पतंग (काव्य-सौंदर्य / शिल्प-सौंदर्य)

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पतंग

काव्य सौंदर्य बोध संबंधी प्रश्न






पूरी कविता से काव्य-सौंदर्य/शिल्प-सौंदर्य के कुछ कॉमन पॉइंट्स: 


● प्रकृति का सुन्दर मानवीकरण किया गया है।
● इस पद में दृश्य, श्रव्य और स्पर्श बिंबों की सुंदर योजना बनी हुई है।
● सहज, सरल तथा आडम्बरहीन सामान्य हिंदी भाषा का प्रयोग हुआ है।
● शब्द-प्रयोग सर्वथा उचित तथा भावाभिव्यक्ति में सहायक है।
● इस पद में मुक्तक छंद की सुंदर योजना है।





निम्नलिखित काव्यांशों को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

1.
सबसे तेज बौछारें गई भादो गया
सवेरा हुआ
खरगोश की आँखों जैसा लाल सवेरा
शरद या पुलों को पार करते हुए
अपनी नई चमकीनी साइकिल तेज चलाते हुए
घंटी बजाते हुए जोर-जोर से
धमकोल इशारों से बुलाते हुए
पतंग उड़ाने वाले बच्चों के झुंड को

प्रश्न
(क) शरत्कालीन सुबह की उपमा किससे दी गई हैं। वयों
(ख) मानवीकरण अलकार किस पक्ति में प्रयुक्त हुआ है। उसका सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
(ग) शरद ऋतु के आगमन वाले बिंब का सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।

उत्तर
(क) शरत्कालीन सुबह की उपमा खरगोश की लाल आँखों से दी गई है क्योंकि प्रातःकालीन सुबह में आसमान में लालिगा 8 जाती है। वह लालिमा ठीक उसी तरह होती है जैसे खरगोश की आँखों की लालिमा।

(ख) मानवीकरण अलंकार वाली पंक्तियाँ शरद आया पुलों को पार करते हुए बुलाते हुए। संदर्य-यहाँ शरद को नई लाल साइकिल तेजी से चलाते हुए, पुल को पार करके आते हुए दर्शाकर उसका मानवीकरण किया गया है।

(ग) इन पंक्तियों में शरद को भी बच्चे के रूप में चित्रित किया गया है जो अपनी नई साइकिल की घंटी जोर-जोर से बजाते हुए अपने चमकीले इशारों से बच्चों को बुलाने आ रहा हैं। मानो कह रहा हो, 'चलो चलकर पतंग उड़ाते हैं।'

2.
जन्म से ही के अपने साध लाते हैं कयास
पृथ्वी घूमती हुई आती हैं उनके बैचैन पैरों के पास
जब वे दौड़ते हैं बेसुध
छतों को भी नरम बनाते हुए
दिशाओं को मृदंग की तरह बजाते हुए
जब वे पेग भरते हुए चले आते हैं।
इल की तरह नाचल वेगस अफसर
छतों के खतरनाक किनारों तक-
उस समय गिरने से बचाता है उन्हें
सिर्फ उनके ही रोमांचित शरीर का सगीत
पतंगों की धड़कती ऊँचाइयों उन्हें थाम लेती हैं महज एक धागे के सहारे।

प्रश्न
(क) प्रस्तुत काव्याश में' मानवीकरण अलंकार का प्रयोग किस प्रकार हुआ है। बताइए।
(ख) काव्यांश के शिल्प-सौंदर्य पर प्रकाश डालिए।
(ग) “डाल की तरह लचीला वेग सौदर्य को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर =
(क) कवि ने इस काव्यांश में मानवीकरण अलंकार का सुंदर प्रयोग किया है। पृथ्वी, पतंग, दिशा आदि सभी में मानवीय क्रियाकलापों का भाव आरोपित किया गया है, जैसे-
• पृथ्वी पूमती हुई आती है उनके बेचैन पैरों के पास।
• दिशाओं को मृदंग की तरह बजाते हुए।
• पतंगों की धड़कती ऊँचाइयाँ उन्हें थाम लेती हैं।

(ख) कवि ने साहित्यिक खड़ी बोली में सहज अभिव्यक्ति की है। उसने मिश्रित शब्दावली का प्रयोग किया है। पृथ्वी, दिशा, मृदंग, संगीत आदि तत्सम शब्द तथा नरम, अकसर, सिर्फ, महज आदि शब्दों का सुंदर प्रयोग किया है। उपमा अलंकार का सुंदर प्रयोग हैं,
जैसे-
- दिशाओं को मृदंग की तरह बताते हुए, वे पेग भरते हुए चले आते हैं, डाल को लचीले वेग से।
• कवि ने दृश्य, स्पर्श व श्रव्य बिंबों का प्रयोग किया है, जैसे- दृश्य बिंब पृथ्वी घूमती हुई आती है, जब वे दौड़ते हैं बेसुध।
श्रव्य बिंब-दिशाओं को मृदंग की तरह बजाते हुए।
• मुक्तक छंद है, परंतु कहीं भी टूटन नजर नहीं आती। भाव एक दूसरे से जुड़े हुए हैं।

(ग) इस पंक्ति में कवि ने वर्षों के शरीर के लचीलेपन की तुलना पेड़ की डाल से की है। पेड़ की डाल एक जगह जुड़ी रहती है फिर भी वह हिलती रहती है। बच्चे भी पतंगड़ाते समय अपने शरीर को झुलाते पीछे आगे करते रहते हैं। यह उनकी स्फूर्ति को सिद्ध करता है। यह प्रयोग सर्वथा नया है।

3.
पतंगों के साथ-साथ वे भी उड़ रहे हैं।
अपने रंध्रों के सहारे
अगर वे कभी गिरते हैं। छतों के खतरनाक किनारों से
और बच जाते हैं तब तो
और भी निडर होकर सुनहले सूरज के सामने आते हैं।
पुथ्वी और भी तेज घूमती हुई आती हैं।
उनके बचन पैरों के पास।

प्रश्न
(क) काव्यांश का भाव सौंदर्य बताइए।
(ख) काव्यांश में अलकार-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
(ग) काव्यांश की भाषागत विशेषता पर टिप्पणी कीजिए।

उत्तर -
(क) कवि ने इस काव्यांश में बच्चों के क्रियाकलापों व उनकी सहनशक्ति का वर्णन किया है। वे पतंग के सहारे कल्पना में उड़ते रहते । हैं। यह लाक्षणिक प्रयोग है। ‘सुनहले सूरज के सामने आने का अर्थ यह है कि वे उत्साह से आगे बढ़ते हैं।

(ख)
• काव्यांश में मानवीकरण अलंकार है। पृथ्वी का तेज घूमते हुए बच्चों के पास आना मानवीय क्रियाकलाप का उदाहरण है।
• 'साथ साथ' में पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है।
• 'सुनहले सूरज में अनुप्रास अलंकार है।

(ग)
• कवि ने लाक्षणिक भाषा का प्रयोग किया है।
• खतरनाक, सुनहले, तेज, बेचैन आदि विशेषणों का सुंदर प्रयोग है तथा खड़ी बोली में सहज अभिव्यक्ति है।
• मिश्रित शब्दावली का प्रयोग है।
• मुक्तक छंद है।
• दृश्य बिंबों का ढेर है, जैसे-
- छतों के खतरनाक किनारे।
- पृथ्वी और भी तेज घूमती हुई आती है उनके बेचैन पैरों के पास।


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