है)। ऐसे में रतन का अचानक मक्खन लेकर आना वातावरण में एक हल्कापन और हास्य (Comic relief) पैदा करता है।
  • स्थिति की विडंबना: रतन को घर के तनावपूर्ण माहौल का कोई अंदाज़ा नहीं है। उसका वह संवाद पूरी स्थिति की विडंबना (Irony) को दर्शाता है कि जिस मेहमान-नवाज़ी के लिए इतनी भागदौड़ हो रही थी, वह सब बेकार हो गई।
प्रश्न 2. एकांकी में यदि परदा दोबारा उठ जाए तो अगला दृश्य क्या होगा? अनुमान लगाइए और लिखिए।
अनुमानित अगला दृश्य:

यदि एकांकी का परदा दोबारा उठता है, तो दृश्य कुछ इस प्रकार होगा:

(परदा उठता है। रामस्वरूप कुर्सी पर माथा पकड़े बैठे हैं। प्रेमा उमा को सांत्वना दे रही है। रतन हाथ में मक्खन की प्लेट लिए हैरान खड़ा है।)

रतन: (घबराते हुए) बाबूजी! मेहमान लोग... वे चले गए क्या? यह मक्खन...
रामस्वरूप: (झुंझलाते हुए) ले जा इस मक्खन को रतन! अब इसकी कोई जरूरत नहीं।
प्रेमा: (रामस्वरूप से) मैंने तो पहले ही कहा था कि इस लड़की को इतना मत पढ़ाओ। अब देखो, बन गया तमाशा! अब कौन करेगा हमारी बेटी से शादी?
उमा: (आँसू पोंछते हुए, दृढ़ता से) माँ! तमाशा मैंने नहीं, उन लोगों ने बनाया था। बाबूजी, मुझे माफ़ कर दीजिए, लेकिन मैं ऐसे लालची और बिना रीढ़ वाले घर में जाकर कभी खुश नहीं रह पाती। मैं आगे पढूँगी और खुद अपने पैरों पर खड़ी होऊँगी।
रामस्वरूप: (कुछ देर शांत रहने के बाद, उमा की ओर देखते हैं। उनके चेहरे पर अब तनाव नहीं, बल्कि एक गर्व का भाव है) नहीं उमा, तूने जो किया बिल्कुल सही किया। मैं ही समाज के झूठे दिखावे के दबाव में अंधा हो गया था। मुझे गर्व है कि मेरी बेटी के पास 'रीढ़ की हड्डी' है!

(रामस्वरूप उठकर उमा के सिर पर प्यार से हाथ रखते हैं। प्रेमा भी मुस्कुरा देती है। रतन मक्खन की प्लेट लेकर वापस रसोई की तरफ चला जाता है। परदा गिरता है।)

मेरे शब्द

प्रश्न 1. एकांकी में पाँच ऐसे शब्द चुनकर रेखांकित कर लीजिए जो आपके लिए बिल्कुल नए थे। उन शब्दों वाले वाक्य अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए। अब उन शब्दों के अर्थ अपने अनुमान से लिखिए। इसके बाद उनके अर्थ शब्दकोश में से देखकर लिखिए।
यहाँ एकांकी से चुने गए 5 नए शब्द, उनके अर्थ और वाक्य प्रयोग दिए गए हैं:

  1. दकियानूसी
    अर्थ: पुराने विचारों वाला या रूढ़िवादी।
    वाक्य: गोपालप्रसाद की सोच बहुत दकियानूसी थी।

  2. तालीम
    अर्थ: शिक्षा / पढ़ाई-लिखाई।
    वाक्य: उमा ने बी.ए. तक की तालीम हासिल की थी।

  3. फितरती
    अर्थ: स्वभाव से चालाक या चालबाज।
    वाक्य: गोपालप्रसाद एक फितरती इंसान थे।

  4. निहायत
    अर्थ: बहुत अधिक / अत्यधिक।
    वाक्य: लड़की का खूबसूरत होना निहायत जरूरी है।

  5. मार्जिन
    अर्थ: अंतर या छूट / गुंजाइश।
    वाक्य: मैं उम्र में एकाध साल का मार्जिन रखता हूँ।

