कर चले हम फ़िदा : सप्रसंग व्याख्या (Kar Chale Hum Fida Class 10 Explanation)
नमस्कार विद्यार्थियों! आज के इस ब्लॉग पोस्ट में हम कक्षा 10वीं हिंदी (स्पर्श भाग-2) के अत्यंत भावुक और देशभक्ति पूर्ण गीत 'कर चले हम फ़िदा' का भावार्थ समझेंगे। इसके रचयिता प्रसिद्ध शायर कैफ़ी आज़मी हैं। यह गीत 1962 के भारत-चीन युद्ध की पृष्ठभूमि पर आधारित है, जिसमें एक सैनिक अपने अंतिम समय में देशवासियों को संदेश दे रहा है।
कविता का सार (Summary)
इस गीत में युद्ध के मैदान में शहीद होता हुआ एक सैनिक अपने साथियों और देशवासियों से कहता है कि हमने अपनी जान देकर देश की रक्षा की है, अब इस देश की जिम्मेदारी तुम्हारे हाथों में है। सैनिक बताता है कि कैसे विषम परिस्थितियों और बर्फीली चोटियों पर भी उन्होंने दुश्मन को आगे नहीं बढ़ने दिया। वह चाहता है कि उनके बलिदान के बाद भी देश की रक्षा का सिलसिला रुकना नहीं चाहिए। धरती को 'दुल्हन' मानकर वे अपने खून से उसकी माँग भरने (रक्षा करने) की बात कहते हैं।
पद्यांश 1: आखिरी संदेश
कर चले हम फ़िदा जान-ओ-तन साथियो,
अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो।
साँस थमती गई, नब्ज़ जमती गई,
फिर भी बढ़ते कदम को न रुकने दिया,
कट गए सर हमारे तो कुछ ग़म नहीं,
सर हिमालय का हमने न झुकने दिया,
मरते-मरते रहा बाँकपन साथियो,
अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो।
शब्दार्थ (Word Meanings):
- फ़िदा : कुर्बान / न्योछावर
- जान-ओ-तन : प्राण और शरीर
- हवाले : सौंपना / जिम्मे करना
- नब्ज़ : नाड़ी (Pulse)
- बाँकपन : वीरता का भाव / जवानी का जोश
प्रसंग (Context):
प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी हिंदी की पाठ्यपुस्तक
व्याख्या (Explanation):
सैनिक कहता है— "हे साथियों! हम तो अपने शरीर और प्राणों को देश के लिए कुर्बान (फ़िदा) करके जा रहे हैं। अब इस देश की रक्षा की बागडोर तुम्हारे हाथों में है।
लड़ाई के दौरान हमारी साँसें रुकने लगी थीं और ठंड के कारण नाड़ियाँ (नब्ज़) जमने लगी थीं, फिर भी हमने अपने बढ़ते हुए कदमों को रुकने नहीं दिया और दुश्मन का मुकाबला किया। हमें इस बात का कोई दुख नहीं है कि हमारे सिर कट गए (हम शहीद हो गए), बल्कि हमें गर्व है कि हमने भारत के गौरव के प्रतीक हिमालय का सिर नहीं झुकने दिया (दुश्मन को जीतने नहीं दिया)। मरते दम तक हमारे अंदर वीरता का जोश (बाँकपन) बना रहा। अब हम जा रहे हैं, वतन तुम्हारे हवाले है।"
विशेष (Vishesh):
- 'हिमालय का सर' भारत के सम्मान का प्रतीक है।
- उर्दू शब्दावली (फ़िदा, जान-ओ-तन, नब्ज़) का सुंदर प्रयोग है।
- वीर रस और करुण रस का मिश्रण है।
पद्यांश 2: बलिदान का मौसम
ज़िंदा रहने के मौसम बहुत हैं मगर,
जान देने की रुत रोज़ आती नहीं,
हुस्न और इश्क़ दोनों को रुसवा करे,
वो जवानी जो खूँ में नहाती नहीं,
आज धरती बनी है दुलहन साथियो,
अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो।
शब्दार्थ (Word Meanings):
- रुत : मौसम / अवसर
- हुस्न : सुंदरता
- इश्क़ : प्रेम
- रुसवा : बदनाम
- खूँ : खून / रक्त
प्रसंग (Context):
प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी हिंदी की पाठ्यपुस्तक
व्याख्या (Explanation):
सैनिक युवाओं को प्रेरित करते हुए कहता है कि इंसान को जिंदा रहने के मौके (मौसम) तो जीवन में बहुत मिलते हैं, लेकिन देश के लिए जान देने का सौभाग्य (रुत) रोज-रोज नहीं मिलता।
