Class 10 Hindi सवैया (कवि देव) Question Answer | NCERT Solutions Kshitij
कक्षा 10 हिंदी क्षितिज के पाठ ‘सवैया – कवि देव’ के महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर यहाँ दिए गए हैं। यह सामग्री NCERT Solutions, Class 10 Hindi Notes तथा परीक्षा तैयारी के लिए उपयोगी है।
सवैया – कवि देव (प्रश्न अभ्यास)
प्रश्न 1. कवि ने 'श्रीब्रजदूलह' किसके लिए प्रयुक्त किया है और उन्हें संसार रूपी मंदिर का दीपक क्यों कहा है?
कवि ने 'श्रीब्रजदूलह' श्री कृष्ण के लिए प्रयुक्त किया है। उन्हें संसार रूपी मंदिर दीपक इसलिए कहा है क्योंकि जिस प्रकार मंदिर का दीपक पूरे मंदिर में प्रकाश फैलाता है। उसी प्रकार श्री कृष्ण ने अपनी लीला और कलाओं से संपूर्ण संसार को प्रभावित किया है। कविवर देव द्वारा रचित 'सवैया' में श्रीकृष्ण के रूप का चित्रण किया है।
प्रश्न 2. पहले सवैया में से उन पंक्तियों को छाँटकर लिखिए जिनमें अनुप्रास और रूपक अलंकार का प्रयोग हुआ है? (परीक्षोपयोगी नहीं है)
अनुप्रास अलंकार का प्रयोग निम्न पंक्तियों में हुआ है:
कटि किंकिनि कै धुनि की मधुराई।
साँवरे अंग लसै पट पीत, हिये हुलसै बनमाल सुहाई।
रूपक अलंकार का प्रयोग निम्न पंक्ति में हुआ है:
मंद हँसी मुखचंद जुंहाई, जय जग-मंदिर-दीपक सुन्दर।
कटि किंकिनि कै धुनि की मधुराई।
साँवरे अंग लसै पट पीत, हिये हुलसै बनमाल सुहाई।
रूपक अलंकार का प्रयोग निम्न पंक्ति में हुआ है:
मंद हँसी मुखचंद जुंहाई, जय जग-मंदिर-दीपक सुन्दर।
प्रश्न 3. निम्नलिखित पंक्तियों का काव्य सौंदर्य स्पष्ट कीजिए- (परीक्षोपयोगी नहीं है)
पाँयनि नूपुर मंजु बजै, कटि किंकिनि कै धुनि की मधुराई। साँवरे अंग लसै पट पीत, हिये हुलसै बनमाल सुहाई।
उत्तर: इन पंक्तियों में कवि ने श्रृंगार रस का प्रयोग किया है। उन्होंने पायल और कमरघनी से निकलने वाले संगीत की मधुरता का चित्रण किया है। इसके बाद उन्होंने साँवले अंग पर पीले वस्त्रों की शोभा का बखान किया है। साथ में फूलों की माला का बखान भी किया है। इसमें तरह-तरह के अलंकारों का प्रयोग हुआ और तुकबंदी भी अच्छी की गई है।
उत्तर: इन पंक्तियों में कवि ने श्रृंगार रस का प्रयोग किया है। उन्होंने पायल और कमरघनी से निकलने वाले संगीत की मधुरता का चित्रण किया है। इसके बाद उन्होंने साँवले अंग पर पीले वस्त्रों की शोभा का बखान किया है। साथ में फूलों की माला का बखान भी किया है। इसमें तरह-तरह के अलंकारों का प्रयोग हुआ और तुकबंदी भी अच्छी की गई है।
प्रश्न 4. दूसरे कवित्त के आधार पर स्पष्ट करें कि ऋतुराज वसंत के बाल रूप का वर्णन परंपरागत वसंत वर्णन से किस प्रकार भिन्न है?
