रीढ़ की हड्डी Class 9 Important Extra Questions Answers | CBSE Exam Notes
कक्षा 9 हिंदी कृतिका के प्रसिद्ध एकांकी “रीढ़ की हड्डी” (लेखक: जगदीशचंद्र माथुर) के अतिरिक्त महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर (Important Extra Questions) यहाँ दिए गए हैं। ये प्रश्न बोर्ड और होम परीक्षाओं (Exams) की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इन प्रश्नों का अध्ययन करके आप परीक्षा में बेहतरीन अंक प्राप्त कर सकते हैं।
रीढ़ की हड्डी – महत्वपूर्ण अतिरिक्त प्रश्न-उत्तर (Extra Questions)
प्रश्न 1. 'रीढ़ की हड्डी' एकांकी के आधार पर उमा का चरित्र-चित्रण कीजिए। (Very Important)
उमा इस एकांकी की मुख्य पात्रा है। उसके चरित्र की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
- सुशिक्षित व समझदार: उमा बी.ए. पास एक सुशिक्षित लड़की है। वह शिक्षा के महत्व को समझती है।
- स्वाभिमानी और साहसी: वह भेड़-बकरियों की तरह तौले जाने का कड़ा विरोध करती है। वह गोपालप्रसाद के सवालों का निडरता से जवाब देती है।
- स्पष्टवादिनी: उमा बिना किसी लाग-लपेट के शंकर की सच्चाई (हॉस्टल से भगाए जाने वाली घटना) सबके सामने रख देती है।
- रूढ़ियों की विरोधी: वह समाज की उन दकियानूसी परंपराओं को नहीं मानती जहाँ लड़की को केवल एक सजी-धजी वस्तु समझा जाता है।
प्रश्न 2. रामस्वरूप अपनी बेटी उमा की उच्च शिक्षा (बी.ए.) को क्यों छिपाना चाहते हैं? इससे उनकी किस विवशता का पता चलता है?
रामस्वरूप अपनी बेटी की उच्च शिक्षा इसलिए छिपाते हैं क्योंकि उमा को देखने आ रहे लड़के वाले (गोपालप्रसाद और शंकर) रूढ़िवादी सोच के हैं। उन्हें अपने घर के लिए अधिक पढ़ी-लिखी लड़की नहीं चाहिए। उनकी नजर में लड़कियों का काम केवल घर-गृहस्थी संभालना है।
इससे रामस्वरूप की सामाजिक विवशता और दबाव का पता चलता है। एक पिता होने के नाते, वे समाज की गलत परंपराओं के आगे घुटने टेक देते हैं और अपनी योग्य बेटी का रिश्ता पक्का करने के लिए झूठ बोलने को मजबूर हो जाते हैं।
इससे रामस्वरूप की सामाजिक विवशता और दबाव का पता चलता है। एक पिता होने के नाते, वे समाज की गलत परंपराओं के आगे घुटने टेक देते हैं और अपनी योग्य बेटी का रिश्ता पक्का करने के लिए झूठ बोलने को मजबूर हो जाते हैं।
प्रश्न 3. 'रीढ़ की हड्डी' एकांकी के माध्यम से लेखक ने समाज की किन बुराइयों पर प्रहार किया है?
लेखक जगदीशचंद्र माथुर ने इस एकांकी के माध्यम से समाज की निम्नलिखित बुराइयों पर गहरा प्रहार किया है:
- स्त्री-शिक्षा का विरोध: समाज में लड़कियों की उच्च शिक्षा को आज भी कई लोग जंजाल मानते हैं।
- दोहरी मानसिकता: लड़कों के ऐब (कमियाँ) छिपा लिए जाते हैं, जबकि लड़कियों को हर कसौटी पर परखा जाता है।
- विवाह में लड़की का वस्तुकरण: शादी के समय लड़की को एक निर्जीव वस्तु या फर्नीचर की तरह नापना-तौलना और उससे बेवजह के सवाल पूछना।
- दिखावा: लड़के वालों के सामने लड़कियों को जबरदस्ती सजा-धजा कर पेश करने की झूठी परंपरा।
प्रश्न 4. गोपालप्रसाद के चरित्र की कौन-सी बातें उन्हें एक रूढ़िवादी और हास्यास्पद व्यक्ति साबित करती हैं?
गोपालप्रसाद पेशे से वकील हैं, लेकिन उनकी सोच अत्यंत पिछड़ी है।
- वे मानते हैं कि शिक्षा केवल पुरुषों का अधिकार है।
- वे औरतों की तुलना जानवरों (शेरनी, मोरनी) से करते हैं जो उनकी संकीर्ण मानसिकता को दर्शाता है।
- अपने बेटे शंकर (जिसकी कमर झुकी है और जो चरित्रहीन है) की कमियों को वे यह कहकर छिपाते हैं कि "लड़का सवा सेर है"।
- वे विवाह को एक 'बिजनेस' (व्यापार) मानते हैं। ये सब बातें उन्हें एक रूढ़िवादी, लालची और हास्यास्पद व्यक्ति साबित करती हैं।
प्रश्न 5. एकांकी का मुख्य उद्देश्य या संदेश क्या है?
इस एकांकी का मुख्य उद्देश्य समाज में स्त्री-शिक्षा के महत्व को स्थापित करना और महिलाओं के आत्मसम्मान की रक्षा करना है। लेखक यह संदेश देना चाहते हैं कि युवतियों को उमा की तरह साहसी, स्वाभिमानी और निडर होना चाहिए। उन्हें अन्याय और रूढ़िवादी सोच के सामने झुकना नहीं चाहिए। समाज को भी यह समझना चाहिए कि लड़के और लड़कियों में कोई भेदभाव नहीं है और विवाह के नाम पर लड़कियों को अपमानित करने का अधिकार किसी को नहीं है।
प्रश्न 6. अगर उमा पढ़ी-लिखी न होती, तो कहानी का अंत क्या होता?
अगर उमा पढ़ी-लिखी न होती, तो उसमें आत्मविश्वास, स्वाभिमान और सही-गलत को पहचानने की क्षमता नहीं होती। वह अपने माता-पिता के दबाव में आकर चुपचाप गोपालप्रसाद के तीखे और अपमानजनक सवालों को सह लेती। वह शंकर जैसे चरित्रहीन और कायर लड़के से शादी करने के लिए मजबूर हो जाती और जीवन भर घुट-घुट कर जीती। शिक्षा ने ही उसे अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाने की ताकत दी।
प्रश्न 7. "लड़कियों को अधिक पढ़ने की ज़रूरत नहीं है।" इस विचारधारा का आप किस प्रकार खंडन करेंगे?
हम इस विचारधारा का पूर्ण रूप से खंडन करते हैं। शिक्षा किसी लिंग (Gender) की मोहताज नहीं है। एक शिक्षित लड़की न केवल अपना, बल्कि अपने पूरे परिवार और समाज का भविष्य सँवारती है। शिक्षा से लड़कियों में आत्मविश्वास आता है, वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होती हैं और आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनती हैं। उमा इसका जीता-जागता उदाहरण है, जिसने अपनी शिक्षा के बल पर ही गलत विचारों वाले लोगों को आइना दिखाया। आज महिलाएँ हर क्षेत्र में पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं।
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