तत्सम और तद्भव शब्द: परिभाषा, भेद और पहचानने के 8 आसान नियम (Tricks)
हिन्दी व्याकरण (Hindi Grammar) में शब्द भंडार का बहुत महत्व है। उत्पत्ति या स्रोत के आधार पर शब्दों को मुख्य रूप से तत्सम और तद्भव श्रेणियों में बाँटा जाता है। विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे CTET, UPTET, REET, SSC GD, और स्कूली परीक्षाओं में इस विषय से प्रश्न अवश्य पूछे जाते हैं। आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं।
1. तत्सम और तद्भव शब्द किसे कहते हैं?
क) तत्सम शब्द (Tatsam Shabda)
तत्सम शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है - तत् (उसके) + सम (समान), अर्थात् संस्कृत के समान।
उदाहरण: अग्नि, सूर्य, कर्पूर, दुग्ध, नक्षत्र, वायु आदि।
ख) तद्भव शब्द (Tadbhav Shabda)
तद्भव शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है - तत् (उससे) + भव (उत्पन्न), अर्थात् जो संस्कृत से उत्पन्न हुए हैं।
उदाहरण: आग, सूरज, कपूर, दूध, तारा, हवा आदि।
2. तत्सम और तद्भव पहचानने के 8 महत्वपूर्ण नियम (Tricks)
परीक्षा में कम समय में सही पहचान करने के लिए नीचे दिए गए नियमों का अभ्यास करें:
प्रायः जिन शब्दों में संयुक्त व्यंजन जैसे 'क्ष', 'त्र', 'ज्ञ', 'श्र' का प्रयोग होता है, वे तत्सम होते हैं। तद्भव में 'क्ष' का परिवर्तन 'ख' या 'छ' में हो जाता है।
उदाहरण: पक्षी (तत्सम) -> पंछी (तद्भव), नक्षत्र (तत्सम) -> नखत (तद्भव)।
यदि किसी शब्द के ऊपर चन्द्रबिन्दु ( ँ ) का प्रयोग हुआ है, तो वह निश्चित रूप से तद्भव शब्द होगा। संस्कृत में चन्द्रबिन्दु का प्रयोग नहीं होता था।
उदाहरण: चंद्र (तत्सम) -> चाँद (तद्भव), ग्राम (तत्सम) -> गाँव (तद्भव)।
तत्सम शब्दों में अधिकतर 'व' वर्ण का प्रयोग होता है, जो तद्भव रूपों में बदलकर 'ब' हो जाता है।
उदाहरण: वर्षा (तत्सम) -> बरसात (तद्भव), वानर (तत्सम) -> बंदर (तद्भव)।
तत्सम शब्दों में अक्सर शलजम वाले 'श' का प्रयोग होता है, जबकि तद्भव में वह बदलकर सरोते वाले 'स' में परिवर्तित हो जाता है।
उदाहरण: श्यामल (तत्सम) -> साँवला (तद्भव), श्वशुर (तत्सम) -> ससुर (तद्भव)।
जिन शब्दों में 'ऋ' की मात्रा लगी हो या फिर आधा 'र' (रेफ या पदेन रूप) हो, वे प्रायः तत्सम शब्द होते हैं।
उदाहरण: घृत (तत्सम) -> घी (तद्भव), आम्र (तत्सम) -> आम (तद्भव)।
जिन शब्दों में षटकोण वाले 'ष' का प्रयोग होता है, वे शब्द हमेशा तत्सम होते हैं। तद्भव बनते समय इसका रूप बदल जाता है या लोप हो जाता है।
उदाहरण: कृषक (तत्सम) -> किसान (तद्भव), वर्ष (तत्सम) -> बरस (तद्भव)।
संसकृत के तत्सम शब्दों में 'ण' का प्रयोग अधिक होता है, जो तद्भव बनते समय सरल होकर 'न' बन जाता है।
उदाहरण: किरण (तत्सम) -> किरन (तद्भव), चूर्ण (तत्सम) -> चूरन (तद्भव)।
संस्कृत भाषा के संख्यात्मक शब्द या कोटि सूचक शब्द तत्सम कहलाते हैं, जबकि व्यावहारिक हिन्दी गिनती वाले रूप तद्भव कहलाते हैं।
उदाहरण: अष्ट (तत्सम) -> आठ (तद्भव), चतुर्थ (तत्सम) -> चौथा (तद्भव)।
परीक्षाओं में बार-बार पूछे जाने वाले तत्सम और तद्भव शब्दों की विस्तृत सूची