जवानी वही सार्थक है जो देश के काम आए। जो जवानी अपने देश की रक्षा के लिए खून में नहीं नहाती (बलिदान नहीं देती), वह जवानी अपने सौंदर्य (हुस्न) और प्रेम (इश्क़) दोनों को बदनाम (रुसवा) करती है।
आज हमारे सैनिकों के खून से यह धरती लाल हो गई है, जैसे किसी दुल्हन ने लाल जोड़ा पहना हो। हे साथियों! आज यह धरती दुल्हन बनी है, इसकी लाज और रक्षा की जिम्मेदारी अब तुम्हारे हवाले है।
विशेष (Vishesh):
- 'धरती बनी है दुलहन' में रूपक अलंकार और मानवीकरण है।
- युवाओं को देश के लिए मर-मिटने की प्रेरणा दी गई है।
पद्यांश 3: कुर्बानियों का सिलसिला
राह क़ुर्बानियों की न वीरान हो,
तुम सजाते ही रहना नए काफ़िले,
फ़तह का जश्न इस जश्न के बाद है,
ज़िन्दगी मौत से मिल रही है गले,
बाँध लो अपने सर से कफ़न साथियो,
अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो।
शब्दार्थ (Word Meanings):
- वीरान : सुनसान / उजड़ा हुआ
- काफ़िले : यात्रियों का समूह (यहाँ सैनिकों का जत्था)
- फ़तह : जीत / विजय
- जश्न : उत्सव / खुशी
- सर से कफ़न बाँधना : मरने के लिए तैयार रहना (मुहावरा)
प्रसंग (Context):
प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी हिंदी की पाठ्यपुस्तक
व्याख्या (Explanation):
सैनिक कहता है कि हम तो जा रहे हैं, लेकिन कुर्बानियों (बलिदान) का यह रास्ता कभी सूना (वीरान) नहीं होना चाहिए। तुम लगातार नए-नए सैनिकों के जत्थे (काफ़िले) तैयार करके भेजते रहना।
आज हम जो बलिदान का उत्सव मना रहे हैं, उसी के बाद हमें जीत (फ़तह) का उत्सव मनाने का मौका मिलेगा। आज जिंदगी खुद आगे बढ़कर मौत को गले लगा रही है (सैनिक खुशी से मर रहे हैं)।
हे साथियों! अब तुम भी अपने सिर पर कफ़न बाँध लो (बलिदान के लिए तैयार हो जाओ), क्योंकि अब वतन की रक्षा का भार तुम्हारे कंधों पर है।
विशेष (Vishesh):
- 'सर से कफ़न बाँधना' मुहावरे का जोशपूर्ण प्रयोग है।
- 'ज़िन्दगी मौत से मिल रही है गले' में मानवीकरण है।
पद्यांश 4: राम और लक्ष्मण का रूप
खींच दो अपने खूँ से ज़मीं पर लकीर,
इस तरफ़ आने पाए न रावन कोई,
तोड़ दो हाथ अगर हाथ उठने लगे,
छू न पाए सीता का दामन कोई,
राम भी तुम, तुम्हीं लक्ष्मण साथियो,
अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो।
शब्दार्थ (Word Meanings):
- खूँ : खून
- लकीर : रेखा (Border)
- रावन : शत्रु / दुश्मन
- दामन : आँचल / इज्जत
प्रसंग (Context):
प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी हिंदी की पाठ्यपुस्तक
व्याख्या (Explanation):
सैनिक कहता है— "हे साथियों! अपने खून से इस धरती पर एक ऐसी लक्ष्मण रेखा (लकीर) खींच दो कि कोई भी रावण (दुश्मन) इसे पार करके इस तरफ न आ पाए।
यदि कोई हाथ हमारी भारत माता की ओर उठे, तो उस हाथ को तोड़ दो। सावधान रहो कि कोई भी सीता (भारत माता) के दामन (पवित्रता) को छू न पाए।
इस समय राम भी तुम ही हो और लक्ष्मण भी तुम ही हो। तुम्हें ही अपनी सीता (देश) की रक्षा करनी है। अब यह वतन तुम्हारे हवाले है।"
विशेष (Vishesh):
- रामायण के पात्रों (राम, लक्ष्मण, सीता, रावण) का प्रतीकात्मक प्रयोग (Symbolism) है।
- 'हाथ तोड़ना' मुहावरे का प्रयोग है।
- अत्यंत ओजस्वी और प्रेरणादायक अंत है।
उम्मीद है कि आपको Class 10 Hindi Kar Chale Hum Fida Explanation का यह लेख पसंद आया होगा। इसे अपने सहपाठियों के साथ शेयर जरूर करें।

If you have any doubts, Please let me know