परंपरागत रूप में बसंत का वर्णन करते हुए कवि प्रायः ऋतु परिवर्तन की शोभा का वर्णन करते हैं। कवि रंग बिरंगे फूल, चारों ओर फैली हरियाली, नायक नायिकाओं का झूलना आदि का उल्लेख करते हैं, परंतु इस कविता में कविवर ने वसंत को एक बालक के रूप में दिखाया है जो कामदेव का पुत्र है। कवि ने दिखाया है कि सारी प्रकृति उसके साथ ऐसा व्यवहार करती है, जैसे नवजात बच्चे से किया जाता है। अतः हम कह सकते हैं कि कवि देव के द्वारा किया गया बसंत का वर्णन परंपरागत नहीं है।
प्रश्न 5. 'प्रातहि जगावत गुलाब चटकारी दै' इस पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।
जब प्रातः काल में गुलाब की कलियाँ खिलती है, तब चट की ध्वनि उत्पन्न होती है। कवि ने इसका प्रयोग करते हुए बसंत रूपी बालक को प्रातः जगाने के लिए फूलों की सहायता ली है। कवि ने कल्पना की है कि गुलाब के फूलों का चटककर खिलना ऐसा लगता है मानो चुटकी बजाकर बसंत रूप बालक को जगाने का प्रयास कर रही हो।
प्रश्न 6. चाँदनी रात की सुंदरता को कवि ने किन-किन रूपों में देखा है?
चाँदनी रात की सुंदरता को कवि ने दही के समुद्र, दूध के झाग के कालीन, तरुणी जिसके वस्त्र मोतियों और मल्लिका फूलों से सुशोभित हैं, के रूप में देखा है।
प्रश्न 7. 'प्यारी राधिका को प्रतिबिंब सो लगत चंद'- इस पंक्ति का भाव स्पष्ट करते हुए बताएँ कि इसमें कौन सा अलंकार है? (परीक्षोपयोगी नहीं है)
कवि को लगता है कि चाँद जो है वह राधा के प्रतिबिंब सा लग रहा है। यहाँ पर व्यतिरेक अलंकार का प्रयोग हुआ है क्योंकि चाँद को राधा न मानकर उसका प्रतिबिंब माना गया है। इसका मतलब है कि चाँद को राधा से नीचे दर्जे का दिखाया गया है।
प्रश्न 8. तीसरे कवित्त के आधार पर बताइए कि कवि ने चाँदनी रात की उज्ज्वलता का वर्णन करने के लिए किन-किन उपमानों का प्रयोग किया है?
कवि ने चाँदनी रात की उज्ज्वलता का वर्णन निम्नलिखित उपमानों के प्रयोग से किया है :
i) फटिक सिलानि ii) दही का सागर iii) दूध की झाग से बना कालीन iv) सुधा मंदिर v) दर्पण
चाँदनी रात न केवल कवियों अपितु हर व्यक्तियों के मन को आकर्षित करती है। कवि ने बताया है कि सागर की लहरें हिलौरें ले रही हैं। चाँदनी की अधिकता के कारण अंदर तक का दिखाई नहीं दे रहा। सारा भवन चाँदनी से नहाया हुआ-सा लग रहा है। राधा भी चाँदनी में झिलमिलाती लग रही है।
i) फटिक सिलानि ii) दही का सागर iii) दूध की झाग से बना कालीन iv) सुधा मंदिर v) दर्पण
चाँदनी रात न केवल कवियों अपितु हर व्यक्तियों के मन को आकर्षित करती है। कवि ने बताया है कि सागर की लहरें हिलौरें ले रही हैं। चाँदनी की अधिकता के कारण अंदर तक का दिखाई नहीं दे रहा। सारा भवन चाँदनी से नहाया हुआ-सा लग रहा है। राधा भी चाँदनी में झिलमिलाती लग रही है।
प्रश्न 9. पठित कविताओं के आधार पर कवि देव की काव्यगत विशेषताएँ बताइए।
कवि देव ने जीवन के सुख-दुख का वर्णन करने की अपेक्षा प्रकृति की सुंदरता का चित्रण किया है। उन्होंने श्री कृष्ण का दूल्हा रूप, वसंत को बच्चे के रूप में तथा रात में आकाश को सुधा मंदिर के रूप में चित्रित किया है। देव ने काव्य में ब्रजभाषा का सुंदर एवं सटीक प्रयोग किया है। अनुप्रास, रूपक, उत्प्रेक्षा, उपमा आदि अलंकारों का सुंदर एवं सफल प्रयोग देखते ही बनता है।
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