प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे REET, CTET, UPTET, RO/ARO, State PCS, और पुलिस भर्ती परीक्षाओं) की दृष्टि से नीचे दिए गए शब्द अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इन्हें याद रखने की आसानी के लिए तीन अलग-अलग श्रेणियों में बाँटा गया है:
श्रेणी क) प्रकृति, पशु-पक्षी, फल और फूलों से संबंधित शब्द
इस श्रेणी में पर्यावरण, पेड़-पौधों और जीव-जंतुओं से जुड़े महत्वपूर्ण तत्सम-तद्भव शब्द शामिल हैं:
| तत्सम शब्द (Sanskrit) | तद्भव शब्द (Hindi) | महत्वपूर्ण ट्रिक/पहचान |
|---|---|---|
| आम्र | आम | आधा 'र' का नियम |
| अग्नि | आग | - |
| उष्ट्र | ऊँट | चन्द्रबिन्दु का नियम |
| कपोत | कबूतर | - |
| कदली | केला | - |
| काक | कौआ | - |
| कोकिल | कोयल | - |
| गौ | गाय | - |
| ग्राम | गाँव | चन्द्रबिन्दु का नियम |
| गृध्र | गीध | आधा 'र' का नियम |
| चैत्र | चेत | संयुक्त व्यंजन 'त्र' का नियम |
| दुग्ध | दूध | - |
| धूम्र | धुआँ | चन्द्रबिन्दु और आधा 'र' |
| नारिकेल | नियल / नारियल | - |
| पक्षी | पंछी | 'क्ष' का 'छ' में बदलना |
| पत्र | पत्ता | संयुक्त व्यंजन 'त्र' का नियम |
| पुष्प | फूल / पुहुप | 'ष' का नियम |
| मयूरा | मोर | - |
| मक्षिका | मक्खी | 'क्ष' का 'ख' में बदलना |
| मेघ | मेह | - |
| व्याघ्र | बाघ | 'व' का 'ब' और आधा 'र' |
| वानर | बंदर | 'व' का 'ब' नियम |
| वृश्चिक | बिच्छू | 'व' का 'ब' नियम |
| शर्करा | शक्कर | 'श' का नियम |
| शुष्क | सूखा | 'श' और 'ष' का नियम |
| हरिद्रा | हल्दी | - |
| हस्ती | हाथी | - |
श्रेणी ख) मानव अंग, संबंध और मानवीय क्रियाओं से संबंधित शब्द
शरीर के अंगों, पारिवारिक रिश्तों और मनुष्य से जुड़ी सामान्य क्रियाओं के तत्सम-तद्भव शब्द:
| तत्सम शब्द (Sanskrit) | तद्भव शब्द (Hindi) | महत्वपूर्ण ट्रिक/पहचान |
|---|---|---|
| अंगुष्ठ | अंगूठा | 'ष' का नियम |
| अक्षि | आँख | 'क्ष' का परिवर्तन और चन्द्रबिन्दु |
| अश्रु | आँसू | संयुक्त व्यंजन 'श्र' और चन्द्रबिन्दु |
| कर्ण | कान | 'ण' का 'न' में बदलना |
| जंघा | जाँघ | चन्द्रबिन्दु का नियम |
| जिह्वा | जीभ | - |
| ज्येष्ठ | जेठ | 'ष' का नियम |
| दंत | दाँत | चन्द्रबिन्दु का नियम |
| दुर्बल | दुबला | आधा 'र' का नियम |
| नख | नाखून | - |
| नयन | नैन | - |
| नृत्य | नाच | 'ऋ' की मात्रा का नियम |
| पाद | पैर | - |
| पुत्र | पूत | संयुक्त व्यंजन 'त्र' का नियम |
| पृष्ठ | पीठ | 'ष' का नियम |
| पौत्र | पोता | संयुक्त व्यंजन 'त्र' का नियम |
| भगिनी | बहन | - |
| भ्राता | भाई | आधा 'र' का नियम |
| भिक्षा | भीख | 'क्ष' का 'ख' में बदलना |
| मस्तक | माथा | - |
| मित्र | मीत | संयुक्त व्यंजन 'त्र' का नियम |
| मृत्यु | मौत | 'ऋ' की मात्रा का नियम |
| राज्ञी | रानी | संयुक्त व्यंजन 'ज्ञ' का नियम |
| वधु | बहू | 'व' का 'ब' नियम |
| विवाह | ब्याह | 'व' का 'ब' नियम |
| श्वशुर | ससुर | 'श' का 'स' में बदलना |
| हस्त | हाथ | - |
श्रेणी ग) दैनिक जीवन, वस्तुएँ, समय और अन्य महत्वपूर्ण शब्द
रोजमर्रा की वस्तुओं, समय और अन्य महत्वपूर्ण अमूर्त अवधारणाओं से संबंधित तत्सम-तद्भव शब्द:
| तत्सम शब्द (Sanskrit) | तद्भव शब्द (Hindi) | महत्वपूर्ण ट्रिक/पहचान |
|---|---|---|
| अंधकार | अँधेरा | चन्द्रबिन्दु का नियम |
| अद्य | आज | - |
| अमूल्य | अमोल | - |
| आश्चर्य | अचरज | आधा 'र' का नियम |
| ईर्ष्या | ईरखा | आधा 'र' का नियम |
| उज्ज्वल | उजाला | - |
| एकत्र | इकट्ठा | संयुक्त व्यंजन 'त्र' का नियम |
| ओष्ठ | ओठ / होठ | 'ष' का नियम |
| कर्पूर | कपूर | आधा 'र' का नियम |
| कार्य / कर्म | काम | आधा 'र' का नियम |
| कूप | कुआँ | चन्द्रबिन्दु का नियम |
| कृषक | किसान | 'ऋ' और 'ष' का नियम |
| गृह | घर | 'ऋ' की मात्रा का नियम |
| घृत | घी | 'ऋ' की मात्रा का नियम |
| चर्म | चाम / चमड़ा | आधा 'र' का नियम |
| चूर्ण | चूरन / चूरा | 'ण' का 'न' और आधा 'र' |
| छत्र | छाता | संयुक्त व्यंजन 'त्र' का नियम |
| छिद्र | छेद | आधा 'र' का नियम |
| दीप | दीया | - |
| धैर्य | धीरज | आधा 'र' का नियम |
| नग्न | नंगा | - |
| पाषाण | पाहन | 'ष' और 'ण' का नियम |
| रात्रि | रात | संयुक्त व्यंजन 'त्र' का नियम |
| लोह | लोहा | - |
| वणिक | बनिया | 'व' का 'ब' और 'ण' का 'न' |
| वर्ष | बरस | 'व' का 'ब' और 'ष' का नियम |
| विद्युत | बिजली | 'व' का 'ब' नियम |
| श्यामल | साँवला | 'श' का 'स' और चन्द्रबिन्दु |
| श्रृंगार | सिंगार | 'श्र' और 'ऋ' का नियम |
| सत्य | सच | - |
| सूर्य | सूरज | आधा 'र' का नियम |
| स्वर्ण | सोना | 'ण' का 'न' और आधा 'र' |
4. स्वयं को परखें: महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न (Practice MCQ Quiz)
अपनी तैयारी को परखने के लिए नीचे दिए गए प्रश्नों को हल करें। सही उत्तर देखने के लिए 'उत्तर देखें' पर क्लिक करें।
उत्तर देखें
स्पष्टीकरण: इसमें संयुक्त व्यंजन 'क्ष' और 'त्र' का प्रयोग हुआ है, जो तत्सम की पहचान है।
उत्तर देखें
स्पष्टीकरण: चन्द्रबिन्दु वाले शब्द हमेशा तद्भव होते हैं।
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स्पष्टीकरण: इसमें 'ष' (षटकोण) और 'ऋ' की मात्रा का प्रयोग हुआ है। इसका तद्भव 'किसान' है।
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स्पष्टीकरण: तत्सम का 'व' तद्भव में 'ब' में परिवर्तित हो जाता है।
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स्पष्टीकरण: तत्सम का 'ण' तद्भव में सरल होकर 'न' में बदल जाता है।
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स्पष्टीकरण: 'तत्सम' का अर्थ ही 'उसके समान' यानी संस्कृत के मूल शब्द हैं।
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स्पष्टीकरण: 'अष्ट' संस्कृत की संख्या है, जिसका तद्भव रूप 'आठ' होता है।
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स्पष्टीकरण: इसमें 'ऋ' की मात्रा का प्रयोग हुआ है, इसका तद्भव 'घी' होता है।
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स्पष्टीकरण: तत्सम का 'श' तद्भव में 'स' में बदल जाता है।
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स्पष्टीकरण: इसका तत्सम रूप 'कर्पूर' है। सरल होने के बाद यह तद्भव श्रेणी में आता है।

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