Ram Lakshman Parashuram Samvad Important Questions | Class 9 Hindi

1

राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद | Class 9 Hindi Chapter 9 Important Extra Questions

कक्षा 9 हिंदी के पाठ “राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद” के परीक्षा की दृष्टि से 7 सबसे महत्वपूर्ण अतिरिक्त प्रश्न-उत्तर (Important Extra Questions) यहाँ दिए गए हैं। इन प्रश्नों के परीक्षा में आने की प्रबल संभावना है।


परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण अतिरिक्त प्रश्न-उत्तर

प्रश्न 1. मुनि परशुराम को सभा में आता देखकर उपस्थित राजाओं की क्या दशा हुई और उन्होंने क्या किया?
उत्तर: शिव-धनुष टूटने के बाद जब मुनि परशुराम अपने भयंकर वेश ("बेषु कराला") में राजा जनक की सभा में पहुँचे, तो उन्हें देखकर वहाँ उपस्थित सभी राजा अत्यंत भयभीत और व्याकुल हो गए। डर के मारे वे सभी अपनी-अपनी जगह से उठ खड़े हुए और अपना तथा अपने पिता का नाम ले-लेकर मुनि परशुराम को दंडवत प्रणाम करने लगे।
प्रश्न 2. परशुराम के आगमन पर राजा जनक और महर्षि विश्वामित्र ने उनका स्वागत किस प्रकार किया?
उत्तर: परशुराम के आगमन पर राजा जनक ने उनके पास आकर विनम्रतापूर्वक अपना सिर झुकाया और पुत्री सीता को बुलाकर उनसे भी प्रणाम करवाया ताकि परशुराम का आशीर्वाद मिल सके। इसके बाद महर्षि विश्वामित्र उनसे आकर मिले और उन्होंने राजा दशरथ के दोनों पुत्रों (राम और लक्ष्मण) का उनसे परिचय करवाया। राम-लक्ष्मण ने भी परशुराम के चरण कमलों में प्रणाम किया।
प्रश्न 3. शिव-धनुष को खंडित देखकर परशुराम ने राजा जनक को क्या कठोर चेतावनी दी?
उत्तर: सभा के बीच धरती पर शिव-धनुष के टुकड़ों को पड़ा देखकर परशुराम अत्यंत क्रोधित हो गए। उन्होंने राजा जनक को मूर्ख ("जड़ जनक") कहते हुए कठोर चेतावनी दी कि जल्दी बताओ यह धनुष किसने तोड़ा है! यदि तुमने तुरंत उस अपराधी को नहीं दिखाया, तो जहाँ तक तुम्हारा राज्य है, मैं आज उस पूरी धरती को उलट दूँगा (यानी पूरे राज्य का विनाश कर दूँगा)।
प्रश्न 4. परशुराम के भयंकर क्रोध को देखकर सीता और उनकी माता सुनयना की क्या मनःस्थिति थी?
उत्तर: परशुराम के क्रोध और धमकियों को सुनकर सीता की माता मन-ही-मन पछतावा करने लगीं कि विधाता ने बनी-बनाई बात बिगाड़ दी है, न जाने अब क्या अनर्थ होगा। वहीं, दूसरी ओर सीता जी भी अत्यंत भयभीत (डरी हुई) थीं। घबराहट और चिंता के कारण उनके लिए आधा पल (क्षण) भी एक कल्प (युग) के समान लंबा और भारी बीत रहा था ("अरध निमेष कलप सम बीता")।
प्रश्न 5. सभा में व्याप्त भय को देखकर श्रीराम ने परशुराम से क्या कहा? इससे उनके स्वभाव की किस विशेषता का पता चलता है?
उत्तर: जब श्रीराम ने देखा कि सभा में उपस्थित सभी लोग और स्वयं सीता जी अत्यंत भयभीत हैं, तब उन्होंने बिना किसी हर्ष (खुशी) या विषाद (दुःख) के अत्यंत शांत भाव से परशुराम से कहा— "हे नाथ! शिवजी के इस धनुष को तोड़ने वाला आपका ही कोई एक दास होगा। आपकी क्या आज्ञा है, आप मुझसे क्यों नहीं कहते?"
इससे श्रीराम के अत्यंत विनम्र, धैर्यवान, मर्यादित और स्थितप्रज्ञ (समान भाव में रहने वाले) स्वभाव का पता चलता है।
प्रश्न 6. श्रीराम के विनयपूर्ण वचन सुनकर परशुराम ने 'सेवक' और 'शत्रु' के विषय में क्या तर्क दिया?
उत्तर: श्रीराम की बात सुनकर क्रोधित परशुराम ने कहा कि सेवक वह होता है जो सेवा का काम करे ("सेवकु सो जो करै सेवकाई")। शिव-धनुष तोड़कर उसने शत्रुता का कार्य किया है और शत्रु के साथ तो केवल लड़ाई (युद्ध) ही की जाती है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जिसने शिव का धनुष तोड़ा है, वह सहस्रबाहु के समान मेरा परम शत्रु है।
प्रश्न 7. लक्ष्मण ने परशुराम की बातों का किस प्रकार उपहास (मज़ाक) उड़ाया और परशुराम ने उस पर क्या प्रतिक्रिया दी?
उत्तर: लक्ष्मण ने मुस्कुराते हुए परशुराम का उपहास उड़ाते हुए कहा कि बचपन में खेलते हुए हमने ऐसी बहुत-सी धनुहियाँ (छोटे धनुष) तोड़ डालीं, तब तो आपने कभी ऐसा क्रोध नहीं किया। फिर इसी एक पुराने धनुष पर आपकी इतनी ममता क्यों है?
लक्ष्मण के ये व्यंग्य वचन सुनकर भृगुकुल के दीपक परशुराम भड़क उठे और बोले, "अरे राजपुत्र! मृत्यु के वश में होने के कारण तुझे बोलने का होश नहीं है। तू शिवजी के इस विश्व-प्रसिद्ध धनुष की तुलना बचपन की धनुहियों से कर रहा है?"
Tags: Ram Lakshman Parashuram Samvad Important Questions Class 9, Class 9 Hindi Chapter Extra Questions, NCERT Solutions Hindi, Board Exam Important Questions, राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद अतिरिक्त प्रश्न-उत्तर.

Post a Comment

1Comments

If you have any doubts, Please let me know

Post a Comment