Class 11 and 12 Hindi Abhivyakti Aur Madhyam NCERT Book Chapter Kese Banti Hai Kavita (अभ्यास प्रश्न)/ कैसे बनती है कविता Question Answer

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Class 12 Hindi कैसे बनती हैं कविता Question Answer | NCERT Exercise Solutions


कक्षा 12 हिंदी के पाठ ‘कैसे बनती हैं कविता’ के अभ्यास प्रश्नों के उत्तर यहाँ दिए गए हैं। यह सामग्री Class 12 Hindi Notes, NCERT Solutions और Exam Preparation के लिए उपयोगी है।

कैसे बनती हैं कविता – प्रश्न अभ्यास

प्रश्न 1 आपने अनेक कविताएं पढ़ी होंगी। उनमें से आपको कौन सी कविता सबसे अच्छी लगी?
उत्तर- मैंने अनेक कविताएं पढ़ी है। इनमें से मुझे जयशंकर प्रसाद जी की निम्नलिखित कविता सबसे अच्छी लगी हैं।

अरुण! यह मधुमय देश हमारा।

जहां पहुंच अनजान क्षितिज को मिलता एक सहारा।
सरस तामरस गर्भ विभा पर, नाच रही तरु सीखा मनोहर।
छिटका जीवन-हरियाली पर मंगल कुमकुम सारा।

लघु सुरधनु से पंख पसारे शीतल मलय समीर सहारे,
उड़ते खग जिस ओर मुंह किए, समझ नीड़, निज प्यारा।

बरसाती आंखों के बादल-बनते जहां भरे करुणा जल,
लहरी टकराती अनंत की-पाकर जहां किनारा।

हेम कुंभ ले उषा सवेरे-भर्ती ढलखाती सुख मेरे।
मंदिर उगते रहते जब जग कर रजनी भर तारा।

मुझे यह कविता इसलिए अच्छी लगती है क्योंकि इसमें राष्ट्र के प्रति सम्मान का भाव व्यक्त किया गया और मेरा भारतवर्ष को असीम प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण देश बताया गया है जहां सबका सदा स्वागत होता है। भाषा तत्सम प्रधान है। संपूर्ण कविता में संगीत के घूमते हुए स्वर सुनाई देते हैं। प्रकृति का मानवीकरण किया गया। रूपक, उपमा, अनुप्रास अलंकार की छटा निराली है।
प्रश्न 2 आपके जीवन में अनेक ऐसी घटनाएं घटी होंगी जिन्होंने आपके मन को छुआ होगा।
उत्तर- जेठ की तपती दोपहरी में एक रिक्शा वाले को रिक्शा चलाते देख कर मन में उत्पन्न भावनाओं को कविता के रूप में इस प्रकार से प्रस्तुत किया जा सकता है-

वह आता, चिल्लाता
रिक्शावाला।

जीर्णवसन, मलीन तन
धूल-विमर्दित पग नगन
बिखरे केस सिर जलन
बहते स्वेद सिक्त तन
ठठरी-सा गात
औ’ पेट पीठ से चिपकाता
वह आता।

तप्त तवे-सी तपती भू
शेष स्वांस सी चलती लू
मध्यान्ह रवि बरसात आ आग
पर
आशा में कुछ कमाने की
वह आता, चिल्लाता
रिक्शावाला।
प्रश्न 3 शब्दों का खेल, परिवेश के अनुसार शब्द चयन आदि से कविता बनती है।
एक जनता का
दु:ख एक।
हवा में उड़ती पताकाएं
अनेक।

दैन्य दानव। क्रूर स्थिति
कंगाल बुद्धि, मजूर घर भर।
एक जनता का- अमरवर,
एकता का स्वर।

अन्यथा स्वातंत्र्य इति।

उत्तर- कभी नहीं आधुनिक काव्य शिल्प का प्रयोग करते हुए भाव जगत में गागर में सागर भरने का सफल प्रयोग किया है। शब्द चयन के उचित प्रयोग ने जनता की पीड़ा और व्यथा को ही प्रकट नहीं किया बल्कि उसकी व्यवस्था और विद्रोह को भी वाणी प्रदान की है। कवि ने जनता को एक विशेषण उसकी प्रमुखता और असहायता को प्रकट किया है। हवा में उड़ती पताकाएं उसके विरोध की प्रतीक हैं। इसमें गतिशील बिंब योजना की गई है। अनेक शब्द का विशेष अर्थ है कि असहायो और पीड़ितों की संख्या बहुत बड़ी है। ‘दैन्य दानव’, ‘क्रूर स्थिति’, ‘कंगाल बुद्धि’ संक्षिप्त होने पर भी अपने भीतर व्यापकता के भावों को समेटे हुए हैं। ‘अन्यथा स्वातंत्र्य इति’ में लाक्षणिकता विद्यमान है जो बोध कराती है कि भूखे नंगे व्यक्ति के लिए स्वतंत्रता का कोई अर्थ नहीं है। वह इंसान के लिए तभी महत्वपूर्ण हो सकती है जब उसका पेट भरा हुआ हो। तत्सम शब्दावली की अधिकता है। अतुकांत छंद का प्रयोग होने पर भी भागवत लयात्मकता की सृष्टि हुई है। तुक का स्वाभाविक प्रयोग एक स्थान पर किया गया है।
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  1. Sir jaldi sa hindi grammar start kardo

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