भाषा में मुहावरे

प्रश्न 2. एकांकी में से चुनकर कुछ वाक्य नीचे दिए गए हैं। इन वाक्यों में जहाँ-जहाँ मुहावरे आए हैं, उन्हें पहचानकर रेखांकित कीजिए। इन मुहावरों का प्रयोग करते हुए नए वाक्य बनाकर लिखिए—
1. "उनके पीछे-पीछे भीगी बिल्ली की तरह रतन आ रहा है— खाली हाथ।"
मुहावरा: भीगी बिल्ली बनना (डर जाना या सहम जाना)
नया वाक्य: चोरी पकड़े जाने पर रमेश पिताजी के सामने भीगी बिल्ली बन गया。

2. "लेकिन वह तुम्हारी लाडली बेटी तो मुँह फुलाए पड़ी है।"
मुहावरा: मुँह फुलाना (रूठ जाना या नाराज होना)
नया वाक्य: अपनी पसंद का खिलौना न मिलने पर बच्चा मुँह फुलाकर बैठ गया。

3. "और तुम उसकी माँ, किस मर्ज़ की दवा हो?"
मुहावरा: किस मर्ज़ की दवा होना (किस काम का होना)
नया वाक्य: अगर तुम मुसीबत में अपने दोस्त की मदद नहीं कर सकते, तो फिर किस मर्ज़ की दवा हो?

4. "तुम्हीं ने उसे पढ़ा-लिखाकर इतना सिर चढ़ा रखा है।"
मुहावरा: सिर चढ़ाना (बहुत अधिक लाड़-प्यार से बिगाड़ देना)
नया वाक्य: माता-पिता ने ही अपने इकलौते बेटे को सिर चढ़ा रखा है, इसलिए वह किसी की नहीं सुनता。

5. "मगर तुम तो अभी से सब-कुछ उगले देती हो।"
मुहावरा: उगल देना (भेद खोल देना या सच बता देना)
नया वाक्य: पुलिस की थोड़ी सी सख्ती देखते ही चोर ने सब कुछ उगल दिया。

6. "यह लीजिए, आप तो मुझे काँटों में घसीटने लगे।"
मुहावरा: काँटों में घसीटना (अत्यधिक प्रशंसा करके शर्मिंदा करना या संकोच में डालना)
नया वाक्य: अरे भाई! इतनी तारीफ करके आप मुझे काँटों में घसीट रहे हैं, मैंने तो बस अपना फर्ज निभाया है。

7. "बाबू रामस्वरूप, आपने मेरी इज्जत उतारने के लिए मुझे यहाँ बुलाया था?"
मुहावरा: इज्जत उतारना (अपमानित करना या बेइज्जत करना)
नया वाक्य: भरी सभा में झूठे आरोप लगाकर उसने सरपंच की इज्जत उतार दी。

8. "लेकिन इनसे पूछिए कि ये किस तरह अपना मुँह छिपाकर भागे थे।"
मुहावरा: मुँह छिपाकर भागना (लज्जित होकर या शर्मिंदा होकर भागना)
नया वाक्य: जब लोगों को नेताजी के भ्रष्टाचार का पता चला, तो वे मुँह छिपाकर भाग गए।

संदर्भ में शब्द

प्रश्न 3. "बाप सेर है तो लड़का सवा सेर।"
एकांकी में इस कहावत का प्रयोग रामस्वरूप द्वारा गोपालप्रसाद और शंकर की नकारात्मक प्रवृत्ति का उल्लेख करने के लिए किया गया है। लेकिन इस कहावत का प्रयोग सकारात्मक अर्थ में भी किया जा सकता है। अब आप इस नए प्रयोग से वाक्य बनाकर लिखिए।
सकारात्मक अर्थ में कहावत का प्रयोग:

वाक्य: रमेश जी ने तो अपने व्यापार में शहर भर में खूब नाम कमाया ही था, लेकिन जब उनके बेटे ने व्यापार को अंतरराष्ट्रीय स्तर (International level) तक पहुँचा दिया, तो लोगों ने कहा कि सच में, "बाप सेर है तो लड़का सवा सेर"।
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