उषा (काव्य-सौंदर्य /शिल्प-सौंदर्य)

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उषा 

काव्य सौंदर्य बोध संबंधी प्रश्न






पूरी कविता से काव्य-सौंदर्य/शिल्प-सौंदर्य के कुछ कॉमन पॉइंट्स: 


● सहज, सरल तथा साहित्यिक हिंदी भाषा का प्रयोग है।
● शब्द प्रयोग सर्वथा उचित तथा भावाभिव्यक्ति में सहायक है।
● प्रस्तुत पद नवीन उपमानों तथा मौलिक कल्पना के लिए प्रसिद्ध है।
● प्रस्तुत पद्यांश चित्रात्मक भाषा के लिए प्रसिद्ध है।
● मुक्तक छंद का प्रयोग हुआ है।





प्रश्न 1.
प्रातः नभ या बहुत नीला शंख जैसे
भोर का नभ
राख से लीपा हुआ चौका
अभी गीला पड़ा है।
बहुत काली सिल जरा से लाल केसर से
कि जैसे धुल गई हो
स्लेट पर सा लाल खड़िया चाक
मल दी हो किसी ने
नील जल में या किसी की
गौर निलमिल देह
जैसे हिल रही हो।
और
जादू हटता हैं इस उषा का अन
सूर्योदय हो रहा हैं।

प्रश्न 
(क) काव्यांश में प्रयुक्त उपमानों का उल्लेख कीजिए।
(ख) कविता की भाषागत दो विशेषताओं की चर्चा कीजिए।
                                  अथवा
किन उपमानों से पता चलता है कि गाँव की सुबह का वर्णन हैं।

(ग) भाव सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
नील जन में या किसी की
गौर झिलमिल देह
जैसे हिल रही हो।

उत्तर-
(क) काव्यांश में निम्नलिखित उपमान प्रयुक्त किए गए हैं।
१) नीला शंख (सुबह के आकाश के लिए)।
२) राख से लीपा हुआ चौका (भोर के नभ के लिए।
३) काली सिल (धेरे से युक्त आसमान के लिए।
(४) स्लेट पर लाल खड़िया चाक (भौर से नमीयुक्त वातावरण में उगते सूरज की लाली के लिए।
(५) नीले जल में झिलमिलाती गोरी देह (नीले आकाश में आते सूरज के लिए।

ख)
(i) कवि ने नए उपमानों का प्रयोग किया है।
(ii) ग्रामीण परिवेश का सहज शब्दों में चित्रण।
                            अथवा
निम्नलिखित उपमानों से पता चलता है कि यह गाँव की सुबह का वर्णन है।
१) राख से लीपा हुआ चौका
२} बहुत काली सिल पर किसी ने लाल केसर मल दिया हो।

(ग) कवि कहना चाहता है कि सुबह सूर्योदय से पहले नीले आकाश में नमी होती है। स्वच्छ वातावरण के कारण सूर्य अत्यंत सुंदर दिखाई देता है। ऐसा लगता है जैसे नीले जल में गोरी युवती की सुंदर देह झिलमिला रही है।


प्रश्न 2.
(क) कोष्ठकों के प्रयोग से कविता में क्या विशेषता आई है’ समझाइए।
(ख) काव्य में आए किन्हीं दो अलकारों का नामोल्लेख करते हुए उनसे उत्पन्न सौंदर्य को स्पष्ट कीजिए।
(ग) उपयुक्त कविता में आए किस दृश्य बिंब से आप सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं और क्यों?

उत्तर-
(क) कवि ने कोष्ठकों का प्रयोग किया है। कोष्ठक अतिरिक्त जानकारी प्रदान करते हैं, जैसे कविता में कोष्ठक में दी गई जानकारी (अभी गीला पड़ा है) से आसमान की नमी व ताजगी की जानकारी मिलती है।

(ख) काव्यांश में 'शंख जैसे में उपमा तथा बहुत काली सिल' गई हो। में उत्प्रेक्षा अलंकार है। इनसे आकाश की पवित्रता व प्रात के समय का मटियालापन प्रकट होता है।

(ग) इस काव्यांश में हग नीले जल में गोरी देह के झिलमिलाने के बिंब से अधिक प्रभावित हुए। सुबह नीला आकाशस्य होता है। 
नर्मी के कारण दृश्य हिलते प्रतीत होते हैं। श्वेत सूर्य का बिंब आकाश में सुंदर प्रतीत होता हैं।



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